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जब हज़ारों दर्शकों और कपिल देव के बीच स्टम्प लेकर खड़ा हो गया अंपायर!

साल 1983 में जब इंडियन टीम इंग्लैंड के लिए उड़ी, तो दुनिया में किसी ने भी इस टीम पर दांव नहीं लगाया था. इंडियन टीम को फायदा भी इसी बात का मिला. कपिल देव की कप्तानी वाली टीम ने विश्वकप में सिर्फ वेस्टइंडीज़ ही नहीं, बल्कि इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और ज़िम्बाब्वे से भी मुश्किल मुकाबले जीते और विश्वकप पर अपना कब्ज़ा जमाया.

22 जून 1983 की तारीख भारतीय क्रिकेट के लिए विश्वकप फाइनल से कम नहीं है. क्योंकि इस दिन टीम इंडिया ने सेमीफाइनल मुकाबले में होम टीम इंग्लैंड को हराकर ये विश्वास हासिल किया था कि वो विश्वविजेता बन सकते हैं.

Team India 1983
1983 विश्वकप में टीम इंडिया.

मज़ा-मस्ती के लिए इंग्लैंड पहुंची टीम को कपिल देव ने पहली मीटिंग में विश्वास से भर दिया. उन्होंने हिन्दी में अपनी टीम से कहा,

”जवानों! चलो खेलो, लड़ो, हम खेलेंगे, मज़ा करेंगे.”

टूर्नामेंट की शुरुआत हुई

इसके बाद पहले ही ग्रुप मुकाबले में टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज़ को हरा दिया. इसके बाद ज़िम्बाबवे पर जीत के साथ टीम का आत्मबल और भी बढ़ गया. क्योंकि ये वो ही ज़िम्बाबवे की टीम थी, जिसने इस मैच से ठीक पहले मजबूत ऑस्ट्रेलिया को हराया था.

लेकिन पहले दोनों मुकाबले जीतने के बाद गाड़ी पटरी से उतरी और पहले ऑस्ट्रेलिया और फिर ज़िम्बाब्वे ने हमें धूल चटा दी. लेकिन इसके बाद ऐतिहासक मुकाबले में कपिल की 175 रनों की पारी से भारत ने ज़िम्बाब्वे को फिर से हराया और ग्रुप के आखिरी मैच में ऑस्ट्रेलिया को बुरी तरह से रौंद दिया. इस जीत के साथ भारतीय टीम में ये विश्वास आ गया कि अब हम किसी भी टीम को पटखनी दे सकते हैं.

22 जून 1983, भारत और इंग्लैंड, ओल्ड ट्रेफर्ड, सेमीफाइनल

जब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल में पहुंची, तो वहां उसकी टक्कर इंग्लैंड से होनी थी. लेकिन मीडिया से लेकर पूरी दुनिया अब भी ये ही मानकर चल रही थी कि इंग्लैंड में इंग्लैंड को हरा पाना आसान नहीं है. इंडियन टीम का सफर अब सेमीफाइनल से आगे नहीं बढ़ पाएगा. इंग्लैंड टीम तो टीम इंडिया को ऐसे देखती थी, जैसे सेमीफाइनल में उनका मैच किसी स्कूल टीम से होने वाला है. लेकिन इंग्लैंड के इसी ओवर कॉन्फिडेंस ने टीम इंडिया की मदद कर दी.

