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उस फिल्म के 5 किस्से, जिसकी शूटिंग के दौरान हुए कांड ने सलमान खान को जेल पहुंचा दिया

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6 नवंबर,1999 में एक फिल्म रिलीज़ हुई, जिसे सलमान खान चाहकर भी कभी भूल नहीं पाएंगे. इसलिए नहीं कि बहुत बड़ी हिट थी. बल्कि इसलिए कि उन्हें इस फिल्म से जुड़ी एक घटना ने 20 साल तक उलझाए रखा और फिर जेल भी पहुंचा दिया. उनका जोधपुर से ऐसा कनेक्शन बन गया, जैसा उस शहर की खोज करने वाले राव जोधा का भी नहीं था. ये वही फिल्म थी, जहां से आलोक नाथ की वो कहानी शुरू हुई, जो 2018 में सबके सामने आई. फिल्म की अधिकतर लड़कियों की मांएं क्यों नहीं थी. और कोका-कोला इस फिल्म पर बेहिसाब पैसा खर्च करने में क्यों लगा हुआ था. इन किस्सों को जिस फिल्म ने अपने साथ समेटे रखा है, उसका नाम है ‘हम साथ-साथ हैं’. सलमान खान और सूरज बड़जात्या की ब्लॉकबस्टर जोड़ी. वैसे तो इस फिल्म की रिलीज़ को 20 साल पूरे हो गए. लेकिन जब भी इस फिल्म से जुड़ा कुछ इवेंट होगा, आपको इस फिल्म की मेकिंग से जुड़े ये किस्से पढ़ने को मिलेंगे. आप माहौलानुसार पढ़ लीजिएगा. फिलहाल किस्से पढ़िए:

आलोक नाथ अपनी पर उतर चुके थे

2018 में एक मूवमेंट शुरू हुआ #MeToo. इसमें हर फील्ड के लोगों के नाम आए. उसी समय पहली बार दुनिया को पता चला कि ‘संस्कारी बाबूजी’ के पीछे एक आलोक नाथ छिपा हुआ है. भले ही दुनिया को तब पता चला हो लेकिन आलोक नाथ की हरकतें काफी पुरानी हैं. 1998 में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग मुंबई में चल रही थी. नाइट सीन शूट होना था, इसलिए रात को हो रहा था. फिल्म के क्रू से एक लड़की आलोक को उनकी शूटिंग के कॉस्ट्यूम देने गई. आलोक नाथ लड़की के सामने ही अपने कपड़े उतारकर चेंज करने लगे. ये देख जब लड़की भागने लगी, तब उसका हाथ पकड़ लिया. वो लड़की किसी तरह हाथ छुड़ाकर कमरे से बाहर भागी. हालांकि ये बात उसने फिल्म के डायरेक्टर सूरज को नहीं बताई. क्योंकि आलोक के सूरज से काफी अच्छे संबंध थे. विंता नंदा के सामने आने के बाद ‘हम साथ-साथ हैं’ की क्रू मेंबर ने भी अपनी कहानी बताई थी.

फिल्म 'हम साथ साथ हैं' के एक सीन में परिवार का मुखिया बना बैठे रेप के आरोपी आलोक नाथ. आलोक पर एक-दो नहीं चार महिलाओं ने बदसलूकी के आरोप लगाए थे.
फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ के एक सीन में परिवार के मुखिया बने बैठे रेप के आरोपी आलोक नाथ. आलोक पर एक-दो नहीं चार महिलाओं ने बदसलूकी के आरोप लगाए थे.

कहानी से इतने इंप्रेस हुए कि फिल्म ही छोड़ना चाहते थे

‘मैंने प्यार किया’ और ‘हम आपके हैं कौन’ का म्यूज़िक काफी पसंद किया गया था. इसलिए ‘हम साथ-साथ हैं’ में भी सूरज ने राम-लक्ष्मण को बनाए रखा. राम-लक्ष्मण के नाम से जो आदमी संगीत बनाता है उसका नाम है विजय पाटिल. यानी राम-लक्ष्मण का लक्ष्मण. 1977 में राजश्री प्रोडक्शन ही फिल्म ‘एजेंट विनोद’ साइन करने के बाद इस जोड़ी में से राम की डेथ हो गई थी. उसके बाद भी लक्ष्मण ने राम-लक्ष्मण के नाम से म्यूज़िक बनाना ज़ारी रखा. मतलब यहां जो बात हो रही है, वो लक्ष्मण यानी विजय पाटिल की हो रही है. विजय ये फिल्म नहीं करना चाह रहे थे. जब सूरज ने उन्हें ये फिल्म ऑफर की, तो वो कहानी से बड़े इंप्रेस्ड हो गए. उन्हें लगा कि वो इस फिल्म का म्यूज़िक नहीं बना पाएंगे. वो सूरज के बहुत मनाने पर फिल्म का म्यूज़िक करने के लिए तैयार हुए. वो अपना बेस्ट देना चाहते थे. उन्होंने फिल्म के लिए सूरज को कुल 27 धुनें बनाकर दीं, जिसमें से 7 गानें फिल्म में लिए गए. फिल्म का एक गाना आप यहां सुनते भी जाइए:

