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'ओम शांति ओम' के गाने में शामिल न होना पड़े, इसके लिए आमिर खान ने फराह से क्या बहाना बनाया?

साल 2007. महीना नवंबर. दो फिल्मों से तीन नए एक्टर्स अपना डेब्यू कर रहे थे. रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोण और सोनम कपूर. संजय लीला भंसाली के कंधों पर बैठ कर रणबीर और सोनम ‘सांवरिया’ से अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत कर रहे थे. तो वहीं दीपिका ‘ओम शांति ओम’ में सीधा ‘शाहरुख खान की हीरोइन’ बन कर आ रही थीं. दिवाली का मौका था. बॉक्स-ऑफिस पर इन दो बड़ी फिल्मों की टक्कर होने वाली थी. फिलमचियों के बीच इस क्लैश की चर्चा ज़ोरो पर थी.

9 नवंबर 2007. ‘सांवरिया’ और ‘ओम शांति ओम’ रिलीज़ हुईं. इस दिवाली क्लैश का रिजल्ट ये निकला कि ‘ओम शांति ओम’ रॉकेट बनकर उड़ गई और ‘सांवरिया’ एकदम फुस्स निकल गई. ‘ओम शांति ओम’ उस साल की सबसे बड़ी फिल्म साबित हुई. हाल ही में ‘ओम शांति ओम’ की रिलीज़ को 14 साल पूरे हुए. आज हम आपको ‘ओम शांति ओम’ के कुछ सुने-अनसुने-कमसुने किस्से सुनाएंगे.

शाहरुख़ खान एज़ ओम. (पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)
शाहरुख़ खान एज़ ओम. (पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)

‘ओम शांति ओम’. ये फ़िल्म पूरी फिल्मी थी. मतलब बॉलीवुडपना कूट-कूटके भरा था. रेट्रो बॉलीवुड को शाहरुख-फराह का ट्रिब्यूट थी ‘ओम शांति ओम’. फ़िल्म के गानों से लेकर फ़िल्म के डायलॉग्स तक सबसे बॉलीवुड टपक रहा था. फ़िल्म में आधा बॉलीवुड तो आपको दिख भी गया होगा. इसी फिल्म से पेट में बिस्कुट बनाने का यानी सिक्स पैक एब्स का रिवाज़ शुरू हुआ था. इससे पहले तो सबका फोकस बाइसेप्स और चेस्ट पर ही रहता था. इस फ़िल्म के पोस्टर में शाहरुख खान पहली बार अधनंगे छपे. वरना इससे पहले तक ये काम सलमान भाई संभालते थे. और इसी फ़िल्म में दर्द, गज़लों और गीतों से निकल कर डिस्को में चला गया था.

'दिल में मेरे है दर्द-ए डिस्को'. (पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)
‘दिल में मेरे है दर्द-ए डिस्को’. (पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)

# ‘जॉन जानी जनार्दन’ से इंस्पिरेशन

जैसा कि हमनें ऊपर कहा था आधा बॉलीवुड आपको इस फ़िल्म में दिख गया होगा. यश चोपड़ा से लेकर डिनो मोरिया तक. रेखा से लेकर अमृता अरोड़ा तक. जो स्टार राज़ी हुआ, फराह ने उसे ‘ओम शांति ओम’ का हिस्सा बना दिया. फराह ने एक इंटरव्यू में बताया भी कि आखिर क्यों उन्होंने थोक के भाव से इतने कैमियो करवाए. दरअसल फराह ‘जॉन जानी जनार्दन’ गाने की फैन थीं. इस गाने में उस वक़्त के टॉप-स्टार्स जैसे राज कपूर, शम्मी कपूर, धर्मेंद्र जैसे दसेक स्टार्स का कैमियो था. उसे देखने के बाद से ही फराह के मन में था कि वो एक दिन अपनी फ़िल्म में इससे भी ज्यादा स्टार्स लेकर आएंगी. और 2007 में ‘ओम शांति ओम’ के ‘दीवानगी-दीवानगी’ गाने में फराह ने अपनी वो इच्छा मुकम्मल कर ली.

