Submit your post

Follow Us

25 साल बाद सामने आया अक्षय की फिल्म का वो झूठ, जो बचपन की यादें बिगाड़ देगा

तारीख 5 जून, 1992. सिनेमा घरों पर नई फिल्म लगी. ‘खिलाड़ी’. लीड में एक नया लड़का था. जो इससे पहले ‘सौगंध’ और ‘डांसर’ जैसी फिल्में दे चुका था. हालांकि, ये दोनों ही फिल्में उसे अपना पहला ब्रेकथ्रू दिलाने में नाकाम रही. अब अब्बास-मस्तान के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म से कुछ उम्मीद थी. उम्मीदें सही साबित हुईं. क्योंकि उस दिन के बाद उस नए लड़के को कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा. ‘खिलाड़ी’ हिट हो गई. महीनों तक जिस सिनेमा घर पर लगी रहती, उसके सामने हाउस फुल का बोर्ड आम हो गया. ये नया लड़का अब एस्टैब्लिश हो चुका था. अक्षय कुमार यानी बॉलीवुड का खिलाड़ी कुमार बनकर.

उन्होंने खिलाड़ी के साथ अपने सफर को आगे भी जारी रखा. ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ और ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ के जरिए. दोनों 90 के दशक की कमर्शियली कामयाब फिल्में. फिर आया साल 1996. तारीख 14 जून. रिलीज़ हुई ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’. अपने समय की बहुत बड़ी हिट. फिल्म उस साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्मों में छठे पायदान पर रही. फिल्म की कामयाबी का अनुमान आप इसी बात से लगा लीजिए कि इसकी रिलीज़ के कुछ दिन बाद शाह रुख खान और श्रीदेवी स्टारर ‘आर्मी’ रिलीज़ हुई थी. जिसे जनता ने सिरे से नकार दिया. ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’, ऐसी फिल्म जिसके साथ हमारे बचपन की कोई-ना-कोई मेमरी जरुर है. हाल ही में फिल्म ने अपनी रिलीज़ के 25 साल पूरे किए हैं. जानेंगे अक्षय की फिल्म ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ से जुड़े कुछ किस्से.

Bollywood Kisse

# बचपन खराब करने वाला झूठ बोला गया

इस किस्से की शुरुआत दो टाइमलाइन से करनी होगी. पहला, फिल्म की कहानी. अक्षय ने अक्षय मल्होत्रा नाम का किरदार निभाया. उसके नाम पर आप हैरानी ना जताएं और ना ही उसका नाम भूलें, इसलिए वो खुद आपको अपना नाम याद दिलाएगा. गाना गाकर. ‘हम हैं सीधे-सादे अक्षय, अक्षय’. खैर, अक्षय का भाई लापता हो जाता है. वो उसी को ढूंढने निकल पड़ता है. फिल्म में उनके भाई का रोल निभाया दिवंगत एक्टर इंदर कुमार ने. जिन्हें आप ‘घूंघट’, ‘मासूम’ और ‘वॉन्टेड’ जैसी फिल्मों में भी देख चुके हैं. अक्षय को पता चलता है कि उसका भाई किसी मैडम माया के लिए काम करता था. भाई का पता लगाना है. इसलिए अक्षय भी मैडम माया की टीम का हिस्सा बन जाता है.

मैडम माया से एक डायलॉग बार-बार याद आता है. ‘माया, तेरी तो मैं बदल दूंगा काया’. जो दोहराता रहता है किंग डॉन. माया का दुश्मन. मैडम माया और किंग डॉन इललीगल तौर पर अंडरग्राउंड रेसलिंग करवाते. जहां दोनों पक्षों से फाइटर्स लड़ते. अक्षय माया का खास फाइटर बन चुका होता है. इसलिए माया की तरफ से वो लड़ता है. किंग डॉन की तरफ से हाजिर होते हैं अंडरटेकर. करीब 6 फुट का गोरा मुश्टंडा. जिसका चेहरा उसके बालों से ही ढका रहता है. और जो बीच-बीच में ‘पंगा’ बोलता रहता है. खैर, अक्षय और इस अंडरटेकर की लड़ाई चलती है. खूब उठा-पटक. और अक्षय लास्ट में जीत जाता है.