टाइगर से पहले एक था ब्लैक बक

टाइगर तो ज़िंदा है, ब्लैक बक नहीं. क्योंकि उसे सलमान खान ने मार दिया. ऐसा बिश्नोई समाज का कहना है. ‘हम साथ-साथ हैं’ टीम राजस्थान के जोधपुर में शूटिंग कर रही थी. सलमान समेत उनके को-स्टार्स तबू, सोनाली बेंद्र, सैफ अली खान और नीलम पर आरोप है कि उन्होंने 1-2 अक्टूबर, 1998 को जोधपुर के कांकणी गांव में दो ब्लैक बक का शिकार किया. और ये चीज़ वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत अपराध है. जोधपुर सेशंस कोर्ट ने इस मामले में सैफ, तबू, सोनाली और नीलम को बरी कर दिया. लेकिन सलमान बुरे फंस गए. उन्हें 5 अप्रैल, 2018 को जोधपुर कोर्ट ने 5 साल जेल की सज़ा सुनाई. सलमान को सीधे कोर्ट से जेल जाया गया. उन्हें दो दिन तक आसाराम बापू वाले बैरक में रखा गया. 7 अप्रैल, 2018 को वो जेल से निकले. फिलहाल बेल पर बाहर हैं.

ब्लैक बक शिकार मामले में जोधपुर जेल में जाते सलमान खान. पहली तस्वीर जेल जाने से पहले की है, जहां वो पुलिसवालों के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं.
2018 में ब्लैक बक शिकार मामले में जोधपुर जेल में जाते सलमान खान. पहली तस्वीर जेल जाने से पहले की है, जहां वो पुलिसवालों के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं.

फिल्म की सारी लड़कियां अनाथ क्यों थीं?

क्योंकि ये हिट फॉर्मूला था. किसी भी टीम का कैप्टन विनिंग कॉम्बिनेशन से छेड़छाड़ करना नहीं चाहता है. सूरज ने भी कभी नहीं किया. उनकी पहली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ की सुमन (भाग्यश्री) की मां नहीं थी. उसके पापा (आलोक नाथ) सिंगल पैरेंट थे. ‘हम आपके हैं कौन’ में प्रेम के माता-पिता बचपन में ही गुज़र चुके थे. और ‘हम साथ-साथ हैं’ की तीनों ही लड़कियों सपना, साधना और प्रीति बिन मां की बच्चियां थीं. थोड़ा आगे बढ़ेंगे, तो हमें ये भी पता चलेगा ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’ में जिस प्रेम (ऋतिक रौशन) से संजना (करीना कपूर) को प्यार था, वो भी अनाथ था. ‘विवाह’ की पूनम अपने चाचा-चाची के साथ रहती थी क्योंकि उसके मम्मी-पापा भी नहीं थे. और फाइनली ‘प्रेम रतन धन पायो’ के प्रेम और युवराज विजय सिंह दोनों की ही मां नहीं थीं. कहने का मतलब ये कोई संयोग नहीं है, जनता को इमोशनल कर अपने पाले में खींचने की पुख्ता प्लानिंग है. बिन मां-बाप के बच्चों के लिए हमारे मन में जो सिंपथी वाली फीलिंग आती है, उसे सूरज बड़जात्या पिछले 30 सालों में 6-7 बार कैश कर चुके हैं.

फिल्म 'हम साथ साथ हैं' के एक गाने में करिश्मा कपूर, तबू और सोनाली बेंद्रे, फिल्म में इन तीनों ही लड़कियों की मां नहीं थी.
फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ के एक गाने में करिश्मा कपूर, तबू और सोनाली बेंद्रे, फिल्म में इन तीनों ही लड़कियों की मां नहीं थी.

