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जब माधुरी दीक्षित ने झूमकर डांस किया और देशभर को गिनती सिखा दी

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1986 में सुभाष घई एक फिल्म बना रहे थे ‘कर्मा’. उसकी कास्टिंग के दौरान उनकी मुलाकात माधुरी दीक्षित नाम की एक लड़की से हुई. माधुरी की हेयरड्रेसर खातून ने घई को माधुरी से मिलावाया था. सुभाष घई तब बड़े डायरेक्टर थे. उनकी फिल्म के साथ लॉन्च होने का मतलब था कि आप पहली ही फिल्म में देखे और नोटिस किए जाएंगे. तब तक माधुरी ‘अबोध’ (1984) और ‘आवारा बाप’ (1985) जैसी फिल्मों में काम कर चुकी थीं. घई ने उनसे मिलते ही कहा कि वो उन्हें बड़े लेवल पर लॉन्च करेंगे. उन्होंने अपनी फिल्म ‘कर्मा’ में उन्हें एक डांस सीक्वेंस के लिए कास्ट कर लिया. लेकिन जब फिल्म बनकर तैयार हुई, तब माधुरी का डांस नंबर फिल्म की फील के साथ नहीं जा रहा था. इसलिए वो गाना ड्रॉप कर दिया गया. लेकिन घई ने माधुरी को वादा किया कि वो उन्हें अपनी ही फिल्म से लॉन्च करेंगे. बाद में माधुरी लॉन्च भी हुई और रातों-रात सुपरस्टार भी बनीं लेकिन उसमें किसी डायरेक्टर, प्रोड्यूसर या एक्टर का हाथ नहीं था. आगे हम जो भी जानेंगे, वो फिल्म ‘तेज़ाब’ के बारे में होगा. क्योंकि 11 नवंबर, 1988 को रिलीज़ हुई इस फिल्म ने अपने 31 साल पूरे कर लिए हैं. और यही वो फिल्म थी, जिससे माधुरी दीक्षित नाम के फेनोमेना की शुरुआत हुई थी.

जब माधुरी का मैनेजर उनके लिए मशहूर प्रोड्यूसर से भिड़ गया

हम यहां जिस शख्स की बात कर रहे हैं, उनका नाम है राकेश नाथ उर्फ रिक्कू. राकेश ने पहली बार माधुरी को 1984 में एक टीवी शो के सेट पर देखा था. रिक्कू और माधुरी की मुलाकात भी हेयरड्रेसर खातून ने ही करवाई. क्योंकि खातून, रिक्कू की क्लाइंट सलमा आगा की भी हेयरड्रेसर थीं. उस समय पर रिक्कू अनिल कपूर का काम देखते थे, जो ‘मिस्टर इंडिया’ के बाद बड़े स्टार बन चुके थे. रिक्कू ने सेट पर माधुरी का काम देखा और इंप्रेस हो गए. माधुरी की पहली फिल्म ‘अबोध’ के रिलीज़ होने के हफ्तेभर बाद रिक्कू माधुरी का काम देखने लगे थे. यानी उनके मैनेजर बन गए थे. ‘अबोध’ बुरी तरह पिट चुकी थी और माधुरी तब तक पांच और फिल्में साइन कर चुकी थीं, जिनमें उन्हें सपोर्टिंग रोल्स में कास्ट किया गया था. रिक्कू अनिल का काम खत्म करने के बाद दिन भर माधुरी को काम दिलाने के लिए एक प्रोड्यूसर से दूसरे प्रोड्यूसर के पास जाते रहते थे. मशहूर डायरेक्टर टी.रामा राव ने अपनी फिल्म ‘खतरों के खिलाड़ी’ में धर्मेंद्र, संजय दत्त, चंकी पांडे और नीलम के साथ माधुरी को भी साइन किया था. लेकिन फिल्म के पोस्टर्स और बाकी के एडवरटाइज़मेंट में माधुरी का नाम आखिरी में लिखा गया था. इस पर जब रिक्कू ने राम राव से सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि माधुरी सबसे जूनियर हैं. रिक्कू अड़ गए. कहा माधुरी नीलम की सीनियर हैं. रामा राव ने कहा साबित करो.

