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जब मां की डेथ के बाद शाहरुख मुंबई पहुंचे और प्रोड्यूसर से सुबह 4 बजे फिल्म बनाने का वादा लिया

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1989 में सलमान खान और रवीना टंडन की फिल्म ‘पत्थर के फूल’ के शूटिंग चल रही थी. इससे रवीना का डेब्यू होना था और सलमान की ‘मैंने प्यार किया’ का पोस्ट-प्रोडक्शन चल रहा था. फिल्म के आखिरी हिस्से की शूटिंग बांद्रा के लिंकिंग रोड में हो रही थी. उन दिनों लिंकिंग रोड पर शूटिंग करने की परमिशन सिर्फ संडे को ही मिलती थी. इस फिल्म को जी.पी सिप्पी और विवेक वासवानी मिलकर प्रोड्यूस कर रहे थे. फिल्म के डायरेक्टर अनंत बलानी और असिस्टेंट डायरेक्टर संजय गुप्ता (कांटे) के कहने पर विवेक पास में ही बने एक कॉफी शॉप में जाकर बैठ गए. शॉप में शीशा लगा हुआ था. विवेक वहां बैठकर शूटिंग देख रहे थे. अचानक एक वेटर ने उनसे आकर कहा कि दूसरी टेबल पर एक टीवी स्टार बैठे हुए हैं और उन्हें सिगरेट चाहिए लेकिन यहां आसपास कहीं नहीं मिल रही. विवेक ने एक सिगरेट दे दी. थोड़ी देर बाद वही वेटर उसी डिमांड के साथ आया. विवेक ने फिर से सिगरेट दे दी. तीसरी बार वेटर को भेजने के बदले वो स्टार खुद ही विवेक के पास आकर बैठ गया. दोनों में बातचीत होनी शुरू हुई. विवेक को पता चला कि लड़के का नाम शाहरुख खान है. दिल्ली से टीवी शो ‘सर्कस’ करने मुंबई आया है.

शाम को ‘पत्थर के फूल’ की शूटिंग खत्म हुई और विवेक अपनी टीम के साथ जेम्स कैमरन की फिल्म ‘ऐबिस’ देखने के लिए जाने लगे. शाहरुख ने कहा मैं भी चलूंगा. विवेक ने कहा चलो. फिल्म हाउसफुल चल रही थी. ब्लैक में टिकट ली गई, पॉपकॉर्न खरीदा गया और पिक्चर देखी गई. जैसे ही फिल्म खत्म हुई शाहरुख ने विवेक से 100 रुपए मांगे. उन्हें बांद्रा में सईद मिर्ज़ा के ऑफिस जाना था लेकिन किराए के लिए पैसे नहीं थे. शाहरुख तब उस ऑफिस में ही रहते थे. इतना खर्चा करने के बाद विवेक के पास भी पैसे नहीं बचे थे. उन्होंने कहा कि वो शाहरुख को अपने कार से छोड़ देंगे. लेकिन कार में पेट्रोल भी नहीं था. विवेक ने कहा मेरे घर चलो मैं मां से पैसे लेकर तुम्हें दे दूंगा फिर तुम चले जाना. लेकिन रात के 1 बजे जब विवेक अपने घर पहुंचे, तब तक उनकी मां सो चुकी थीं. उन्होंने शाहरुख को कपड़े दिए और कहा कि रात यहीं रुक जाओ कल सुबह चले जाना. लेकिन उस रात के बाद शाहरुख अगले दो सालों तक विवेक के घर ही रहे. हम इतने बड़े इंट्रो के साथ जो बीज बो रहे हैं, उस पर फिल्म ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ नाम का पेड़ उगने वाला है. यानी शाहरुख के करियर की दूसरी और लीड रोल में उनकी पहली फिल्म. 13 नवंबर, 1992 को रिलीज़ हुई इस फिल्म ने अपनी रिलीज़ के 27 साल पूरे कर लिए हैं.

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जब शाहरुख ने मां की डेथ के बाद प्रोड्यूसर से जबरदस्ती फिल्म बनवाई

‘सर्कस’ की शूटिंग से फुर्सत निकालकर शाहरुख दिल्ली गए. अपने कपड़े वगैरह लेकर आए. शूटिंग में लग गए. फिर से कुछ दिन बाद वो दिल्ली गए. उन्होंने दिल्ली जाकर विवेक को फोन किया कि उनकी मां की तबीयत खराब है. दवाइयां चाहिए. विवेक ने शाहरुख के पायलट दोस्त रमन को दवाइयां खरीदकर दे देते. और रमन वो दवाइयां शाहरुख को दे देते थे. दो-चार बार ऐसा करने के बाद विवेक खुद शाहरुख की मां से मिलने दिल्ली गए. तब तक वो कोमा में जा चुकी थीं. विवेक के मुंबई लौटने के हफ्ते दिन बाद उनकी डेथ हो गई. शाहरुख ने वहां अपनी फॉर्मैलिटी पूरी की और बिना किसी को इंफॉर्म किए मुंबई आ गए. सुबह चार बजे उन्होंने विवेक के घर की घंटी बजाई. विवेक ने गेट खोला और अंदर आने को कहा लेकिन शाहरुख ने मना कर दिया. उन्होंने कहा कि वो उनके घर में तभी आएंगे, जब वो उनके साथ पिक्चर बनाएंगे. विवेक ने बात-बात में कह दिया कि हां बनाएंगे. इसके बाद दोनों घर से निकलकर पास के ताज होटल में कॉफी पीने चले गए. यहां बैठकर दोनों की लंबी बातचीत हुई और ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ का आइडिया आया.