ओम प्रकाश मक्खिजा नेड हिज़ फ़िल्मी माँ.
ओम प्रकाश मक्खिजा नेड हिज़ फ़िल्मी माँ.

#खान तिकड़ी साथ आते-आते रह गई

फराह चाहती थीं कि पहली बार स्क्रीन पर शाहरुख-सलमान-आमिर को वो एक साथ लाएं. उन्होंने सलमान और आमिर दोनों से रिक्वेस्ट की कि एक दिन के लिए आ जाएं. सलमान तो आ गए लेकिन आमिर ने फराह को टरका दिया. आमिर ने कहा कि वो ‘तारे ज़मीन पर’ की एडिटिंग में बिज़ी हैं. फ़राह समेत पूरे इंडिया का इस खान ट्रायो को एक साथ देखने का ख्वाब आज भी ख्वाब ही है. फराह फ़िल्म में कैमियो के लिए एवरग्रीन देवानंद के पास भी गई थीं. लेकिन देव साहब तो ठहरे देव साहब. बोल दिया,

“देवानंद सिर्फ लीड रोल करता है, कैमियो नहीं.”

ऐसे ही और भी कई सितारे थे, जिन्हें फराह ने अप्रोच किया था. लेकिन किसी ना किस वजह से वो ‘ओम शांति ओम’ का हिस्सा नहीं बन पाए. जैसे फरदीन खान भी ‘दीवानगी दीवानगी’ गाने का हिस्सा बनने वाले थे. इसी गाने की शूटिंग के लिए वो दुबई से आ रहे थे. लेकिन दुबई एयरपोर्ट पर उन्हें ड्रग्स के साथ धर लिया गया था. फराह अमिताभ बच्चन के पास भी गईं थीं. लेकिन उस वक़्त अभिषेक और ऐश्वर्या की शादी होने को थी. तो बच्चन ने साब ने फराह से कहा कि वो शादी की तैयारियों में बिज़ी हैं. हालांकि अभिषेक ने खुद फ़िल्म में कैमियो किया था. शाहरुख चाहते थे फ़िल्म में दिलीप कुमार और सायरा बानो भी आएं. लेकिन खराब स्वास्थ्य के चलते दिलीप जी नहीं आ पाए.

शाहरुख़ खान और दीपिका पादुकोण शूटिंग के बीच आराम फरमाते हुए. (पिक्चर सोर्स- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)
शाहरुख़ खान और दीपिका पादुकोण शूटिंग के बीच आराम फरमाते हुए. (पिक्चर सोर्स- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)

# असली फ़िल्मफेयर रेड कार्पेट पर की शूटिंग

‘ओम शांति ओम’ में कुल 62 कैमियो हैं. 30 तो ‘दीवानगी दीवानगी’ में आ गए. बाकी आए फ़िल्म में हुई ‘फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड नाईट’ पर. जिसकी शूटिंग फराह ने रियल में फिल्मफेयर अवॉर्ड फंक्शन पर ही की थी. जिस दिन फ़िल्मफेयर होना था फराह कैमरा लेकर फ़िल्मफ़ेयर के रेड-कार्पेट पर पहुंच गईं. और स्टार्स से एक-एक डायलॉग बुलवा लिए. फ़िल्म में अक्षय कुमार, सुभाष घई, ऋषि कपूर और अभिषेक बच्चन के स्पेशल एक-एक सीन शूट हुए थे.

# मज़ेदार स्क्रिप्ट और रेफरेन्सेस

‘ओम शांति ओम’ लिखी है फराह खान, मयूर पुरी और मुश्ताक़ शेख ने. फ़िल्म में बहुत ही स्मार्ट और क्रिएटिव ह्यूमर पोर्शन है. कई सीन्स में क्लीशे बॉलीवुड फिल्मों को लेकर अच्छा व्यंग है. ‘ओम शांति ओम’ की राइटिंग काफी क्रिएटिव थी. बॉलीवुड की पुरानी फिल्मों के रेफरेन्सेस बहुतायत में थे. इंडस्ट्री के भीतरी कॉम्पटीशन या कह लें कोल्ड वॉर्स को भी मज़ाकिया ढंग से दिखाया गया था फ़िल्म में. कुछ उदाहरण देते हैं.

