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जिस आदेश को लेकर मणिपुर में हिंसा भड़की, हाई कोर्ट ने अब उसे वापस ले लिया

27 मार्च 2023 को कोर्ट के इस आदेश के बाद ही मणिपुर में हिंसा भड़की थी. जिसमें 200 से ज्यादा लोगों की जान गई थी.

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22 फ़रवरी 2024 (अपडेटेड: 22 फ़रवरी 2024, 07:14 PM IST)
Manipur High Court withdraws its own order to consider including Meiteis in ST list
21 फरवरी को मणिपुर हाई कोर्ट ने कहा कि आदेश की समीक्षा करने की जरूरत है. (फोटो- PTI)
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मणिपुर हाई कोर्ट ने अपने उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें राज्य सरकार से मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल करने पर विचार करने को कहा गया था. कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वो मैतेई समुदाय के लोगों को ST में शामिल करने के लिए सर्वे कराए और इस पर कार्रवाई करे. अब हाई कोर्ट ने अपने आदेश से इस पैराग्राफ को हटा दिया है. बता दें कि 27 मार्च 2023 को कोर्ट के इस आदेश के बाद ही मणिपुर में जातीय हिंसा भड़की थी. इस हिंसा में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

हाई कोर्ट का 27 मार्च का आदेश एक्टिंग चीफ जस्टिस एमवी मुरलीधरन ने पारित किया गया था. आदेश मैतेई जनजाति संघ के सदस्यों की याचिका पर सुनाया गया था. 3 मई 2023 को मणिपुर ट्राइबल यूनियन के नेतृत्व में कई संगठनों ने हाई कोर्ट का रुख किया. उन्होंने कोर्ट के आदेश के खिलाफ तीसरे पक्ष द्वारा अपील दायर करने की अनुमति मांगी थी. इस दौरान मैतेई समुदाय की की तरफ से आदेश के पैराग्राफ 17 (iii) में संशोधन की मांग करते हुए एक रिव्यू पिटीशन दायर की गई. ये वही पैराग्राफ है जिसके जरिये कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए.

मैतेई याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में अपील दायर करने का भी विरोध किया था. और कहा था कि मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए. इस बीच मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई. सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हाई कोर्ट के आदेश को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया. इसके बाद 17 मई को मैतेई याचिकाकर्ताओं की तरफ से रिव्यू पिटीशन याचिका दायर की गई.

21 फरवरी को मणिपुर हाई कोर्ट में जस्टिस गोलमई गाइफुलशिलू ने कहा कि आदेश की समीक्षा करने की जरूरत है. उन्होंने कहा,

“मैं इस बात से संतुष्ट हूं और मेरा विचार है कि 27 मार्च 2023 को सिंगल जज बेंच द्वारा पैराग्राफ 17 (iii) में दिए गए निर्देश की समीक्षा करने की आवश्यकता है. ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा की गई टिप्पणी के खिलाफ है.”

राज्य में हिंसा भड़कने का कारण

पिछले साल मणिपुर हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज्य में भड़की हिंसा अब तक पूरी तरह शांत नहीं हो पाई है. हाई कोर्ट के निर्णय को कुकी समुदाय ने अपनी हार की तरह देखा था. क्योंकि मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह खुद मैतेई समुदाय से आते हैं, तो हाईकोर्ट के इस निर्णय को मैतेई समुदाय ने अपनी जीत की तरह देखा. एक कारण और था. कोर्ट के इस फैसले से पहले बीरेन सिंह सरकार ने कुछ ऐसे काम शुरू किए थे, जिसे कुकी समुदाय के लोग खुद पर हमले की तरह देख रहे थे. जैसे -

- फरवरी 2023 के महीने में बीरेन सिंह की सरकार ने चुराचांदपुर, कांगपोकपी और तेंगनूपाल जिलों में बेदखली अभियान चलाया. जंगलों में रहने वाले लोगों को ये कहकर निकाला जाने लगा कि ये म्यांमार से आए घुसपैठिए हैं.

- मार्च 2023 के महीने में बीरेन सिंह सरकार ने एक त्रिशंकु शांति संधि से अपने हाथ वापस खींच लिए. ये था सस्पेन्शन ऑफ ऑपरेशन यानी SOO. ये सू (SOO) केन्द्रीय गृह मंत्रालय, राज्य सरकार और कुकी उग्रवादी गुटों के बीच साइन किया था. इसके तहत उग्रवादी, सेना और पुलिस एक दूसरे पर गोली नहीं चलाएंगे. ना ही ऐसी नौबत लाएंगे. बीरेन सिंह ने जैसे ही इस शांति संधि से हाथ खींचे, उनके कदम की खूब आलोचना हुई.

ये दो फैसले कुकी समुदाय के लोगों को कतई ना भाए. उन्हें लगा कि राज्य सरकार उन्हें निशाना बनाने की कोशिश कर रही है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद कुकी समुदाय में आंदोलन शुरू हो गया.

कैलेंडर में तारीख 28 अप्रैल 2023 थी. इस दिन बीरेन सिंह चुराचांदपुर पहुंचे एक ओपन जिम का उद्घाटन करने. चूंकि चुराचांदपुर कुकी बहुल है तो वहाँ मौजूद लोगों ने बीरेन सिंह के विरोध में ओपन जिम में आग लगा दी. पुलिस ने इलाके में धारा 144 लगाई. पाँच दिनों के लिए इंटरनेट बंद कर दिया गया.

फिर आया 3 मई 2023 का दिन. आदिवासी छात्रों के संगठन All Tribal Student Union Manipur (आतसुम) के छात्र इकट्ठा हुए. उन्होंने सरकार और कोर्ट के फैसले का विरोध करने के लिए रैली निकाली. इसे नाम दिया गया ट्राइबल सॉलिडैरिटी मार्च. इसके जवाब में मैतेई संगठनों ने भी उसी दिन जवाबी मार्च निकाला. कई जगहों पर छोटे-मोटे गतिरोध हुए.

घटना ने हिंसक मोड़ लिया जब चुराचांदपुर में मौजूद एंग्लो-कुकी वॉर मेमोरियल गेट पर आग लगा दी गई. गेट साल 1917 -1919 के बीच कुकी जनजातियों और ब्रिटिश सेना के बीच हुए युद्ध का मेमोरियल गेट था. इसके बाद कुकी समुदायों ने अपने इलाकों में मौजूद मैतेई घरों में आग लगाई. यही काम मैतेई लोगों ने अपने इलाकों में किया, कुकी लोगों के साथ. और इसके बाद मणिपुर में एक हिंसक रक्तपात शुरू हो गया.

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