करियर के शुरुआती दिनों में एक मैग्ज़ीन कटिंग में विवेक के साथ शाहरुख खान. दूसरी तस्वीर में सुपरस्टार बनने बाद विवेक से बातचीत करते शाहरुख.
करियर के शुरुआती दिनों में एक मैग्ज़ीन कटिंग में विवेक के साथ शाहरुख खान. दूसरी तस्वीर में सुपरस्टार बनने बाद विवेक से बातचीत करते शाहरुख.

सलमान की फिल्म पर पैसा बहाने के बाद शाहरुख की फिल्म पर कंजूसी

‘राजू बन गया जेंटलमैन’ के आइडिया के बाद शाहरुख ने कुछ और फिल्में साइन कीं. इसमें कुछ बड़े फिल्ममेकर्स की भी फिल्में थीं. खैर, विवेक अपनी फिल्म का आइडिया लेकर अपने पार्टनर (प्रोड्यूसर) जी.पी सिप्पी के पास पहुंचे. विवेक ने बताया कि वो शाहरुख नाम के एक लड़के को लेकर फिल्म बना रहे हैं. जी. पी. सिप्पी ने सलाह दिया कि एक लड़का है, जिसे राजीव मेहरा (चमत्कार), राकेश रौशन (किंग अंकल) और हेमा मालिनी (दिल आशना है) ने साइन किया है, वो ऐसे एक्टर को फिल्म में क्यों नहीं लेते. विवेक ने बताया कि ये वही लड़का है. इस बात से आश्वस्त होने की बजाय सिप्पी ने कहा कि उन्हें ‘राजू…’ को ‘पत्थर के फूल’ से कम बजट में बनाना होगा. सिप्पी ने कहा कि उस फिल्म में सलमान खान है, जो सलीम खान का बेटा है. रवीना टंडन है, जो रवि टंडन (फिल्ममेकर) की बेटी है. उनकी फिल्म के चल जाने का स्कोप ज़्यादा है. शाहरुख बिलकुल नया है. साथ ही वो इंडस्ट्री का भी नहीं है. इसलिए ये फिल्म लो बजट में ही रखनी पड़ेगी. विवेक मान गए.

 फिल्म 'पत्थर के फूल' के पोस्टर में सलमान खान और रवीना टंडन. दूसरी तरफ फिल्म राजू बन गया जेंटलमैन के पोस्टर पर जूही चावला के साथ शाहरुख खान.
फिल्म ‘पत्थर के फूल’ के पोस्टर में सलमान खान और रवीना टंडन. दूसरी तरफ फिल्म राजू बन गया जेंटलमैन के पोस्टर पर जूही चावला के साथ शाहरुख खान.

आमिर खान की वजह से जूही शाहरुख के साथ फिल्म करने को मानीं

1988 में जूही चावला और आमिर खान की फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ आई थी. ये फिल्म ब्लॉकबस्टर रही थी. इसके बाद ‘लव लव लव’ में भी वो आमिर के साथ काम कर चुकी थीं. ऐसे में उन्हें प्रोड्यूसर ने ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ के लिए अप्रोच किया. जूही ने कहानी वगैरह सुनने के बाद पूछा कि फिल्म में उनके साथ कौन है. विवेक ने बताया शाहरुख खान नाम का एक लड़का है. तब तक जूही ने सिर्फ शाहरुख खान का नाम सुना था, कभी मिली नहीं थीं. विवेक ने डिस्क्रिप्शन देते हुए बताया कि ये हीरो भी आमिर खान जैसा ही है. जूही मान गईं. लेकिन जब वो सेट पर पहुंची, तो शाहरुख को देखकर हैरान हो गईं. जूही के शब्दों में कहें, तो- ”जब मैंने सेट पर शाहरुख को पहली बार देखा तो वो भूरे रंग के थे. उनके बिखरे हुए बाल आंखों तक आ रहे थे. हाइट ठीक-ठाक सी ही थी. लेकिन वो किसी भी एंगल से आमिर खान नहीं लग रहे थे.” हालांकि फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों की बातचीत हुई और शाहरुख के विट से जूही इंप्रेस हो गईं. कुछ ही समय में दोनों की दोस्ती हो गई. आगे उन्होंने एक साथ कुल 9 फिल्मों में काम किया. साथ मिलकर ड्रीम्ज़ अनलिमिटेड (Dreamz Unlimited) नाम की प्रोडक्शन कंपनी शुरू की. और पार्टनरशिप में एक आईपीएल (Indian Premiere League) टीम (कोलकाता नाइट राइडर्स) भी खरीदी.

