The Lallantop
Advertisement

दिल्ली पुलिस ने जिन पत्रकारों के घर रेड मारी उनके बारे में कितना जानते हैं आप?

उर्मिलेश, परंजॉय गुहा ठाकुरता जैसे पत्रकार भी हैं, जो चार दशक से पत्रकारिता कर रहे हैं. पुलिस ने कुछ पत्रकारों को हिरासत में भी लिया है.

Advertisement
Jouralists raided in India
अभिसार शर्मा, उर्मिलेश, प्रबीर पुरकायस्थ और तीस्ता सीतलवाड़ (फोटो- सोशल मीडिया)
3 अक्तूबर 2023 (Updated: 3 अक्तूबर 2023, 18:21 IST)
Updated: 3 अक्तूबर 2023 18:21 IST
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

3 अक्टूबर की सुबह-सुबह एक खबर टीवी और मोबाइल स्क्रीन पर छा गई. दिल्ली-NCR में कई पत्रकारों के यहां पुलिस की छापेमारी की खबर. ये रेड दिल्ली पुलिस ने की है. मामला दिल्ली बेस्ड एक मीडिया प्लेटफॉर्म 'न्यूजक्लिक' की फंडिंग की जांच से जुड़ा है. न्यूजक्लिक के खिलाफ 2 साल पहले भी छापेमारी हुई थी. अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने न्यूजक्लिक के खिलाफ UAPA के तहत एक नया केस दर्ज किया. उसी केस के सिलसिले में न्यूजक्लिक के पत्रकारों या उस संस्थान से पैसे लेने वाले दूसरे लोगों के खिलाफ छापेमारी चल रही है. लेकिन ये पत्रकार कौन हैं, जिनके घर दिल्ली पुलिस पहुंची है?

समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है. पुलिस सूत्रों ने कहा कि जिन पत्रकारों को हिरासत में लिया गया, उनसे 25 सवाल पूछे गए. इनमें उनकी विदेश यात्रा, शाहीन बाग में CAA के खिलाफ प्रदर्शन और किसान आंदोलन से जुड़े सवाल भी रखे गए थे.

दिल्ली पुलिस ने इस छापेमारी को लेकर अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है. लेकिन कुछ पत्रकारों ने खुद सोशल मीडिया पर बताया कि उनके घर पुलिस पहुंची. पत्रकार अभिसार शर्मा ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा कि दिल्ली पुलिस मंगलवार (3 अक्टूबर को) सुबह-सुबह उनके घर पहुंची. और उनका लैपटॉप और फोन छीन लिया है.

अभिसार शर्मा न्यूजक्लिक के लिए फिलहाल 'इंडिया की बात' नाम का एक प्रोग्राम करते हैं. इसके अलावा अपने यूट्यूब चैनल से भी समसामयिक मुद्दों पर वीडियो डालते हैं. अभिसार लंबे समय तक अलग-अलग टीवी न्यूज चैनलों में एंकर रह चुके हैं. इसके अलावा अभिसार ने अंग्रेजी में कुछ उपन्यास भी लिखे हैं. पत्रकारिता के लिए उन्हें दो बार रामनाथ गोयन्का अवार्ड और 2017 में रेड इंक अवार्ड मिल चुका है. दो दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता में हैं.

भाषा सिंह न्यूजक्लिक की कंसल्टिंग एडिटर हैं. करीब दो दशक से पत्रकारिता कर रही हैं. रेड की जानकारी देते हुए भाषा ने लिखा कि वो अपने इस फोन से आखिरी ट्वीट कर रही हैं. दिल्ली पुलिस उनका फोन जब्त करने वाली है. भाषा सिंह लखनऊ यूनिवर्सिटी से LLB की पढ़ाई कर चुकी हैं. न्यूजक्लिक से जुड़ने से पहले उन्होंने कई अखबारों और पत्रिकाओं के लिए काम किया था. सिर पर मैला ढोने की प्रथा और किसानों की आत्महत्या पर उन्होंने काफी काम किया है. साल 2005 में मैला ढोने की प्रथा पर काम करने के लिए उन्हें एक फेलोशिप मिली थी. इसी पर आधारित उन्होंने 'अृदश्य भारत' नाम की किताब भी लिखी है. इसके अलावा वो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ चलने वाले आंदोलन पर भी एक किताब लिख चुकी हैं जिसका शीर्षक है- "शाहीन बाग".

