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जब 17 साल के लड़के ने ज़हीर खान को बोलिंग से हटवा दिया था

2003 और 2011 विश्वकप के बीच क्रिकेट का एक विश्वकप और हुआ था, 2007 में. वेस्टइंडीज़ में खेले इस विश्वकप को कोई भी इंडियन फैन याद नहीं करना चाहता. दुनिया की सबसे मज़बूत बैटिंग लाइन अप वाली टीम टूर्नामेंट के पहले स्टेज में ही हारकर बाहर हो गई थी. बांग्लादेश और श्रीलंका ने टीम इंडिया को हराकर काम खराब कर दिया था.

20 मार्च, 2007 को अपने 18वें जन्मदिन से तीन दिन पहले. उसी मैच में एक 17 साल का लड़का ऐसे खेल रहा था मानो उसे पता ही न हो कि वो कहां पर और किसके खिलाफ खेल रहा है. टीम इंडिया 191 रनों पर ढेर हो गई थी. बांग्लादेश टीम की बल्लेबाज़ी आई. उनके लिए एक अनजान सा लड़का पारी शुरू करने उतरा. पारी के पांचवे ओवर में ज़हीर ने शाहरियार नफीस को आउट करके बांग्लादेश पर दबाव बनाया. इसके बाद सातवें ओवर में ज़हीर ने आते ही 17 साल के उस लड़के को तेज़ बाउंसर दे मारी. बॉल उसकी गर्दन पर लगकर स्लिप में खड़े सहवाग के हाथों में चली गई. पूरी टीम जश्न मनाने लगी. अंपायर ने गर्दन हिलाकर इनकार कर दिया. वो बच्चा ज़मीन पर अपनी गर्दन पकड़े बैठा था. उस लड़के का नाम था तमीम इकबाल. वही इकबाल जो आज बांग्लादेश क्रिकेट की सबसे बड़ी पहचान है.

सब ठीक हुआ. वो फिर से खेलने के लिए खड़ा हुआ. इस ओवर में आखिरी दोनों गेंदों पर उसने झन्नाटेदार चौके जड़ दिया. पहला पॉइंट में. और दूसरा आगे बढ़कर सीधे ज़हीर के सिर के ऊपर से. सबको लगा नॉर्मल है. कभी-कभी ऐसा होता है.

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2007 विश्वकप में ज़हीर की गेंद पर छक्का लगाते तमीम. फोटो: Getty

लेकिन कप्तान द्रविड़ दूरदर्शी आदमी थे. वो पहचान चुके थे, आज इसे रोकना ज़रूरी है. उन्होंने ज़हीर को 11वें ओवर तक एक छोर पर लगाए रखा. लेकिन 11वें ओवर में तमीम ने वो कर दिया. जो शायद दुनिया का बड़े से बड़ा बल्लेबाज़ ज़हीर की गेंदों पर करने से डरता रहा. ओवर की पांचवी गेंद पर तमीम ज़हीर की 136 से ऊपर की रफ्तार वाली गेंद पर आगे बढ़ा और लॉन्ग ऑन के ऊपर से एक बड़ा छक्का दे मारा. इस ओवर में वो पहले भी लगातार दो चौके लगा चुका था.

इसके बाद कप्तान द्रविड़ ने ज़हीर खान का स्पेल ही खत्म कर दिया. तमीम ने इस मुकाबले में 53 गेंदों पर 51 रनों की पारी खेली. मुनाफ पटेल ने बाद में तमीम को कैच आउट करवाया. लेकिन लो स्कोरिंग मैच में तमीम ने बांग्लादेश के लिए चीजें बिल्कुल आसान कर दी थीं. बांग्लादेश ने इस मैच को पांच विकेट से जीत लिया था. इस पारी के 13 साल बाद भी तमीम इसमें ज़हीर के ओवर में लगाए छक्के को अपना बेस्ट सिक्स बताते हैं.

