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दिल्ली दंगे: 17 महीने बाद पहचाने गए जख्मी युवकों से जबरन राष्ट्रगान गवाने के आरोपी पुलिसवाले

पिछले साल फरवरी में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों के बाद एक वीडियो वायरल हुआ था. इसमें पुलिसवाले कुछ युवकों को पीटते दिख रहे थे. उनसे जबरन राष्ट्रगान गाने को कहते भी सुनाई दे रहे थे. बाद में एक युवक फैज़ान की मौत हो गई थी. अब दिल्ली पुलिस (Delhi police) ने तीन पुलिसवालों की पहचान का दावा किया है. पुलिस अब इनका लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है.

वायरल वीडियो में दिखे थे पुलिसवाले

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए इन दंगों के कई दिल दहलाने वाले वीडियो वायरल हुए थे. इन्हीं में से एक वीडियो ऐसा था जिसे देखकर न्यायपालिका से लेकर पुलिस प्रशासन तक दंग रह गया. इसमें कुछ युवकों को पीट-पीटकर राष्ट्रगान गाने के लिए कहा जा रहा था. पीटने वाले आम लोग नहीं बल्कि पुलिसवाले थे. आरोपी पुलिसवालों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठी. लेकिन पुलिस कहती रही कि उसकी लाख कोशिशों के बाद भी इन पुलिसवालों की पहचान नहीं हो सकी है.

लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी

इंडियन एक्सप्रेस अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, अब 17 महीने बाद दिल्ली पुलिस ने इन पुलिसकर्मियों की पहचान करने में कामयाबी मिली है. इसके लिए क्राइम ब्रांच की स्पेशल इनवेस्टिगेटिव यूनिट (SIT) बनाई गई थी. उसने 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों से पूछताछ की. दंगों के दौरान बाहर से लाकर तैनात किए गए पुलिसवालों के ड्यूटी चार्ट खंगाले. और भी तमाम दस्तावेजों को स्कैन किया. तब जाकर इन आरोपी पुलिसवालों का पता चला. अब पुलिस इनका लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी में है.

एक सीनियर अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि

“लगभग 17 महीनों के बाद पुलिस को इन 3 पुलिसकर्मियों को पहचानने में कामयाबी मिली है. सीनियर अधिकारियों को इसके बारे में सूचना दे दी गई है. उनकी परमीशन मिलने के बाद इनका लाई डिटेक्टर टेस्ट किया जाएगा.”

पहचान में इतना वक्त क्यों लगा?

आरोपी पुलिसवाले थे, फिर भी दिल्ली पुलिस को उनकी पहचान में इतना वक्त क्यों लगा? दरअसल इसकी मेन वजह घटनास्थल की लोकेशन बताई जा रही है. जिस 66 फुटा रोड पर ये घटना हुई थी, वो तीन-चार पुलिस थानों से घिरा हुआ है. इन थानों के सभी पुलिसवाले वहां दंगे रोकने के लिए तैनात थे. इससे पहचान में मुश्किल आ रही थी. एक पुलिस अधिकारी ने आरोपियों तक पहुंचने के तरीके के बारे में इंडियन एक्सप्रेस को बताया. कहा कि

“आरोपियों की पहचान के लिए हमने आसपास के वीडियो फुटेज खंगाले. इनमें हमें एक पुलिसवाला आंसू गैस के गोले दागने वाले हथियार के साथ नजर आया. जब भी कोई फोर्स इस तरह के हथियार के साथ बाहर जाती है तो जिस पुलिसवाले को ये इश्यू किया जाता है, उसकी यूनिट के नाम से एंट्री की जाती है. जांच अधिकारी इस एंट्री के जरिए उस यूनिट तक पहुंचे, जिसे ये इश्यू किया गया था. एक पुलिसवाले को जांच के लिए बुलाया गया. उसके बाद 2 और पुलिसवालों को पूछताछ के लिए दरियागंज एसआईटी के ऑफिस लाया गया.”

जो फैजान नाम का युवक वायरल वीडियो में दिखा था, उसकी मौत ज्योति नगर पुलिस स्टेशन से घर आने के कुछ दिन बाद हुई थी. पिटाई के बाद इन युवकों को ज्योति नगर थाने में बंद कर दिया गया था. फैजान के परिजनों ने पुलिस पर दो दिन हिरासत में रखकर पिटाई का आरोप लगाया था. हाई कोर्ट ने जब पुलिसवालों की पहचान के बारे में सवाल किया था तो दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया था कि 24 फरवरी से 4 मार्च 2020 के बीच ज्योति नगर पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी कैमरे खराब थे, इसलिए आरोपी पुलिसवालों की पहचान नहीं हो पा रही है.


वीडियो – दिल्ली दंगे में जांच कर रहे संजीव कुमार को पहले प्रमोशन करके ACP बनाया और अब SHO

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