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उस गैंगस्टर पर फिल्म आ रही है, जिसने यूपी के मुख्यमंत्री को मारने सुपारी ली थी

बहन को छेड़ने वाले को गोली मारकर की थी अपने आपराधिक करियर की शुरुआत.

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4 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 13 जुलाई 2020, 09:22 PM IST)
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असल घटना से प्रेरित इस फिल्म को डायरेक्ट किया है भाव घुलिया ने.
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श्रीप्रकाश शुक्ला. एक 25 साल का लौंडा जिससे पूरा स्टेट कांपता था. उसने 25 साल की उम्र में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सुपारी ले ली थी. 6 करोड़ रुपए में. उसी गैंगस्टर पर सीरीज़ आ रही है. सीरीज़ का नाम है 'रंगबाज'. सीरीज़ में साकिब सलीम गैंगस्टर शिव प्रकाश शुक्ला का रोल कर रहे हैं, जो रियल लाइफ गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला की लाइफ पर बेस्ड है. सीरीज़ में उनके साथ होंगे तिगमांशु धूलिया, रणवीर शौरी, अहाना कुमरा और रवि किशन. इस सीरीज़ को डायरेक्ट किया है भाव धुलिया ने. इसे वहीं रिलीज़ किया जाएगा, जहां इमरान हाशमी स्टारर 'टाइगर्स' रिलीज़ की गई थी. ZEE 5 पर. इसे आप 22 दिसंबर से देख पाएंगे. आइए जानते है श्रीप्रकाश शुक्ला की वो जर्नी, जिसने उसे 25 साल की उम्र में मोस्ट वॉन्टेड क्रिमिनल बना दिया.
20 साल की उम्र में पहला मर्डर कर पुलिस रिकॉर्ड में आया
गोरखपुर में एक गांव है मामखोर. यहां के एक टीचर के घर बच्चा पैदा हुआ, जिसका नाम पड़ा श्रीप्रकाश. पिताजी नाम के आगे शुक्ला लिखते थे, तो लड़का का नाम हो गया श्रीप्रकाश शुक्ला. कंपटीशन वाली भावना और मारधाड़ की ओर दिलचस्पी थी, इसलिए गांव में ही पहलवानी करने लगा. उसका आपराधिक करियर शुरू हुआ उसके गांव से ही. राकेश तिवारी नाम के एक लड़के ने उसकी बहन को देखकर सीटी मार दी. बदला लेने के लिए श्रीप्रकाश शुक्ला ने उसे गोली मार दी. तब उसकी उम्र कोई 19-20 साल थी. जब पुलिस पीछे पड़ी, तो बचने के लिए बैंकॉक भाग गया. जब लौटा, तो उसके दिमाग में 'मिर्ज़ापुर' वाला डायलॉग कौंधा 'शुरुआत मजबूरी में किए थे, अब मज़ा आ रहा है'. लौटन के बाद वो बिहार के विवादित नेता सुरजभान सिंह के साथ जुड़ गया. धीरे-धीरे वो राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा करने लगा. कई तरह के गैरकानूनी धंधे करने लगा. पैसे आने लगे. ठाठ बढ़ने लगी.
 फिल्म 'रंगबाज़' के एक सीन में गैंगस्टर शिव प्रकाश शुक्ला के रोल में साकिब सलीम.
'रंगबाज़' के एक सीन में गैंगस्टर शिव प्रकाश शुक्ला के रोल में साकिब सलीम.

जब यूपी अंडरवर्ल्ड का हिस्सा रहे नेता को श्रीप्रकाश ने ठोक दिया
पुलिस की सिरदर्दी श्रीप्रकाश शुक्ला ने 1997 में बहुत बढ़ा दी, जब उसने नेता और यूपी अंडरवर्ल्ड का हिस्सा रहे वीरेंद्र शाही को ठोक दिया. हर ओर हंगामा मच गया, क्योंकि वीरेंद्र शाही बड़ा नाम था. नेताओं से उसकी अच्छी सांठ-गांठ थी. क्योंकि उसका इस्तेमाल नेता भी अपने फायदे के लिए करते थे. इन्हीं चक्करों में उसका पॉलिटिकल एंबिशन जाग गया. अब उसकी हिट लिस्ट में अगला नाम था यूपी के कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी का, जो गोरखपुर के चिल्लूपार सीट से विधायक थे. अब श्रीप्रकाश को वो विधानसभा सीट चाहिए थी. 23-24 साल की उम्र का ये लड़का, उस विधायक का कत्ल करना चाहता था, जिसे 15 साल में चिल्लूपार सीट से कोई हिला नहीं पाया था.
श्रीप्रकाश शुक्ला के माथे पर 20 कत्ल का इल्जाम था.
श्रीप्रकाश शुक्ला के माथे पर 20 कत्ल का इल्जाम था.

