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यूपी के एक और अस्पताल में 32 बच्चों की मौत, डॉक्टरों को कारण का पता नहीं

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यूपी के बदायूं से एक निराश करने वाली खबर आ रही है. यहां के सरकारी अस्पताल में 50 दिनों के भीतर 32 बच्चों की मौत हो चुकी है. और इस मामले में रोचक बात ये है कि डॉक्टरों के साथ-साथ किसी को भी ये पता नहीं लग पा रहा है कि ये मौते क्यों हो रही हैं?

बदायूं के जिला महिला अस्पताल में एक स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट यानी SNCU है. बीते एक महीने से कुछ ज्यादा समय में यहां एक स्थिति देखी जा रही है कि यहां भर्ती करवाए जा रहे बच्चे किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. इस बीमारी का अभी प्राथमिक जांच में कोई पता नहीं चल सका है.

जिला महिला अस्पताल का स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट
जिला महिला अस्पताल का स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (तस्वीर : ANI)

भर्ती करवाए गए बच्चों में अब तक 32 बच्चों की मौत हो चुकी है. वहीं 20 बच्चों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा सकी है. जिला महिला अस्पताल की सुपरीटेंडेंट डॉ. रेखा रानी ने कहा,

“इस महीने ज्यादा बच्चे भर्ती हुए हैं. और उनमें से कई बच्चों के कई सारे अंग फेल हो चुके थे. करीब 20 बच्चों का इलाज करके डिस्चार्ज कर दिया गया है.”

वहीं बदायूं के मुख्य चिकित्सा अधिकारी मनजीत सिंह ने तो मीडिया से बातचीत में साफ़ कहा है कि भर्ती किए गए बच्चों के बचने की संभावना बहुत कम थी.

खबरों की मानें तो बदायूं में मौसम में बदलाव के चलते मौसमी बुखार और डायरिया बहुत तेज़ी से फ़ैल रहा है. कई बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि गांवों और दूरदराज इलाकों में रहने वाले ने पहले स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराया. तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो जिला अस्पताल लेकर आए, लेकिन यहां लाने के पहले ही बच्चों की तबीयत काफी बिगड़ चुकी थी.

बच्चों की ऐसी बेहिसाब मौत पर दो साल पहले यानी 2017 में गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में हुई घटना याद आती है. इस साल जुलाई-अगस्त के ही महीने में ऑक्सीजन की कमी से मेडिकल कॉलेज में कई दर्जन बच्चे मारे गए थे. इस मामले में अब तक कार्यवाही चल रही है. इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा था कि अमूमन अगस्त में बच्चे मरते ही हैं.

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज

क्या बदायूं में भी बच्चों के लिए ऑक्सीजन की कमी थी? शायद नहीं. अस्पताल प्रशासन और अधिकारियों ने तो ऐसा ही कहा है. डॉ. रेखा रानी ने जानकारी दी है,

“अबाध और लगातार ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है. हम दिन के 24 घंटे और हफ्ते के 7 दिन ऑक्सीजन की आपूर्ति करते हैं.”

अब मामला बढ़ गया है तो गहन किस्म की जांच चल रही थी. एक एडवांस माइक्रोबायोलॉजी की टीम इस मामले की जांच कर रही है कि मामले की जड़ में कोई इन्फेक्शन है या कोई और बात.

इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन की खामी सामने आ रही है. सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि अस्पताल के डॉक्टर बच्चों को दूसरे निजी अस्पताल ले जाने के लिए कह रहे हैं. चिकित्सा अधिकारी मनजीत सिंह ने कहा,

“जिन बच्चों की मौत हुई है, वे समय से पहले ही पैदा हो गए थे. ऐसे बच्चों का वजन काफी कम होता है और उन्हें बचा पाना बहुत मुश्किल होता है.”

मनजीत सिंह ने इस संभावना से भी इंकार किया कि बच्चे किसी किस्म के संक्रमण से मर रहे हैं. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा कि SNCU में खासतौर पर सफाई का ध्यान रखा जाता है.

लेकिन यहीं पर SNCU प्रभारी ने एक अलग तस्वीर सामने रखी है. आजतक से ही बातचीत में उन्होंने कहा,

“सभी बच्चों की मौत SNCU में फैले संक्रमण की वजह से हुई है. वार्ड में संक्रमण फैला हुआ है. प्रत्येक तीन साल में माइक्रो बायोलॉजिकल सर्वे और इन्फेक्शन की जांच के लिए ब्लड कल्चर होना आवश्यक है, लेकिन ये सुविधा जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं है.”

साथ ही अस्पताल में कम सुविधाओं की भी खबरें आ रही हैं. सूत्रों ने बताया है कि अस्पताल में एक ही बिस्तर पर एक से ज्यादा बच्चों का इलाज किया जा रहा है, जिस वजह से इन्फेक्शन तेज़ी से फैल रहा है.


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