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अजय देवगन की 'दिलजले' के किस्से: जब ऐक्टर ने फ़िल्म में रोल और दाढ़ी के बीच, अपनी दाढ़ी को चुना

दिलजले…दिलजले… अरे लाले, यहां तो सभी दिलजले हैं.

कुछ याद आया! अमरीश पुरी की दमदार आवाज़. और वो दिल को चीर देने वाली उनकी हंसी. बचपन याद दिला दिया लाले. दिलजले (Diljale) के डायलॉग मुंहज़बानी याद हुआ करते थे. आज भी यूपी के गाँवों में कुछ लड़के नाइंटीज़ में जी रहे हैं. टिपिकल अजय देवगन कट हेयरस्टाइल. दिलजले वाली दाढ़ी और फ़ोन में बजेगी अजय देवगन की आवाज़ में रिंगटोन :

आग जो दिल में लगी है, उसे दुनिया में लगा दूंगा मैं
जो तेरी डोली उठी, ज़माने को जला दूंगा मैं

मोबाइल की दुकानों से गुज़रिए. एक न एक लड़का मिलेगा जो दुकानदार से कह रहा होगा: भाई मोबाइल में दिलजले भर दो. वो कम से कम 10 बार दिलजले देख चुका है. पर कैसे भूल जाए उस शबनम को, जो आग है. कैसे भूल जाए राधिका को, जिसके प्यार में शाका ने ज़माने को आग लगाने की ठान रखी है.

मैंने दिलजले इतनी देखी जितनी देखी जा सकती थी
लेकिन फिर भी दो आंखों से कितनी देखी जा सकती थी

दिलजले शायरी का एक दौर चला. ट्रक के पीछे वाली शायरी का उदय शायद दिलजले से हुआ होगा. आज भी सिंगल लड़कों की फेसबुक वॉल देखिए. किसी न किसी ने ज़रूर लिखा होगा: मेरी कोई प्रेम कहानी नहीं है. शायद वो मुझे आतंकवादी समझती है.

मॉडर्न मीम ज़माने में जैसे गैंग्स ऑफ वासेपुर कल्ट है, वैसे ही नाइंटीज़ की कल्ट है, दिलजले. आज उसी कल्ट-कटीली जोशीली फ़िल्म के कुछ किस्से हमारे हिस्से आये हैं. उन्हें आपके हवाले करते हैं:

# शाका के लिए अजय देवगन नहीं थे पहली पसंद

दिलजले में मधु और अजय देवगन
दिलजले में मधु और अजय देवगन

अजय देवगन के करियर को धार देने वाला रोल शाका. जिसने रातों रात उन्हें स्टार बना दिया. लोग उनके पीछे पागल हो गये. रास्ते में भी शाका की आवाज़ सुन लेते तो ठहर जाते. ऐसा दमदार और करियर पलट किरदार सबसे पहले उन्हें नहीं, अक्षय कुमार को ऑफर हुआ था. फिर बीच में अजय कैसे आ धमके? इस किस्से के दो वर्ज़न हैं. एक में यह माना जाता है कि अक्षय कुमार के पास डेट्स का इशू था. उन्होंने फ़िल्म रिजेक्ट कर दी. तब अजय को मिली. और दूसरे वर्ज़न में कहा जाता है. डायरेक्टर हैरी बवेजा दो-तीन साल से दिलजले पर काम कर रहे थे. वो अक्षय को अप्रोच भी कर चुके थे. फिर दिलवाले में अजय के साथ उन्होंने काम किया. उन्हें उनका काम इतना पसंद आया कि अक्षय की जगह अजय को साइन कर लिया. ख़ैर जो भी वर्ज़न सही हो. अजय देवगन की तो निकल पड़ी. जब वो दारा से कहते हैं:

शाका का बस चले तो हर मंडप जला दे. यहां के 40 गांव में किसी की शादी न हो.

वो इतने बेहतरीन और जबर कनविक्शन से कहते हैं कि उनकी जगह किसी और को इस रोल में इमैजिन करना भी पाप होगा.

#परमीत से पहले 5 लोगों को ऑफर हुआ रोल

दिलजले में परमीत सेठी
दिलजले में परमीत सेठी

इस फ़िल्म का लगभग हर किरदार पहले किसी और को ऑफर हुआ. उसके बाद अपनी मंज़िल तक पहुंचा. एक किरदार है कैप्टन रणवीर का. जिसे परमीत सेठी ने निभाया है. यह ऐसा रोल है, जो परमीत से पहले 5 लोगों को ऑफर हुआ. सबसे पहले ऑफर हुआ, मिलिंद गुनाजी को. उन्होंने सिर्फ़ इसलिए फ़िल्म रिजेक्ट कर दी, क्योंकि इसके लिए उन्हें अपनी दाढ़ी हटानी पड़ती. मिलिंद के बाद रोल लुढ़कते-लुढ़कते सुनील शेट्टी के पास पहुंचा. वो ‘बॉर्डर’ के शूट में बिज़ी थे. अब रोल पहुंचा सनी देओल के पास. वो भी बॉर्डर शूट कर रहे थे. फिर संजय दत्त के पास. उन्होंने भी पोपटलाल वाला रूप धारण कर लिया. अंत में जब फ़िल्म 1995 में अनाउन्स हुई, तब आदित्य पंचोली इस रोल के लिए कन्फर्म थे. न जाने क्या हुआ, वो भी बैक आउट कर गये. फिर कहीं जा के यह रोल मिला परमीत सेठी को. कह सकते हैं: रोल-रोल पर लिखा है, करने वाले का नाम.