फिल्म 'खतरों के खिलाड़ी' के पोस्टर में धर्मेंद्र, माधुरी दीक्षित, संजय दत्त, चंकी पांडे और नीलम.
फिल्म ‘खतरों के खिलाड़ी’ के पोस्टर में धर्मेंद्र, माधुरी दीक्षित, संजय दत्त, चंकी पांडे और नीलम.

इसके बाद रिक्कू नीलम की पहली फिल्म ‘जवानी’ के डायरेक्टर रमेश बहल के पास गए. कहा कि फिल्म ‘जवानी’ की रिलीज़ डेट एक पेपर पर लिखकर दीजिए. इसके बाद वो माधुरी की पहली फिल्म प्रोड्यूस करने वाले राजश्री प्रोडक्शन हाउस पहुंचे. माधुरी की पहली फिल्म की रिलीज़ डेट लेने. एक्चुअली दोनों ही फिल्में 1984 में रिलीज़ हुई थीं. लेकिन ‘अबोध’ पहले थिएटर्स में लगी थी. उन्होंने ये तारीखें टी. रामा राव को दिखाई और माधुरी नाम पहले कर दिया गया. लेकिन राजश्री के ऑफिस में रिक्कू की मुलाकात फिल्ममेकर एन. चंद्रा से हो गई. चंद्रा ने रिक्कू को बताया कि वो अपनी अगली फिल्म में उनके हीरो यानी अनिल कपूर को ले रहे हैं. उन्हें फिल्म के लिए एक लड़की की तलाश है. रिक्कू ने फटाक से अपने बैग से माधुरी की तस्वीरें निकालीं और चंद्रा को दिखाने लगे. चंद्रा को फेस-वेस तो ठीक लगा लेकिन वो काम देखना चाहते थे. रिक्कू ने राजश्री से ‘अबोध’ फिल्म के कुछ हिस्से मंगवाकर उन्हें दिखाए. इसके बाद चंद्रा माधुरी से मिले और उन्हें ‘तेज़ाब’ के लिए साइन कर लिया. चंद्रा उस वक्त बड़े डायरेक्टर थे. उनकी पिछली दो फिल्में- ‘अंकुश’ और ‘प्रतिघात’ सुपरहिट रही थीं. ‘तेज़ाब’ में माधुरी पहली बार लीड हीरोइन के तौर पर नज़र आईं.

मैनेजर रिक्कू राकेश नाथ के साथ माधुरी दीक्षित. रिक्कू ने माधुरी के साथ 28 साल काम किया है.
मैनेजर रिक्कू राकेश नाथ के साथ माधुरी दीक्षित. रिक्कू ने माधुरी के साथ 28 साल काम किया है.

बोनी कपूर ने घालमेल कर अपने भाई को फिल्म में काम दिला दिया

एन. चंद्रा ने ‘तेज़ाब’ के लिए अनिल कपूर को फाइनल करने से पहले आदित्य पंचोली को लीड रोल में कास्ट किया था. लेकिन इस बीच कुछ ऐसा हो गया कि फिल्म से आदित्य बाहर हो लिए और अनिल कपूर की एंट्री हो गई. हुआा ये कि चंद्रा की कहानी प्रोड्यूसर बोनी कपूर ने सुनी और उन्हें ठीक लगी. उन्होंने कहा कि वो इस फिल्म में अनिल कपूर को ले लें. लेकिन अनिल कपूर ‘मिस्टर इंडिया’ की सक्सेस के बाद इतने व्यस्त थे कि उनके पास दो साल से पहले इस फिल्म की शूटिंग के लिए समय ही नहीं था. बोनी ने कहा कि वो ज़िम्मेदारी लेते हैं कि वो अनिल से ये फिल्म शूट करवा लेंगे. चंद्रा मान गए और आदित्य पंचोली को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. कास्टिंग को लेकर एक और थियरी मार्केट में ये चलती है कि ‘तेज़ाब’ पहले नाना पाटेकर को लेकर बन रही थी. नाना ने फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग भी कर ली थी. लेकिन चंद्रा ने वो फिल्म रोक दी और उसी टाइटल के साथ दूसरी कहानी पर फिल्म बनाने लगे. कहा जाता है कि ‘तेज़ाब’ के मुहूर्त के लिए अमिताभ बच्चन और जीतेंद्र जैसे स्टार्स आए थे. जो इनविटेशन कार्ड लोगों को भेजा गया था, उस कार्ड पर नाना पाटेकर नाम था. लेकिन नाना मुहूर्त शॉट पर पहुंचे ही नहीं.

