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बिलकिस बानो केस के दोषियों की रिहाई पर पति याकूब ने कहा- 'डर बढ़ गया है, सुरक्षा नहीं मिली'

याकूब ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद भी घर और सरकारी नौकरी नहीं मिली है.

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16 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 16 अगस्त 2022, 10:08 PM IST)
Bilkis Bano husband Yakub Rasool Patel
(बायीं ओर) बिलकिस बानो के पति याकूब रसूल पटेल (फोटो: आजतक)
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पहले भी डर था, लेकिन अब 11 दोषियों की रिहाई के बाद डर और बढ़ गया है. हम अपनी जगह बदलते रहते हैं और सार्वजनिक जीवन से छिपते रहते हैं. हमारे पास कोई सुरक्षा नहीं है.

ये बयान दिया है बिलकिस बानो (Bilkis Bano) के पति याकूब रसूल पटेल (Yakub Rasool Patel) ने. उनका ये बयान तब आया है, जब 15 अगस्त को गुजरात दंगों (Gujarat Riots) के दौरान बिलकिस बानो के गैंगरेप और उनके परिवार के 7 लोगों की हत्या मामले के 11 दोषियों को रिहा कर दिया गया. इन दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुजरात सरकार (Gujarat Government) ने रिमिशन पॉलिसी (माफी नीति) के तहत इन कैदियों की रिहाई की मंजूरी दी. इस फैसले पर बिलकिस बानो के पति ने दुःख जताते हुए कहा है कि उन्हें अब सरकार पर कोई भरोसा नहीं रह गया है.

दरअसल, इस मामले के एक दोषी ने 15 साल से अधिक की सजा काटने के बाद रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी. कोर्ट ने गुजरात सरकार को इस याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया था.

ये भी पढ़ें- 2002 गुजरात दंगा : बिलकिस बानो का सामूहिक बलात्कार करने वाले 11 लोगों को रिहा किया गया

'डर और बढ़ गया है'

इन 11 दोषियों की रिहाई पर इंडिया टुडे से जु़ड़े सौरभ वक्तानिया ने बिलकिस बानो के पति याकूब रसूल से बात की. याकूब रसूल पटेल ने कहा,

हम शांतिपूर्ण जीवन जी रहे थे. लेकिन अब जब वे सभी (दोषी) जेल से रिहा हो गए हैं, तो हम बेहद दुःखी और परेशान हैं. पहले भी डर था, लेकिन हम कोशिश कर रहे थे कि एक सामान्य जीवन जिएं. हालांकि, अब डर बहुत बढ़ गया है. यहां का माहौल भी अच्छा नहीं है.

उन्होंने आगे कहा,

उस घटना में हमने सब कुछ खो दिया. हमारी 3 साल की बेटी की हत्या कर दी गई. परिवार के ज्यादातर सदस्य मारे गए. बिलकिस को ऐसी घटना का सामना करना पड़ा. हम अभी भी अपने परिवार के उन सदस्यों के लिए प्रार्थना करते हैं, जो नहीं रहे.

'कोई सुरक्षा नहीं दी गई'

याकूब ने बताया कि दोषियों को रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा,

पूरे फैसले के बारे में हमें बिल्कुल भी सूचित नहीं किया गया था. हमें मीडिया के जरिए इसके बारे में पता चला. हम इतने डर में जी रहे हैं, हमारे पास कोई सुरक्षा भी नहीं है. हम अपना ठिकाना बदलते रहते हैं और छिपी जिंदगी जीते हैं. हमने सरकार से सुरक्षा की गुहार लगाई थी, लेकिन वो अब तक नहीं दी गई है.

'अभी भी घर और नौकरी नहीं मिली'

वहीं मुआवजे के बारे में याकूब ने बताया, 

हमें अभी भी घर और नौकरी नहीं मिली है. हमारे पास अभी के लिए कोई कानूनी टीम नहीं है और भविष्य के कानूनी विकल्प के बारे में नहीं पता है. 

इससे पहले साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को आदेश दिया था कि बानो को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. साथ ही कोर्ट ने गुजरात सरकार को ये भी आदेश दिया था कि बिलकिस बानो को सरकारी नौकरी और नियमों के मुताबिक घर मुहैया कराया जाए. याकूब के मुताबिक कई बार अपील करने के बाद भी कुछ नहीं मिला है.

वीडियो- सुप्रीम कोर्ट ने दिया बिलकिस बानो को 50 लाख और सरकारी नौकरी देने का आदेश

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