उर्मिलेश फिलहाल न्यूजक्लिक में रीडर्स एडिटर हैं. समसामयिक विषयों पर वीडियो प्रोग्राम भी करते हैं. पिछले चार दशक से पत्रकारिता कर रहे हैं. उर्मिलेश इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से एमफिल कर चुके हैं. नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान और दूसरे अखबारों में लंबे समय तक रहे. राज्यसभा टीवी (अब संसद टीवी) में कार्यकारी संपादक रह चुके हैं. इसके बाद अलग-अलग स्वतंत्र मीडिया संस्थानों के लिए लिखते और बोलते रहे. अपने पत्रकारिता करियर में रहते हुए ही उन्होंने करीब 10 किताबें लिखी हैं. कश्मीर: विरासत और सियासत (2006), राहुल सांकृत्यायन: सृजन और संघर्ष (1994), झारखंड: जादू जमीन का अंधेरा (1999) उनकी चर्चित किताबें हैं.

प्रबीर पुरकायस्थ न्यूजक्लिक के फाउंडिंग एडिटर हैं. साल 2009 में उन्होंने इस मीडिया संस्थान को खड़ा किया था. प्रबीर पत्रकारिता बैकग्राउंड से नहीं आते हैं. लेकिन लेख वगैरह लिखते रहे हैं. वामपंथी राजनीति की तरफ हमेशा से उनका झुकाव रहा है. इमरजेंसी के दौरान जेल भी गए थे. तब वो जेएनएयू में पढ़ाई कर रहे थे और CPI(M) के स्टूडेंट विंग SFI से जुड़े थे. न्यूजक्लिक शुरुआत करने के पीछे भी यही वजह थी कि लेफ्ट का स्पेस मीडिया में कम था. द कैरेवन को दिये एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि इस स्पेस में लेफ्ट की मौजूदगी को मजबूत करना है. प्रबीर विज्ञान और तकनीक पर पॉलिसी की वकालत करने वाली संस्था 'दिल्ली साइंस फोरम' के फाउंडिंग मेंबर भी हैं. इसके अलावा कई किताबें लिख चुके हैं.

जिन पत्रकारों के घर रेड हुई, उनमें सीनियर पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता भी हैं. परंजॉय भी न्यूजक्लिक के प्रोग्राम में कई बार नजर आए. पत्रकारिता के अलावा उन्होंने कई डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाई हैं. साथ ही IIM अहमदाबाद, दिल्ली यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर पढ़ाया भी है. दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से पढ़ाई के बाद परंजॉय ने कोलकाता में पत्रकारिता शुरू की. इसके बाद चार दशक से भी ज्यादा समय तक अलग-अलग अखबारों और मैगजीन में काम किया. वे चर्चित मैगजीन इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली (EPW) के एडिटर भी रह चुके हैं. साल 2017 में मैगजीन को चलाने वाले बोर्ड के साथ मतभेदों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. इसके अलावा उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं. इनमें कुछ चर्चित हैं- Sue the messenger, Gas Wars, द रियल फेस ऑफ फेसबुक इन इंडिया.

परंजॉय गुहा ठाकुरता, बीच में (फोटो- फेसबुक)

 

