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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज लोकुर ने कहा, जबरन धर्मांतरण पर यूपी का क़ानून लोगों की आजादी के खिलाफ़ है

UAPA और दिल्ली दंगों पर जस्टिस लोकुर ने क्या कहा?

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सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड रहे मदन बी. लोकुर ने पीएम केयर्स फंड में अपारदर्शिता के आरोप लगाए हैं.
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सिद्धांत मोहन
2 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 2 दिसंबर 2020, 10:33 AM IST)
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जस्टिस मदन लोकुर. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज. उन्होंने यूपी सरकार के नए जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून की जमकर आलोचना की है. जस्टिस लोकुर ने कहा कि ये क़ानून लोगों के अपनी पसंद से चुनने के अधिकार और उनके आत्मसम्मान को अंतिम वरीयता पर रखता है. जस्टिस लोकुर फ़िलहाल फ़िजी के सुप्रीम कोर्ट में जज की भूमिका अदा कर रहे हैं. उन्होंने सातवें सुनील स्मृति व्याख्यान के समय ये बातें कहीं. उन्होंने कहा,
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जस्टिस लोकुर ने आगे कहा,
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जस्टिस लोकुर ने दूसरे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा,
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जस्टिस लोकुर ने पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन का उदाहरण दिया. हाल ही में कप्पन को हाथरस जाते वक़्त यूपी पुलिस द्वारा CrPC 107/151 के तहत हिरासत में ले लिया गया था. लोकुर ने कहा,
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जस्टिस लोकुर ने भीमा कोरेगांव केस में अरेस्ट किए गए फ़ादर स्टैन स्वामी और कवि वरवरा राव की हालत का भी ज़िक्र किया. उमर ख़ालिद के खिलाफ़ दिल्ली पुलिस द्वारा जमा की गई 17 हज़ार पेज की चार्जशीट का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि जब आरोपी को चार्जशीट की कॉपी देने की बात थी, तो वो कहने लगे कि हार्डकॉपी और सॉफ़्टकॉपी में कोई अंतर नहीं है. पूरा वक्तव्य यहां सुना जा सकता है :
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