'किसी के कपड़ों का मतलब हां नहीं होता'
बात वहां की है, जहां लड़कियों को जबरन बांहों में जकड़ा गया. लड़कियां रोयीं, चिल्लाईं. मगर आवाजें दबा दी गईं.
Advertisement

वीरेंद्र सहवाग ने कोच बनने की इच्छा नहीं, सेलेक्टर बनने की इच्छा जताई है. लगा जैसे वो सेलेक्टर्स के लिए कह रहे हों- इनका कुछ नहीं हो सकता.
Story Summary