# वो सीन याद कीजिए जब फिल्मफेयर अवॉर्ड शो में स्पॉटलाइट आने से ठीक पहले स्टेज पर ऋषि-कपूर और सुभाष घई अवॉर्ड की छीना-झपटी कर रहे होते हैं. फिर एक दूसरे से पहले बोलने के लिए माइक छीनने लगते हैं. काफी मजेदार सीन है. शायद कभी फराह ने किसी को वाकई में ऐसे झगड़ते देखा होगा.

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सुभाष घई एंड ऋषि कपूर.(पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)

# एक और मज़ेदार सीन है. जब अभिषेक बच्चन अवॉर्ड लेने को खड़े होते हैं, लेकिन आवर्ड ओम कपूर को मिल जाता है. और अभिषेक मंद-मंद गरियाते हुए ओम कपूर के लिए ताली बजाते हैं.

# फ़िल्म में शबाना आज़मी फिल्मफेयर के रेड कार्पेट पर बोलती हैं, “ये अवॉर्ड शो का सेट झुग्गी-झोपड़ियों को हटाकर बनाया गया है. मैं इसके खिलाफ प्रोटेस्ट करूंगी”. आप जानते ही होंगे शबाना आज़मी असल में सोशल एक्टिविस्ट भी हैं. और अक्सर ऐसे मुद्दों को लेकर मुखर रही हैं.

शबाना आज़मी. (पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)
शबाना आज़मी. (पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)

# अक्षय कुमार तो एक कदम आगे रहते हैं. ‘ओम शांति ओम’ में उनका छोटा सा कैमियो फ़िल्म की सबसे बड़ी हाईलाइट थी. सीन है अक्षय की बजाय ओम कपूर को अवार्ड मिल जाता है. इस पर सबके साथ अक्षय की सेक्रेटरी भी ताली बजाने लगती है. इससे खिसियाए अक्षय उसके बाल नोंचने लगते हैं. और बंदूक भी तान देते हैं. कसम से लोटपोट कर देने वाला सीन था ये भाई. फराह ने एक जगह बताया था कि ये पीटने वाला पार्ट अक्षय ने खुद इम्प्रोवाइज़ किया था.

# फिल्मफेयर के रेड कार्पेट पर काजोल, बिपाशा, रानी मुखर्जी कहती हैं “मी एंड ओम कपूर आर जस्ट गुड़ फ्रेंड्स”. उसके बाद संजय कपूर भी यही बोलते हैं. ये सीन बॉलीवुड कपल्स के रिलेशनशिप छुपाने को लेकर चुटकी थी.

'मी एंड ओके आर जस्ट गुड फ्रेंड्स'.(पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)
‘मी एंड ओके आर जस्ट गुड फ्रेंड्स’.(पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)

# फ़िल्म में एक सीन है जब शांति प्रिया आग में फंस जाती है और ओम प्रकाश मखीजा उसे बचाने आग में कूद जाता है. दरअसल ये वाकया असल घटना से प्रेरित था. ये घटना घटित हुई थी फ़िल्म ‘मदर इंडिया’ में सुनील दत्त और नर्गिस जी के साथ. ‘मदर इंडिया में एक सीन के दौरान नर्गिस जी आग में घिर गईं थी. तब सुनील दत्त कंबल लेकर आग में कूद गए थे नर्गिस जी को बचाने. खुद थोड़ा सा जल गए थे लेकिन नर्गिस को बचा लिया था. इस वाकये के एक साल बाद नर्गिस जी मिसेज़ दत्त बन गई थीं.

