पियाला गर नहीं देता न दे पेनकिलर तो देमिर्ज़ा ग़ालिब के एक शेर का इस तरह कबाड़ा करने की ख़ास वजह है. दर्द. बकौल शायरआदमी दर्द में मयखाने की ओर जाता है. लेकिन दर्द अगर दिल का न हो तो आदमी को मयखानेके बजाय डॉक्टर के पास जाना चाहिए. तो आज बात दर्द की, दर्दनिवारक दवाओं यानीपेनकिलर्स की. साथ में बात नशे, शराब के नशे, दवा के नशे की भी. क्योंकि ऐसे हीइच्छा सी हुई कि इनकी बात की जाए. एक ऐसा अप्रिय अहसास जिसके कारण शरीर असहज महसूसकरे, एक मायने में ऐसा संकेत या ऐसी सूचना जिससे आपके दिमाग को ये पता चले कि फलानीजगह या फलाने अंग में कुछ गड़बड़ है और आपको उपचार की आवश्यकता है. इसी को कहते हैंदर्द. कुछ कहेंगे ये प्यार का लक्षण है. लेकिन फैक्ट्स पर लौटिए. शरीर Sick फील करेतो आशिक मत बनिए. तो उन्हीं लक्षणों से समझ आए दर्द से मुक्ति के लिए बनाया गयापेनकिलर. पेनकिलर यानी दर्दनिवारक दवाएं जिसके सेवन को ऐनल्जेसिक थैरेपी भी कहाजाता है. ये नर्वस सिस्टम पर काम करती हैं और शरीर के केमिकल एंजाइम्स को ब्लॉक करदर्द की सूचना मस्तिष्क तक नहीं पहुंचने देती. ये दर्द और सूजन दोनों को कम करतीहै. लेकिन सभी दर्दनाशक दवाएं बिल्कुल एक जैसे काम करती हों ऐसा भी नहीं. सबका अलगमैकेनिज्म है. मतलब रास्ते अलग हैं मंजिल एक. एक ही संकल्प, दर्द मिटाओ. उदाहरण केतौर पर आप किसी मित्र की शादी में गए और जोश-जोश में ज़रूरत से ज्यादा नागिन डांसकरने पर चोटिल हो गए, या आपको घुटने में हेयरलाइन फ्रैक्चर हो गया. अब कायदे सेहोना तो ये चाहिए कि आप रात भर आराम करें और अगली सुबह डॉक्टर को दिखाएं. प्रॉपरडायग्नोसिस के बाद इलाज शुरू करें. लेकिन ‛थकना मना है’ वाली ज़िंदगी में तत्कालआराम के लिए डॉक्टर को दिखाने से पहले आप खाते हैं पेनकिलर. खुराक की मात्रा औरप्रिकॉशन को समझे बिना. इसके कारण शुरू होता है साइड इफेक्ट. चूंकि बात शादी कीचली, इसलिए पेनकिलर का पत्ता निकालने से पहले ये ध्यान दें कि शादी में आपनेमद्यपान न किया हो. यदि किया भी हो तो कम से कम 7 से 8 घंटे का अंतर रखें. दर्द होघुटने में तो पेनकिलर लीजे और जो पेनकिलर ही पेन हो तो क्या कीजे अर्थात पेनकिलर केसाइड इफेक्ट्स. सभी दवाओं की तरह, पेनकिलर्स के भी दुष्प्रभाव होते हैं. उनमें सेकुछ गंभीर भी हो सकते हैं. ये साइड इफेक्ट्स लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैटेगरी मेंडिवाइड किए गए हैं. इनमें किडनी डैमेज, एक्यूट लिवर डैमेज, मिचली, खराब नींद औरतनाव जैसे लक्षण हैं. चूंकि इसका उपयोग नशाखोरी के लिए भी किया जाता है, इसलिए सबसेजरूरी सवाल... क्या पेनकिलर्स से नशा हो सकता है? बात दर्द और मयखाने से शुरू हुईतो बिहार का ज़िक्र होना लाज़मी है, जहां शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगने के बाद मार्केटसे दर्दनिवारक दवाएं अचानक आउट ऑफ स्टॉक हो गईं. इसके पीछे क्या कारण है, ये बिहारमें दवाओं के क्रेता और विक्रेता ही जानें. लेकिन एक बात साफ है कि पेनकिलर्स काउपयोग नशा-पत्ती के लिए भी किया जाता है. लेकिन जैसे हर कफ सिरप पीने वाला माहौलीनहीं होता और हर कफ सिरप से नशा नहीं होता, वैसे ही हर दर्दनिवारक दवा से नशा हो येभी जरूरी नहीं. और इसका इस्तेमाल सिर्फ नशे के लिए ही किया जाता है ऐसा भी नही है.