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जब श्रीदेवी ने अपनी इस फिल्म में रजनीकांत और सनी देओल को खिलौना बनाकर छोड़ दिया

1964 में रामुडू भीमुडू नाम की एक तेलुगु फिल्म बनी. इसमें एन.टी. रामा राव ने लीड रोल किया था. फिल्म बड़ी सफल रही. इसके फौरन बाद इस फिल्म को अन-ऑफिशियली हिंदी में रीमेक किया. दिलीप कुमार स्टारर इस फिल्म का नाम था राम और श्याम. ये फिल्म भी चल गई. इसके बाद सलीम-जावेद की ब्लॉकबस्टर राइटर जोड़ी ने राम और श्याम की कहानी को दोबारा लिखा. फीमेल पर्सपेक्टिव से. इस स्क्रिप्ट पर हेमा मालिनी के साथ सीता और गीता नाम की फिल्म बनाई गई. मगर इस फिल्म के रीमेक में श्रीदेवी की एंट्री कैसे हुई, इसके पीछे एक बड़ा दिलचस्प किस्सा है. एक बार इंट्रो से निपट लें, फिर उस पर विस्तार से बात करेंगे. हां, तो भइया 8 दिसंबर, 1989 को रिलीज़ हुई चालबाज़ न सिर्फ क्रिटिक्ली अक्लेम्ड रही, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी हिट साबित हुई. कुछ ही दिन पहले आई चांदनी के बाद चालबाज़ ने श्रीदेवी को अन-डिस्प्यूटेड क्वीन ऑफ हिंदी सिनेमा बना दिया. मगर ये सब इतना आसान भी नहीं था. चालबाज़ के बनने की कहानी हम बातों में जानेंगे.

1.

जो डायरेक्टर श्रीदेवी का मज़ाक उड़ाते थे, कैसे श्रीदेवी उनकी अगली फिल्म की हीरोइन बन गईं?

करमचंद जैसा पॉपुलर टीवी शो बना चुके फिल्ममेकर पंकज पराशर चेन्नई के प्रसाद फिल्म लैब्स में अपनी फिल्म ‘जलवा’ पर काम कर रहे थे. कलर करेक्शन टीम के एक बंदे ने प्रसाद लैब्स के मालिक और फिल्म प्रोड्यूसर एल.वी. प्रसाद को जाकर ये कह दिया कि जलवा वैसी नहीं है, जैसी फिल्म बनाने की बात हुई थी. कुछ अलग लग रही है. उसकी बात सुन एल.वी. प्रसाद फिल्म देखने के लिए अपने लैब आ गए. जलवा की फुटेज देखने के बाद एल.वी प्रसाद ने प्रोड्यूसर पूर्णचंद्रा राव को फोन किया और कहा कि इस लड़के को अगली फिल्म के लिए साइन कर लो. जब पूर्णचंद्रा राव बॉम्बे आए, तो पंकज को मिलने के लिए बुलाया. तब तक उनके पास कोई स्क्रिप्ट या कहानी नहीं थे, जिसे वो प्रोड्यूसर के सामने पिच कर सकें. जब पूर्णचंद्रा ने कहानी के बारे में पूछा, तो पंकज ने हड़बड़ाहट में कह दिया कि उन्हें अपनी फिल्म के लिए श्रीदेवी चाहिए. क्योंकि वो सीता और गीता को रीमेक करना चाहते हैं. संयोग ये रहा है कि प्रोड्यूसर श्रीदेवी को कास्ट करने की बात मान गए. पंकज को 11 हज़ार रुपए का साइनिंग अमाउंट दिया और कहा कि आप तैयार शुरू करिए.

पंकज पराशर की पिछली फिल्म जलवा में श्रीदेवी का मज़ाक बनाने के लिए एक किरदार का नाम श्रीबेबी रखा गया था. वो रोल एक्ट्रेस रोहिणी हट्टंगड़ी ने किया था.
पंकज पराशर की पिछली फिल्म जलवा में श्रीदेवी का मज़ाक बनाने के लिए एक किरदार का नाम श्रीबेबी रखा गया था. वो रोल एक्ट्रेस रोहिणी हट्टंगणी ने किया था.

