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चेहरे पर गेंद लगी, छह टांके लगे, लौटकर उसी बॉलर को पहली बॉल पर छक्का मार दिया

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मोहिंदर अमरनाथ. 1983 में इंडियन क्रिकेट टीम में अपना चौथा कम-बैक कर रहे थे. ऐसा उनके साथ पूरे करियर भर होता रहा. वो आते और फिर कुछ वक़्त बाद उन्हें टीम से बाहर रहना पड़ता. टीम वेस्ट इंडीज़ के दौरे पर जा रही थी. पहले तीन टेस्ट मैचों में 2 मैच ड्रॉ हुए और 1 वेस्ट इंडीज़ ने जीता. वेस्ट इंडीज़ के फ़ास्ट बॉलर्स आग उगल रहे थे. मैल्कम मार्शल, माइकल होल्डिंग और एंडी रॉबर्ट्स ने इंडियन बैटिंग लाइनअप को छकाया हुआ था. लम्बे कद का फ़ायदा ये सभी बॉलर्स उठा रहे थे. भारतीय बल्लेबाज़ों को उछाल भरी गेंदें खेलने को मिल रही थीं. मोहिंदर अमरनाथ ने अपनी ख़राब फॉर्म से उबरने के लिए अपने पिता लाला अमरनाथ की मदद ली थी. इसके बाद जब वो वापस आए, तो क्रीज़ में खड़े होने के तरीके बदला हुआ था. अब उनका स्टांस थोड़ा खुला हुआ था. इसे अंग्रेजी में ‘टू आइड’ (two eyed) स्टांस कहते हैं. लाला अमरनाथ ने कहा कि ऐसे खड़े होने से उन्हें छोटी गेंदें खेलने में आसानी होगी.

दौरे पर आते ही दूसरे टेस्ट मैच में मोहिंदर अमरनाथ ने मैन ऑफ़ द मैच जीता. पहली इनिंग्स में 58 रन और दूसरी में सेंचुरी जड़ी. तीसरा मैच बारिश की वजह से ड्रॉ हो गया. चौथे मैच में जो हुआ उसने मोहिंदर अमरनाथ की मेंटल ताकत के बारे में बहुत बड़ा सबूत पेश किया.

अमरनाथ दुनिया के एकमात्र बैट्मैन हैं, जिन्हें 'हैंडलिंग द बॉल' और फील्डर का रास्ता रोकने के कारण आउट करार दिए गए हैं.
अमरनाथ दुनिया के एकमात्र बैट्मैन हैं, जिन्हें ‘हैंडलिंग द बॉल’ और फील्डर का रास्ता रोकने के कारण आउट करार दिया गया है.

पहली इनिंग्स में मोहिंदर अमरनाथ ने 91 रन बनाए. वो भारत की तरफ़ से एकमात्र बल्लेबाज़ थे, जिन्होंने 30 रनों के आंकड़े को छुआ या उसे पार किया था. एंडी रॉबर्ट्स ने 16 ओवर में 4 विकेट्स निकाले. होल्डिंग ने वेंगसरकर और गावस्कर को आउट किया. वेस्ट इंडीज़ ने बैटिंग की और 277 रनों की लीड ले ली. इंडिया का मैच हारना तय लग रहा था.

