अमेरिका में न्यूयॉर्क साउथ ज़िले में जिला लेवल के वकील का एक ऑफिस है. अटॉर्नीऑफिस. इस ऑफिस ने 29 नवंबर को एक प्रेस रिलीज जारी की. इस प्रेस रिलीज में दोव्यक्तियों का जिक्र था. एक व्यक्ति का नाम था निखिल गुप्ता उर्फ निक. दूसरेव्यक्ति का नाम नहीं लिया गया था, लेकिन इस रिलीज में उसे CC-1 कहकर पुकारा गया था.रिलीज में कहा गया कि जो कुछ दिनों पहले पन्नू की हत्या की कोशिश की गई थी, वो इसीनिखिल गुप्ता और सीसी-1 ने मिलकर की थी. इस प्रेस रिलीज में कहा गया-"साल 2023 की शुरुआत में भारत सरकार के एक कर्मचारी ने भारत और अन्य जगहों पर निखिलगुप्ता के साथ मिलकर अमेरिकी धरती पर एक वकील और एक राजनैतिक कार्यकर्ता की हत्याकी साजिश रची थी."इस रिलीज में कहीं भी पन्नू का नाम नहीं लिया गया. लेकिन चेन ऑफ ईवेंट को देखते हुएलोगों ने मतलब निकाल लिया की यहां जिस राजनीतिक कार्यकर्ता की बात हो रही है, उसकानाम हुआ गुरपतवंत सिंह पन्नू. इस रिलीज में और भी बहुत सारे आरोप लगाए. आरोपों परकुछ देर बाद आते हैं. पहले मामले की पृष्ठभूमि समझ लेते हैं.एक ब्रिटिश अखबार है- फाइनेंशियल टाइम्स. सबसे पहले इस अखबार ने 22 नवंबर को अपनीएक खबर में दावा किया कि भारत ने अमरीका की धरती पर पन्नू को मारने की कोशिश की. येबात अभी तक साफ नहीं हो सकी है कि भारत ने ऐसा प्रयास किया तो किया कब? किस महीनेऔर किस दिन - इसकी कोई जानकारी नहीं. लेकिन अखबार ने कहा कि हत्या के इस प्रयास कोलेकर अमरीका ने दो बार भारत के सामने अपना विरोध जताया. और भारत से सवाल पूछे. पहला मौका जून 2023 में, पीएम मोदी अमरीका की यात्रा के ठीक बाद. और दूसरी बारसितंबर 2023 में. जब G20 के समय अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन भारत आए, और उन्होंनेपीएम नरेंद्र मोदी से सीधी बातचीत में इसका जिक्र किया.FT को ये जानकारी तब मिली, जब अमरीका के सरकारी वकीलों ने न्यू यॉर्क की जिला अदालतमें एक सीलबंद लिफाफा फ़ाइल किया. इस लिफ़ाफ़े में उस आदमी का नाम भी बंद था, जिसनेपन्नू को मारने की प्लानिंग की थी या मारने की कोशिश की थी. उस समय अमरीका काडिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस उस सीलबंद लिफाफा फ़ाइल को ओपन करने पर विचार कर रहा था. ऐसाकरने से आदमियों का नाम सामने आ जाता.अब 29 नवंबर की शाम जब निखिल और सीसी-1 का नाम सामने आया तो ये कयास लगाए गए, शायदलिफ़ाफ़े को खोल दिया गया है. लिफाफा खुला तो और भी कहानियां सामने आईं. और सामने आगई वो प्रेस रिलीज जिसका हम जिक्र कर रहे थे.इस रिलीज में निखिल गुप्ता का नाम एकाधिक जगहों पर तो लिया गया है. लेकिन कहीं भीदूसरे व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया है. उसे हर जगह सीसी-1 कहकर पुकारा गया है. औरलिखा गया है कि सीसी-1 ने कई जगह खुद को "सीनियर फील्ड ऑफिसर" कहकर परिचय दिया है.उसने कई लोगों को ये भी बताया कि वो पहले CRPF में पोस्टेड था. सीसी-1 के पास"सेक्योरिटी मैनेजमेंट" और "इंटेलीजेंस" की जिम्मेदारी थी. इस सीनियर फील्डऑफिसर,सेक्योरिटी मैनेजमेंट और इंटेलिजेंस जैसे शब्दों और भूमिकाओं पर ध्यान दीजिए.तभी शायद आप मामला डीकोड कर सकेंगे. और ये सब काम करने में सीसी-1 की मदद कौन करताथा? जवाब है निखिल गुप्ता.