श्रीदेवी के साथ फिल्म करने की बात सुन पंकज फेर में पड़ गए. नगीना, मिस्टर इंडिया और चांदनी के बाद फेनोमेना बन चुकीं श्रीदेवी के साथ इंडस्ट्री का हर शख्स काम करना चाहता था. मगर जब उसे अपनी फिल्म के लिए श्रीदेवी नहीं मिलतीं, तो वो उनके बारे में अफवाहें फैलाते और मज़ाक उड़ाते. ऐसा ही कुछ पंकज ने भी किया था. उन्होंने नसीरुद्दीन शाह और अर्चना पूरण सिंह स्टारर फिल्म जलवा में श्रीबेबी नाम का एक किरदार रखा था. श्रीदेवी का मज़ाक उड़ाने वाले इस किरदार को मशहूर एक्ट्रेस रोहिणी हट्टंगणी ने निभाया था.

2.

श्रीदेवी का रुतबा ऐसा कि उन्हें देख शत्रुघ्न सिन्हा और विनोद खन्ना जैसे सुपरस्टार्स खाना छोड़कर उठ गए!

जब पूर्णचंद्रा और पंकज पराशर की मुलाकात हुई, तब श्रीदेवी अमेरिका में किसी फिल्म की शूटिंग कर रही थीं. पंकज बताते हैं कि उन्होंने उससे पहले सिर्फ एक बार श्रीदेवी को सामने से देखा था. वो मौका था मिस्टर इंडिया का मुहूरत शॉट, जहां श्रीदेवी डांस कर रही थीं. तब से पंकज के भीतर श्रीदेवी के साथ काम करने की इच्छा थी. पंकज बताते हैं कि समय के साथ लोगों ने श्रीदेवी को ‘माई’ कहना शुरू कर दिया था. एक बार वो विनोद खन्ना, अमरीश पुरी और शत्रुघ्न सिन्हा के साथ एक फिल्म के सेट पर बैठकर लंच कर रहे थे. इतने में बाहर से आवाज़ें आनी शुरू हो गईं. किसी ने बताया कि माई आ गईं. ये सुनना था कि विनोद खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा और अमरीश पुरी खाना छोड़कर श्रीदेवी के सम्मान में खड़े हो गए. मेल डॉमिनेटेडे फिल्म इंडस्ट्री में इस घटना से आप श्रीदेवी के रुतबे और स्टारडम का अंदाज़ा लगा सकते हैं.

फिल्म चालबाज़ के एक सीन में शक्ति कपूर के साथ श्रीदेवी.
फिल्म चालबाज़ के एक सीन में शक्ति कपूर के साथ श्रीदेवी.

खैर, इसके घटना के कुछ ही समय बाद पूर्णचंद्रा ने पंकज पराशर और श्रीदेवी की मीटिंग फिक्स की. श्रीदेवी किसी फिल्म की शूटिंग कर रही थीं. पंकज उनसे मिलने सेट पर पहुंचे. श्री ने कहा कि अपनी फिल्म की कहानी सुनाइए. मगर पंकज ने तब तक कुछ भी नहीं लिखा था. इसलिए उन्होंने शुरू से लेकर आखिर तक सीता और गीता की कहानी सुना दी. इसके बाद श्रीदेवी ने पास में ही बैठे प्रोड्यूसर पूर्णचंद्रा को तेलुगु में कहा कि वो इस फिल्म में काम करने को तैयार हैं. जब चालबाज़ की शूटिंग शुरू हुई, तब पंकज ने श्रीदेवी के सामने कन्फेस किया कि उन्होंने चालबाज़ नहीं, सीता और गीता की कहानी सुनाई थी. श्रीदेवी ने कहा कि उन्हें ये बात मालूम थी. मगर उन्होंने पंकज की पिछली फिल्म जलवा देखी है. इसलिए उन्हें पता है कि वो जो भी बनाएंगे, वो कुछ अलग और नया होगा. पंकज ने ये किस्सा सत्यार्थ नायक की किताब- श्रीदेवी दी एटरनल गॉडेस में सुनाया था.

3.

जब श्रीदेवी ने बुखार में तपते हुए इस सुपरहिट गाने की शूटिंग की और पूरी यूनिट को पैसे बांट दिए

