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रजनीकांत किस एक्टर की नकल करते थे और किसे देखकर सिगरेट उछालना सीखा?

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‘2.0’ को सिनेमा घरों में पहुंचे दो हफ्ते होने जा रहे हैं. रजनीकांत इस दौरान चर्चा में रहे हैं. जैसे हर रिलीज के वक्त हर साल होते हैं. इस बार एक ताकतवर वजह ये भी है कि जब से उन्होंने राजनीति में आने की घोषणा की है तब से उनके अगले बड़े कदम का सबको इंतजार है. इस कारण इंडिया टुडे मैगजीन ने 12 दिसंबर 2018 के अंक में उनको आवरण पर रखा है. इसमें प्रकाशित अपने इंटरव्यू में रजनी ने कुछ ऐसे जवाब भी दिए जो बहुत से फैन्स को नहीं पता होंगे. जैसे एक जगह जब उनसे पूछा गया कि करियर में आपने सबसे बड़ी बात क्या सीखी है तो ज़ोर से ठहाका लगाते हुए वे बोले – “(कि) सबकुछ ड्रामा है.”

प्रस्तुत है इस बातचीत से निकली 10 जानने लायक बातें.

~ 1.  रजनीकांत की खुद की फेवरेट फिल्में कौन सी हैं?
उन्होंने जितनी फिल्में की हैं उसकी लिस्ट बहुत लंबी है. इनमें से प्रशंसकों को कौन सी फिल्में और रोल सबसे ज्यादा पसंद हैं, इसे लेकर एक राय नहीं हो सकती. लेकिन ख़ुद रजनीकांत को अपनी कौन सी फिल्में/रोल पसंद हैं इसे लेकर उन्होंने जो बताया है वो बहुत से फैन्स को सरप्राइज़ करेगा. उनका कहना है, “बाशा (बाशा, 1995), एलेक्स पांडियन (मूंड्रू मुगम, 1982) और श्री राघवेंद्र (श्री राघवेंद्रार, 1985). ये तीन ऐसे किरदार हैं जिनको याद करके मैं कह सकता हूं कि एक अभिनेता के तौर पर मैंने कुछ किया है.”

~ 2.  सेट पर रजनीकांत जैसे बिहेव करते हैं, उसके पीछे ये कारण है
बड़े फिल्मस्टार्स अकसर सेट पर जूनियर आर्टिस्ट्स और दूसरे लोगों से हंसी-मजाक करते हुए दिखते हैं. एक खास तरह से व्यवहार करते हैं. ये अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख खान तक में नोटिस किया गया है. रजनी भी एक कैजुअल अंदाज से व्यवहार करते हैं. लेकिन वो अपने मन के लिए नहीं बल्कि एक कारण से ऐसा करते हैं. वो बताते हैं, “मैं जब सेट पर जाता हूं और शूट नहीं चल रहा होता तो चुटकुले सुनाता हूं, हंसी-मज़ाक करता हूं और जूनियर्स जब मेरे पास आते हैं तो उन्हें सहज बनाने की कोशिश करता हूं. मैं चाहता हूं कि वे आज़ाद होकर चलें. इसके लिए मुझे ही पहल करनी होती है. मुझे उनके साथ अन्य विषयों पर बातें करनी होती हैं. उनसे घुलना-मिलना होता है ताकि वे बेफिक्र और सहज महसूस करें.”

अपने सबसे अज़ीज़ दोस्त राज बहादुर के साथ रजनी. वे कंडक्टर होते थे और राज बहादुर बस चलाते थे.

~ 3.  बस कंडक्टर से अभिनेता कैसे बने?
इसकी शुरुआत बैंगलुरु से हुई. वहां हर साल कर्नाटक परिवहन विभाग की सालगिरह पर हर डिपो को एक नाटक करना होता था. जिस डिपो में रजनीकांत बस कंडक्टर थे, उसे भी नाटक करना था. तो रजनीकांत ने ‘दुर्योधन’ नाटक करने की सोची क्योंकि वे एनटीआर के बड़े प्रशंसक थे. एनटीआर बहुत बड़े तेलुगु एक्टर, डायरेक्टर, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री रहे थे. रजनी उनकी नकल करते थे. तो स्टेज पर उन्होंने एनटीआर की अच्छी नकल उतारी. उसके बाद उनके साथी ड्राइवर ने कहा कि तुम शानदार एक्टिंग करते हो. ये बस डिपो तुम्हारे लिए सही जगह नहीं है. तुम मद्रास फिल्म इंस्टिट्यूट जाओ. एक दिन तुम बड़े एक्टर बनोगे. उसने रजनी को बड़ा मोटिवेट किया. उनके बड़े भाई (सत्यनारायण राव) ने भी आर्थिक मदद दी. फिर रजनी ने 1973 में मद्रास फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला ले लिया. वहां उनकी मुलाकात डायरेक्टर के. बालाचंदर से हुई. उन्होंने अपनी फिल्म ‘अपूर्व रागांगळ’ के लिए रजनीकांत को चुन लिया.

~ 4.  रजनीकांत की सिग्नेचर स्टाइल कहां से आई?
इसका श्रेय भी डायरेक्टर बालाचंदर को ही जाता है. रजनी कहते हैं, “उन्होंने ही मेरे अंदर की गति को पहचाना जो काम करने के दौरान या एक्टिंग के दौरान मुझमें दिखती थी. उन्होंने कहा कि इसे बनाए रखना क्योंकि ये तुम्हारी मौलिकता है, तुम्हारी शैली है, तुम्हारा हस्ताक्षर है, तुम्हारा स्टाइल है. और इसी तरह मेरी शैली (स्टाइल) विकसित हुई.” रजनी में यहीं से एक नया आत्मविश्वास उभरा और उन्हें फिर पलटकर नहीं देखना पड़ा.

