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'क्रीमी लेयर का सवाल ही नहीं है'- पीएम मोदी ने सांसदों से कहा

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए SC/ST कैटेगरी में सब-क्लासिफिकेशन करने को कहा है. साथ ही फैसला सुनाने के दौरान जस्टिस गवई ने कहा कि क्रीमी लेयर भी बनाया जाना चाहिए.

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10 अगस्त 2024 (पब्लिश्ड: 10:39 PM IST)
पीएम मोदी ने पार्टी के एससी/एसटी सांसदों के 70 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मीटिंग की (फोटो-ट्विटर)
PM Modi met a 70-member delegation of the party’s SC/ST MPs (photo-twitter)
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सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त को एससी/एसटी आरक्षण को लेकर एक अहम फैसला सुनाया. अदालत ने एससी/एसटी आरक्षण के तहत सब-क्लासिफिकेशन को लेकर राज्य सरकारों की शक्ति को मान्यता दे दी है. सीधा कहें तो अब राज्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के तहत उपजातियां तय कर सकते हैं. साथ ही जस्टिस बीआर गवई ने ये भी कहा कि क्रीमी लेयर भी बनाया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर दलित नेताओं ने आशंका व्यक्त की. जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के एससी/एसटी सांसदों के 70 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मीटिंग की. बुलंदशहर से भाजपा के सांसद भोला सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से इस मीटिंग के बाद बात की. उन्होंने बताया कि दोनों सदनों के एससी/एसटी सदस्य प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे. उन्होंने कहा, 

“हमने पीएम मोदी को एससी/एसटी समुदायों के बीच क्रीमी लेयर के बारे में सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा की गई टिप्पणियों के संबंध में अपनी चिंताओं से अवगत कराया. उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार कोई कदम नहीं उठाएगी और कहा कि वह एससी और एसटी समुदायों के कल्याण के लिए खड़ी है."

मीटिंग के बाद खुद पीएम मोदी के आधिकारिक X अकाउंट से पोस्ट करते हुए लिखा गया, 

“आज एससी/एसटी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. एससी/एसटी समुदायों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता और संकल्प को दोहराया.”

हिमाचल प्रदेश से बीजेपी सांसद सुरेश कुमार कश्यप ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पीएम के साथ उनकी मुलाकात का यही एकमात्र एजेंडा था. उन्होंने कहा, 

“हम केवल ज्ञापन देने के लिए प्रधानमंत्री से मिले, लेकिन उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाएगी. प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल एक अवलोकन था और सरकार पर बाध्यकारी नहीं है.”

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली से बीजेपी सांसद योगेन्द्र चंदोलिया ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 

''यह टिप्पणी फैसले का हिस्सा नहीं थी, लेकिन हमारे विरोधी अफवाह फैला रहे हैं कि बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार क्रीमी लेयर लाना चाहती है. इसलिए, हमने औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री से मुलाकात की, जिन्होंने हमें आश्वासन दिया कि एससी/एसटी के लिए क्रीमी लेयर का कोई सवाल ही नहीं है. भाजपा, हमारे पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमंत्री सभी इस मुद्दे पर एकमत हैं.”

मध्य प्रदेश के एसटी नेता और बीजेपी सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी पीएम के आश्वासन के बारे में बात की. उन्होंने कहा, 

"सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने अपनी राय व्यक्त की कि एससी/एसटी के बीच क्रीमी लेयर को बाहर रखा जाना चाहिए, लेकिन यह कोर्ट के फैसले का हिस्सा नहीं था."

इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ी लिज़ मैथ्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर आधिकारिक तौर पर अपना रुख नहीं बताया है. लेकिन इसकी सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जिसका मुख्य वोट बैंक दलित समुदाय है, ने इस फैसले से असहमति जताई है और कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ रिव्यु पिटीशन दायर करेगी.

 

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