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जब एक अजीब शॉट के सदके ये क्रिकेटर इंडिया से मैच छीन ले गया

अगर तुम्हें मैक्ग्राथ का सामना करना पड़ा तो क्या करोगे?

फाइन लेग ऊपर है, तो मैं सोच रहा हूं कि मैं स्वीप करूंगा.

लोग हंसने लगे. सबको लगा कि लड़का मज़ाक कर रहा है. लेकिन लड़के ने तो दिल की बात बताई थी. उसका प्लान ही वही था. प्लान कामयाब भी रहा. ये और बात है कि यह कामयाब प्लान जीत में नहीं बदला. लेकिन मैक्ग्राथ के ओवर में 13 रन तो आ ही गए. ये भी तो बड़ी बात थी.

302 चेज कर रही टीम 301 तक ही पहुंच पाई. लेकिन मैक्ग्राथ के फेंके आखिरी ओवर में आए 13 रनों ने इस यंग क्रिकेटर का नाम बना दिया. रनों से ज्यादा फेमस हुआ उन्हें बनाने का तरीका. बाद में इस तरीके को प्लेयर के नाम से ही बुलाया गया. और अगले ही साल इस तरीके का शिकार हुआ भारत. तरीका था मरीलियर स्कूप और प्लेयर का नाम डगलस मरीलियर.

# मरीलियर ने दिखाया मरीलियर

तारीख 7 मार्च, 2002. जिम्बाब्वे की टीम इंडिया टूर पर थी. सीरीज का पहला मैच हुआ फरीदाबाद में. सौरव गांगुली और लक्ष्मण की फिफ्टी की मदद से भारत ने छह विकेट खोकर 274 रन बनाए. इसमें अजित आगरकर के 40 रनों का भी रोल था. आगरकर ने यह रन सिर्फ 19 बॉल्स में बनाए थे. और उनके छह चौकों और एक छक्के ने हर बार मैदान को तालियों से भर दिया था. लेकिन तालियां बजाने वालों को अंदाज़ा भी नहीं था कि दूसरी पारी में उनके साथ क्या होने वाला है.

जिम्बाब्वे खेलने उतरा. एलिस्टेयर कैम्पबेल और एंडी फ्लॉवर ने हाफ-सेंचुरी जड़ी. लेकिन इसके बाद भी भारत मजबूत स्थिति में था. जिम्बाब्वे ने 41.3 ओवर्स में 200 पर सात विकेट गंवा दिए. अब बची हुई 51 बॉल्स में उन्हें 75 रन चाहिए थे. और विकेट बस तीन थे. यहां से भारत ने अपना शिकंजा और कसा. अगली 15 बॉल्स में बस नौ रन आए. अब छह ओवर्स में जिम्बाब्वे को 66 रन बनाने थे. अगला ओवर लेकर आए संजय बांगर.

दूसरी ही बॉल पर डियन इब्राहिम आउट हो गए. अब क्रीज़ पर आए डगलस मरीलियर. मरीलियर ने बांगर की चौथी बॉल पर सिंगल लेकर खाता खोला और आखिरी बॉल पर चौका जड़ दिया. अब जिम्बाब्वे को 30 बॉल्स में 59 रन चाहिए थे. 46वां ओवर लेकर आए अनिल कुंबले. मरीलियर ने इस ओवर में दो चौके जड़े. ओवर में 10 रन आए लेकिन अब भी चार ओवर में 49 रन की जरूरत थी.

47वां ओवर डाला ज़हीर खान ने. यही वह ओवर था जब मरीलियर ने मरीलियर शॉट खेलना शुरू किया. पहली दो बॉल्स पर उन्होंने करीने से खेलते हुए छह रन बटोरे. इनमें एक नोबॉल भी थी. ओवर की तीसरी बॉल, अतिउत्साह में ज़हीर ने एक और नो बॉल फेंक दी और भारतीय फैंस ने पहली बार मरीलियर देखा. सब हैरान थे कि यह कौन सा शॉट है.

मरीलियर ने ऑफ स्टंप की ओर आगे बढ़कर बॉल को एकदम गिल्ली-डंडा वाले अंदाज में विकेटकीपर के ऊपर से उछाल दिया. इस पर दो रन आए. अगली बॉल डॉट रही. और ओवर की तीसरी वैलिड बॉल पर मरीलियर ने आगे आते हुए स्वीप कर छह रन बटोर लिए. चौथी बॉल पर मरीलियर ने मरीलियर के जरिए चार रन बटोरे. पांचवीं बॉल पर एक रन आया और आखिरी बॉल टटेंडा टाइबु ने डॉट खेली.

