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ड्रग्स और गैंगवॉर वाली जगह से निकलकर दुनिया का सबसे बड़ा T20 क्रिकेटर बनने की कहानी!

कायरन पोलार्ड. वेस्टइंडीज़ की वनडे और T20 टीम के कप्तान. दुनिया के सबसे बड़े T20 खिलाड़ी. 500 T20 खेलने वाले दुनिया के इकलौते खिलाड़ी. लेकिन एक समय ऐसा भी था जब पोलार्ड के पास खाने के भी पैसे नहीं थे.

12 मई, 1987 को ट्रिनिडाड के टकारिगुआ में पोलार्ड का जन्म हुआ. पिता नहीं थे. उनकी मां पर कायरन और उनकी दो बहनों की परवरिश का जिम्मा था. घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. मां उन्हें लेकर टुनापूना-पिआरको आ गईं. ये जगह ड्रग्स, गैंग वॉर, बंदूक की नोक पर क्राइम और खेल के दीवानेपन के लिए पहचानी जाती थी.

कायरन के सामने दो रास्ते थे. एक गलत मगर आसान. और दूसरा सही और खूब मेहनत वाला. उन्होंने दूसरा यानी खेल का रास्ता चुना. हालांकि इसके लिए भी उन्हें काफी कुछ छोड़ना पड़ा. क्रिकेट उनके लिए एक महंगा खेल था.

कैसे गली-मोहल्ले से निकलकर स्टार बने पोलार्ड:

जिस माहौल में पोलार्ड बड़े हुए वहां छह महीने क्रिकेट खेला जाता था और बाकी छह महीने फुटबॉल और एथलेटिक्स. ओलंपिक के समय सब एथलेटिक्स में लग जाते थे. फुटबॉल विश्वकप आता तो बच्चे फुटबॉल के पीछे पड़ जाते. और जब क्रिकेट होता था तो उनके शहर में सब लारा, एम्ब्रोस, कर्टनी वॉल्श बन जाते. पोलार्ड भी ऐसे ही एक बच्चे थे.

बचपन से ही उनके पास बड़े छक्के लगाने की नैचुरल एबिलिटी थी. लेकिन उनके टैलेंट का पता दुनिया को सेकेंडरी स्कूल में चला. वह शुरुआत में सिर्फ टेस्ट और वनडे क्रिकेट के बारे में ही सोचते थे. उनका सपना था कि वो पहले टीएंडटी के लिए खेलें और फिर वेस्टइंडीज़ टीम में जगह बनाएं.

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पोलार्ड फाइल फोटो

साल 2006 में पोलार्ड को वेस्टइंडीज़ की अंडर-19 टीम में खेलने का मौका मिला. इसके बाद फर्स्ट-क्लास और लिस्ट ए क्रिकेट से भी पहले उन्हें प्रोफेशनल T20 मैच खेलने का मौका मिल गया. बचपन में जिस तरह के क्रिकेट को वो पहचानते भी नहीं थे. उनकी ज़िंदगी उसके इर्द-गिर्द ही लिखी जानी थी. ट्रिनिडाड एंड टोबैगो के लिए वो स्टैनफोर्ड T20 टूर्नामेंट खेले. उस मैच में उनकी बैटिंग तो नहीं आई लेकिन उन्हें एक विकेट ज़रूर मिला.

इस टूर्नामेंट में पोलार्ड पर सलेक्टर्स की नज़र पड़ी. 20 की उम्र में उन्हें 2007 में वेस्टइंडीज़ की वनडे टीम में मौका मिल गया. लेकिन इसके साथ ही क्रिकेट अपनी दिशा बदल रहा था. उसी साल T20 विश्वकप खेला गया. अब क्रिकेट एक नए फॉर्मेट में आ चुका था. दुनियाभर में T20 लीग्ज़ का क्रेज़ बढ़ रहा था.

कैसे दुनिया की नज़र में चढ़े कायरन पोलार्ड:

साल 2008. स्टैनफोर्ड और इंग्लैंड का मैच. पोलार्ड ने दो विकेट लिए और इंग्लैंड की टीम 99 के स्कोर पर ढेर हो गई. स्टैनफोर्ड ने 7.2 ओवर में ये मैच 10 विकेट से जीत लिया. इस सीरीज़ के बाद पोलार्ड को करीब एक मिलियन डॉलर मिले.

पोलार्ड को ग्लोबल पहचान दिलाने वाला दूसरा मौका आया भारत में. 2009 का चैम्पियंस लीग. इसमें आईपीएल की टीमों के अलावा न्यू साउथ वेल्स और ट्रिनिडाड एंड टोबैगो की टीम ने भी हिस्सा लिया. हैदराबाद में खेले मुकाबले में NSW ने 20 ओवर में 170 रन बना दिए. जवाब में टीएंडटी की टीम ने 15.2 ओवर में 118 रनों पर छह विकेट गंवा दिए. लेकिन पोलार्ड ने अंत तक हार नहीं मानी. उन्होंने उस मैच में 18 गेंदों में 54 रनों की ऐसी पारी खेली कि मैच को 19वें ओवर में ही खत्म कर दिया.

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पोलार्ड की चैम्पियंस लीग की फाइल फोटो. फोटो: PTI

बड़ी बात ये थी कि उन्होंने इस मैच में ब्रेट ली, मोएसिज़ एनरिकेज़, डग बॉलिंजर और स्टुअर्ट क्लार्क जैसे इंटरनेशनल प्लेयर्स की गेंदों को बाउंड्री पार पहुंचाया था.

