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UP: नाम किसी का, नौकरी किसी और की; एक और 'अनामिका शुक्ला' गिरफ्तार

साल 2020. उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में एक बड़ा भ्रष्टाचार देखने को मिला था. अनामिका शुक्ला के नाम से यूपी के 5 जिलों में कई महिलाएं साइंस टीचर की पूर्णकालिक नौकरी कर रही थीं. वो भी एक साथ. मामला सामने आया. कई ‘अनामिका शुक्ला’ गिरफ्तार हुईं. ट्विस्ट पर ट्विस्ट के बाद पुलिस ने अब एक ‘अनामिका शुक्ला’ को अरेस्ट किया है. इसका असली नाम कुछ और है, लेकिन बछरावां के विद्यालय में अनामिका बनकर नौकरी करती थी. इस पर पुलिस ने 15 हज़ार का इनाम भी घोषित कर रखा था. 

नर्स की नौकरी कर रही थी

इस महिला का असली नाम मंजेश कुमारी उर्फ अंजलि है. मंजेश कन्नौज जनपद के रामपुर बेहटा थाना सौरिख की रहने वाली है. ख़बरों के मुताबिक़, अपनी फ़रारी के दरम्यान मंजेश उर्फ़ अंजलि लखनऊ के ठाकुरगंज के निजी अस्पताल में नर्स की नौकरी कर रही थी. नौकरी हासिल करने के लिए उसने अपनी डिग्री वग़ैरह लगायी थी. और गिरफ़्तारी हुई सीधे अस्पताल से. 

8 मार्च 2019 को मंजेश ने खुद को अनामिका शुक्ला बताकर बछरावां के विद्यालय में फुल टाइम टीचर की नौकरी हासिल कर ली थी. 7 मार्च 2020 को मंजेश होली की छुट्टी पर चली गई. छुट्टी से उसे 14 मार्च को लौटना था, लेकिन उसने फिर छुट्टी ले ली.

इसी बीच कोरोना की पहली लहर आ गई, और लाॅकडाउन लगा दिया गया. मानव संपदा पोर्टल पर कर्मचारियों व अधिकारियों का डेटा फीड किया जाने लगा. पूरे डेटा का डिजीटलीकरण हुआ. और यहीं पर अनामिका शुक्ला वाला फ़र्ज़ीवाड़ा पकड़ में आया. बाद में दीक्षा ऐप पर जब विद्यालयवार डेटा फ़ीड किया गया, तो सारी तहें खुल गयीं. बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर 20 जून 2020 को फर्जी अनामिका शुक्ला के खिलाफ बछरावां थाने में केस दर्ज कराया गया. और तब से तलाश जारी थी. छानबीन में पता चला कि अनामिका शुक्ला के दस्तावेज़ों के आधार पर प्रदेश के 8 जिलों के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में साइंस टीचर की नौकरी की जा रही थी.

सूत्रों के हवाले से आ रही ख़बरों की मानें तो मंजेश ने ही अनामिका शुक्ला के नाम से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की रायबरेली ब्रांच में खाता खुलवाया था. खाते के साथ आधार कार्ड लिंक नहीं था. इसी वजह से उसे हर बार रायबरेली आकर सैलरी निकालनी पड़ती थी. विभाग के बाबू ने कई बार मंजेश को आधार कार्ड लिंक कराने को कहा, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. उसका फर्जीवाड़ा एक साल तक पकड़ में नहीं आया, और वह तनख्वाह लेती रही.

असली अनामिका ने क्या बताया था?

जब मामला मीडिया में आया तो असली अनामिका शुक्ला सामने आयीं. बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. इन्द्रजीत प्रजापति से मिलीं और अपने दस्तावेज पेश किए. और बताया कि वो तो अब तक बेरोज़गार हैं. अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया था कि उनकी मेरिट हाई थी. उन्होंने पांच जिलों- सुल्तानपुर, जौनपुर, बस्ती, मिर्जापुर, लखनऊ में वर्ष 2017 में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में विज्ञान शिक्षिका के लिए आवेदन किया था. काउंसिलिंग का समय आया तो वह उसमें शामिल नहीं हो सकीं. उस समय उन्होंने ऑपरेशन के जरिए बेटी को जन्म दिया था, और साल 2019 में बेटे का जन्म हुआ.

असली अनामिका शुक्ला ने उस समय बताया था कि दो छोटे बच्चे होने के कारण वह नौकरी करने में असमर्थ थीं. इसलिए अभी भी बेरोज़गार हैं. फिर मामले की सघन जांच हुई. एक सुप्रिया जाटव की गिरफ़्तारी हुई, जो अनामिका शुक्ला के नाम पर नौकरी कर रही थीं. और अब जाकर लखनऊ के एक निजी अस्पताल से हुई है मंजेश की गिरफ़्तारी.


वीडियो : असली अनामिका शुक्ला और उनके पति की ये बातें तो कुछ और ही कह रही हैं!

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