आगे बढ़ते हैं. तो अमरीका के जस्टिस डिपार्टमेंट के मुताबिक, साल 2023 की शुरुआत मेंसीसी-1 ने पन्नू को ठिकाने लगाने की तैयारी शुरू की. वो तब भारत से ही ऑपरैट कर रहाथा. फील्ड के काम के लिए उसे एक साथी की तलाश थी. मई 2023 के महीने में उसने निखिलगुप्ता से संपर्क साधा. निखिल ये काम करने के लिए तैयार हो गया. निखिल को ये काम करने के लिए एक किलर की तलाश थी. जो पैसे ले, और पन्नू का काम तमामकर दे. निखिल ने अपने सूत्रों का इस्तेमाल किया. उसे एक बंदे का कान्टैक्ट मिला.निखिल ने उस किलर से काम करने के लिए संपर्क किया, किलर तैयार हो गया. लेकिन ठीकइसी मौके पर निखिल से गलती हो गई थी. जो किलर था, वो असल अपराधी नहीं था बल्किअमरीका में नशे से डील करने वाली एजेंसी Drug Enforcement Administration यानी DEAका खुफिया एजेंट था. DEA को आप हमारे देश में काम कर रहे Narcotics Control Bureauके बराबर समझ सकते हैं.इधर निखिल DEA एजेंट को अपना पन्टर समझकर डील करता रहा. पन्नू के मर्डर का दाम तयहो गया था. 1 लाख डॉलर यानी लगभग 83 लाख रुपये. न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर केमुताबिक, जो आरोप दाखिल किया गया था, उसमें नोटों के उस बन्डल की फ़ोटो भी थी, जोएडवांस के तौर पर निखिल ने अपने किलर को पे किया था. कैलेंडर में जून का महीना लगा.ये वो मौका था, जब किसी भी मौके पर पन्नू पर हमला किया जा सकता था. हमले को सफलबनाने के लिए सीसी-1 ने निखिल को कुछ चीजें मुहैया कराईं -1 - पन्नू का पता2 - पन्नू का फोन नंबर3 - पन्नू का दिन भर का शेड्यूल4 - पन्नू की तस्वीरेंइन चीजों को निखिल ने उस किलर को सौंप दी. और एक निर्देश दिया - पन्नू की हत्याजल्द से जल्द की जानी चाहिए. लेकिन किलर को इस बात का ध्यान रखना होगा कि हत्या केआसपास भारत और अमेरिका के आपसी हाईलेवल के कार्यक्रम न हों. ध्यान दें कि जून 2023ही वो महीना था, जब प्रधानमंत्री मोदी अमरीका की यात्रा पर गए थे. लेकिन निखिल काइशारा क्या पीएम मोदी के दौरे की ओर था? ये साफ नहीं है.ध्यान दें कि 18 जून ही वो तारीख थी, जब अनजान शूटरों ने कनाडा में खालिस्तानीआतंकी हरदीप सिंह निज्जर को मार डाला था. और इधर निखिल ने भी अपने शूटर को जल्द सेजल्द काम तमाम करने का मोटिव दे दिया था. यही नहीं, निज्जर के मर्डर के अगले दिनयानी 19 जून को निखिल ने अपने शूटर को निज्जर की तस्वीर दिखाकर कहा था - "ये भीहमारा निशाना था". और ये भी कहा था - "हमारे पास और भी निशाने हैं".लेकिन DEA एजेंट को अपना प्यादा समझकर निखिल ने बड़ी गलती कर ली थी. वो 20 जून 2023को अरेस्ट हो गया. लेकिन वो न्यूयॉर्क में अरेस्ट नहीं हुआ. न्यूयॉर्क से लगभग साढ़े6 हजार किलोमीटर दूर मौजूद चेक रिपब्लिक में उसे अरेस्ट किया गया. उस पर 'मर्डर फॉरहायर' और मर्डर फॉर हायर की साज़िश रचने की धाराएं लगाई गईं. मर्डर फॉर हायर यानीसुपारी देकर मर्डर करवाना या उसकी कोशिश करना. हम फिर से बता दे रहे हैं कि हम येसारी बातें अमरीका के जस्टिस डिपार्टमेंट के आरोप पत्र के मुताबिक कह रहे हैं. कुछभी अभी साबित नहीं हुआ है.अब आप ये पूरी कहानी देखें सुनें तो आपको एक बात नहीं समझ में आएगी. बात ये कि जोनिखिल एक दिन पहले अपने शूटर को पन्नू के मर्डर का ब्रीफ़ दे रहा था, वो एक दिन केभीतर इतनी दूर तक जाकर अरेस्ट कैसे हुआ? अमरीका से उड़कर यूरोप गया और अरेस्ट होगया? या उसे अरेस्ट करके यूरोप ले जाया गया? इन सवालों के जवाब भी अभी आने बाकीहैं.