इस प्रदर्शन के तुरंत बाद आईपीएल में मुंबई इंडियंस की टीम ने साढ़े पांच करोड़ में पोलार्ड को अपने साथ जोड़ लिया. उन्होंने मुंबई टीम से जुड़ने के बाद कहा था,

”IPL में शामिल होना. जहां पर इतनी बड़ी कीमत वाले खिलाड़ी खेलते हैं. मेरे लिए काफी संतोषजनक था. IPL में मुझपर लगी बोली के बाद क्रिकेट के लिए मेरी मानसिकता पूरी तरह से बदल गई. क्योंकि अब मुझे ज़्यादा जिम्मेदारी और प्रोफेशनलिज़्म के साथ खेलना होगा.”

जब वेस्टइंडीज़ बोर्ड और लीग्ज़ के बीच फंस गए पोलार्ड:

साल 2010 के आसपास T20 लीग्ज़ में शानदार खेल की वजह से पोलार्ड का वेस्टइंडीज़ क्रिकेट बोर्ड के साथ भी टकराव हुआ. दरअसल पोलार्ड लीग में भी खेलना चाहते थे और वेस्टइंडीज़ के लिए भी. लेकिन वेस्टइंडीज़ बोर्ड के साथ कॉन्ट्रैक्ट का सीधा मतलब ये था कि उन्हें हर वक्त वेस्टइंडीज़ के लिए खेलने के लिए उपलब्ध रहना होता.

दरअसल, बोर्ड चाहता था कि पोलार्ड समरसेट के साथ खेलने की बजाए इंग्लैंड के ए दौरे पर टीम के साथ रहें. लेकिन पोलार्ड ने इस शर्त को नहीं माना. उन्होंने वेस्टइंडीज़ बोर्ड के साथ सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट को छोड़ दिया.

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वेस्टइंडीज़ के दिग्गज माइकल होल्डिंग. फोटो: WI Cricket

तब वेस्टइंडीज़ के ग्रेट माइकल होल्डिंग ने पोलार्ड पर कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पोलार्ड कोई क्रिकेटर हैं. होल्डिंग T20 क्रिकेट के आलोचक थे.

बोर्ड के साथ करार नहीं करने के फैसले की वजह से एक बार वेस्टइंडीज़ क्रिकेट के एक प्रशासक ने पोलार्ड से पूछा था,

”तुम एक लिजेंड के तरह याद किया जाना चाहते हो या फिर एक भाड़े के क्रिकेटर के रूप में?”

जवाब में पोलार्ड ने कहा था,

”मैं अपनी काबिलियत के साथ इंसाफ करूंगा और इस वक्त मैं दुनियाभर में जाकर खुद के खेल को बैक करूंगा.”

हालांकि पोलार्ड वेस्टइंडीज़ के लिए वनडे क्रिकेट खेलते रहे. उन्होंने T20 क्रिकेट भी खेला. लेकिन वेस्टइंडीज़ के सेंट्रेल कॉन्ट्रेक्ट से बाहर ही रहे, ताकि वो लगातार दुनियाभर में T20 क्रिकेट खेल सकें.

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कायरल पोलार्ड. फोटो: WI Cricket

अपने इस फैसले पर एक बार पोलार्ड ने कहा था,

”मैंने अपने इस फैसले के लिए दुनियाभर की मीडिया की आलोचना सुनी. दुनियाभर में लोगों के निशाने पर रहा. लेकिन मैं वो दिन देखने के लिए जी रहा हूं जब क्रिकेटर्स इंटरनेशनल क्रिकेट छोड़कर दुनियाभर में टीमों के लिए T20 खेलेंगे. जबकि उनके अंदर काफी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बाकी होगा. ऐसी चीज़ों के लिए किसी को तो पहल करनी ही थी.”

पोलार्ड ने अब तक 30 टीमों के लिए क्रिकेट खेला है. 500 T20 मैचों में पोलार्ड के नाम 10,000 रन हैं. T20 क्रिकेट में पोलार्ड ने 279 विकेट भी चटकाए हैं.

पोलार्ड कभी टेस्ट टीम में नहीं आ सके. साल 2016 से 2019 तक उन्हें टीम में जगह नहीं मिली. सलेक्टर्स के बदलते ही 2019 में वह वेस्टइंडीज़ टीम में लौटे भी, और वनडे और T20 टीम के कप्तान भी बने.

पोलार्ड का 15 साल लंबा करियर विवादों में रहा. लेकिन उन्होंने वो ज़रूर हासिल कर लिया जो वो हमेशा से अपने परिवार के लिए चाहते थे. वो अपने परिवार को अच्छी ज़िंदगी देना चाहते थे. पोलार्ड की यही कोशिश रही कि वो अपनी बुजुर्ग मां को एक आरामदायक रिटायरमेंट की ज़िंदगी दे सकें.

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कायरल पोलार्ड की पत्नी और बेटा. फोटो: KP Twitter

बचपन की मुफलिसी को अपने प्रेरणा बताते हुए पोलार्ड ने कहा था,

”मैं ये नहीं चाहता कि मेरा परिवार भी उसी हालात से गुज़रे जिस हालात से मैं गुज़रा हूं. इसलिए मैं जब भी मैदान पर उतरता हूं तो उनकी प्रेरणा मुझे परफॉर्म करने का ज़ज़्बा देती है.”


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