~ 5.  उन्होंने सिगरेट उछालने वाला स्टाइल इस एक्टर से लिया था
रजनीकांत की फिल्मों में उनके सबसे हिट स्टाइल्स में से एक है सिगरेट को हवा में उछालकर होठों से पकड़ना और जलाना. बाद में साउथ के सारे बड़े स्टार लोगों ने इसकी कॉपी की. लेकिन ये भी रजनी का अपना स्टाइल नहीं है. ये उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा को देखकर पिक किया था. रजनी बताते हैं, “शत्रुघ्न सिन्हा ने पहली बार इसे हिंदी फिल्मों में किया था. मैंने इसे वहां से उठाया और उसमें बहुत सुधार किया. इसे एकदम सटीक बनाने के लिए मुझे हजार से अधिक बार अभ्यास करना पड़ा. यह एक टैलेंट है लेकिन उससे भी अधिक ज़रूरी है उसकी टाइमिंग. सिगरेट को सिर्फ उछालना ही नहीं था, बल्कि अपने डायलॉग भी बोलने थे. कुछ एक्टिंग करते हुए सिगरेट को उछालना और फिर वापस पकड़ना होता था.”

~ 6.  शुरू में किस एक्टर की नकल करते थे रजनीकांत?
शिवाजी गणेशन की. शुरू से ही. वे उनकी नकल करने की कोशिश करते था. यहां तक कि अपनी डायलॉग डिलिवरी में भी करते थे. लेकिन जब वे डायरेक्टर बालाचंदर के साथ काम कर रहे थे तो उन्हें समझ में आया. बालाचंदर ने रजनीकांत को समझाया कि जब पहले से एक शिवाजी गणेशन है तो तुम शिवाजी गणेशन की नकल क्यों करना चाहते हो? रजनी कहते हैं कि इस बात ने उनको पूरी तरह बदल कर रख दिया.

~ 7.  जिस हीरोइन के साथ काम करने में सबसे ज्यादा मज़ा आया
फटाफट जयलक्ष्मी (जयलक्ष्मी रेड्डी) के साथ अपने काम को रजनी ने सबसे ज्यादा एंजॉय किया. वे कहते हैं, “फटाफट जयलक्ष्मी एक शानदार हीरोइन थीं. हमने बस दो ही फिल्में कीं लेकिन वे बहुत अच्छी थीं.”

~ 8.  उन्होंने हिमालय की यात्राएं की हैं
रजनीकांत परदे पर एक मसालेदार व्यक्तित्व वाले आदमी हैं लेकिन असल जिंदगी में उनका एक मजबूत आध्यात्मिक पक्ष भी है. और बचपन से उन्होंने इस पक्ष को टटोलना शुरू कर दिया था. इसके बारे में वे बताते हैं, “मेरे बड़े भाई सत्यनारायण बहुत आध्यात्मिक इंसान हैं. बैंगलुरु में मेरे घर के पास ही रामकृष्ण आश्रम था. जब मैं सात साल का था तब से ही उन्होंने मुझे उस आश्रम भेजना शुरू कर दिया था. इसीलिए बचपन से ही मैं वेदों, उपनिषदों, ध्यान आदि से परिचित हो गया था. आगे चलकर में कई गुरुओं के संपर्क में आया और मैंने हिमालय की कई यात्राएं भी कीं. ये एक गहरा विषय है. इसे वही समझ सकता है जो इसमें उतरे. इसे शब्दों में बता पाना मुश्किल है. मुख्य रूप से कहूं तो आपको इससे शांति मिलती है.”

हिमालय यात्राओं के दौरान रजनी.
हिमालय यात्राओं के दौरान रजनी.

~ 9.  कमल हसन ने एक बार उनकी मदद की थी
एक आम सोच ये भी है कि रजनीकांत और कमल हसन के बीच एक किस्म की प्रतिस्पर्धा है. दोनों ही तमिल और हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार रहे हैं, और अब राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी भी हैं. कमल ने अपनी पोलिटिकल पार्टी बना ली है – मक्कल नीधि मैय्यम. और रजनीकांत ने अभी अपनी पार्टी के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन अपने फैंस को रजनीकांत मंडल मंड्रम तले लाकर उनका इस्तेमाल तमिलनाडु में पार्टी कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करने में कर रहे हैं. लेकिन क्या वाकई में दोनों में कोई टक्कर है. जब ये रजनी से पूछा जाता है तो वो कहते हैं, “प्रतिद्वंद्वी? किसने कहा? बिलकुल नहीं. मैं तो उन्हें अपना प्रतिस्पर्धी भी नहीं कहूंगा.” वे बोलते हैं, “वो (कमल) मेरे अज़ीज़ दोस्त हैं. मेरे साथी आर्टिस्ट हैं. बल्कि एक धारावाहिक में तो वो मुझे मेरी डायलॉग डिलीवरी में मदद किया करते थे. मेरी खातिर अपनी डेट्स भी एडजस्ट करते थे. वे मेरे घनिष्ठ मित्र हैं.”

~ 10.  आज के एक्टर्स की पीढ़ी से उन्हें क्या शिकायत है?
मौजूदा पीढ़ी के एक्टर्स को लेकर रजनीकांत का कहना है, “हम उनसे ज्यादा अनुशासित थे. हम अपने पेशे का सम्मान किया करते थे. बुजुर्गों का आदर करते थे. वह एक अलग ही दौर था. उस समय नैतिक मूल्यों पर ज्यादा ज़ोर था.”

 

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