चालबाज़ की शूटिंग के दौरान महबूब स्टूडियो में स्ट्राइक होनी थी. शुक्रवार को एक गाने की शूटिंग शुरू हुई, जिसे रविवार की रात तक किसी भी हाल में खत्म करना था. क्योंकि सोमवार से स्ट्राइक चालू थी. ये गाना था ‘ना जाने कहां से आई है, ना जाने कहां को जाएगी’. शनिवार को श्रीदेवी जब फिल्म के सेट पर पहुंचीं, तो उनका बदन तप रहा था. अगर जानने वालों की मानें, तो उन्हें 101 डिग्री बुखार था. मगर श्रीदेवी ने कहा कि चाहे जो हो जाए, वो इस गाने की शूटिंग ज़रूर खत्म करेंगी. उनकी शर्त ये थी कि उनकी मां को उनसे और शूटिंग लोकेशन से थोड़ा दूर रखा जाए. बताया जाता है कि श्रीदेवी के जीवन और करियर में उनकी मां काफी हस्तक्षेप करती थीं. वो उनकी मीटिंग से लेकर शूटिंग तक उनके साथ रहती थीं. श्रीदेवी ने इस ममले पर कभी कोई बात नहीं की, मगर सिनेमा मैग्ज़ीन्स में श्रीदेवी और उनकी मां की आपसी तकरारों की खबरें खूब छपा करती थीं. खैर, श्रीदेवी ने पंकज से कहा कि उनकी मां को एक मैग्ज़ीन देकर थोड़ी दूर बैठा दिया जाए. वो नहीं चाहतीं कि उनकी मां को पता चले कि उन्हें बुखार है.

एक इवेंट के दौरान अपनी मां के साथ श्रीदेवी.
एक इवेंट के दौरान अपनी मां के साथ श्रीदेवी. बताया जाता है कि श्रीदेवी की लाइफ उनकी मां का काफी हस्तक्षेप हुआ करता था. 

श्रीदेवी के सेक्रेट्री हरी सिंह ने भी कहा कि शूटिंग रोक दीजिए. क्योंकि श्री की तबीयत खराब है. मगर श्रीदेवी खुद मानने को तैयार नहीं थीं. सेट पर शूटिंग के लिए बारिश वाली मशीन लगी हुई थी, श्रीदेवी ने मस्ती करते हुए हरी सिंह को उस मशीन के नीचे धकेल कर पूरा भीगो दिया. सुबह से लेकर रात के 2 बजे तक उस गाने की शूटिंग हुई. शूटिंग से निपटने के बाद श्रीदेवी ने उनके साथ सेट पर मौजूद रही पूरी यूनिट को पैसे बांटे. इसके बाद पूरी यूनिट के साथ श्री गेटी-गैलेक्सी थिएटर पहुंचीं. श्रीदेवी की रिक्वेस्ट पर उस थिएटर को देर रात तक खुला रखा गया था. वहां श्रीदेवी की फिल्म के पुराने गानों को देखते हुए पूरी टीम ने एंजॉय किया. सुबह के साढ़े पांच बजे ये सारा खेल खत्म हुआ. इसके बाद श्रीदेवी घर पहुंचीं और कहा कि वो अगले कुछ दिनों तक किसी फिल्म की शूटिंग नहीं करेंगी. प्रोड्यूसरों ने पूछा ऐसा क्यों, तो श्रीदेवी का जवाब था- क्योंकि मेरी तबीयत खराब है. फिल्म का वो गाना यहां सुनिए:

4.

चालबाज़ में कैसे श्रीदेवी ने रजनीकांत और सनी देओल को खिलौना बनाकर छोड़ दिया?

रजनीकांत और श्रीदेवी 1983 में आई तमिल फिल्म अदुथा वरिसु के बाद एक साथ काम करना बंद कर दिया था. क्योंकि श्रीदेवी हिंदी फिल्मों में एक्टिव हो गई थीं. मगर 1986 में उन्होंने एक बार फिर ‘नान आदिमई इल्लाई’ नाम की तमिल फिल्म में काम किया. ये फिल्म उन्होंने सिर्फ और सिर्फ रजनीकांत की वजह से की. इसी फिल्म का बदला चुकाने के लिए रजनीकांत ने चालबाज़ में एक नॉन-लीड रोल स्वीकार किया. फिल्म में रजनीकांत ने चॉल में रहने वाले एक शराबी टैक्सी ड्राइवर जग्गू का किरदार निभाया था. फिल्म के दूसरे मेल लीड थे सनी देओल. इस फिल्म में सनी को कास्ट किए जाने का आइडिया भी श्रीदेवी का ही था.

फिल्म के एक में सनी देओल और श्रीदेवी.
फिल्म के एक में सनी देओल और श्रीदेवी. तब सनी देओल हिंदी फिल्मों के बड़े स्टार थे और श्रीदेवी का स्टारडम देशभर की तमाम फिल्म इंडस्ट्रीज़ में था. 