वनडे क्रिकेट के इतिहास में ऐसा सिर्फ एक बार नहीं हुआ. तमीम के डेब्यू करने के बाद से बांग्लादेश ने चार बार भारत को हराया. जिसमें से तीन बार तमीम की बदौलत ही बांग्लादेश ने मैच पर अपनी पकड़ बनाई.

तमीम बांग्लादेश क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े बल्लेबाज़ हैं. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने दूसरे सबसे ज्यादा 4405 रन. जबकि वनडे में सबसे ज्यादा 7202 रन बनाए हैं.

जब टूटे हाथ के साथ मैदान पर उतर आए तमीम:

ऐसा नहीं है कि तमीम सिर्फ रनों के लिए पहचाने जाते हैं. उन्होंने अपनी हिम्मतवाली पारियों से भी दिखाया है कि वह क्रिकेट का एक नायाब हीरा हैं. एक मौका आया साल 2018 में. 2018 का एशिया कप. टीम इंडिया चैम्पियन बनी थी. लेकिन उस टूर्नामेंट का पहला मैच हुआ था बांग्लादेश और श्रीलंका के बीच. मैच शुरू हुआ. बांग्लादेश पहले खेलने उतरा लेकिन मलिंगा के आगे बांग्लादेशी धूल खाते दिखने लगे.

पहले ओवर में ही लिटन दास और शाकिब उल हसन आउट हो गए. एक ओवर के बाद टीम का स्कोर एक रन पर दो विकेट. दूसरा ओवर शुरू हुआ. तमीन ने लकमल के ओवर में एक रन ले लिया. मुश्फिकुर रहीम ने पांचवी गेंद पर सिंगल लेकर स्ट्राइक फिर से तमीम को लौटा दी. अब तमीम आखिरी गेंद का सामने करने आए. लकमल की गेंद पर तमीम ने पुल शॉट खेलने की कोशिश की. लेकिन गेंद सीधे उनकी कलाई पर जा लगी. तमीम दर्द से बिलखते हुए ज़मीन पर बैठ गए.

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बांग्लादेशी स्टार तमीम इकबाल: फोटो: Getty

चोट इतनी बड़ी थी कि मैदान पर फिज़ियो आए और तमीम की हालत देखकर उन्हें मैदान से बाहर ले गए. दूसरा ओवर खत्म होते-होते बांग्लादेश के तीन बल्लेबाज़ वापस पवेलियन लौट चुके थे. मुश्फिकुर ने एक छोर थामे रखा और टीम को एक अच्छे स्कोर की तरफ ले जा रहे थे कि 47वें ओवर में बांग्लादेश का नौवां विकेट भी गिर गया. मुश्फिकुर क्रीज़ पर अकेले छूट गए. क्योंकि तमीम तो पहले ही रिटायर्ड हर्ट होकर चले गए थे. बांग्लादेश का स्कोर था 229 रन. लेकिन तीन ओवर बाकी थे. श्रीलंकाई खिलाड़ी मैदान छोड़ने की फिराक में थे.

मुश्फिकुर ड्रेसिंग रूम की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे थे, कि तभी तमीम हाथ में प्लास्टर के साथ अंधेरे गलियारे से उजाले में दिखे. ऐसा होते देख किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था. फ्रैक्चर के साथ खेलने आए तमीम का एक हाथ बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा था. लेकिन यहां बात सिर्फ मुश्फिकुर का साथ देने की नहीं थी. जब क्रीज़ पर हैं तो बल्लेबाज़ी भी करनी होगी. तमीम अब गेंद का सामना करने आए. उन्होंने लकमल के ओवर से गेंद का सामना किया. वो भी एक हाथ से. इसके बाद मुश्फिकुर ने 50वें ओवर तक बल्लेबाज़ी कर टीम को 261 रनों तक पहुंचा दिया.

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एशिया कप में एक हाथ से बल्लेबाज़ी करते तमीम इकबाल. फोटो: Twitter

32 रनों की इस साझेदारी से बांग्लादेश ने एक बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया था. आखिर में तमीम नॉटआउट ही पवेलियन लौटे. और कॉमेंटेटर समेत पूरा क्राउड उनकी तारीफ कर रहा था.


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