# जूही चावला को मिलता राधिका का किरदार

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हमने अभी क्या बताया था कि लगभग हर रोल पहले किसी और को ऑफर हुआ था. एक और किस्सा सुनिए. राधिका के रोल ने सोनाली बेंद्रे की किस्मत चमका दी. यह उनके करियर की माइलस्टोन फ़िल्म है. पर वो राधिका के लिए पहली पसंद नहीं थीं. मेकर्स जूही चावला को साइन करना चाहते थे. पर उनके पास डेट्स नहीं थीं. होतीं भी कैसे! पूरी क़ायनात ने साज़िश की थी कि यह रोल मिले सिर्फ़ और सिर्फ़ सोनाली बेंद्रे को. नहीं तो वो नाइंटीज़ के लड़कों की क्रश कैसे बन पाती. इसी बात पर हिमेश का एक गाना याद आ गया: कितने अरमाण…माण…माण.. ख़ैर आगे बढ़ते हैं.

#अमरीश पुरी न होते तो कौन होता!

दिलजले में अमरीश पुरी
दिलजले में अमरीश पुरी

अमरीश पुरी ने जो किरदार निभाया उसे अमर कर दिया. उनके मुंह से जो डायलॉग निकलता, उस पर अमरता की छाप होती. इसी मूवी के तमाम डायलॉग देखिए.

बंदूकें, बम, हथियार. लूट लाया रे, तू तो पुलिस को लूट लाया.

और सबसे ज़रूरी डायलॉग के बाद का अट्टहास. यह कौन कर सकता है. सिर्फ़ और सिर्फ़ अमरीश पुरी. उन्हें रिप्लेस करना असंभव है. पर इस रोल के लिए वो भी पहली पसंद नहीं थे. हैरी बवेजा ने इसके लिए सबसे पहले रज़ा मुराद को अप्रोच किया. उन्होंने रोल रिजेक्ट कर दिया. और फ़िल्म आ गयी अमरीश पुरी की झोली में. नहीं तो हम कैसे सुनते लाले:

प्रेमी है…पागल है… दीवाना है…पर यह मत भूल कि दुनिया की नज़रों में तू आतंकवादी है और आतंकवादी की प्रेम कहानी नहीं होती.

और फिर उनका अट्टहास. लूप पर लगाकर सुना जा सकता है.

#सफल रहा हैरी बवेजा का एक्सपेरिमेंट

हैरी बवेजा ने 1994 में अजय देवगन के साथ एक फ़िल्म बनायी, ‘दिलवाले’. इसके ऑडियो कैसेट्स में फ़िल्म के डायलॉग इस्तेमाल किये गये. ठीक उसी तरह दिलजले के डायलॉग्स की ऑडियो कैसेट भी बनायी गयी. मार्केट में तहलका मच गया. लोग गाने सुनने से ज़्यादा अजय देवगन, मधु और सोनाली की आवाज़ सुनने के लिए कैसेट खरीदते.

जब सोनाली बेंद्रे कहती:

होने को तो कुछ भी हो सकता है मेरे श्याम.

या फिर जब अजय देवगन कहते:

लाले क्या बताऊं यार! वो जिस ज़मीं पे पैर रखती है वो ज़मीं महकने लगती है और अगर वो अपने लंबे बालों को खुला छोड़ दे, तो ये कुदरत बहकने लगती है.

लोग पागल हो जाते. कैसेट ऐसी चली कि आज भी लोग इसे डाउनलोड करते हैं. बाक़ायदा उसकी रिंगटोन लगाते हैं. इंटरनेट पर इसकी ऑडियो क्लिप्स मौज़ूद हैं.

#इसके एक गाने का म्यूजिक, और चार गानों में हुआ है प्रयोग

फ़िल्म का म्यूजिक भी ख़ूब पसंद किया गया. अनु मलिक उस समय अपने उरूज़ पर थे. हर दूसरी फ़िल्म में उनका म्यूजिक होता. नाइंटीज़ के महारथी कुमार सानू, उदित नारायण, और अलका याग्निक ने इस मूवी में गाने गाये. एक कमाल का ट्रिविया बताते हैं. दिलजले में एक गाना है बूम-बूम शाका ला…इसके 1 मिनट 22 सेकंड पर जो म्यूजिक इस्तेमाल हुआ. उसे और चार गानों में इस्तेमाल किया गया.

  • काला साम्राज्य के ‘आओ ना’ के इंट्रो में.
  • मिस्टर रोमियो के ‘रोमियो तेरी किस्मत’ के इंट्रो में.
  • बारूद के गाने ‘मेरी सांसों में गर्मी’ के 55वें सेकंड में.
  • राम जाने के गाने ‘फेंक हवा में एक चुम्मा’ के 50वें सेकंड में.

है न कमाल ट्रिविया. फ़िल्म के म्यूज़िक को पहले अमिताभ बच्चन के प्रोडक्शन हाउस एबीसीएल के तहत रिलीज़ किया जाना था. फिर एबीसीएल दीवालिया हो गयी.  बाद में म्यूजिक राइट्स टी-सीरीज़ ने ख़रीदे और इसका म्यूजिक रिलीज़ हुआ.

जब तक नाइंटीज़ का नॉस्टैल्जिया है, तब तक दिलजले की रिंगटोन मोबाइल में बजती रहेंगी. और इन हवाओं में अजय देवगन की आवाज़ गूंजती रहेगी क्योंकि

‘शाका मर नहीं सकता दारा. ना ही ज़िंदा पकड़ा जा सकता है. बस मार सकता है और सिर्फ़ मार सकता है.’

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