मुंबई में एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ के घर पर भी पुलिस ने तलाशी ली है. तीस्ता एक थिंक टैंक ट्राइकॉन्टिनेंटल: इंस्टीट्यूट फॉर सोशल रिसर्च की डायरेक्टर हैं. ये थिंक टैंक न्यूजक्लिक के लिए कई आर्टिकल लिखता है. सीतलवाड़ ने मुंबई यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद करीब एक दशक तक मेनस्ट्रीम अखबारों और पत्रिकाओं के लिए काम किया. इसके बाद मानवाधिकार के मुद्दों के लिए काम करने लगीं. अभी वो सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) नाम का एक एनजीओ चलाती हैं. उनके पति जावेद आनंद भी सोशल एक्टिविस्ट हैं. तीस्ता सीतलवाड़ के परिचय के साथ दो चीजें ख़ास तौर पर जुड़ती हैं- एक कि वो वकालत के लिए मशहूर परिवार से आती हैं. उनके दादा मोतीलाल चिमनलाल सीतलवाड़ भारत के पहले अटॉर्नी जनरल थे. और दूसरा, 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े मामलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कटघरे में खड़े करने को लेकर. गुजरात दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने इस हिंसा के मामले में नरेंद्र मोदी को मिली क्लीन चिट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसमें तीस्ता सीतलवाड़ भी सह-याचिकाकर्ता थीं.

सीनियर पत्रकार औनिंद्यो चक्रवर्ती, लेखक और इतिहासकार सोहैल हाशमी, स्टैंड-अप कॉमेडियन संजय रजौड़ा के घर भी छापेमारी हुई है. ये सभी न्यूजक्लिक पर किसी ना किसी रूप में नजर आ चुके हैं. इसके अलावा न्यूजक्लिक से जुड़े कुछ और पत्रकारों के घरों पर दिल्ली पुलिस पहुंची और खोजबीन की.

न्यूजक्लिक के खिलाफ आरोप क्या?

बीती 5 अगस्त को अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि न्यूजक्लिक को अमेरिकी बिजनेसमैन नेविल रॉय सिंघम से जुड़ी संस्थाओं से फंडिंग होती है. रिपोर्ट में बताया गया था कि नेविल रॉय किस तरह दुनिया भर की संस्थाओं को फंड करते हैं, जो चीनी सरकार के "प्रोपेगैंडा टूल" की तरह काम करती हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स ने ये भी लिखा था कि न्यूजक्लिक पर चीन की सरकार काफी कवरेज है.

इसके बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि भारत सरकार लंबे समय से बता रही है कि न्यूजक्लिक प्रचार की एक खतरनाक वैश्विक चाल है. ठाकुर ने दावा किया था कि नेविल रॉय का सीधा संपर्क कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के एक प्रोपेगैंडा विंग के साथ है. कांग्रेस और विपक्षी दल जिन अखबारों के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, उन्होंने ही पुष्टि की है.

हालांकि इस रिपोर्ट के बाद न्यूजक्लिक ने आरोपों पर जवाब दिया था और कहा था कि संस्थान के खिलाफ कई तरह के झूठे और आधारहीन आरोप लगाए गए हैं. न्यूजक्लिक पर साल 2021 में FDI (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा था. इस पर संस्थान ने कहा था कि ये मामला कोर्ट के सामने विचाराधीन है. न्यूजक्लिक के मुताबिक, वो भारतीय कोर्ट में भरोसा करता है और भारतीय कानून के हिसाब से काम करता रहेगा. संस्थान ने तब ये भी कहा था कि दिल्ली हाई कोर्ट ने मौजूदा केस में न्यूजक्लिक के पक्ष में एक फैसला सुनाया और कंपनी के कई अधिकारियों को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी.

इससे पहले न्यूजक्लिक के खिलाफ फरवरी 2021 में ED ने छापेमारी की थी. ये छापेमारी 5 दिनों तक चली थी. न्यूजक्लिक ऑफिस के अलावा वेबसाइट के एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ और कई जगहों पर छापेमारी हुई थी. तब भी यही खबर सामने आई थी कि वेबसाइट को मिली फंडिंग की जांच की जा रही है. हालांकि न्यूजक्लिक ने कहा था कि उसके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और कंपनी ने सभी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है. न्यूजक्लिक का मालिकाना ‘PPK NewsClick स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड’ के पास है.

वीडियो: कश्मीर में पत्रकारों पर UAPA क्यों लग रहा? एलजी मनोज सिन्हा ने इसकी पूरी कहानी बताई है

thumbnail

Advertisement

Advertisement

Advertisement