*आगे गालियां हैं. विवेक से काम लें.*समस्या! समस्या! समस्या! होशियार! होशियार! होशियार! दिक्कत ये है कि फेसबुक नेबहुत विकट बलंडर कर दिया था. भारी वाला. आदमी है फेसबुक पे. कुछ भी लिख देता है.अंट-संट. कितने रोकियेगा? लिख दिया मादर**. अब लिख दिया तो लिख दिया. क्या कियाजाए. लेकिन ये क्या कि फ़ेसबुक के ट्रांसलेट वाले ऑप्शन का इस्तेमाल किया जा रहा थातो वो मादर** को मुस्लिम में ट्रांसलेट कर के दे रहा था. यही तो था बलंडर. फेसबुकका. न मालूम कहां से, कौन सा अलगोरिदम लेके आये जुकरबर्ग बाबू. न मालूम कौनप्रोग्रामर था. न मालूम कौन धुन में था. किस देस का था. किस परदेस का था? किस पिनकमें ऐसा मामला बना दिया कि आदमी लिख रहा है मादर** और ट्रांसलेट होकर आ रहा थामुस्लिम. और जब ढूंढा गया तो मालूम चला कि ये एक ही नहीं, सभी रिज़ल्ट्स में हो रहाहै. माने ये बग है. या जो भी कह लें. लेकिन जो भी है निंदनीय है. नमूने और भी हैं:कुछ और भी पढ़ने की ताब बची हो तो ये भी पढ़ लें. गालियां यहां भी संलग्न हैं. डियरशाहरुख़, हमें तुमसे कोई द्वेष नहीं है. न इमरान खान से है. लेकिन यहां ये फ़ोटोचस्पा करनी पड़ी. इसके लिए माफ़ करना. करना पड़ता है. हमें मालूम है तुम बहुत प्यारेहो. बाहें फैलाते हो तो मैं जलता हूं तुमसे. तुमसे ही सीखा था - "जियो, खुश रहो,मुस्कुराओ. क्या पता, कल हो न हो." हालांकि अब ये सही हो गया है. बवाल खूब हुआ. खूबकम्प्लेंट भेजी गयीं फेसबुक को. आनन फानन में ऐक्शन लिया गया. सब सही किया गया. अबमादर** लिखो तो Idiot दिखाता है. चलो गनीमत है. जो कुछ भी हो, जो दिक्कत होनी थी वोहो गयी. ये एक सिंपल ट्रांसलेशन में इतनी भारी गलती कैसे हो सकती है? और इसकेअलावा, इस ट्रांसलेशन से मुसलामानों को जो झेलना पड़ा है, उसका भुगतान कौन करेगा?इसका तो कोई मुआवजा भी नहीं कुछ कर सकेगा. आज जब एक बड़ा हिस्सा इस्लामोफोबिया सेजूझ रहा है तो माहौल और खराब करने को बस इसी की दरकार थी. शेम ऑन यू, फेसबुक!