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ऑटो-रिक्शे में हुई अंतरधार्मिक शादी तो हाई कोर्ट ने पूछा- "धर्म परिवर्तन का रैकेट तो नहीं चल रहा?"

Punjab and Haryana High Court ने Punjab Police को निर्देश दिए हैं कि फर्जी शादियों की आड़ में 'धर्म परिवर्तन का कोई रैकेट' तो नहीं चल रहा, इसकी जांच की जाए.

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17 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 04:13 PM IST)
Punjab and Haryana High Court
मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को है. (प्रतीकात्मक तस्वीर - इंडिया टुडे)
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) में अपनी सुरक्षा की मांग करने वाले अंतर-धार्मिक जोड़े को झटका लगा है. कोर्ट ने जोड़े की याचिका को ठुकराते हुए, उनके ख़िलाफ़ ही जांच करने के निर्देश दिए हैं. पुलिस से ये पता लगाने के लिए कहा गया है कि कहीं इस तरह की ‘फर्जी शादियों’ की आड़ में 'धर्म परिवर्तन का कोई रैकेट' तो नहीं चल रहा. कारण ये कि बेंच को पता चला कि जोड़े की शादी एक ऑटो-रिक्शा में हुई, न कि किसी मस्जिद में. जबकि जोड़े ने बताया था कि शादी मस्जिद में हुई थी.

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने कहा,

"ये ना केवल कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश है, बल्कि कोर्ट के सामने झूठी गवाही देने का गंभीर अपराध है. शादी की आड़ में कोर्ट को मूर्ख बनाने की कोशिश की गई है."

क्या है मामला?

दरअसल, एक जोड़े ने भागकर शादी की है. दोनों ने कोर्ट के सामने लड़की के परिवार से सुरक्षा मांगीं है. इसी मामले की सुनवाई चल रही थी. याचिकाकर्ताओं के वकील हरजिंदर सिंह की तरफ़ से बताया गया कि जुलाई में पंजाब के नयागांव में मुस्लिम रीति-रिवाजों से दोनों की शादी हुई थी. ये शादी लड़की के परिवार वालों के मर्जी के ख़िलाफ़ हुई थी, इसीलिए अब उन्हें जान का खतरा है. जोड़े ने अपने वकील के ज़रिए कोर्ट के सामने शादी के प्रमाण पत्र (marriage certificate) और फोटोज भी पेश किए.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक़, पंजाब सरकार के लिए डिप्टी एडवोकेट जनरल राजीव वर्मा ने दलील दी. राजीव ने बताया कि संबंधित पुलिस स्टेशन के पुलिस अफ़सरों ने याचिकाकर्ताओं से संपर्क करने की कोशिश की. साथ ही, लड़की के रिश्तेदारों से खतरे के बारे में पूछताछ करने की भी कोशिश की गई. लेकिन वो दिए गए पते पर थे ही नहीं.

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कोर्ट ने क़ाज़ी द्वारा जारी मैरिज सर्टिफिकेट और फ़ोटोज को भी अच्छे से देखा. इसके बाद कोर्ट ने कहा,

"तस्वीरों को देखने से ये स्पष्ट हो जाता है कि ये शादी किसी मस्जिद में नहीं हुई. साथ ही, सर्टिफिकेट में बताए गए गवाहों में से कोई भी (वकील, गवाह या अहले जमात) मौजूद नहीं था."

आख़िर में याचिकाकर्ताओं ने भी मान लिया कि शादी का कार्यक्रम ऑटो-रिक्शे में हुआ था. इस पर कोर्ट ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं. साथ ही, इस तरह की फर्जी शादी की आड़ में धर्म परिवर्तन के नाम पर कोई रैकेट तो नहीं चल रहा, इसकी भी विस्तार से जांच करने के लिए कहा है. मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी. कोर्ट ने SSP को ये सुनिश्चित करने के लिए कहा कि याचिकाकर्ताओं और लड़की के रिश्तेदारों को अगली तारीख़ पर कोर्ट में पेश किया जाए.

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