जब इलाज कराने पहुंचे बिहार के बाहुबली मंत्री को सरेबाज़ार भून दिया
साल 1998 में श्रीप्रकाश शुक्ला का उपद्रव बहुत बढ़ गया था. मई मे उसने लखनऊ के एक बिजनेसमैन के बेटे को किडनैप कर लिया फिरौती मांगी 5 करोड़ रुपए. बेटे को बचाने आए बिजनेसमैन का श्रीप्रकाश शुक्ला ने कत्ल कर दिया. शुक्ला का खौफ इतना बढ़ गया था कि बड़े से छोटे सभी लोग आंख मिलाने से भी बचते थे. मई में हुई किडनैपिंग कांड के ठीक एक महीने बाद एक और बड़ा कांड हुआ. बिहार के बाहुबली मंत्री थे बृज बिहारी प्रसाद. यूपी के आखिरी छोर तक उनका सिक्का चलता था. 13 जून 1998 को वो इलाज के लिए पटना के इंदिरा गांधी हॉस्पिटल पहुंचे थे. हॉस्पिटल के सामने वो अपनी लाल बत्ती वाली गाड़ी से उतरे ही थे कि एके-47 से लैस 4 बदमाश उन्हें से भून दिया.
श्रीप्रकाश शुक्ला के ऊपर बनी फिल्म 'रंगबाज़' में किरदारों के नाम में हल्का-फुल्का बदलाव किया गया है.
श्रीप्रकाश शुक्ला के ऊपर बनी 'रंगबाज़' में किरदारों के असल नाम में हल्का-फुल्का बदलाव किया गया है.

जब साक्षी महाराज ने बताई सीएम की सुपारी लिए जाने की बात
1998 में साक्षी महाराज यूपी के फर्रुखाबाद से एमपी थे. साक्षी ने बिना सोर्स बताए ये खबर ब्रेक की कि श्रीप्रकाश शुक्ला ने यूपी के (तत्कालीन) सीएम कल्याण सिंह को मारने की सुपारी ली है. पूरे 6 करोड़ रुपए में. ये सुनकर यूपी का पुलिस महकमा बेहाल हो गया. अप्रैल 1998 में यूपी पुलिस ने 43 मोस्ट वॉन्टेड क्रिमिनल्स को मारने या पकड़ने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाई. इस 43 क्रिमिनल्स में एक नाम श्रीप्रकाश शुक्ला का भी था. लेकिन मुख्यमंत्री के नाम की फिरौती लेने के बाद श्रप्रकाश शुक्ला पुलिस की प्रायॉरिटी लिस्ट काफी ऊपर आ गया था.
फिल्म 'रंगबाज' के एक दृश्य में तिगमांशु धूलिया. घूलिया का किरदार फिल्म में राम शंकर तिवारी नाम के नेता का रोल कर रहे हैं.
सीरीज़ 'रंगबाज' के एक दृश्य में तिगमांशु धूलिया. घूलिया सीरीज़ में राम शंकर तिवारी नाम के नेता का रोल कर रहे हैं.

ज़िंदा रहते टीवी के मशहूर क्राइम शो में दिखाई गई थी शुक्ला की कहानी
शुक्ला का आतंक इतना बढ़ गया था कि टीवी पर आने वाले मशहूर क्राइम शो इंडियाज़ मोस्ट वॉन्टेड में उसके ऊपर बेस्ड दो एपिसोड दिखाए गए. इस शो को होस्ट करते थे सुहैब इलयासी. एपिसोड के ऑन एयर जाने के बाद सुहैब को शुक्ला से धमकी भरे फोन आने शुरू हो गए. लेकिन इसी बीच एक अंजान नंबर से आए कॉल में सुहैब को ये बताया गया कि शुक्ला नीली सिएलो कार में दिल्ली एम्स के आसपास देखा गया है. इसके 10 दिन बाद एक और फोन कॉल आया, जिसमें बताया गया कि शुक्ला अपने साथियों समेत गाज़ियाबाद में देखा गया. ये सारी जानकारियां दिल्ली और यूपी पुलिस के सुपुर्द कर दी गईं.
जब श्रीप्रकाश शुक्ला मरा, तब उसकी उम्र सिर्फ 25 साल थी.
जब श्रीप्रकाश शुक्ला मरा, तब उसकी उम्र सिर्फ 25 साल थी.

गर्लफ्रेंड के चक्कर में मारा गया
श्रीप्रकाश शुक्ला को मोबाइल फोन्स का बहुत चाव था. गलत धंधे में होने के कारण वो अलग-अलग सिम कार्ड्स का इस्तेमाल करता था. लेकिन किस्मत खराब थी, उसने एक ही सिम लगातार एक हफ्ते तक इस्तेमाल किया. इससे श्रीप्रकाश शुक्ला को ट्रेस करना पुलिस के लिए आसान हो गया. पुलिस ने दिल्ली में उसके वसंत कुंज वाले इलाके का पता लगा लिया था. लेकिन शुक्ला पकड़ में अब भी नहीं आया था. 22 सितंबर 1998 को वो अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने गाज़ियाबाद स्थित उसके फ्लैट पर पहुंचा जहां पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया.
जाते-जाते श्रीप्रकाश शुक्ला के ऊपर बनी सीरीज़ 'रंगबाज' का ट्रेलर देखते जाइए:



वीडियो देखें: सिंबा में रणवीर सिंह एक करप्ट पुलिसवाले बने हैं

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