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जब ब्रेडमैन को खेलते देखने के लिए जेल में सोए महात्मा गांधी के बेटे

क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा क्रिकेटर कौन है. इस बहस का कोई भी अंत नहीं है. हर चाहने वालों की नज़र में उनके देश से एक से एक महान क्रिकेटर निकले. लेकिन अगर क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज़्यादा औसत वाले बल्लेबाज़ की बात की जाएगी, तो सर डॉन ब्रैडमेन के आसपास उनके संन्यास के लगभग सात दशक बाद भी कोई नहीं है.

10 जून 1948 वो तारीख है जब ब्रैडमेन ऐलान करके अपने करियर की आखिरी सीरीज़ खेलने उतरे. वो सीरीज़ थी ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी इंग्लैंड के साथ एशेज़ की. वैसे तो इस सीरीज़ से भारत का कोई ताल्लुक नहीं है. लेकिन फिर भी इस सीरीज़ से महात्मा गांधी के सबसे छोटे बेटे देवदास गांधी का रिश्ता ज़रूर है.

महात्मा गांधी के चार बेटे थे. जिनमें सबसे छोटे थे देवदास.  क्रिकेट से बहुत प्यार था उनको. देवदास पेशे से पत्रकार थे और 1948 में हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ जुड़े हुए थे.

गांधी की हत्या के बाद RSS को लेकर पटेल के विचार काफी बदल गए. उन्हें समझ आ गया था कि गांधी की हत्या की जड़ वही हिंदुवादी सांप्रदायिकता है, जिसका जहर फैलाने में RSS का बड़ा हाथ है.
गांधी की हत्या के बाद RSS को लेकर पटेल के विचार काफी बदल गए. उन्हें समझ आ गया था कि गांधी की हत्या की जड़ वही हिंदुवादी सांप्रदायिकता है, जिसका जहर फैलाने में RSS का बड़ा हाथ है.

जब गांधी जी की हत्या की खबर मिली, भारत की टीम ऑस्ट्रेलिया में थी

भारत अब आज़ादी की सांस ले रहा था. लेकिन 1948 की शुरुआत में ही 30 जनवरी को बापू की हत्या हो गई. जिस वक्त बापू की हत्या हुई, आज़ाद भारत की क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी. ऑल इंडिया रेडियो के जरिए ये खबर भारतीय टीम तक पहुंची.

भारत के खिलाफ उस दौरे के तुरंत बाद ब्रैडमेन ने संन्यास का ऐलान कर दिया. उन्होंने घोषणा की कि

”इंग्लैंड के खिलाफ एशेज़ उनके करियर की आखिरी सीरीज़ होगी.”

ब्रैडमेन का ये फैसला इसलिए था क्योंकि वो 40 साल के होने जा रहे थे. ये वो वक्त था जब डॉन ब्रैडमेन को खेलते देखना क्रिकेट फैंस ही नहीं क्रिकेटर्स के लिए भी एक सपना होता था. जब ब्रैडमेन ने ये ऐलान कर दिया कि 10 जून से शुरू होने वाली सीरीज़ उनके करियर की आखिरी सीरीज़ है तो फिर पूरी दुनिया के क्रिकेट फैंस ब्रैडमेन को एक आखिरी बार देखने के लिए बेकरार हो गए.

Don Bradman
डॉन ब्रैडमेन का करियर औसत 99.94 का रहा. फोटो: Twitter

गांधी जी के बेटे ने ठान लिया अब ब्रैडमेन को एक बार देखना है

जब ये खबर दिल्ली में बैठे देवदास को मिली, तो वो भी ब्रैडमेन को कम से कम एक बार खेलते देखने के लिए बेकरार हो गए. वो सर डॉन और क्रिकेट को दीवानों की तरह चाहते थे. उन्होंने ठान लिया कि इस जीवन में वो ये मौका हाथ से नहीं जाने देंगे. वो ये मलाल लिए नहीं जीना चाहते कि उन्होंने कभी सर डॉन ब्रैडमेन को खेलते नहीं देखा. इत्तेफाक से उस वक्त वो एक मीटिंग के सिलसिले में लंदन में ही थे.

इतिहासकार रामचन्द्र गुहा ने एक बार रेडिफ में लिखा था कि जब देवदास से उनके एक सहकर्मी ने पूछा कि जब उनका अपने काम से मन भर जाएगा तो वो क्या करेंगे.

तो इसके जवाब में देवदास ने कहा था कि

”ब्रेडमेन को खेलते देखूंगा.”

फिर शुरू होती है ब्रैडमेन की आखिरी सीरीज़:

ब्रैडमेन की आखिरी सीरीज़ की खबर फैलते ही पूरी दुनिया के उनके फैंस उन्हें देखने के लिए इंग्लैंड पहुंच गए. ब्रैडमेन को एक आखिरी बार खेलते देखने के लिए. इंग्लैंड के जिस शहर में मैच होता था, वहां इतना भीड़ होती थी कि टिकट के दाम आसमान छूने लगते थे. इतना ही नहीं मैदान के अंदर एंट्री ले पाना भी अच्छे-अच्छों के बस की बात नहीं थी.