ओल्ड ट्रेफर्ड के मैदान पर इंग्लिश कप्तान बॉब विलिस ने टॉस जीता और बैटिंग चुनी. भारतीय टीम की गेंदबाज़ी आई. इंग्लैंड के लिए ग्रेम फोलर (33 रन) और क्रिस टेवर (32 रन) ने अच्छी शुरुआत की. इन दोनों ने पहले विकेट के लिए 69 रन जोड़े. लेकिन रॉजर बिन्नी ने टीम को पहला विकेट दिलाया. इसके बाद बिन्नी ने 84 के स्कोर तक दूसरे ओपनर को भी आउट किया. लेकिन 100 रन पार होते ही जब इंग्लैंड के सबसे मजबूत बल्लेबाज़ ऐलन लैम्ब (29 रन) रन-आउट हुए तो टीम इंडिया की नज़र में अब सिर्फ इआन बोथम का महत्वपूर्ण विकेट रह गया. कीर्ति आज़ाद ने सिर्फ 6 रन पर बोथम को ऐसा बोल्ड किया कि उनके चेहरे का रिएक्शन मैच देख रहा एक शख्स पढ़ सकता था.

Kapil And Team India
1983 विश्वकप में टीम इंडिया

देखते ही देखते इंग्लैंड की टीम को कपिल देव, अमरनाथ और बिन्नी ने 60 ओवरों में सिर्फ 213 रनों पर रोक दिया.

इनिंग्स ब्रेक में टीम ड्रेसिंग रूम में पहुंची

ड्रेसिंग रूप में पहुंचते ही टीम के कप्तान कपिल देव और अनुभवी सुनील गावस्कर ने पूरी टीम में एक-एक से बात करनी शुरू की. वो बार-बार हर खिलाड़ी को ये कह रहे थे-

”सिर्फ अच्छी शुरुआत और दो अच्छी पार्टनरशिप के बाद गेम हमारा है.”

लेकिन टीम इंडिया की शुरुआत ऐसी नहीं रही. टीम इंडिया ने 50 रन के अंदर अंदर ही दो विकेट गंवा दिए. टीम के सबसे दिग्गज बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर (25 रन) और क्रिस श्रीकांत (19 रन) आउट होकर वापस पवेलियन जा चुके थे. लेकिन उसके बाद मोहिंदर अमरनाथ और यशपाल शर्मा ने पूरी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर उठाली. अमरनाथ पूरे टूर्नामेंट में टीम की जान थे. वो लगातार खेल को बदलते थे. टीम की बैटिंग की बैकबोन थे.

Amarnath
मोहिंदर अमरनाथ

अमरनाथ और यशपाल ने उस वक्त 92 रनों की पार्टनरशिप की. उसने एक टोन सेट की और ड्रेसिंग रूम में ये विश्वास जागा कि अब हम मैच में वापसी कर सकते हैं.

उस मैच में माहौल इतने टेंशन का था कि इस पार्टनरशिप को देखते हुए. कीर्ति आज़ाद, संदीप पाटिल और खुद कप्तान कपिल देव भी पैड करके तैयार बैठे थे. सुनील गावसकर भी बुरी तरह से टेंशन में थे.

कपिल देव इतना नर्वस थे कि वो एक जगह ठहर भी नहीं पा रहे थे. वो बार-बार कभी नीचे कभी ऊपर आ रहे थे. उन्होंने इस मुश्किल हालात में टीम के सबसे अनुभवी स्टार सुनील गावस्कर से पूछा कि अब अगले विकेट के बाद किसे भेजना चाहिए.

सुनील गावस्कर ने पहली इनिंग में 66 रन बनाए थे.
सुनील गावस्कर ने पहली इनिंग में 66 रन बनाए थे.

सुनील ने एक ही जवाब दिया,

”पैनिक करने की कोई ज़रूरत नहीं है. जो बैटिंग ऑर्डर है, उसी हिसाब से चलने दो. बिल्कुल हम इस मैच को जीतेंगे.”

पार्टनरशिप का पतन और टेंशन का उदय

अमरनाथ और यशपाल शानदार खेल रहे थे. टीम इंडिया को 108 गेंदों में अब 86 रनों की ज़रूरत थी. लेकिन जीत से सिर्फ 72 रन पहले यानी 142 के स्कोर अमरनाथ रन-आउट हो गए. इंग्लैंड के खेमे में खुशी का माहौल. मैदान पर बैठे अंग्रेज़ फैंस को अब भी जीत की खुशबू आ रही थी. एक तरफ रनरेट बढ़ रहा था और दूसरी तरफ भारत की एक अहम साझेदारी टूट गई.