ताजा खबरों के मुताबिक निखिल अभी भी चेक रिपब्लिक की ही जेल में बंद है. और वोअमरीका जाने का इंतजार कर रहा है. चूंकि अमरीका और चेक गणराज्य में प्रत्यर्पण संधिहै. यानी वो एक दूसरे से अपने देश के अपराधियों का लेनदेन कर सकते हैं, तो कयासलगाए जा रहे हैं कि जल्द ही निखिल की जमीन बदलकर अमरीका भी हो सकती है. अमरीका आगया और केस हार गया, तो निखिल को 10 साल जेल के पीछे गुजारने होंगे. और सीसी-1 काक्या? कोई खबर नहीं.खबरों के मुताबिक अमरीका इस पूरे मामले को लेकर गंभीर है. उसने बार-बार कई मौकों परभारत के सामने इस केस को उठाया. टाइमलाइन देखिए.जुलाई 2023 - असोसिएटेड प्रेस की खबर के मुताबिक, अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडनके ऑफिस को इस केस के बारे में सबसे पहले जुलाई 2023 में पता चला.जुलाई 2023 - अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने भारत के NSA अजीतडोभाल से संपर्क किया और इस केस के बारे में बताया. सुलिवन ने डोभाल से आग्रह कियाकि मामले की जांच करें और दोषियों को जिम्मेदार ठहराएं. सुलिवन ने ये भी साफ कहा -"अमरीका चाहता है कि ऐसा दोबारा न हो, क्योंकि इससे दोनों देशों की आपसी भरोसाकमजोर होता है."अगस्त 2023 - जो बाइडन इस बात से संतुष्ट नहीं हुए. उन्होंने अमरीका की खुफियाएजेंसी CIA के डायरेक्टर विलियम बर्न्स से कहा कि वो भारतीय खुफिया एजेंसी RAW केप्रमुख से इस केस के बारे में बात करें.सितंबर 2023 - G20 के समय जो बाइडन भारत आए. उनके और पीएम मोदी के बीच इस केस कोलेकर बातचीत हुई.सितंबर 2023 - भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अमरीका यात्रा पर गए. जेल सुलिवन केअक्टूबर 2023 - अमरीका के नेशनल इन्टेलिजन्स के डायरेक्टर एव्रिल हैन्स भारत आए.भारतीय अधिकारियों के साथ जानकारी साझा की ताकि भारत में इस केस की आंतरिक जांचपूरी हो सके.आप ध्यान देंगे तो बार-बार अमरीका भारत के सामने इस बात को उठाता रहा. उसकी गंभीरताबनी रही. इधर निखिल और सीसी-1 पर केस चलने के बाद जब असोसिएटेड प्रेस ने व्हाइटहाउस से संपर्क किया, तो उन्होंने कोई कमेंट करने से मना कर दिया. लेकिन व्हाइटहाउस की नेशनल सिक्युरिटी काउंसिल की प्रवक्ता एड्रीयन वॉटसन ने एक बात कही -"जब हमें ये पता चला कि भारत सरकार के एक कर्मचारी के कहने पर एक हत्या की प्लानिंगकी गई थी, तो हमने इस सूचना को बेहद गंभीरता से लिया. और हमने भारत सरकार सेहाईएस्ट लेवल पर बात करके अपनी चिंता ज़ाहिर की."अब आपको बताते हैं कि ताज़ा अपडेट्स के बाद भारत सरकार का रिस्पान्स क्या है? भारतसरकार का पहला रिस्पान्स 29 नवंबर को ये अपडेट्स आने के पहले ही आ चुका था. विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा -"भारत ने मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं पर गौर करने के लिए 18 नवंबर को एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है. हम पहले ही कह चुके हैं कि द्विपक्षीय सुरक्षासहयोग पर अमेरिका के साथ चर्चा के दौरान, अमेरिकी पक्ष ने संगठित अपराधियों, बंदूकचलाने वालों, आतंकवादियों और अन्य लोगों के बीच सांठगांठ से संबंधित कुछ जानकारीसाझा की थी."