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दिल्ली दंगे : दिल्ली सरकार ने जिन वकीलों की नियुक्ति पर सवाल उठाए, LG ने उनकी ही नियुक्ति कर दी

दिल्ली दंगे. नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर हुए थे. और इन दंगों से जुड़े 85 केसों की सुनवाई की जानी है. सुनवाई के लिए दिल्ली पुलिस ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को कहा कि छह वक़ील चाहिए. नाम भेजे. उपराज्यपाल  यानी LG ने दिल्ली सरकार को फ़ाइल भेजी.

दिल्ली सरकार ने कहा कि ये नाम नहीं चलेंगे. फ़ाइल वापस LG को.

LG इज़ लाइक, “यही नाम चलेंगे. मैं मुहर लगा दे रहा हूं.”

दिल्ली सरकार इज़ लाइक, “हैं!”

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली दंगों की कोर्ट में सुनवाई होनी है. इसके लिए दिल्ली पुलिस ने ख़त लिखा. कहा कि 85 केस हैं. सुनवाई के लिए छह सीनियर वकीलों की ज़रूरत है. दिल्ली पुलिस ने नाम भी सुझाए.

ये नाम थे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी, और इनके अलावा एसवी राजू, चेतन शर्मा, अमित महाजन और रजत नायर. दिल्ली सरकार की मंशा थी कि ये वक़ील सेशंस कोर्ट के अलावा दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में सरकार की तरफ़ से अपीयर हों. 

दिल्ली सरकार ने इन नामों पर नाराज़गी ज़ाहिर की. इसके बाद 28 जुलाई को कैबिनेट मीटिंग में ये मुद्दा उठा. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की ख़बर के मुताबिक़, कैबिनेट ने कहा-

“दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पुलिस द्वारा की जा रही दंगों की जांच एकतरफ़ा और अपारदर्शी है. न्यायपालिका ने भी कई मौक़ों पर दिल्ली पुलिस की जांच और कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. ऐसे में जजों के सामने सारे तथ्य रखे जा सकें, इसके लिए सरकारी वकीलों का दिल्ली पुलिस की ओर से स्वतंत्र होना बहुत ज़रूरी है.”

लिहाज़ा, दिल्ली पुलिस की ओर से सुझाए गए नाम ख़ारिज कर दिए गए. आम आदमी पार्टी के ट्विटर हैंडल के मुताबिक़, दिल्ली सरकार ने गृह विभाग को आदेश भी दिए कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सबसे अच्छा वक़ील चुनें. 

लेकिन ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की ख़बर की मानें, तो कैबिनेट की नकार और दूसरे वकीलों की नियुक्ति की सिफ़ारिश की सूचना अनिल बैजल के पास गयी, तो LG बैजल ने संविधान के अनुच्छेद 239AA (4) का उपयोग किया.  यानी संविधान का वो अनुच्छेद, जिसके तहत दिल्ली सरकार को उपराज्यपाल का फ़ैसला मानना ही होगा. और LG ने दिल्ली पुलिस द्वारा ही सुझाए छह वकीलों की नियुक्ति का प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास भेज दिया. 

क्यों होती है ऐसी कन्फ़्यूज़न?

‘दी प्रिंट’ की ख़बर का हवाला दे रहे हैं. दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है, जो फ़िलहाल अमित शाह के अधीन है. और दिल्ली सरकार के सरकारी वक़ील सभी क्रिमिनल मामलों में हाईकोर्ट में अपीयर होते हैं. 

लेकिन दंगों के केसों में दिल्ली पुलिस ने पहले ही तुषार मेहता और अमन लेखी, जो क़ानूनी अधिकारी हैं, उन्हें चुन लिया. LG यानी उपराज्यपाल, जो केंद्र की तरफ़ से दिल्ली सरकार के काम-धाम पर नज़र रखते हैं, उनको नाम भेज दिया. साथ ही शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए तमाम क़ानूनी अधिकारियों की बतौर सरकारी वक़ील नियुक्ति कर दी.


वीडियो : दिल्ली के LG अनिल बैजल ने जारी किया आदेश, पुलिस कमिश्नर को मिला अधिकार

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