Akshay Ka Bhai
फिल्म में अक्षय के भाई बने थे इंदर कुमार.

अब कट टू दूसरी टाइमलाइन. साल 1994 की WWF. WWF, हमारे बचपन का सबसे बड़ा टाइमपास. WWF के प्लेयर अंडरटेकर गायब हो जाते हैं. जिन्हें स्टोरीलाइन में मृत घोषित कर दिया जाता है. शो की भाषा में बोलें तो अंडरटेकर कई बार मरकर लौट आते थे. खैर, अंडरटेकर गायब हैं. वो भी पिछले आठ महीनों से. किसी को नहीं पता कि वो कहां हैं. इसी बीच टेड डीबियासे, जो खुद एक रेसलर हैं, एक दावा करते हैं. कि मैं अंडरटेकर को वापस लेकर आऊंगा. अपने साथ एक रेसलर को लेकर आते हैं. जो हूबहू अंडरटेकर जैसा दिखता है. आगे बढ़ने से पहले एक जरूरी बात, अंडरटेकर किसी का असली नाम नहीं. अंडरटेकर नाम के किरदार का लाइसेंस WWE के पास है. जिन्हें हम असली अंडरटेकर कहकर पुकारते थे, उनका नाम मार्क कैलावे था.

Undertaker Panga
अक्षय ने फिल्म में जिस अंडरटेकर से लड़ाई की, वो असली था ही नहीं.

हालांकि, टेड जिस अंडरटेकर को लेकर आए. वो असली नहीं था. उसका नाम था ब्रायन ली. ऐसा किया गया ताकि अंडरटेकर वर्सेज़ अंडरटेकर की स्टोरीलाइन रची जा सके. कुछ समय बाद असली अंडरटेकर यानी मार्क की वापसी हुई. और दोनों का बड़े पैमाने पर मैच रखा गया. 29 अगस्त, 1994 को समरस्लैम ईवेंट में दोनों अंडरटेकर भिड़े. और असली वाले ने ब्रायन को महज आठ मिनट के अंदर हरा दिया. अब लौटते हैं ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ वाले अंडरटेकर पर. फिल्म की रिलीज़ के वक्त ये एक बड़ा एडवरटाइज़िंग पॉइंट था. कि फिल्म में आपको अक्षय कुमार अंडरटेकर से लड़ाई करते दिखेंगे. इंटरनेट का दौर था नहीं. इसलिए जनता को जो परोसा गया, वो उन्होंने मान लिया. लेकिन बाद में सच सामने आया. कि अक्षय से लड़ने वाला अंडरटेकर असली नहीं था. बल्कि, ब्रायन ली ही अंडरटेकर की कॉस्टयूम में अक्षय से लड़े थे. ये बात खुद अक्षय कुमार ने भी एक मीम के जरिए शेयर की. ब्रायन ने बिना WWF की जानकारी के फिल्म में शूटिंग की थी. ब्रायन के अलावा WWF के रेसलर क्रश भी फिल्म का हिस्सा थे.


# एक सीन जिसके चलते अक्षय कभी सिक्स पैक ऐब्स नहीं रख सकते

अक्षय कुमार बताते हैं कि उन्होंने आज तक कोई भी सनराइज़ मिस नहीं किया है. रात को जल्दी सोते हैं. डाइट में सख्ती बरतते हैं. उनकी लाइफस्टाइल इंस्पिरेशनल है. लेकिन फिट रहने के बावजूद भी आपने कभी अक्षय की भारी-भरकम बॉडी नहीं देखी होगी. ना ही कभी उनके सिक्स पैक एब्स देखे होंगे. अक्षय के ऐसा ना कर पाने की वजह भी ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ से जुड़ी हुई है. दरअसल, उस सीन से जहां उन्होंने नकली अंडरटेकर से लड़ाई की. अक्षय और ब्रायन की लड़ाई में खूब उठा-पटक हुई. लास्ट में अक्षय जीत जाते हैं. लेकिन उनकी इस फाइट ने उन्हें ऐसी इंजरी दे दी जिसके निशान ज़िंदगी भर रहेंगे.