बता दें की भारत ने 22 नवंबर की रात भी बयान जारी करके कहा था कि अमरीका द्वारासाझा की गई जानकारी को भारत गंभीरता से लेता है. जब अमरीका जस्टिस डिपार्टमेंट कीप्रेस रिलीज सामने आ गई, तो उसके लगभग 14 घंटों बाद अरिंदम बागची ने कहा,"..अमरीका की अदालत में जो भारतीय अधिकारी से जुड़ा एक केस हुआ है, वो चिंता का विषयहै. ये हमारी नीतियों के खिलाफ है. ये एक गंभीर विषय है, इसीलिए हमने एक हाईलेवलजांच का भी आदेश दिया है."अब सवाल आता है इस कहानी के मुख्य पात्र को जानने का. कौन है ये पन्नू? और क्या हैंउसके कारनामे? पन्नू पंजाब के अमृतसर के गांव खानकोट का रहने वाला है. पन्नू नेशुरुआती पढ़ाई के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रेजुएशन किया. उसके बादन्यूयॉर्क के टूरो लॉ कॉलेज से मास्टर्स और यूनिवर्सिटी ऑफ हार्टफोर्ड से एमबीए कीडिग्री ली. इसके बाद वो कनाडा चला गया.कनाडा जाते ही पन्नू कुछ ऐसे लोगों के संपर्क में आया, जहां से उसका भटकाव शुरूहुआ. वो सिख समुदाय के लिए अलग देश खालिस्तान की मांग करने लगा. उसे साथ मिलापाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का. इसी क्रम में उसने साल 2007 में उसने नींव रखीअपने संगठन की. नाम - सिख फॉर जस्टिस उर्फ SFJ.SFJ का एजेंडा साफ था. सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की स्थापना करना. लेकिन ये एजेंडा चलाने के लिए SFJ ने जो रास्ता चुना, वो हिंसा का था. जानकार बताते हैं किSFJ ने अपने तरीकों को खुलकर सामने नहीं रखा. कनाडा के पत्रकार टेरी मिलेव्सकी नेइंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा है कि पन्नू ने लोगों को SFJ का एजेंडा बताया -बुलेट नहीं, बैलट. यानी गोली नहीं, वोट. लेकिन संवैधानिक लोकतंत्र की वकालत करता येमोटो बस चेहरा था, पीछे तमाम हिंसक संगठनों से हेल्प ली जा रही थी. ऐसे एक संगठनISI का नाम तो हमने आपको पहले ही बता दिया. पन्नू आज भी ISI के संपर्क में बतायाजाता है. पन्नू और ISI मिलकर पंजाब के सीमावर्ती गांवों में ड्रोन से ड्रग्स औरहथियार गिराते रहते हैं.पन्नू रहता है मूलतः अमरीका में. वहां की नागरिकता भी ले रखी है, और कनाडा की भी.उसका कनाडा भी आना-जाना लगा रहता है. कनाडा में अपने सारे काम धाम के लिए एक ऑफिसखोलकर रखा है. ऑफिस का नाम - शहीद तलविंदर सिंह परमार वोटर सेंटर. कौन शहीदतलविंदर सिंह? तलविंदर सिंह परमार बब्बर खालसा का आतंकी था. उसने अपने दोस्तइंदरजीत सिंह रेयात के साथ मिलकर 23 जून 1985 को कनाडा के मॉन्ट्रियल से दिल्ली आरही एयर इंडिया की फ्लाइट 182 में बम धमाके किये थे. इस धमाके में प्लेन में सवारसभी 329 लोग मारे गए थे, जिसमें 268 कनाडाई नागरिक, 27 ब्रिटिश नागरिक और 24 भारतीयनागरिक शामिल थे.इसके अलावा पन्नू के ऑफिस के नाम में लगे वोटर सेंटर की कहानी भी रोचक है. वोटरसेंटर का मतलब ये एक रेफरेंडम सेंटर है. यानी जनमत संग्रह का केंद्र. मकसद - सिखखालिस्तान की स्थापना के लिए एकजुट होकर वोट करें. ऐसे देखें तो पन्नू के ऑफिस कामकसद साफ है -0 काम वोट मांगना, नाम इस्तेमाल करना एक आतंकी का.साल 2019 में भारत सरकार का एक्शन शुरू हुआ. इस साल सरकार ने SFJ को एक प्रतिबंधितसंगठन घोषित किया. साल 2020. भारत सरकार ने पन्नू UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया.जुलाई 2020 में ही पंजाब पुलिस ने अमृतसर और कपूरथला में उसके खिलाफ राजद्रोह काकेस दर्ज किया था. उसके बाद NIA ने UAPA एक्ट 1967 की धारा 51 ए के तहत अमृतसरस्थित उसकी अचल संपत्तियों को जब्त किया.