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चीन तो नहीं खरीद रहा रूस का Su-57 फाइटर जेट? पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ विमान को मिला पहला कस्टमर

रूस के मित्र देश ने इस फाइटर जेट को खरीदने पर हरी झंडी दे दी है. रूसी टेलीग्राम चैनल रोसोबोर्नएक्सपोर्ट के मुताबिक सुखोई कॉर्पोरेशन ने एक्सपोर्ट वेरिएंट Su-57 E का उत्पादन शुरु कर दिया है.

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13 फ़रवरी 2025 (अपडेटेड: 13 फ़रवरी 2025, 10:34 AM IST)
russian fighter jet su57 its first foreign customer maybe china nort korea or algeria
सुखोई का Su-57 फाइटर जेट (PHOTO-X/Russian Embassy in India)
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एयरो इंडिया 2025 (Aero India 2025) में आए बहुचर्चित रूसी फाइटर जेट सुखोई Su-57 (Sukhoi Su-57) को उसका पहला विदेशी कस्टमर मिल गया है. रूस के मित्र देश ने इस फाइटर जेट को खरीदने पर हरी झंडी दे दी है. रूसी टेलीग्राम चैनल रोसोबोर्नएक्सपोर्ट के मुताबिक सुखोई कॉर्पोरेशन ने एक्सपोर्ट वेरिएंट Su-57 E का उत्पादन शुरु कर दिया है. योजना है कि साल 2025 के अंत तक जेट्स की डिलीवरी पूरी कर दी जाए.

रूसी डिफेंस एक्सपोर्ट Rosoboroneexport के सीईओ Alaxander Mikheev ने भारत में चल रहे एयरो इंडिया के दौरान रूसी मीडिया एजेंसी Interfax से बात करते हुए कहा

Su-57 का पहला विदेशी कस्टमर जल्द ही इस एयरक्राफ्ट को ऑपरेट करना शुरु कर देगा. 2025 तक ये एयरक्राफ्ट उस देश को सप्लाई कर दिए जाएंगे.

भारत में चल रहे एयरो इंडिया शो के दौरान इस रूसी विमान ने सभी को आकर्षित किया. रूस ने इस विमान को भारत को भी ऑफर किया है. साथ ही इसके जॉइंट प्रोडक्शन की बात भी सामने रखी है. इससे पहले इस विमान ने चीन में आयोजित Zhuhai एयर शो में अपना जलवा दिखाया था. Su-57 एक 5वीं पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट जिसे यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर सुखोई ने बनाया है. एयर-कॉम्बैट के अलावा इस जहाज में एयर-टू-ग्राउंड टारगेट्स पर हमला करने की भी क्षमता है. साथ ही इसकी स्टेल्थ तकनीक इसे रडार को चकमा देने में मदद करती है.

किसने खरीदा?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने ये विमान किसी एक देश को बेचा है; मगर किसे, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. हालांकि ख़बरें और अटकलें कहती हैं कि अल्जीरिया या नॉर्थ कोरिया में से कोई एक देश इसका संभावित पहला खरीदार हो सकता है. पर अधिकतर रिपोर्ट्स के मुताबिक अल्जीरिया की ओर ईशारा करती हैं. हालांकि रोसोबोर्नएक्सपोर्ट ने अभी तक अपने कस्टमर की पहचान उजागर नहीं की है. इसके पीछे कारण बताया जा रहा है की अगर पश्चिमी देशों को उस कस्टमर के बारे में पता चला तो वो उसपर कई सारे प्रतिबंध लगा सकते हैं.

(यह भी पढ़े: रूस-यूक्रेन वॉर अब खत्म होने जा रहा है? ट्रंप ने पुतिन और जेलेंस्की को राजी कर लिया!)

अल्जीरिया का नाम सबसे मजबूती से लेने के पीछे वजह है इसकी रूस से दोस्ती. ये देश पहले से ही रूस से सैन्य साजो-सामान खरीदता रहा है जिसमें Su-30 और मिग-29 जैसे विमान शामिल हैं. साथ ही अल्जीरिया ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम भी खरीदा है. हालांकि अभी तक रूस या अल्जीरिया, किसी भी देश ने आधिकारिक तौर पर इस डील की पुष्टि नहीं की है.

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