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रूस की सेना की शान बने बिहार में बने जूते, हाजीपुर के कारखाने में होता है गजब का काम

कॉम्पिटेंस एक्सपोर्ट्स नाम की लोकल कंपनी रूसी कंपनियों के लिए सेफ्टी शूज बनाती है. इसके साथ ही कंपनी इटली, फ्रांस, स्पेन और यूके के बाजारों के लिए लग्जरी डिजाइनर फुटवियर बनाने का काम भी करती है. कंपनी ने पिछले साल 15 लाख जोड़े रूस को एक्सपोर्ट किए थे. इनकी कीमत 100 करोड़ रुपये थी.

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16 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 10:04 PM IST)
Russian army marches forward in ‘Made in Bihar’ safety shoes
रूसी सेना ने हाजीपुर में निर्मित ‘मेड इन बिहार’ जूते पहन कर मार्च किया. (फोटो- ट्विटर)
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बिहार का हाजीपुर वैसे तो केले के उत्पादन के लिए फेमस है, लेकिन इन दिनों इसके चर्चे रूस तक हो रहे हैं. कारण है यहां के बने बूट, जो कि रूसी सेना के सैनिक इस्तेमाल (Russian army ‘Made in Bihar’ shoes) कर रहे हैं. हाजीपुर के बने इन ‘मेड इन बिहार’ बूट्स की अब सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा है.

ANI डिजिटल द्वारा X पर किए गए एक पोस्ट में लिखा गया,

“रूसी सेना ने हाजीपुर में निर्मित ‘मेड इन बिहार’ जूते पहन कर मार्च किया.”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कॉम्पिटेंस एक्सपोर्ट्स नाम की लोकल कंपनी रूसी कंपनियों के लिए सेफ्टी शूज बनाती है. इसके साथ ही कंपनी इटली, फ्रांस, स्पेन और यूके के बाजारों के लिए लग्जरी डिजाइनर फुटवियर बनाने का काम भी करती है. कॉम्पिटेंस एक्सपोर्ट्स के जनरल मैनेजर शिब कुमार रॉय ने ANI को बताया,

“हमने साल 2018 में हाजीपुर यूनिट की शुरुआत की थी. इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों के लिए रोजगार पैदा करना था. हाजीपुर में हम सेफ्टी जूते बनाते हैं, जिन्हें रूस को निर्यात किया जाता है. ज्यादातर एक्सपोर्ट का सामान रूस जाता है. हमने धीरे-धीरे यूरोप के लिए भी काम करना शुरू किया है. जल्द ही हम घरेलू बाजार में भी अपने प्रोडक्ट्स लॉन्च करेंगे.”

रूसी सेना के लिए सेफ्टी जूतों की आवश्यकताओं के बारे में बात करते हुए रॉय ने कहा,

"उनकी डिमांड है कि जूते हल्के और फिसलन-रोधी होने चाहिए. इसके साथ ही वो सोल में विशेष विशेषताएं डिमांड करते हैं. ये मायनस 40 डिग्री सेल्सियस जैसे एक्सट्रीम मौसम की स्थिति का सामना करने में सक्षम होने चाहिए. हम इन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए सेफ्टी जूते बनाते हैं."

रोजगार के पहलू पर बात करते हुए रॉय ने कहा,

"कंपनी के एमडी दानेश प्रसाद की महत्वाकांक्षा बिहार में एक विश्व स्तरीय कारखाना बनाना है और राज्य के रोजगार में योगदान देना है. हम कर्मचारियों को अधिकतम रोजगार देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. इसमें 300 कर्मचारियों में से 70 प्रतिशत महिलाएं हैं."

कंपनी ने पिछले साल 15 लाख जोड़े एक्सपोर्ट किए थे. इनकी कीमत 100 करोड़ रुपये थी. रॉय का लक्ष्य अगले साल इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का है. 

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