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क्या कोलकाता में कोरोना से मरे लोगों के शव को घसीटकर श्मशान पहुंचाया गया?

सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हैं. इनमें दिख रहा है कि बुरी तरह से सड़ चुके शवों को एक वैन में रखा जा रहा है. रस्सी से खींचते हुए शवों को एक कमरे से बाहर निकाला जा रहा है. ये सभी वीडियो कोलकाता के हैं. 10 जून की दोपहर से ये सोशल मीडिया पर तैरने लगे. वीडियो में दिखने वाली वैन कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरशन (KMC) की है, जिस कमरे से इन्हें बाहर निकाला जा रहा है, वो गारिया श्मशान घाट का कमरा है. इस वीडियो के वायरल होते ही ये कहा जाने लगा कि ये शव कोरोना वायरस की वजह से दम तोड़ चुके लोगों के हैं.

हालांकि इस दावे को कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल के हेल्थ डिपार्टमेंट ने खारिज किया है. पुलिस ने कहा है कि शव कोरोना मरीज़ों के थे ही नहीं.

Kmc Disposal Of Bodies 1
इस तरह के ट्वीट किए जा रहे थे.

क्या है पूरा मामला?

‘इंडिया टुडे’ से जुड़ी मनोज्ञा लोइवाल ने मामले की जानकारी हमें दी. बताया कि गारिया श्मशान घाट में 14 लोगों के शव को 10 जून के दिन लाया गया था. अंतिम संस्कार करने, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया. लोगों ने शवों का अंतिम संस्कार उस इलाके में करने से मना कर दिया. हंगामा हुआ, इसके बाद KMC के लोगों ने मजबूरन दोबारा उन शवों को वैन में डाला. हालांकि, बाद में पुलिस की मदद ने उन सभी शवों का अंतिम संस्कार उसी श्मशान घाट में किया गया.

शव आखिर थे किसके?

जब शवों के वीडियो वायरल हुए, तो NRS मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल साइबाल कुमार मुखर्जी ने कोलोकाता पुलिस कमिश्नर अनुज शर्मा को लेटर लिखा. बताया कि अलग-अलग पुलिस थानों से जो लिस्ट मिली थी, उसके मुताबिक अस्पताल के मुर्दाघर से 14 अज्ञात शवों को KMC के हवाले किया गया. नोट में मुखर्जी ने लिखा,

‘कोई भी शव कोरोना मरीज़ का नहीं था. वायरल हो रहे वीडियो का जो सब्जेक्ट है, वो फेक है. आपको इस मामले में ज़रूरी कदम उठाने चाहिए.’

इसके बाद कोलकाता पुलिस ने भी ट्वीट किया. लिखा,

‘पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी दी है कि शव कोरोना मरीज़ों के नहीं थे, लेकिन अज्ञात लोगों के शव थे, ऐसे शव थे जिन्हें लेने कोई नहीं आया था. ये सब अस्पताल से मुर्दाघर से लाए गए थे, अंतिम संस्कार के लिए, जिसने भी फेक न्यूज़ फैलाई है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.’

इसके पहले भी कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरशन ने एक सर्कुलर जारी किया था, 29 मई को. बताया था कि अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार गारिया श्मशान घाट में ही किया जाएगा, क्योंकि धापा श्मशान का इस्तेमाल इस वक्त कोविड-19 की वजह से दम तोड़ने वाले हिंदू लोगों के अंतिम संस्कार के लिए हो रहा है.

वहीं सिटी मेयर फिरहाद हाकिम का कहना है कि वो गारिया की घटना पर ध्यान देंगे. ये भी कहा कि कोरोना के मरीज़ों के शव को तो अलग से धापा में जलाया जा रहा है. चूंकि वायरल वीडियो में जो शव दिख रहे हैं, वो बुरी तरह सड़े हुए नज़र आ रहे हैं, इसलिए जब हाकिम से सवाल किया गया कि शव कितने पुराने होंगे, तो उन्होंने कहा,

‘अज्ञात शव 45 दिन से ज्यादा पुराने हैं. हम अभी इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते. मुझे पता लगाने दीजिए. मैं जानकारी दूंगा.’

गवर्नर ने भी सरकार से जवाब मांगा

भले ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ये कह रहा है कि शव कोरोना मरीज़ों के नहीं थे, लेकिन सवाल शवों के साथ हुए ट्रीटमेंट पर भी खड़े हो रहे हैं. इसी पर पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ ने भी ट्वीट करके सवाल किया. लिखा,

‘मुद्दा ये नहीं है कि शव कोविड-19 के मरीज़ों के थे या नहीं. ये तो जांच का विषय है. मुद्दा ये है कि किस तरह से एक इंसान के शव को खींचा जाता है. जानवरों से भी बुरा बर्ताव किया जाता है. जो भी इसमें शामिल है, अपने आप से पूछो और इमेजिन करो कि वो शव आपके होते.’

इस ट्वीट के पहले भी उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार से सवाल किया था. होम सेक्रेटरी को टैग करके कहा था,

‘शवों के साथ बहुत ही असंवेदनशील बर्ताव किया गया. उनके निपटारे का तरीका बहुत हृदयहीन था. वीडियो शेयर नहीं कर रहा हूं, क्योंकि बहुत संवेदनशील है हमारी सोसायटी में, शवों को सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है. परंपरा के अनुसार अनुष्ठान किए जाते हैं.’

इसके अलावा भी धनखड़ ने और भी कई सारे ट्वीट किए. शवों को जिस तरीके से खींचकर गाड़ी में रखा गया, उस पर सरकार से जवाब मांगा और जांच करने की बात कही.

देखिये भारत में कोरोना कहां-कहां और कितना फैल गया है.


वीडियो देखें: बंगाल के म्युनिसिपल गर्ल्स हाई स्कूल में छपी तस्वीर ने रेसिज्म पर ज़रूरी सवाल उठाए

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