अगला ओवर लेकर बांगर आए. हालात अब बदल चुके थे. अब जिम्बाब्वे को 18 बॉल्स में सिर्फ 28 रन चाहिए थे. बेख़ौफ मरीलियर ने बांगर की पहली ही बॉल पर आगे बढ़कर ऑफसाइड में चार रन बटोर लिए. अगली बॉल पर सिंगल आया. तीसरी डॉट रही. चौथी बॉल पर टाइबु ने विकेट के पीछे अजय रात्रा को कैच थमा दिया. इस ओवर में बस पांच रन आए और एक विकेट भी गिरा. अब भारत को जीत के लिए बस एक विकेट लेना था.

अब दो ओवर में जिम्बाब्वे को 23 रन बनाने थे. ज़हीर फिर आए. मरीलियर ने फिर मारा. इस ओवर में ज़हीर ने फिर से दो नो बॉल्स फेंकी. दो चौकों समेत इस ओवर में कुल 13 रन आए. मज़े की बात ये है कि यह दोनों ही चौके मरीलियर शॉट से ही आए. आखिरी ओवर कुंबले ने फेंका. मरीलियर ने पहली ही बॉल पर चौका मार सिर्फ 21 बॉल्स में अपनी हाफ सेंचुरी पूरी कर ली.

अब जिम्बाब्वे को जीत के लिए पांच बॉल्स में छह रन चाहिए थे. अगली तीन बॉल्स में कुंबले ने बस दो रन दिए. अब मेहमानों को दो बॉल्स में चार रन बनाने थे. कुंबले ने अगली बॉल नो फेंक दी. मरीलियर इस पर लंबी हिट लगाने के चक्कर में थे. बॉल ने बल्ले का ऊपरी किनारा लिया और रात्रा को पार कर बाउंड्री के बाहर चली गई. जिम्बाब्वे ने दो बॉल पहले ही मैच एक विकेट से जीत लिया. इस जीत के हीरो रहे डगलस मरीलियर.

# खानदानी क्रिकेटर

सिर्फ 16 साल की उम्र में भयानक कार हादसे का शिकार हुए मरीलियर महीनों तक व्हील चेयर पर रहे थे. क्रिकेट खेलना तो दूर, उनका दोबारा चल पाना मुश्किल था. लेकिन वह इस हादसे से उबरे. खूब क्रिकेट खेली. बैट और बॉल दोनों के साथ वक्त बे वक्त धमाल किया. गुस्से में क्रिकेट से रिटायरमेंट भी ले ली.

मार्च 2004 में रिटायर होने के बाद इंग्लैंड गए. लेकिन क्रिकेट में कुछ खास हो नहीं पाया. फिर परिवार के रियल एस्टेट बिजनेस में घुसे. लेकिन बहुत दिन तक मन नहीं लगा. 2010 में दोबारा जिम्बाब्वे लौटे और क्रिकेट खेली. लेकिन वापसी बहुत लंबी नहीं चली. मरीलियर ने आखिरी T20 मैच 20 फरवरी 2010 को खेला. यह कंपटिटिव क्रिकेट में उनका आखिरी मैच था.

ट्रिविया

# डगलस मरीलियर के पिता टोनी भी एक क्रिकेटर थे. क्लब क्रिकेट के दिग्गज रहे टोनी ने जिम्बाब्वे नेशनल टीम के लिए भी खेला था.

# डगलस जब आठ दिन के थे तभी उनके पिता ने उन्हें क्रिकेट बॉल पकड़ा दी थी.

# डगलस का एक बड़ा भाई भी था. वह क्रिकेट छोड़ हर गेम में डगलस से बेहतर था. इसीलिए डगलस ने क्रिकेट को अपना करियर बनाया.

# डगलस ने उसी स्कूल में पढ़ाई की थी जहां जिम्बाब्वे के लेजेंडरी फ्लावर बंधु, ग्रांट और एंडी पढ़े थे.

# अपने पिता और भाई की तरह डगलस भी विकेटकीपर थे.

# कार एक्सिडेंट से रिकवरी के दौरान खेल से जुड़े रहने के लिए उन्होंने कोचिंग और अंपायरिंग भी की.

मरीलियर साल 2004 में जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड से हुए विवाद के बाद क्रिकेट छोड़ने वाले प्लेयर्स में शामिल थे.


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