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जब डॉन ब्रेडमैन ने सुनील गावस्कर से शिवसेना के बारे में सवाल कर डाले

साल 1977-78. भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया के टूर पर थी. टूर के दौरान साउथ ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट असोसिएशन ने मेहमानों के लिए एक डिनर पार्टी रखी. पूरी टीम पार्टी में पहुंची. सबने अपनी-अपनी सीट पकड़ी. टीम के युवा बल्लेबाज और हाल ही में बने वाइस-कैप्टन सुनील गावस्कर ने अपनी सीट देखी और जाकर बैठ गए.

बगल की सीट खाली थी. कुछ वक्त बीता और गावस्कर की सीट पर आकर साक्षात डॉन ब्रेडमैन बैठ गए. ऐसे हाल में कोई भी युवा अचकचा जाए लेकिन ये कोई आम युवा तो था नहीं. ये था सुनील गावस्कर, वही गावस्कर जिन्होंने अपने डेब्यू टूर पर ही खौफ़नाक विंडीज़ के बोलर्स को ऐसा कूटा कि दुनिया वाह-वाह कर उठी.

तो गावस्कर शांत बैठे रहे और बड़े ध्यान से सर डॉन की बातें सुनते रहे. डॉन ने 1947-48 की इंडियन क्रिकेट टीम के बारे में बात की. फिर बताया कैसे उनकी विजय मर्चेंट और रूसी मोदी से बातचीत होती थी. इस बातचीत के दौरान सर डॉन ने एक घटना के लिए अफसोस भी जाहिर किया.

# डॉन का अफसोस

सर डॉन ने बातों-बातों में कहा,

‘साल 1948 के टूर के लिए जब हम लोग इंग्लैंड जा रहे थे, हमारा जहाज बंबई में किनारे लगा था. हजारों लोग सिर्फ एक बार मुझे देखने के लिए वहां इकट्ठा हुए थे. मैं डेक तक जाकर उनका अभिवादन भी नहीं स्वीकार पाया. इस बात का मुझे हमेशा अफसोस रहा. विजय मर्चेंट जहाज पर आकर मुझसे मिले थे. उन्होंने मुझसे कहा भी कि मैं डेक पर आकर फैंस की तरफ बस हाथ हिला दूं, लेकिन मैं उनके निवेदन को पूरा नहीं कर पाया.’

जहाज काफी देर तक बंबई डॉक पर खड़ा रहा. लेकिन सर डॉन इस पूरे वक्त अपने केबिन से बाहर नहीं निकले थे. उनका कहना था कि उनकी सेहत बहुत अच्छी नहीं थी और वह किसी इन्फेक्शन का रिस्क नहीं लेना चाहते थे. इसी के चलते वह अपने केबिन में ही रुके रहे. इस बातचीत के दौरान सर डॉन ने गावस्कर से भारत और शिव सेना के बारे में भी सवाल किए. इस पूरी चर्चा और डिनर पार्टी के दौरान गावस्कर को बहुत जोर से सूसू आ रही थी लेकिन वह अपनी जगह से हिले नहीं.


गावस्कर सर डॉन के साथ का एक भी मोमेंट मिस नहीं करना चाहते थे. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर गावस्कर ऐसा क्यों कर रहे थे? दरअसल इस टूर पर जाने से पहले बंबई के मशहूर कोच वासू परांजपे ने गावस्कर से कहा था कि सर डॉन के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताएं और उनसे होने वाली पूरी बातचीत नोट करके वासू तक लाएं.

वासू बंबई के चुनिंदा दिग्गज कोचों में से एक थे. वासू सर डॉन ब्रेडमैन को भगवान मानते थे और गावस्कर के लिए वासू का दर्जा बेहद ऊंचा था. ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट के जबरा फैन वासू गावस्कर के शुरुआती कोच थे और उन्होंने ही सुनील को ‘सनी’ निकनेम दिया था जो आज गावस्कर की पहचान बन चुका है.

यह क़िस्सा वासू पर आ रही किताब क्रिकेट द्रोण से लिया गया है. यह किताब पेंगुइन रैंडम हाउस से छपकर आ रही है.


वो टॉपमटॉप खिलाड़ी, जिन्हें लोग आज भी किसी न किसी वजह से याद करते हैं

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