शांतिप्रिया को आग से बचाता ओम प्रकाश. (पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)
शांतिप्रिया को आग से बचाता ओम प्रकाश. (पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)

● वो सीन याद कीजिए जब ओम प्रकाश मखीजा शांति प्रिया को ‘दोस्ती में नो सॉरी, नो थैंक यू’ बोल रहे होते हैं. इसी वक़्त पीछे खड़े ‘फ्रेंड्स’ की टोपी पहने टीनएजर सूरज बडजात्या ये डायलॉग नोट कर रहे होते हैं. फिर सूरज के पिताजी राजकुमार बडजात्या आते हैं और ‘गीत गाता चल’ गाते हुए निकल जाते हैं. ये सीन कमाल था. बहुत मज़ेदार ढंग से ‘मैंने प्यार किया’ का रेफरेंस डाला गया था.

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ओरिजिन ऑफ़ ‘दोस्ती में नो सॉरी, नो थैंक यू’.

# ऐसा ही एक और कमाल सीन है. पप्पू और ओम प्रकाश मखीजा बैठे हैं चाय की दुकान पर. ओम प्रकाश मखीजा अपने सरनेम से परेशान है. तत्काल नाम बदलना चाहता है. दोनों बातचीत कर ही रहे होते हैं कि तभी उनके पास गोविंद आहूजा नाम का एक स्ट्रगलिंग एक्टर आता है. वो भी नाम बदलना चाहता है. ओम और पप्पू उसे बोलते हैं ‘गोविंदा रख ले’. बॉलीवुड में दमदार नाम होना ही चाहिए वाले ट्रेंड को यहां बहुत सही तरीके से दिखाया था. और वो स्ट्रगलिंग एक्टर का रेफरेंस तो समझ ही गए होंगे आप.

# फ़िल्म में साउथ मूवीज़ के एक्शन पर भी अच्छा सटायरिकल सीन है. शाहरुख साउथ के हीरो बने होते हैं. रूई से भरे शेर से लड़ रहे होते हैं. इस सीन में बेस्ट पार्ट है, भीड़ में खड़ा जूनियर आर्टिस्ट बार बार ‘वाह क्या एक्टिंग कर रहा है’ बोल रहा होता है. कमाल का टेक था ये सीन साउथ की क्लीशे मूवीज़ पर. इस सीन का आइडिया फराह को 1970 में रिलीज़ हुई ‘टार्ज़न 303’ से आया था.

"वाह क्या एक्टिंग कर रहा है". (पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)
“वाह क्या एक्टिंग कर रहा है”. (पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)

# ऐसा ही एक सीन है, जिसमें ओम कपूर फ़िल्म की शूटिंग कर रहा है. उसके हाथ-पैर नहीं है. कट टु अगले सीन में वो दर्द-ए-डिस्को करता हुआ दिखता है. ये फिल्मों में ज़बरदस्ती घुसाए जाने वाले ड्रीम सीक्वेंस को लेकर अच्छा व्यंग था.

# वाह क्या गाने हैं

‘ओम शांति ओम’ की सक्सेस का 50 परसेंट क्रेडिट फ़िल्म के म्यूज़िक को भी जाता है. एक-एक गाना ब्लॉकबस्टर था. ‘ओम शांति ओम’ अल्बम के लिए विशाल-शेखर को उस साल के सारे अवार्ड मिल गए थे. हर गाना भयंकर हिट. सुखविंदर सिंह के गाए ‘दर्द-ए-डिस्को’ पर नाच-नाच कर तो घुटने दर्द हो गए थे कइयों के. और फिर केके का ‘आंखों में तेरी अजब सी अदाएं हैं’ तो आज भी प्लेलिस्ट में है. इसके अलावा ‘दीवानगी-दीवानगी’, ‘मैं अगर कहूं’, ‘धूम ताना’ जैसे गाने भी खूब हिट थे. लेकिन एक गाना ऐसा भी था, जिसे सिर्फ पिक्चर में ही लोगों ने सुना. ‘दास्तान-ए-ओम शांति ओम’. फ़िल्म के बाकी गानों की तरह इस गाने को भी जावेद अख्तर साहब ने लिखा था. और साहब क्या लिखा था. पूरे तीन घंटे की फ़िल्म का सार आपको इस सात मिनट के गाने में मिल जाएगा. अब तक नहीं सुना हो तो ज़रूर सुनें.