फिल्म 'राजू बन गया जेंटलमैन' के एक रोमैंटिक सीन में शाहरुख खान और जूही चावला.
फिल्म ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ के एक रोमैंटिक सीन में शाहरुख खान और जूही चावला.

शाहरुख फिल्म में खुद को देखकर इतने निराश हुए कि दिल्ली लौटने लगे

शाहरुख को देखने के बाद जूही को जैसा लगा था, वही रियलाइजेशन शाहरुख को भी होने लगा. ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ की शूटिंग खत्म हो चुकी थी. फिल्म के शूट किए कुछ हिस्से आर.के. स्टूडियोज़ में फिल्म से जुड़े लोगों को दिखाए जा रहे थे. यहां शाहरुख भी मौजदू थे. उन्होंने जब पहली बार खुद को बड़े पर्दे पर देखा, तो उन्हें लगा कि वो काफी बुरे दिख रहे हैं. साथ ही वो नाना पाटेकर जैसे ब्रिलियंट एक्टर के सामने बचकानी एक्टिंग कर रहे हैं. उन्हें लगने लगा कि वो फिल्मों में काम नहीं कर पाएंगे. वो इतने निराश हो गए कि अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर उसी रात मुंबई छोड़ने का फैसला कर लिया. सुबह के सवा चार बजे एक फ्लाइट मुंबई से दिल्ली के लिए निकलती थी. प्रोड्यूसर्स की मदद से उसकी टिकट पर 25 % की छूट मिल जाती थी. शाहरुख ने वो टिकट बुक किया और एयरपोर्ट निकल पड़े. इस दौरान उन्हें फिल्म के डायरेक्टर अज़ीज़ मिर्ज़ा और जूही चावला ने समझाया कि ये फिल्म का रफ कट है. एडिटिंग वगैरह होने के बाद उन्हें जो चीज़ खटक रही है, वो ठीक हो जाएगी. ये सुनकर शाहरुख के भीतर एक उम्मीद जगी और उन्होंने दिल्ली जाने का प्लान कैंसिल कर दिया. फिल्म रिलीज़ हुई और चल गई लेकिन बकौल शाहरुख वो पर्दे पर कभी अच्छे नहीं दिखे.

फिल्म के एक सीन में धाकड़ एक्टर नाना पाटेकर के साथ शाहरुख खान.
फिल्म के एक सीन में धाकड़ एक्टर नाना पाटेकर के साथ शाहरुख खान.

शाहरुख की डेब्यू फिल्म के लिए प्रोड्यूसर्स लड़ पड़े

ये वो समय था, जब शाहरुख के पास ‘दिल आशना है’, ‘दीवाना’, ‘राजू बन गया जेंटलमैन’, ‘किंग अंकल’ और ‘चमत्कार’ जैसी फिल्में थीं. हर प्रोड्यूसर चाहता था कि उसकी फिल्म पहले बनकर रिलीज़ हो. लेकिन शाहरुख चाहते थे कि ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ पहले थिएटर्स में उतरे. ‘दीवाना’ बनकर तैयार थी और मई-जून 1992 में रिलीज़ के लिए होने जा रही थी. वहीं ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ नवंबर से पहले कंप्लीट होने की हालत में नहीं थी. ऐसे में तमाम कोशिशों के बावजूद ‘दीवाना’ रिलीज़ होने वाली शाहरुख के करियर की पहली फिल्म बनी. लेकिन दिक्कत ये थी कि इस फिल्म में शाहरुख सेकंड लीड में थे. उनका कैरेक्टर फिल्म में हाफ टाइम के बाद आता है. हालांकि शाहरुख इसमें पसंद किए गए. इस फिल्म के दौरान शाहरुख के लिए मार्केट में जो बज़ बना, उसका फायदा उठाया पांच महीने बाद रिलीज़ होने वाली ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ ने. ‘राजू…’ रन अवे हिट रही. फिल्म का एक सुपरहिट ट्रैक यहां सुनिए:

‘दीवाना’ और ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ की बैक टू बैक सक्सेस के बाद शाहरुख खान डिमांड में आ गए. फिल्म के गाने काफी पॉपुलर हुए. जतिन-ललित का बनाया ‘लवेरिया हुआ’ तो चार्टबस्टर बन गया. आज के समय में भी इस फिल्म को स्वीट-रोमैंटिक बताते हुए भी प्रासंगिक माना जाता है. अगले साल (1993) अब्बास-मस्तान की ‘बाज़ीगर’ और यश चोपड़ा की ‘डर’ जैसी फिल्में करने के बाद शाहरुख खान बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन के बाद नेक्स्ट बिग थिंग माने जाने लगे. और आगे जो हुआ उसके लिए हम एक बार फिर से इतिहास गवाह है वाली लिखेंगे.


वीडियो देखें: सलमान खान और सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ के धांसू किस्से

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