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वो क्रिकेटर, जो मैच में विकेट चटकाने के लिए अपने मुंह पर पेशाब मलता था!

132 साल पुराने क्रिकेट इतिहास में साउथ अफ्रीका के लिए गिने-चुने ब्लैक क्रिकेटर्स हुए. लेकिन उनमें से एक क्रिकेटर ऐसा रहा, जिसने साउथ अफ्रीका के लिए न सिर्फ 100 टेस्ट मैच खेले, बल्कि अपना नाम भी इतिहास में दर्ज करवाया. उस क्रिकेटर का नाम है, मखाया एंटिनी. आज हम आपको बताते हैं साउथ अफ्रीका के तीसरे सबसे सफल तेज़ गेंदबाज़ एंटिनी के करियर से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से और कहानियां.

साउथ अफ्रीकी क्रिकेट में ब्लैक्स की एंट्री:

साल 1970 में साउथ अफ्रीकी सरकार की रंगभेद नीति की वजह से आईसीसी ने साउथ अफ्रीकी क्रिकेट टीम को बैन कर दिया. ये बैन साल 1991 यानी 21 साल तक बना रहा. जब साउथ अफ्रीका सरकार ने रंगभेद के खिलाफ अपनी नीति को बदला. इसके बाद ही 10 नवंबर 1991 को साउथ अफ्रीकी टीम की फिर से क्रिकेट में वापसी हो पाई.

इस नीति के बदलने के बाद एक के बाद कई ब्लैक खिलाड़ियों को साउथ अफ्रीकी टीम के लिए मैदान पर उतरने का मौका मिला.

साउथ अफ्रीका के लिए खेलने वाला पहला ब्लैक

साल 1998 में साउथ अफ्रीकी टीम के लिए डेब्यू से पहले मखाया एंटिनी की लाइफ बिल्कुल भी आसान नहीं रही. ईस्टर्न केप के एमडिंगी गांव में मखाया का बचपन एक मवेशी की तरह गुज़रा. वो बचपन में गाय और जानवरों को नंगे पैर चराते थे. उस वक्त मखाया के पास ठंड से बचने के लिए एक जोड़ी जूते भी नहीं होते थे. खुद को ठंड से बचाने के लिए मखाया अपने दोस्तों के साथ गाय के ताज़े गोबर का इंतज़ार करते थे. गाय के गोबर करते ही वो अपने पैर उस गोबर में डाल देते थे, जिससे कि वो अपने ठंडे पैरों को गर्मी दे सकें.

मखाया को क्रिकेट खेलने का जुनून बचपन से ही था. लंबे कद के इस गेंदबाज़ पर बॉर्डर क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी की नज़र पड़ी. उन्होंने 15 साल के इस लड़के की तेज़ गेंदबाज़ी देखी. साथ ही उन्होंने इसके नंगे पांव भी देखे. फिर उन्होंने इस गाय चराने वाले लड़के को कपड़े के जूते दिलवाए और किंग्स विलियम टाउन में उसे प्रैक्टिस के लिए जगह भी दिलवा दी.

इसके बाद एंटिनी की किस्मत और खेल ने उनका फिर से साथ दिया. इस बार डेवलपमेंट प्रोग्राम के एक अधिकारी ग्रेग हेय की नज़र उन पर पड़ी और उन्होंने इस लड़के को क्रिकेट में आगे बढ़ाने का फैसला किया. हेस ने एन्टिनी को एक जोड़ी जूते भी दिलाए और साथ ही ये सख्त हिदायत दी कि वो उन्हें मैदान के बाहर या मवेशियों को चराते हुए न पहने.

इसके बाद एंटिनी की ज़िंदगी ने करवट बदल ली. दो साल बाद ही उन्होंने साउथ अफ्रीका की अंडर 19 टीम में जगह मिली और वो इंग्लैंड और भारत के दौरे पर गए. समय बढ़ते-बढ़ते 20 साल की उम्र में उन्हें साउथ अफ्रीका की नेशनल टीम में जगह मिल गई. एंटिनी पहले ब्लैक क्रिकेटर बने, जिन्हें अफ्रीकी टीम में चुना गया.

टीम में आते ही लगा रेप का चार्ज

अभी साउथ अफ्रीका के लिए खेलते हुए एंटिनी को एक साल ही हुआ था कि उन पर रेप का गंभीर केस लग गया. एन्टिनी पर आरोप लगा कि उन्होंने 21 साल की एक स्टूडेंट के साथ रेप किया है. उन्होंने इससे इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ उस लड़की को अपनी गाड़ी में लिफ्ट दी थी. कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया और उस वक्त की अफ्रीकी टीम में इकलौते ब्लैक क्रिकेटर को 1999 की साउथ अफ्रीका की वर्ल्डकप टीम से बाहर कर दिया.

हालांकि बाद में 1999 में ही ग्राह्मसटाउन हाई कोर्ट ने एंटिनी को रेप के आरोपों से बरी कर दिया. इसके बाद उनकी फिर से नेशनल टीम में वापसी हो गई. इसके बाद एंटिनी ने फिर पीछे मुढ़कर नहीं देखा.