'आंखों में तेरी अजब सी अजब सी अदाएं हैं'.(पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)
‘आंखों में तेरी अजब सी अजब सी अदाएं हैं’.(पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)

# दर्द-ए-कॉन्ट्रोवर्सी

‘ओम शांति ओम’ को लेकर कई सारी कॉन्ट्रोवर्सीज भी हुईं. ‘फ़ैशन’ और ‘कॉर्पोरेट’ जैसी फिल्मों के राइटर अजय मोंगा ने फ़िल्म देखने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट में उनकी स्क्रिप्ट चुराने का केस कर दिया था. टीवी टेलीकास्ट रुकवाने की अर्जी भी डाली. अजय ने कहा कि ‘ओम शांति ओम’ की स्क्रिप्ट का शुरुआती हिस्सा उस स्क्रिप्ट से मिलता है, जो उन्होंने शाहरुख खान को 2006 में मेल की थी. हालांकि अजय की बात में कोई दम नहीं निकला. और उनकी अपील बाद में खारिज हो गई.

‘ओम शांति ओम’ में एक सीन है, जिसमें मनोज कुमार के डुप्लीकेट को पुलिस मारती है. क्योंकि वो हमेशा अपने चेहरे पर हाथ रखे रहते हैं. ये सीन असली वाले मनोज कुमार को कतई पसंद नहीं आया. फ़िल्म पर मुकदमा करने की बात बोल दी. शाहरुख और फराह ने पहले प्रेस-कॉन्फ्रेंस कर के मनोज कुमार से माफी मांगी. और बाद में पर्सनल जाकर. मनोज कुमार ने माफ भी कर दिया. लेकिन बाद में जब टीवी पर वो सीन दुबारा देखा तो फिर भड़क गए. इस बार सीधा कोर्ट पहुंच गए. टेलिविज़न टेलीकास्ट पर रोक लगाने की अर्जी डाल दी. कोर्ट ने चैनल को मनोज कुमार वाले सीन को डिलीट करने का आदेश दिया.

शाहरुख़ खान एंड श्रेयस तलपड़े.(पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)
शाहरुख़ खान एंड श्रेयस तलपड़े.(पिक्चर- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट)

#जापानी रीमेक

ये बात सुनकर आप में से में कई लोग ताज्जुब करेंगे. क्या आपको पता है ‘ओम शांति ओम’ इंडिया की पहली फ़िल्म है, जिसका जापानी रीमेक बना था. 2017 में ‘ओम शांति ओम’ जापान में ‘ओउमु शांति ओउमु’ नाम से रीमेक बना था. ये एक म्यूजिकल प्ले था. ओसाका में इस फ़िल्म के पहले प्रीमियर पर खुद फराह खान ने भी शिरकत की थी.

फराह खान 'ओम शांति ओम' के जापानी प्ले के समारोह में.
फराह खान ‘ओम शांति ओम’ के जापानी प्ले के समारोह में.

# फालतू में गिनती मत करना

अक्सर लोग इस तरीके की मसाला-एंटरटेनर को ज़्यादा तवज्जो नहीं देते. सिर्फ सीरियस टाइप की फिल्मों को ही ‘आर्ट फ़िल्म’ समझ कर देखते रहते हैं. और उसे ही रियल सिनेमा मान लेते है. अगर आपको ‘ओम शांति ओम’ पसंद हो तो हो सकता है, आपका बगल वाला बुद्धिजीवी दोस्त आपकी दिमागी स्थिति पर भी सवाल उठा दे. लेकिन मेरा मानना है हर फिल्म का अपना एक जॉनर होता है. फ़िल्म अपने जॉनर के हिसाब से खरी-उतरती है या नहीं, ये जांच कर फ़िल्म को अच्छा या खराब घोषित करना चाहिए. अगर फ़िल्म में मज़ा आया तो मतलब फ़िल्म अच्छी है.


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