दूसरी इनिंग्स में बैटिंग करते हुए इंडिया का ओपनिंग स्टैंड हाफ़ सेंचुरी का रहा. गावस्कर 19 रनों पर आउट हो गए. अमरनाथ बैटिंग करने के लिए आए और गायकवाड के साथ अच्छी पार्टनरशिप शुरू हुई. अमरनाथ को छोटी गेंदों से होने वाली समस्या जगज़ाहिर थी. माइकल होल्डिंग ने इसी का फ़ायदा उठाने की कोशिश की. उन्होंने एक गेंद को पटका जो कि आकर सीधे अमरनाथ की ठुड्डी पर लगी. वो ज़मीन पर गिर पड़े. उन्हें तुरंत ही मैदान से बाहर ले जाना पड़ा. खून से सनी हुई शर्ट लेकर वो अस्पताल गए, जहां उनके चेहरे पर 6 टांके लगे. आधे घंटे के अन्दर उन्हें वापस ड्रेसिंग रूम में बिठाया गया, जहां पहुंच कर सबसे पहले उन्होंने अपनी शर्ट पर लगा खून साफ़ किया. लेग स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन पास में ही बैठे हुए थे और लगातार अमरनाथ को मॉनिटर कर रहे थे. कुछ देर में एंडी रॉबर्ट्स ने बलविंदर संधू को एलबीडब्लू कर निपटा दिया. भारत अपना पांचवा विकेट खो चुका था. ड्रेसिंग रूम में अमरनाथ खड़े हुए और बैटिंग करने के लिए जाने लगे. उनसे पूछा गया कि क्या वो बैटिंग करने की हालत में हैं, तो उन्होंने हां में सर हिला दिया और चले गए. मिनट भर की देरी के बाद लोगों ने देखा कि मोहिंदर अमरनाथ पिच तक पहुंच गए हैं और पीछे से लक्ष्मण शिवरामकृष्णन दौड़ते हुए आ रहे हैं. असल में अमरनाथ बैटिंग करने को लेकर इस कदर उत्साहित थे कि जल्दबाज़ी में उन्होंने एब्डॉमेन गार्ड ही नहीं लगाया था. शिवरामकृष्णन को जैसे ही ड्रेसिंग रूम में अमरनाथ का गार्ड रखा हुआ दिखाई दिया, वो उसे लेकर दौड़ पड़े.

इसके बाद अमरनाथ ने 18 रन के अपने स्कोर को आगे बढ़ाना शुरू किया. अमरनाथ को होल्डिंग ने पहली ही गेंद फिर से पटकी और इस बार पुल शॉट मारा गया. सीधे 6 रन. हालांकि ये बात एक किंवदंती भी हो सकती है क्योंकि रिकार्ड्स में दूसरी इनिंग्स में एक भी छक्के का ज़िक्र नहीं है. लेकिन ये ज़रूर है कि दोबारा बैटिंग करने आए मोहिंदर अमरनाथ ने पटकी गई हर गेंद को हुक किया और रन बटोरे. अमरनाथ की इनिंग्स 80 रनों पर जाकर रुकी. हालांकि इंडिया वेस्ट इंडीज़ के बराबर ही रन बना सकी और वेस्ट इंडीज़ को जीतने के लिए 1 रन और चाहिए था जो कि आसानी से बन गए.

इस मैच के बाद एंटीगा में हुए आख़िरी टेस्ट मैच में एक बार फिर अमरनाथ के बल्ले से रन निकले. उन्होंने पहले इनिंग्स में 54 और दूसरी इनिंग्स में 116 रन बनाए. इस तरह से उनका टूर 594 रनों पर ख़त्म हुआ. इस दौरान उन्होंने 66.44 के एवरेज से 2 सेंचुरी और 4 हाफ़ सेंचुरी मारी.

मोहिंदर अमरनाथ 1983 वर्ल्ड कप फाइनल और सेमी-फाइनल दोनों ही मैचों में मैन ऑफ द मैच रहे थे.
मोहिंदर अमरनाथ 1983 वर्ल्ड कप फाइनल और सेमी-फाइनल दोनों ही मैचों में मैन ऑफ द मैच रहे थे.

कुछ ही वक़्त के अंतर पर अमरनाथ ने वर्ल्ड कप सेमी-फाइनल और फाइनल में बढ़िया परफॉर्म किया और इसी परफॉरमेंस की बदौलत लॉर्ड्स की बालकनी में कपिल देव चमचमाती ट्रॉफी लेकर खड़े दिखाई दिए थे. वर्ल्ड कप फाइनल में 7 ओवर में 3 विकेट लेने वाले अमरनाथ ही मैन ऑफ़ द मैच भी थे.


वीडियो देखें: एशिया कप में रोहित और धवन ने की पाकिस्तान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी ओपनिंग पार्टनरशिप

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