‘हम साथ-साथ हैं’ के लिए कोका-कोला पैसा पानी जैसे बहा रहा था

इंडिया में कोका-कोला नया-नया आया था. कंपनी इंडिया में मार्केट बनाने की हरसंभव कोशिश में लगी हुई थी. अब वो साल की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में गिनी जा रही ‘हम साथ-साथ हैं’ के साथ जुड़ना चाहती थी. यानी कोका-कोला फिल्म का प्रमोशन करेगी और फिल्म कोका कोला का. तब के समय में ब्रांड प्रमोशन बैकग्राउंड में होते. उनका नाम या प्रोडक्ट फिल्म में दिखभर जाता था. कोका-कोला ने ये ट्रेंड तोड़ा और फिल्म की कहानी का हिस्सा बन गया. ‘हम साथ-साथ हैं’ से दो महीने पहले रिलीज़ हुई फिल्म ‘ताल’ के एक सीन में हीरो-हीरोइन पर कोका-कोला के बोटल से ही अपने प्रेम का इज़हार करते दिखाई दिए. कोल्ड-ड्रिंक शेयर करके. फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को लगा कि ये कुछ ओवर हो रहा है. लेकिन तभी कोक ने ‘हम साथ-साथ हैं’ के साथ कोलैबरेट कर लिया.

फिल्म 'ताल' के गाने 'इश्क बिना क्या जीना यारों' में कोका-कोला पीतीं ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना.
फिल्म ‘ताल’ के गाने ‘इश्क बिना क्या जीना यारों’ में कोका-कोला पीतीं ऐश्वर्या राय और अक्षय खन्ना.

राजश्री प्रोडक्शंस कोक से इसलिए जुड़ी क्योंकि उस कंपनी ने हाल ही में आई स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म ‘शिंडलर्स लिस्ट’ का दुनियाभर में काफी बड़े लेवल पर प्रमोशन किया था. ‘हम साथ-साथ हैं’ से जुड़ने के बाद कोक ने देशभर में एक मार्केंटिंग कैंपेन स्टार्ट की- ‘कोका-कोला और हम साथ-साथ हैं’. इस कैंपेन के लिए खास बोतलें तैयार करवाई गईं, जिन पर ‘हम साथ-साथ हैं’ की एक तस्वीर होती थी. बताया जाता है कि उस समय कोक ने ‘हम साथ-साथ हैं’ के प्रमोशन में तकरीबन 1.25 करोड़ रुपए (12.5 मिलियन) खर्च किए थे. फिल्म प्रमोशन पर होने वाले खर्च के मामले में, ये अपने दौर की ये सबसे महंगी फिल्मों में से एक थी. लेकिन इसका फिल्म को खूब फायदा हुआ. इंटरनेशनल मार्केट में भी ‘हम साथ-साथ हैं’ खूब देखी गई थी. और जितने लोगों ने देखी, कोका-कोला उन सब तक पहुंच गया.

पहली तस्वीर में कोक का प्रमोशन करती फिल्म. और दूसरी तस्वीर में 'कोका कोला और हम साथ साथ हैं' के तहत फिल्म को प्रमोट करती कोक.
पहली तस्वीर में कोक का प्रमोशन करती फिल्म. और दूसरी तस्वीर में ‘कोका कोला और हम साथ-साथ हैं’ के तहत फिल्म को प्रमोट करती कोक.

बीतते समय के साथ ‘हम साथ-साथ हैं’ को टीवी पर ज़ी सिनेमा ने इतनी दफे दिखाया कि जनता टीवी म्यूट करके भी फिल्म के डायलॉग्स बोल देती है. किशनकांत की फैमिली में प्रॉब्लम बस ये थी कि उनकी फैमिली में कोई प्रॉब्लम ही नहीं थी. इसलिए इसे असलियत से कोसों से दूर माना गया. बचाव में सूरज बड़जात्या ने कहा कि वो वही दुनिया अपनी फिल्मों में दिखाते हैं, जो उन्होंने अपने आसपास देखी है. बाद में उन्हीं सूरज ने ‘प्रेम रतन धन पायो’ (2015) बनाई, जिस परिवार में समस्याओं के सिवाय कुछ था ही नहीं. मतलब साफ है. समय के साथ सूरज भी बदले. उनके आसपास की दुनिया भी. और उनकी फिल्में भी.


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