संदीप पाटिल ने छीन लिया इंग्लैंड से मैच

अब कपिल देव ने संदीप पाटिल को मैदान पर उतारा. वो आए उन्होंने गार्ड लिया और यशपाल शर्मा से सिर्फ एक ही बात कही,

”तू बस 60 ओवर तक टिके रहना. मैं अपना काम कर लूंगा.”

मैदान पर उतरते ही संदीप ने ये मन बना लिया था कि जैसी गेंदबाज़ी होगी वो उस हिसाब से ही बल्लेबाज़ी करेंगे. बॉब विलिस ने एक लूज़ गेंद दी और संदीप ने उस गेंद को बाउंड्री के लिए पहुंचा दिया. संदीप ने जो शॉट मारा, वैसा कोई भी शॉट क्रिकेट की कोचिंग बुक में नहीं दिखता.

Sandeep Patil
संदीप पाटिल: फाइल फोटो ट्विटर.

लेकिन इस शॉट से उनके अंदर विश्वास जागा और उन्होंने अपने नेचुरल तरीके से खेलना शुरू कर दिया. इस मैच से पहले भी वो ज़िम्बाब्वे के खिलाफ 92.59 और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 120 के स्ट्राइक रेट से खेल चुके थे. उस दौर में इस स्ट्राइक रेट का मतलब बहुत ज़्यादा होता था.

इसके बाद पाटिल ने 32 गेंदों पर 8 चौकों के साथ 51 रनों की ऐसी तूफानी पारी खेली कि मैच को 55वें ओवर में ही भारत की पहुंच में ला दिया.

जीत से पहले ही मैदान पर दौड़ आए भारतीय फैंस

55वें ओवर में कपिल देव ने जैसे ही दो रन लिए, मैदान पर मौजूद भारतीय फैंस को ये गलतफहमी हुई की टीम इंडिया मैच जीत गई. सभी फैंस सुरक्षा घेरा तोड़कर मैदान पर दौड़ आए. ये देखते ही सिक्योरिटी गार्ड्स और अंपायर डॉन ऑस्लियर और डेविड ईवान्स पिच के पास उसे बचाने के लिए पहुंच गए. अंपायर्स स्टम्प्स को हाथ में एक डंडे की तरह पकड़कर फैंस को भगाने के लिए खड़े थे. तुरंत मैदान पर से सभी दर्शकों को खदेड़ कर बाहर किया गया.

लेकिन इसके बाद मैनचेस्टर के मैदान पर वो हुआ, जो शायद ही क्रिकेट के इतिहास में कभी हुआ होगा. इंग्लिश कप्तान बॉब विलिस ने ऑन साइड के और बाउंड्री पर खड़े अपने सभी फील्डर्स को ऑफ साइड पर विकेट के पास बुला लिया. दरअसल ऑन साइड पर भारतीय फैंस बड़ी तादात में थे. इस वजह से इंग्लिश कप्तान को अंदाज़ा था कि भीड़ इंग्लैंड के खिलाड़ियों के साथ धक्का-मुक्की कर सकती है.

भारत को जीत के लिए अब सिर्फ एक रन चाहिए था और विकेटकीपर और बॉलर को छोड़कर इंग्लैंड की पूरी टीम ऑफ साइड पर एकसाथ खड़ी थी, जबकि संदीप पाटिल और कपिल देव ऐसा होते देख ज़ोर-ज़ोर से हंस रहे थे.

इसके बाद विलिस की गेंद पर विकेट के पीछे चौका आया और टीम इंडिया ने ये ऐतिहासिक सेमीफाइनल जीत लिया. शॉट लगने के साथ भारत और इंग्लैंड के खिलाड़ी दर्शकों से बचने के लिए तूफान सी रफ्तार में ड्रेसिंग रूम की तरफ भाग निकले.


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