श्रीदेवी हिंदी सिनेमा इतिहास की वो पहली एक्ट्रेस रहीं, जो अपनी फिल्म के हीरो खुद चुनती थीं. सनी देओल ये रोल नहीं करना चाहते थे. वो फिल्म के सेट पर मज़ाक-मज़ाक में हमेशा कहते रहते कि उनके रोल को क्रेडिट में गेस्ट अपीयरेंस बताया जाए. जिस दिन सेट पर सनी का क्लोज़ अप लगता, वो फटाक से कहते- आज माई नहीं आई क्या?

जब सनी से पूछा गया कि उन्होंने चालबाज़ में काम क्यों किया, तो वो कहते-

”मैं ये रोल करने को सिर्फ इसलिए तैयार हुआ क्योंकि बिलकुल ऐसा ही एक किरदार पापा ने भी सीता और गीता में निभाया था. मुझे लगा कि सिनेमा हमें इसलिए याद रखेगा. और बोनस ये कि इस फिल्म में मुझे पंकज पराशर और श्रीदेवी जैसी टैलेंटेड लोगों के साथ काम करने का मौका मिल रहा था.”

जब चालबाज़ बन रही थी, तब रजनीकांत साउथ इंडियन फिल्मों के सबसे बड़े स्टार थे और सनी देओल हिंदी फिल्मों के स्टार. इन दोनों के फिल्म होने के बावजूद चालबाज़ को श्रीदेवी की फिल्म कहकर प्रमोट किया गया और आज भी उसे श्रीदेवी की ही फिल्म कहा जाता है. फिल्म के मेकर्स भी मानते हैं कि श्रीदेवी ने चालबाज़ में अपनी परफॉरमेंस से रजनी और सनी को प्रॉप्स भर बनाकर छोड़ दिया. अगर वो फिल्म में नहीं भी होते, तो कुछ खास फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि पब्लिक श्रीदेवी को देखने के लिए सिनेमाघरों में आई.

कहा जाता है कि रजनीकांत ने चालबाज़ में श्रीदेवी का फेवर लौटाने के लिए काम किया था.
कहा जाता है कि रजनीकांत ने चालबाज़ में श्रीदेवी का फेवर लौटाने के लिए काम किया था.

जितने भी लोगों ने श्रीदेवी के साथ काम किया, सबका ये मानना है कि श्रीदेवी स्विच ऑन- स्विच ऑफ प्रोसेस से काम करती हैं. वो मेथड एक्टिंग नहीं करती. वो गिफ्टेड हैं. वो बड़ी चुपचाप सी, शांत सी रहने वाली महिला थीं, मगर जैसे ही कैमरा ऑन होता, श्रीदेवी का स्विच ऑन हो जाता. वो बदल जातीं. जैसे ही कट की आवाज़ आती, उनका स्विच ऑफ हो जाता.

5.

जब गुस्से में आकर हीरो ने श्रीदेवी के पांव पर गाड़ी चढ़ा दी!

श्रीदेवी ने अपना करियर एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर शुरू किया. इसके बाद वो एक्टिंग की फील्ड में आगे बढ़ती ही चली गईं. कहने का मतलब श्रीदेवी को कभी कोई फॉर्मल एजुकेशन नहीं मिला. न वो स्कूल जा पाईं, न कॉलेज. उन्होंने जीवन में दुनिया नहीं देखी. वो स्डूडियो और फिल्म सेट्स पर ही कैद रहीं. बावजूद इसके उन्होंने अपने करियर तमाम तरह के रोल्स किए. ये चीज़ किसी को भी अचंभित कर सकती है. जब चालबाज़ की शूटिंग शुरू हुई, तब यही सवाल पकंज पराशर श्रीदेवी से पूछ लिया. पंकज ने पूछा कि आपने कभी लाइफ नहीं देखी, फिर आप इन अलग-अलग किरदारों के निभाने की प्रेरणा कहां से पाती हैं? श्रीदेवी ने इसके जवाब में एक किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा कि वो एक फिल्म में काम कर रही थीं. फिल्म का हीरो बार-बार उनके साथ फ्लर्ट करने की कोशिश कर रहा था. श्री बार-बार पीछे हट जा रही थीं. इस बात ने उस हीरो को नाराज़ कर दिया. उस फिल्म के एक गाने की शूटिंग हो रही थी, जिसमें श्री को पैदल चलना था और हीरो को जीप में उनके पीछे आना था. इस सीन की शूटिंग के दौरान उस हीरो ने जान-बूझकर उनके पांव जीप चढ़ा दी. श्रीदेवी ने धीमे से कहा-

”लोगों को लगता है मैंने लाइफ नहीं देखी, मगर मैंने इन फिल्म सेट्स और स्टूडियो में ही बहुत कुछ देखा है.”


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