गुरुवार को हजरत निजामुद्दीन की दरगाह पर जियारत करने पहुंचे स्पेशल गेस्ट.कांग्रेस के वाइस प्रेसीडेंट राहुल गांधी. दरगाह जाने से पहले ब्रेक लिया उर्स महलमें. वहां ख्वाजा सईद अहमद निजामी ने दस्तारबंदी की. दस्तारबंदी मतलब वो पगड़ीबांधी जाती है सिर पर. दरगाह पर खुला सिर लेकर नहीं जाते न. इस मौके पर बड़े हाईफाई इंतजाम थे वहां पर. वहां अच्छा खासा वक्त बिताया. तकरीबन आधा घंटा. उनके ट्विटरएकाउंट पर ये ट्वीट भी आया है देखो.https://twitter.com/OfficeOfRG/status/692752539377205248 कौन थे हजरत निजामुद्दीनहजरत निजामुद्दीन औलिया 13वीं सदी के बड़े चिस्ती संत थे. पहुंचे हुए फकीर. 1238में यूपी, बदायूं में पैदा हुए. पांच साल के थे जब बाप का साया सिर से उठ गया. मांबीबी जुलेखा के साथ आ गए दिल्ली. 20 साल की उम्र में अजोधन गए. ये जगह अब पाकिस्तानमें है पाकपट्टन के नाम से. वहां बाबा फरीद के चेले बन गए. वहां से लौटे तब सूफीमस्ती सवार हो चुकी थी. उसके बाद हर साल रमजान पर अपने गुरु के साथ वक्त बितानेजरूर पहुंचते थे. बाकी जिंदगी इनकी दिल्ली में ही गुजरी. मोइनुद्दीन चिस्ती इनसेपहले के चिस्ती संत थे. निजामुद्दीन के चेले थे नसीरुद्दीन चिराग ए देहलवी और फेमसकवि अमीर खुसरो. अपने गुरुओं की परंपरा को बहुत अच्छे से संभाला. दुनिया को प्यारसे रहने की नसीहत दी. सन 1325 में हजरत निजामुद्दीन जन्नतनशीं हुए. ये दरगाह उन्हींहजरत निजामुद्दीन की है. पश्चिमी दिल्ली में. इस दरगाह के साथ ही अमीर खुसरो औरमुगल सल्तनत की राजकुमारी जहां आरा बेगम की मजारें भी हैं. हर साल यहां हिंदुस्तानऔर हिंदुस्तान के बाहर से लोग जियारत करने पहुंचते हैं. धरम मजहब का कोई चक्कर नहींहै. हिंदू मुसलमान सब आते हैं. यहां जो कव्वाली होती है वो वर्ल्ड फेमस है.कलाकारों को दुनिया भर में प्रोग्राम करने के लिए बुलाया जाता है. हर साल यहां उर्सहोता है. इस साल 712वां उर्स चल रहा है जो चलेगा 30 जनवरी तक. राहुल गांधी पहुंचेहैं क्योंकि स्पेशल गेस्ट के तौर पर बुलाया गया था. अब पहुंचे हैं तो कुछ न कुछ तोमांगा ही होगा. अब दिमाग लड़ाओ क्या मांगा होगा.