ऐसी स्थिति कुछ खास पेनकिलर और ज़रूरत से ज्यादा पेनकिलर लेने पर ही उत्पन्न होतीहै. इसलिए सही दवा का चुनाव एवं रोगी की विशेषता दोनों को ध्यान में रखा जाना जरूरीहै. ऐसे पेनकिलर्स जिनसे नशा होता है, नारकोटिक पेनकिलर्स. Opioid Analgesics. अगेनफ़ॉर एक्जाम्पल, अगर हेयरलाइन फ्रैक्चर के कारण दर्द ज्यादा है या कोई पुरानी चोटउभरकर असहनीय दर्द दे रही है तो सेंसिटिविटी घटाने के लिए आप ऐसे पेनकिलर्स का सेवनकरते हैं तो आपको नींद, एंग्जाइटी या चक्कर जैसे साइड इफेक्ट्स दिख सकते हैं. ज़रूरीनहीं कि ये लक्षण हर मरीज़ में दिखें. ये बॉडी टू बॉडी वैरी करते हैं. लेकिन ध्यानरखें, अगर आपको पेनकिलर लेने के बाद ऐसे लक्षण दिखते हैं तो आपको कुछ कामों को नहींकरना चाहिए. जैसे गाड़ी चलाना, स्विमिंग करना. उदाहरण के तौर पर अगर आप वकील हैं तोकचहरी के बहसों में न जाएं, आप बिजनेसमैन या कॉरपोरेट कर्मचारी हैं तो मीटिंग्स कोअवॉइड करें, और हां अगर आप मीडिया में हैं तो इंटरव्यू या बाइट्स वगैरह से बचनाचाहिए. ऐसे आपका खुद पर आत्मनियंत्रण कमजोर हो सकता है और Lack of Concentration केकारण शब्दों के चुनाव में गलती कर सकते हैं. माने आम को इमली कह सकते हैं. ग़ालिब काशेर जो हमने तोड़ा मरोड़ा था वो ओरिजिनल कुछ ऐसे है,पिला दे ओक से साक़ी जो हम से नफ़रत है पियाला गर नहीं देता न दे शराब तो देइसलिए या तो पेन किलर खाएं या शराब पिएं, दोनों काम साथ न करें. और दोनों हीस्थितियों में वो करें जो आप हिंदी में ख़बरें लिखते हुए करते हैं. मात्रा का ध्यानज़रूर रखें. डॉक्टरों का कहना है अल्कोहल लेने के बाद या अल्कोहल के साथ पेनकिलरखाना जानलेवा हो सकता है. शराब के अलावा भी कुछ पेनकिलर्स को लेने में कुछसावधानियां बरतना जरूरी है. जैसे पेनकिलर्स को कभी खाली पेट न खाएं, यदि उसमेंसेडेटिव वार्निंग प्रिकॉशन हैं तो सोने के पहले ही खाएं, ज्यादा मात्रा में यालगातार न खाएं.आखिरी बातकोई अगर मुट्ठी भर पिल्स फांक ले तो वो बड़बड़ाने लग सकता है, स्मृति पर प्रभाव पड़सकता है, होश में होने पर भी बातचीत में शामिल होना मुश्किल हो सकता है, हार्ट रेटगड़बड़ा सकती है, आप भूल सकते हैं कि आप हैं कौन? आप अचानक उत्तेजित हो सकते हैं, फिरअचानक रुआंसे भी. नारकोटिक पेनकिलर्स जैसे ओपिऑड, मॉर्फिन और कोडीन पेनकिलर्स अगरज़रूरत से जरा भी ज्यादा हुए तो आपको ऊल-जुलूल हरकतें कर सकते हैं, इसलिए उम्र, लिंगऔर और वजन का ध्यान रखते हुए प्रिस्क्राइब वे में पेनकिलर्स का सेवन करें, पब्लिकअपीयरेंस से बचें और मेडिकल इमरजेंसी होने पर करीबी अस्पताल से संपर्क करें.(ये व्यंग्य हमारे साथी अतुल ने लिखा है.)