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Farmers Protest: शुभकरण के परिवार को 1 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि, छोटी बहन को नौकरी, पंजाब सरकार की घोषणा

किसान नेता Rakesh Tikait ने 26 फरवरी को दिल्ली की ओर जाने वाले राजमार्गों पर ट्रैक्टर मार्च और 14 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक दिवसीय कार्यक्रम की घोषणा की है.

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Shubhkaran Singh
मामले में FIR दर्ज करने की मांग की जा रही है. (फाइल फोटो: PTI)
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23 फ़रवरी 2024 (Updated: 23 फ़रवरी 2024, 11:59 IST)
Updated: 23 फ़रवरी 2024 11:59 IST
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दिल्ली चलो मार्च (Delhi Chalo March) को लेकर किसानों का दावा है कि 21 फरवरी को खनौरी बॉर्डर पर एक किसान की मौत हुई है. मृतक किसान का नाम शुभकरण सिंह बताया गया है. शुभकरण की मौत की खबर के बाद केंद्र सरकार और किसान संगठनों (Farmers Protest) के बीच चल रही बातचीत का दौर थम गया है. अब 2020-21 के किसान आंदोलन में हिस्सा लेने वाले संगठन ने भी अपना विरोध जताया है. शुभकरण को शहीद घोषित करने और उनके परिवार के लिए आर्थिक सहायता की मांग की जा रही है.

इस बीच पंजाब सरकार ने शुभकरण के परिवार को 1 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि देने की घोषणा की है. शुभकरण की छोटी बहन को पंजाब सरकार की ओर से नौकरी दी जाएगी. 1 मार्च को पंजाब विधानसभा में पंजाब के तीनों किसानों के लिए श्रद्धांजलि रखी जाएगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है.

इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ीं कंचन वासदेव और राखी जग्गा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 23 फरवरी की सुबह तक शुभकरण का शव अब भी अस्पताल में ही था. किसान संगठन पुलिस को पोस्टमार्टम नहीं करने दे रहे थे. किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंढेर ने सिंह को शहीद घोषित करने की मांग की है. साथ ही इसे ‘हत्या’ बताते हुए इसके विरोध के लिए लोगों से अपने घरों, दुकानों और वाहनों पर काले झंडे लगाने की अपील की है. इससे पहले किसानों ने दावा किया था कि शुभकरण की मौत हरियाणा पुलिस के साथ हुई झड़प के कारण हुई.

दिल्ली बॉर्डर पर 2020-21 के कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन का नेतृत्व करने वाली संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) भी सक्रिय हो गई है. SKM ने कहा है कि हरियाणा सरकार के अधिकारियों और राज्य के गृह मंत्री के खिलाफ हत्या के आरोप में FIR दर्ज की जाए. साथ ही हरियाणा सरकार से सिंह के परिवार के लिए 1 करोड़ रुपए के मुआवजे और क्षतिग्रस्त हुए ट्रैक्टरों की लागत का भुगतान करने की मांग की गई है.

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इससे पहले 21 फरवरी को SKM ने एक बैठक बुलाई थी. जिसमें पंजाब के 37 सहित देश भर के 100 से अधिक किसान नेताओं ने हिस्सा लिया. इस बैठक में 23 फरवरी को देशव्यापी काला दिवस मनाने की घोषणा की गई. 

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने 26 फरवरी को दिल्ली की ओर जाने वाले राजमार्गों पर ट्रैक्टर मार्च और 14 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक दिवसीय कार्यक्रम की घोषणा की है.

इस बीच पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने भी इस घटना की निंदा की है. उन्होंने 23 फरवरी को काम नहीं करने का फैसला किया है.

BKU (सिद्धूपुर) के प्रवक्ता गुरदीप सिंह चहल के हवाले से एक्सप्रेस ने लिखा है कि अगर सिद्धू मूसेवाला को न्याय मिले बिना उसके शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया होता तो उसके माता-पिता को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ती. चहल ने कहा कि उन्होंने सिद्धू मूसेवाला की हत्या से सीखा है और वो अपनी मांगें पूरी कराएंगें.

इस बीच हरियाणा के अंबाला पुलिस ने एक बयान जारी किया है. कहा है कि किसान शंभू बॉर्डर पर लगे बैरिकेड्स को तोड़ने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया है कि इस आंदोलन के दौरान लगभग 30 पुलिसवालों को चोट आई है. वहीं 1 पुलिस कर्मचारी का ब्रेन हैमरेज और 2 पुलिसवालों की मौत हुई है.

बयान में कहा गया है कि किसान नेताओं को NSA के तहत नजरबंद करने की कार्यवाही को अमल में लाया जा रहा है.

हालांकि, कुछ घंटों के बाद हरियाणा पुलिस ने अपने इस फैसले को वापस ले लिया. और कहा कि किसानों के खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी.

पंजाब पुलिस ने भी X (ट्विटर) पर एक बयान जारी कर बताया है कि 22 फरवरी को खनौरी बॉर्डर पर एक DSP की मौत हो गई है.

इससे पहले, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक वीडियो जारी कर किसानों का समर्थन किया था. कहा था कि शुभकरण के मौत की जांच की जाएगी और जिम्मेवार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: नौजवान किसान की मौत के पीछे का सच, किसान आंदोलन में आगे क्या होगा?

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