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जब गुस्साए बल्लेबाज़ ने कपिल की जांघ पर बल्ला दे मारा!

मौजूदा दशक की बात करें तो मांकडिंग का नाम आते ही क्रिकेट जगत से जुड़ी पहली तस्वीर रविचन्द्रन अश्विन की आती है. लेकिन 90 के दशक में कपिल देव ने भी मांकडिंग की थी. और इसके चलते वह बीच मैदान पिट भी गए थे. जी हां, मांकडिंग के चलते विरोधी टीम के कप्तान ने कपिल की जांघ पर बल्ला दे मारा था.

ये कहानी है साल 1992 की. जब भारतीय टीम साउथ अफ्रीका के दौरे पर गई. बता दें कि टीम इंडिया रंगभेद के आरोपों की वजह से 22 साल का बैन झेल रहे साउथ अफ्रीका के दौरा पर जाने वाली पहली टीम थी. इस सीरीज़ का नाम फ्रेंडशिप टूर रखा गया. लेकिन इस सीरीज़ में फ्रेंडशिप जैसी कोई बात नज़र नहीं आई.

इस सीरीज़ में पहली बार ICC पैनल वाले इंडिपेंडेंट अंपायर्स का इस्तेमाल किया गया, साउथ अफ्रीकी क्रिकेट बोर्ड ने इस सीरीज़ में पहली बार टीवी रीप्ले का ट्रायल किया. जिसे थर्ड अंपायर के रूप में पहचाना गया. हालांकि बाद में ये टीवी रीप्ले छोड़िए, मैच के ओरिजिनल विज़ुअल्स भी मैच रेफरी को नहीं मिले.

मांकडिंग और कपिल-वेसल्स विवाद:

1992 के दौरे पर कपिल देव से भारतीय टीम की बहुत ज़्यादा उम्मीदें थीं. लेकिन वो इस सीरीज़ में अपने शबाब पर नहीं थे. सीरीज़ का दूसरा वनडे पोर्ट एलिज़ाबेथ में खेला गया. 9 दिसंबर को हुए इस मैच में टीम इंडिया ने पहले बैटिंग चुनी. लेकिन ब्रायन मैकमिलन ने यह फैसला गलत साबित करते हुए इंडिया को 147 रन पर ऑल-आउट कर दिया. जवाब में मेज़बान टीम ने इस टार्गेट को छह विकेट बाकी रहते आसानी से हासिल कर लिया.

हालांकि इस जीत से पहले ही मैदान पर बड़ा विवाद हो गया. साउथ अफ्रीकी पारी का नौवां ओवर. कपिल देव गेंदबाज़ी कर रहे थे. नॉन-स्ट्राइकर एंड पर खड़े पीटर कर्स्टन क्रीज़ से बाहर निकले और कपिल देव ने गेंद फेंकने से पहले ही उन्हें रन-आउट कर दिया. गुस्से से लाल कर्स्टन वापस ड्रेसिंग रूम की तरफ लौट गए.

बता दें कि कपिल ने पहली बार में ही कर्स्टन को रन-आउट नहीं किया था. उन्होंने पहले दो बार कर्स्टन को गलत तरीके से स्टार्ट लेते देखा और टोका भी. लेकिन जब वो दो बार के बाद तीसरी बार भी ऐसा करने गए, तो कपिल पाजी ने बेल्स उड़ा दीं. क्रिकेट के नियम के हिसाब से कर्स्टन रन-आउट होकर लौट गए.

और कर्स्टन के विकेट से पूरा साउथ अफ्रीका खेमा बुरी तरह से गुस्सा गया. इस घटना का असर तुरंत मैदान पर दिखा. उस वक्त बल्लेबाज़ी कर रहे साउथ अफ्रीकी कप्तान केपलर वेसल्स का गुस्सा चरम पर पहुंच गया. उसी ओवर में रन लेते हुए वेसल्स ने अपना बल्ला कपिल देव की जांघ पर दे मारा. ये घटना कैमरे पर नहीं दिखी लेकिन मैच के बाद कपिल देव ने टीम को इस घटना की कहानी बताई. कपिल ने कहा कि

केपलर ने उन्हें जानबूझकर मारा है और ये अंजाने में हुआ वाकया नहीं है.

जब ये बात पता चली तो भारतीय ड्रेसिंग रूम का गुस्सा बढ़ गया. टीम इंडिया का दल इस हरकत के लिए सख्त एक्शन की मांग करने लगा. जिसके बाद टीम के मैनेजर अमरित माथुर ने ICC मैच रेफरी क्लाइव लॉयड के पास इस घटना की शिकायत दर्ज करवाई. ये घटना बेहद बड़ी थी क्योंकि क्रिकेट के मैदान पर फिज़िकल असॉल्ट या वाइलेन्स एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. और खासतौर पर तब, जब एक हाई प्रोफाइनल स्टार या एक वर्ल्ड चैम्पियन सम्मानजनक कप्तान ऐसे आरोप लगाए.

Clive Lloyd
क्लाइव लॉयड. फोटो: Getty Images

हालांकि इस शिकायत के बाद असली समस्या ICC के रेफरी क्लाइव लॉयड के सामने आ गई. इस घटना की जांच के समय कपिल देव ने आरोप लगाया कि वेसल्स ने उन्हें जानबूझकर बल्ला मारा है. जबकि वेसल्स ने अपने बचाव में इसे अनजाने में हुई घटना बताया.

रेफरी लॉयड दोनों के बयान सुन कंफ्यूज़ हो गए. क्योंकि इस मामले में सबूतों की कमी थी. लॉयड ने ब्रॉडकास्टर SABC से इस घटना की रिकॉर्डिंग मांगी तो ब्रॉडकास्टर ने ये कहते हुए इनकार कर दिया कि उनके पास इस मामले की कोई रिकॉर्डिंग नहीं है.

आखिरकार मैच रेफरी क्लाइव लॉयड ने ये फैसला सुनाया कि वेसल्स ने ये बात मानी है कि उनका बल्ला कपिल के संपर्क में आया, लेकिन वो जानबूझकर नहीं था. उन्होंने ये भी कहा कि कैमरा पूरी घटना को कैप्चर नहीं कर पाया इसलिए सच पूरी तरह सामने नहीं आ पाया है.


रविचंद्रन अश्विन जल्द ही कपिल-कुंबले के इन रिकॉर्ड्स को तोड़ देंगे! 

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