सिक्किम बाढ़: 4 आर्मी जवानों सहित 19 की मौत, हजारों लोग फंसे, ग्लेशियल फटने की कगार पर
सिक्किम में शाको चो झील के किनारे से लोगों को निकालना शुरू कर दिया गया है. ये झील फटने की कगार पर है. इधर, सुरंगों में कुछ लोग फंसे हुए हैं.

सिक्किम में बादल फटने और बाढ़ (Sikkim Flash Floods) की वजह से तबाही मची हुई है. अब तक 19 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. इनमें से चार मृतक सेना के जवान बताए जा रहे हैं. अभी भी 103 लोग लापता हैं. इधर, NDRF के 60 जवानों की टीम सुरंग में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हुई है. शाको चो झील के किनारे बसे लोगों को निकालना शुरू कर दिया गया है. ये झील फटने की कगार पर है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी सिक्किम के सुदूर चुंगथांग में दर्जनों लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है. वो लोग बिना खाना-पानी के 48 घंटों से फंसे हुए हैं. इस बात की जानकारी नहीं है कि सुरंगों में पानी भर गया या नहीं या वहां फंसे 12-14 लोग जिंदा हैं या नहीं. इस मुश्किल सर्च ऑपरेशन के लिए टीम में लैंड रेस्क्यूर्स और स्कूबा गोताखोर शामिल होंगे. उनके पास हथौड़े, वॉटर गन, रॉक कटर, सैटेलाइट फोन, जनरेटर सेट और लाइफ सेंविंग मेडिकल इक्विपमेंट्स होंगे.
इधर मंगन जिले में लाचेन के पास शाको चो झील के इर्द गिर्द बसे लोगों को निकालने का काम शुरू हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ये एक ग्लेशियल यानी ठंडी झील है और फटने की कगार पर है जिसके चलते अधिकारियों को अलर्ट जारी किया है. शाको चो झील थांगु गांव के ऊपर है. गंगटोक जिले के सिंगतम, मंगन जिले के डिक्चू और पाक्योंग जिले के रंगपो IBM क्षेत्र को भी खाली करा दिया गया है.
सिक्किम के मुख्य सचिव विजय भूषण पाठक ने बताया,
चेकपोस्ट के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लाचेन और लाचुंग में लगभग 3000 लोग फंसे हुए हैं. 700-800 ड्राइवर हैं. 3150 लोग जो मोटरसाइकिल्स पर वहां गए थे, वो भी वहां फंसे हैं. सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से सभी को निकाला जाएगा.
बता दें, 4 अक्टूबर को राज्य के उत्तरी इलाके में स्थित लहोनक झील पर बादल फटा था, जिसकी वजह से झील से बहुत ज्यादा पानी बह गया. और इससे तीस्ता नदी में अचानक बाढ़ (Flash flood) आ गई. नदी से लगे इलाके में ही आर्मी कैंप था, जो बाढ़ की चपेट में आने के बाद बह गया और यहां खड़ी 41 गाड़ियां डूब गईं.
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राज्य सरकार ने बेघर हुए लोगों के लिए सिंगतम, रंगपो, डिक्चू और आदर्श गांव में 18 राहत शिविर स्थापित किए हैं.
शिक्षा विभाग ने एक सर्कुलर में कहा कि मंगन, गंगटोक, पाकयोंग और नामची जिलों में स्थित सभी स्कूल आठ अक्टूबर तक बंद रहेंगे. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने आशंका जाहिर की है कि झील के फटने के पीछे कारण नेपाल में आया भूकंप हो सकता है.