किट बैग में गाय का गोबर लेकर चलते थे एंटिनी

गाय के गोबर के साथ पले बड़े लड़के के जीवन में वो गोबर हमेशा रहा. एंटिनी ने एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था कि वो हमेशा अपने किट बैग में प्लास्टिक के पैकेट में गाय का गोबर ज़रूर रखते थे. उन्होंने बताया था-

”पूरे करियर में मेरे पास वो गाय के गोबर का एक टुकड़ा हमेशा रहा, वो मेरा लकी-चार्म भी था, जिसकी वजह से मैं हमेशा ज़मीन से जुड़ा रहा. मुझे जब भी मैदान पर बेहतर प्रदर्शन की ज़रूरत होती, तो मैं उसे चूम लेता था. वो हमेशा मेरे लिए काम करता था. आप चाहें तो मेरे स्टैट्स देख सकते हैं.”

लॉर्ड्स में 10 विकेट लेने वाले इकलौते अफ्रीकी

साल 2003 में साउथ अफ्रीकी टीम इंग्लैंड गई. लॉर्ड्स के मैदान पर सीरीज़ का दूसरा टेस्ट खेला जा रहा था. लेकिन एंटिनी उस दिन कुछ और ही सोचकर उतरे थे. उन्होंने पहली पारी में इंग्लैंड को 173 रनों पर ढेर कर दिया. उन्होंने पारी में 75 रन देकर 5 विकेट अपने नाम किए. लेकिन इसके बाद ग्रेम स्मिथ के दोहरा शतक ने एंटिनी पर से सभी का ध्यान हटा दिया.

हर तरफ सिर्फ स्मिथ के खेल की चर्चा थी. लेकिन दूसरी पारी में एक बार फिर से एंटिनी बांह चढ़ाकर उतरे और एक बार फिर से पांच विकेट लेकर लॉर्ड्स के मैदान पर 10 विकेट चटका दिए. लॉर्ड्स की दीवार पर एंटिनी का नाम अब अजर-अमर था. हालांकि इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बावजूद इंग्लिश मीडिया पूरी तरह से एंड्र्यू फ्लिटॉफ के गुणगान में लगा था. जिन्होंने दूसरी पारी में शानदार शतक बनाया था.

Makhaya Ntini 1
Makhaya Ntini 1

इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद एंटिनी ने कहा था,

”मैं बहुत भावुक हूं. तसल्ली, जश्न और बहुत सारा गर्व महसूस कर रहा हूं. इस वक्त मैं सिर्फ इतना ही महसूस कर रहा हूं कि अब ‘होम ऑफ क्रिकेट’ में ‘एंटिनी’ नाम हमेशा बना रहेगा. एक दिन मेरे बच्चे लॉर्ड्स की दीवार पर मेरा नाम देखेंगे. साथ ही मैं उन सभी ब्लैक युवा लड़कों के बारे में सोचता हूं जो इससे प्रेरणा लेंगे और ये महसूस करेंगे कि वो कुछ भी कर सकते हैं. लेकिन मैं इस चीज़ से खुश हूं कि एक साउथ अफ्रीकी का नाम इस दीवार पर आया है. मैं चाहता हूं कि हर साउथ अफ्रीकी इस पर गर्व महसूस करे.”

अपने पेशाब को मुंह पर रगड़ना

एक मवेशी के लिए जानवारों की हर चीज़ बहुत प्यारी होती है. जैसा की इस कहानी में भी मिला. एंटिनी की ज़िंदगी बदली और वो एक कामयाब क्रिकेटर बन गए. उसके बावजूद वो गाय का गोबर अपनी किट में रखते थे. लेकिन एंटिनी का प्यार सिर्फ गाय के गोबर से ही नहीं था. बल्कि अक्सर वो खुद को मोटिवेट करने के लिए अपने पेशाब का इस्तेमाल भी किया करते थे.

एन्टिनी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि

”बहुत से लोग इस बारे में नहीं जानते लेकिन अगर मैं कभी भी खेल के एक सेशन में अच्छा नहीं कर पाता था, तो टॉयलेट में जाकर अपने हाथ पर पेशाब करता और फिर उसे अपने चेहरे पर मसल लेता था. इससे मैं फिर से आगे के खेल और स्पेल के लिए तरोताज़ा हो जाता था.”

वनडे और टेस्ट में एक मैच का बेस्ट स्पेल एंटिनी के नाम:

वैसे तो एंटिनी का करियर बहुत से उतार-चढ़ावों और अजीब किस्से-कहानियों से भरा रहा. लेकिन वो साउथ अफ्रीका के लिजेंड्री गेंदबाज़ थे. उन्होंने अफ्रीकी टीम के लिए कुल 101 मैचों में 390 विकेट अपने नाम किए.

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मखाया एंटिनी

टेस्ट में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वेस्टइंडीज़ के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में आया. जब उन्होंने एक मैच में 13 विकेट चटकाए. इतना ही नहीं वनडे में उनका बेस्ट स्पेल 22 रन देकर छह विकेट रहा, जो कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियन टीम के खिलाफ किया. ये दोनों ही प्रदर्शन किसी भी साउथ अफ्रीकी फास्ट बोलर का बेस्ट परफॉर्मेन्स है.

एंटिनी, शॉन पोलोक और एलेन डोनाल़्ड के बाद के बाद साउथ अफ्रीका के लिए 300 विकेट लेने वाले तीसरे गेंदबाज़ रहे. इंग्लैंड के खिलाफ 100 टेस्ट पूरे करने के बाद उन्होंने सिर्फ एक टेस्ट खेला और साल 2011 में भारत के खिलाफ टी20 खेलकर उन्होंने संन्यास का ऐलान कर दिया.


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