देवदास के पास भी इतना पैसा नहीं था कि वो इतनी महंगी टिकट खरीद सकें. गुहा ने इस बारे में विज़डन में लिखा,

”ट्रेंट ब्रिज टेस्ट की सभी टिकटें हाथों-हाथ बिक गईं. लेकिन फ्लीट स्ट्रीट के ग्रे इमिनेन्सिस से उन्होंने मैच के पास का जुगाड़ कर लिया.”

इस पास की मदद से देवदास का वो सपना सच होने वाला था, जो उन्होंने पिछले 20 सालों से देखा था. लेकिन मैच देखने का इंतज़ाम होने के बावजूद अब भी देवदास के लिए एक बड़ी परेशानी तैयार खड़ी थी.

ब्रैडमेन के दीवानेपन में नॉटिंघम शहर की सड़कों पर जगह-जगह लोगों के झुंड लग गए थे. सिर्फ भारत ही नहीं, इंग्लैंड के अलग-अलग शहरों से, ऑस्ट्रेलिया से, अफ्रीका से और वेस्टर्न कंट्रीज़ से भी कितने ही लोग ब्रैडमेन के लिए नॉटिंघम पहुंच गए थे.

पहले टेस्ट के पहले दिन का खेल:

इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज़ की शुरूआत हुई. इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग चुन ली. अब ब्रैडमेन को देखने आए फैंस का इंतज़ार और बढ़ गया. पहले दिन इंग्लैंड की टीम 165 रन बनाकर ऑल-आउट हो गई और ऑस्ट्रेलिया की पारी तो शुरू हुई लेकिन ब्रैडमेन की बारी नहीं आई. अब सारी उम्मीदें दूसरे दिन पर जा टिकी.

शहर में इतनी भीड़ लगने की वजह से सारे होटल, गेस्ट हाउस पूरी तरह से हाउसफुल हो गए. ऐसे में देवदास वहां ठहरने के लिए एक कमरे की तलाश में भटकते रहे. उन्हें ना तो कोई होटल मिला और ना ही कोई गेस्ट हाउस.

फिर देवदास ने जो किया वो कोई जुनूनी क्रिकेट फैन ही कर सकता है.

मैच देखने के लिए जेल में बिताई रात

जब कोई ठिकाना नहीं मिला, तो देवदास के दिमाग में एक आइडिया आया. आइडिया था जेल में ठहरने का. देवदास अपने पत्रकार होने का फायदा उठाकर नॉटिंघम काउंटी जेल के वार्डन के पास पहुंच गए. वहां पहुंचकर उन्होंने वार्डन को अपनी बातों में फंसाया और जेल में खुद की बुकिंग फिक्स कर ली.

महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन
महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन

जेल में रात गुज़ारने के बाद देवदास अगली सुबह उठते ही सीधे नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज क्रिकेट मैदान की दर्शकों से खचाखच गैलरी में पहुंच गए.

10 जून को शुरू हुए टेस्ट में ब्रैडमेन की पारी 11 जून को आई. दूसरे दिन के खेल के 32वें ओवर में आर्थर के बोल्ड होते ही मैदान पर एंट्री हुई दि लिजेंड सर डॉन ब्रैडमेन की. वो ब्रैडमेन जिन्हें देखने के लिए उस मैदान पर हज़ारों दर्शक मीलों दूर से आए थे. देवदास का सपना अब सच होता जा रहा था. उन्होंने भी हज़ारों फैंस के साथ पेट पर बंधी पैंट वाले और ढीली-ढाली शर्ट पहने डॉन ब्रैडमेन को मैदान पर उतरते देखा.

ब्रैडमेन मैदान पर उतरे और उन्होंने किसी को निराश नहीं किया. उन्होंने दूसरे दिन के खेल में 130 रन ठोके और फैंस की हर आरज़ू पूरी कर दी. ब्रैडमेन ने मैच की पहली पारी में 138 रन बनाए थे. उनकी उस पारी की मदद से ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 509 रन बनाए और 344 रनों की विशाल बढ़त ली. उस मैच की दूसरी पारी में इंग्लैंड की टीम 441 रन बना सकी और ऑस्ट्रेलिया के सामने 98 रनों का लक्ष्य रखा.

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डॉन ब्रैडमन. इमेज सोर्स: cluesarena.com

ऑस्ट्रेलिया ने दो विकेट खोकर इस स्कोर को हासिल कर लिया. ब्रैडमेन की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने उस सीरीज़ पर 4-0 से कब्ज़ा जमाया. अपने करियर की आखिरी सीरीज़ में ब्रैडमेन ने दो शतक और एक अर्धशतक जमाया.  लेकिन अपने करियर की आखिरी पारी में ब्रैडमेन शून्य के स्कोर पर आउट हो गए और कई फैंस को उनकी ऐतिहासिक बल्लेबाज़ी नसीब नहीं हो सकी.

लेकिन देवदास अपना सपना पूरा करके वापस भारत लौट आए.


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