लेकिन इस कार्रवाई का असर उस पर कोई असर नहीं होता. वो कभी ऐलान करता कि किसानों कोदिल्ली में प्रोटेस्ट के लिए वो 1 लाख डॉलर यानी 83 लाख रुपये देगा. और कभी ऐलानकरता कि इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि यानी 31 अक्टूबर पर खालिस्तान का झंडा फहराने केलिए स्टूडेंट्स को आईफोन देगा. बात ये भी है कि स्टूडेंट्स और किसान बार-बार पन्नूके ये फालतू के लालच मानने से मुंह फेरते रहे हैं और आगे भी फेरते रहेंगे. पन्नू परकेस के बाद केस दर्ज होते रहे. 6 जुलाई, 2017 से लेकर 28 अगस्त, 2022 तक आतंकवाद औरदेशद्रोह सहित विभिन्न धाराओं में कुल 22 मामले दर्ज किए गए. ये सभी मामले केवलपंजाब में दर्ज हैं.अब हम पन्नू का साल 2023 का क्राइम चार्ट देखते हैं. आपको ध्यान होगा कि कनाडा मेंखालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की मौत के बाद सितंबर के महीने में भारत औरकनाडा में तनाव हुआ था. तो इसी तनावपूर्ण स्थिति में पन्नू ने ऐलान किया कि गैर-सिखभारतीय कनाडा छोड़ दें, अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें.नवंबर 2023 में उसने सिखों से अपील की थी कि वो वर्ल्ड कप फाइनल के दिन यानी 19नवंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से एयर इंडिया के विमानसे यात्रा न करें. पन्नू ने कहा कि उनकी जान को खतरा है. लोगों ने अनुमान लगाया -पन्नू प्लेन को बम से उड़ाना चाहता है. क्यों ऐसा अनुमान लगाया? जवाब हमने आपको पहलेही दिया. वो 1985 की एयर इंडिया बॉम्बिंग के मुख्य आरोपी तलविंदर सिंह परमार कासमर्थक है. और वो ऐसा ही कोई चैप्टर रिपीट करना चाहता है. हालांकि अखबार फाइनेंशियलटाइम्स से बातचीत में पन्नू ने तब सफ़ाई दी थी कि उसका मकसद हिंसा करना नहीं था.हालांकि सुरक्षा एजेंसियों को पता चला कि पन्नू ने किसी स्तर पर तैयारी की तो थी.क्योंकि 19 नवंबर के दिन ही दिल्ली पुलिस ने एक बंदे को अरेस्ट किया था, जो अलग-अलगजगहों पर खालिस्तान समर्थक नारे लिख रहा था. पुलिस ने पूछा तो उसने इतना खुलासाजरूर किया कि उसे ऐसा करने का ऑर्डर पन्नू ने दिया था.ये तो हो गई पन्नू की कहानी. अपने मर्डर की कोशिश पर उसने क्या कहा? असोसिएटेडप्रेस से बातचीत में उसने कहा -"मैं मौत से नहीं डरता. अगर खालिस्तान का प्रचार करने की यही कीमत है तो मुझे येकीमत मंजूर है."निज़्जर का जिक्र करते हुए पन्नू ने कहा कि भारत ने साबित कर दिया है कि वो रोकने केलिए हिंसा और गोलियों का सहारा लेगा. पन्नू के बाद चलते हैं विशेषज्ञों के पास.अमरीका जस्टिस डिपार्टमेंट के केस के बाद कनाडा भी एक्टिव हो गया. वहां के पीएमट्रूडो ने कहा कि भारत को अमरीका के केस को गंभीरता से लेना चाहिए. इस पर अरिंदमबागची ने कहा कि कनाडा खुद के यहां एंटी-इंडिया हिंसा और चरमपंथियों को पनाह देतारहता है. तो सवाल उठता है कि क्या पन्नू का केस सामने आने के बाद निज़्जर का केस भीबदलेगा? एक बात ये भी होने लगी है कि क्या इस तरह के सतत आरोप भारत की साख कोनुकसान पहुंचा सकते हैं? या भारत अपनी डिप्लमैटिक स्टैन्डींग में हमेशा की तरहमजबूत खड़ा है? उम्मीद है कि इस पेचीदा अंतर्राष्ट्रीय दिक्कत का हल जल्द से जल्दनिकलेगा. और देश के तमाम दुश्मनों तक उचित न्याय भी पहुंचेगा.