उस सीन में ब्रायन को उठाने के दौरान अक्षय को स्लिप्ड डिस्क की समस्या हो गई थी. अक्षय ने सीन बड़ी सफाई से शूट किया. लेकिन फिर भी उसके बाद उन्हें डॉक्टर के पास जाना पड़ा. डॉक्टर ने उन्हें कम्प्लीट बेड रेस्ट की सलाह दी. ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रायन को उठाने के चक्कर में अक्षय को स्लिप्ड डिस्क हो गया था. स्लिप्ड डिस्क जो है, वो रीढ़ की हड्डियों में होता है. एक नॉर्मल इंसान की रीढ़ बहुत सारी हड्डियों को मिलाकर बनती है. इन हड्डियों को एक-दूसरे से टकराने और उसकी वजह से चलने-दौड़ने में लगने वाले झटकों से बचाने के लिए उनके बीच दो लेयर होते हैं. एक लेयर होती है जेलेटिन जैसा कोई मटिरियल और दूसरी एक सख्त परत. जब सख्त परत कमज़ोर पड़ जाती है और उससे रीसकर जेल बाहर निकलने लगता है, उस कंडिशन को डॉक्टरों की भाषा में स्लिप्ड डिस्क कहते हैं. ये आम तौर पर भारी वजन उठाने से हो जाती है.

Akshay And Brian Fight 11
फिल्म में ब्रायन को उठाने के दौरान अक्षय को स्लिप्ड डिस्क की दिक्कत हो गई थी.

अपनी इस चोट की वजह से अक्षय आज भी वेट ट्रेनिंग नहीं करते. इसके बदले वो जॉगिंग और तैराकी पर ज्यादा ध्यान देते हैं. कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये बताया गया कि अक्षय कुमार ने ‘भाग मिल्खा भाग’ सिर्फ इसलिए छोड़ी थी क्योंकि उस फिल्म के लिए उन्हें अपनी बॉडी में काफी बदलाव करने पड़ते. मतलब भयंकर किस्म का ट्रांसफॉर्मेशन. जो अक्षय अपनी स्लिप्ड डिस्क की वजह से नहीं कर पाते.


# वो रोल जिसे कर डिम्पल कपाड़िया को शर्मिंदा होना पड़ता

मैडम माया. क्रूर किस्म की महिला. हमेशा अपने मुश्टंडे बॉडीगार्ड्स से घिरी रहती. उस तक पहुंचने के लिए सामने वाले को 20 कदम का फासला तय करना होता. अक्षय ये फासला तय कर लेता है और माया के करीब आ जाता है. माया का किरदार निभाया दिग्गज एक्ट्रेस रेखा ने. उनके काम की खूब तारीफ हुई. उनके हिस्से अवॉर्ड्स भी आए. उन्होंने फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस अवॉर्ड और स्टार स्क्रीन अवॉर्ड फॉर बेस्ट विलन जैसे अवॉर्ड जीते. रेखा का विलन पसंद किया गया. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि रेखा इस रोल के लिए पहली चॉइस नहीं थी.

Rekha Filmfare Award
‘मैडम माया’ की बदौलत रेखा के हिस्से कई अवॉर्ड्स आए.

ये रोल पहले गया था डिम्पल कपाड़िया के पास. लेकिन डिम्पल ने मना कर दिया. वजह थी कि उनकी बेटी ट्विंकल खन्ना उसी दौरान अपना डेब्यू करने जा रहीं थी. फिल्म ‘बरसात’ के जरिए. डिम्पल अपनी बेटी के शुरुआती करियर पर ध्यान देना चाहती थीं. इसलिए उन्होंने इस रोल को मना कर दिया. ये रोल ठुकराने के पीछे सिर्फ एक ये वजह ही नहीं थी. दरअसल, 1993 में डिम्पल कपाड़िया की एक फिल्म आई थी. ‘रुदाली’. फिल्म में उनके किरदार शनीचरी ने उन्हें थका कर रख दिया था. इसलिए वो कुछ समय के लिए ब्रेक भी लेना चाहती थीं. ये बात उन्होंने खुद साल 2000 में फिल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में बताई.

Shanichari
‘रुदाली’ में शनीचरी के किरदार ने डिम्पल कपाड़िया को थका कर रख दिया था.

‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ रिलीज़ होने के बाद डिम्पल ने देखा कि रेखा के किरदार के हिस्से खूब तारीफ़ें आ रही हैं. हर रिव्यू में उनके काम की प्रशंसा हो रही है. अवॉर्ड्स मिल रहे हैं. उन्हें उस समय लगा कि उन्हें रोल छोड़ना नहीं चाहिए था. लेकिन अब वो मानती हैं कि उन्होंने वो रोल छोड़कर अच्छा ही किया. फिल्म में रेखा और अक्षय के इंटिमेट सीन्स थे. रेखा और अक्षय के ऐज गैप की वजह से भी ऐसे सीन्स को देखकर ऑडियंस असहज हो गई थी. ऊपर से अक्षय ने फिल्म रिलीज़ होने के करीब पांच साल बाद डिम्पल की बेटी ट्विंकल से शादी की. तो ऐसे में डिम्पल मानती हैं कि अच्छा हुआ उन्होंने वो रोल छोड़ दिया. वरना ये अक्षय और उनके लिए काफी ऑकवर्ड हो जाता.


वीडियो: नसीरुद्दीन शाह क्यों आमिर के साथ काम करना पसंद नहीं करते?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्रिकेट के किस्से

नेट्स में फुटबॉल के जूते पहनकर बैटिंग करने आए राहुल द्रविड़ तो क्या हुआ?

इस बात को कभी भूल नहीं पाएंगे रिकी पॉन्टिंग.

जब पता भी नहीं था कि वनडे क्या होता है, तब मज़े-मज़े में विश्व कप में मैच जीत गया भारत!

भारत की पहली वनडे जीत की कहानी.

जब ब्रैडमैन को खेलते देखने के लिए जेल में सोए महात्मा गांधी के बेटे

ब्रैडमैन की आखिरी सीरीज़ में नॉटिंघम में होटलों का अकाल पड़ गया था.

क़िस्से उस शराबी 'इंग्लिश' क्रिकेटर के, जिसने ऑस्ट्रेलिया को वर्ल्ड चैंपियन बना दिया

वो क्रिकेटर जो किसान या मछुआरा बनना चाहता था, लेकिन बन गया शराबी.

क़िस्सा बंगाल से निकले 'बेस्ट' लेफ्ट हैंडर का, जिसने हमें सौरव गांगुली दिया

जिसके घरवाले बैंक को लोन देते थे.

ऑस्ट्रेलिया का वो कप्तान, जिसकी वैल्यू सबसे पहले सौरव गांगुली ने पहचानी

एक लेग स्पिनर, जिसे अब डॉन ब्रेडमैन जैसा बताया जाता है.

नमाज़ के कारण मिस्बाह उल हक़ को टीम में नहीं आने देना चाहते थे इंज़माम?

क्या है मिस्बाह उल हक़ का अताउल्लाह खान कनेक्शन?

'शैम्पेन के घूंट' जैसे खेलने वाला वो भारतीय क्रिकेटर, जिसपर फिदा थे ऑस्ट्रेलिया के लोग

जिगरबाज़ ऑलराउंडर, जिसे लोग 'गरीबों का सोबर्स' भी कहते थे.

कहानी उस कमाल के शख्स की, जिसने सचिन तेंडुलकर को अरबपति बनाया

सचिन को 'ब्रांड सचिन' बनाने वाले दिग्गज के किस्से, जिसने कहा था- जब यूरोप के दिग्गज सो रहे थे, हमने राजाओं का गेम ही खरीद लिया.

सहवाग के उतरे कंधे की वजह से सालों साल खेल गया टीम इंडिया का ये बल्लेबाज़!

जब मांजरेकर ने जॉन राइट से कहा, इसकी रेप्युटेशन 50 वाली नहीं 200-300 रन वाली है.