फिल्म तेज़ाब के लॉन्चिंग इवेंट का इन्विटेशन कार्ड. उस इवेंट के चीफ गेस्ट अमिताभ बच्चन, जावेद अख्तर से बात करते हुए.
फिल्म तेज़ाब के लॉन्चिंग इवेंट का इन्विटेशन कार्ड. उस इवेंट के चीफ गेस्ट अमिताभ बच्चन, जावेद अख्तर से बात करते हुए.

जब एक से लेकर तीस तक की गिनती माधुरी की पहचान बन गई

फिल्म में माधुरी का किरदार एक क्लब/कैबरे डांसर का था. इसलिए फिल्म में एक डांस नंबर टाइप रखा गया था. आम तौर पर पहले गानों की धुन तैयार होती है, जिसके ऊपर डमी लिरिक्स यानी धुनों के ऊपर पर कुछ भी शब्द डाल दिए जाते थे. जैसे फिल्म ‘रॉकस्टार’ के गाने ‘फिर से उड़ चला’ में रहमान ने झझझझां-झझझझां डाला था. उस हिस्से में पहले किसी इंस्ट्रुमेंट से धुन भरी जानी थी. वो गाना इम्तियाज़ अली ने सुना और उन्हें अच्छा लगा. इसलिए बाद में वो गाना वैसे ही रिलीज़ हुआ. ये किस्सा जब तक आगे बढ़ता है, तब तक आप रॉकस्टार का वो गाना सुनिए और प्रोसेस समझने की कोशिश करिए:

खैर, ‘तेज़ाब’ का म्यूज़िक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी कर रही थी और लिरिक्स लिख रहे थे जावेद अख्तर. फिल्म में एक सिचुएशन बनी जहां एक डांस नंबर फिट किया जाना था. लेकिन म्यूज़िक डायरेक्टर और लिरिसिस्ट के साथ दो मीटिंग में भी चंद्रा ये सिचुएशन सही से एक्सप्लेन नही कर पाए. तीसरी मीटिंग में जावेद अख्तर आए ही नहीं. ऐसे में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने एक धुन सुनी. उससे प्रेरित होकर उन्होंने एक धुन बनाई. उस धुन को सुनाने के लिए शुरुआत में 1, 2, 3, 4 जोड़ दिया. ये सब करके धुन भेजी गई जावेद साहब को. अगली बार जब मीटिंग हुई, तब जावेद अख्तर अपने साथ एक गाना लेकर आए थे. उन्होंने अपनी लिरिक्स में इस 1,2,3, 4 को बनाए रखा. ये सुनने के बाद चंद्रा और म्यूज़िकल जोड़ी सकते में आ गई. लेकिन जावेद अख्तर ने उन्हें भरोसा दिलाया कि इस गाने में ये नंबर आसानी से एडजस्ट और सुनने वालों को डाइजेस्ट हो जाएंगें. बाद में वो गाना बना और ब्लॉकबस्टर साबित हुआ. गाना आप समझ तो गए ही होंगे, सुन भी लीजिए:

इस गाने की शूटिंग शाहरुख खान के घर में हुई थी

लेकिन तब वो घर शाहरुख खान का नहीं था. जिस घर में शाहरुख खान रहते हैं, उसका नाम है ‘मन्नत’. पहले उसी जगह पर एक विला हुआ करता था, जिसका नाम था ‘विला विएना’. इस विला में तब कई फिल्मों की शूटिंग होती थी. जब ‘एक दो तीन चार’ बनकर तैयार हुआ, तब फिल्म में सिर्फ इसका फीमेल वर्ज़न रखा गया था. इस गाने की शूटिंग महबूब स्टूडियो में हुई थी. लेकिन बीतते समय के साथ गाने की पॉपुलैरिटी देखकर फिल्म के मेकर्स को लगा कि गाने का मेल वर्ज़न भी होना चाहिए. जब गाने का मेल वर्ज़न तैयार हुआ, तब इसकी शूटिंग के लिए विला विएना को चुना गया. फीमेल वर्ज़न के 15 हफ्ते बाद इस गाने के मेल वर्ज़न को फिल्म में जोड़ा गया. इसे अमित कुमार ने गाया था. वो गाना आप यहां देख सकते हैं:

अडवांस बुकिंग शुरू होने के बाद भी फिल्म की शूटिंग चालू थी

‘तेज़ाब’ 11 नवंबर, 1988 यानी शुक्रवार को रिलीज़ होनी थी. फिल्म को लेकर जनता में काफी एक्साइटमेंट थी. इसे देखते हुए अडवांस बुकिंग सोमवार से ही चालू कर दी गई. लोग लंबी-लंबी लाइन लगाकर खड़े थे. बुकिंग काउंटर से कुछ ही दूर एक रेलवे ट्रैक था. यहां पर एन. चंद्रा अनिल कपूर के साथ फिल्म का एक ज़रूरी हिस्सा शूट कर रहे थे. इस सीन में अनिल कपूर ट्रेन की छत पर चढ़े दिखाई देते हैं. ये खबर टिकट के लिए लाइन में खड़े लोगों तक पहुंच गई. सारे लोग टिकट छोड़कर अनिल कपूर को देखने रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए. जैसे-तैसे ये सीन शूट हो पाया. इसे फिल्म की रिलीज़ से एक दिन पहले यानी 10 नवंबर, गुरुवार को फिल्म में जोड़ा गया और फिर जाकर फिल्म तय समय पर रिलीज़ हो पाई.

ट्रेन वाली फोटो तो नहीं मिली लेकिन फिल्म से अनिल कपूर के एक एक्शन सीक्वेंस की फोटो आप देख सकते हैं.
ट्रेन वाली फोटो तो नहीं मिली लेकिन फिल्म से अनिल कपूर के एक एक्शन सीक्वेंस की फोटो आप देख सकते हैं.

कार साफ करने वाले बच्चों ने माधुरी को स्टारडम का पहला एहसास दिलाया

ये फिल्म अनिल कपूर से ज़्यादा माधुरी दीक्षित के लिए चाइफ चेंजिंग थी. जब ‘तेज़ाब’ रिलीज़ हुई, तब माधुरी अपनी बहन की शादी अटेंड करने अमेरिका गई हुई थीं. फिल्म की रिलीज़ के बाद वो इंडिया आईं और एयरपोर्ट से निकलकर अपनी कार की ओर जाने लगीं. इतने में उन्हें कार साफ करने के लिए सड़क पर घूमने वाले कुछ बच्चों ने देखा. माधुरी को देखते हुए उनमें से एक चिल्लाया- ‘वो देख हीरोइन’. वो सारे बच्चे दौड़कर माधुरी के पास आए और उनका ऑटोग्राफ लेने लगे. माधुरी ने अपने नाम के इनिशियल्स पेपर पर उकेर दिए. उनका लिखा एम (M) देखकर चिल्लाने वाले बच्चे ने कहा- ‘देखा मैंने बोला था न, ये मोहिनी है’. फिल्म तेज़ाब में ये माधुरी के किरदार का नाम था. माधुरी ने अपने एक मीडिया इंटरैक्शन में बताया कि ये वो पहला मौका था, जब उनके काम की वजह से उन्हें पब्लिक ने पहचाना था.

आगे सुभाष घई ने माधुरी के साथ खलनायक (1993) जैसी फिल्म में भी काम किया.
आगे सुभाष घई ने माधुरी के साथ खलनायक (1993) जैसी फिल्म में भी काम किया.

फिल्म की रिलीज़ के इतने साल बाद ‘तेज़ाब’ को खालिस मसाला पिक्चर में गिना जाता है. ये वो दौर था, जब रिवेंज ड्रामा फिल्में ट्रेंड में थीं. ‘तेज़ाब’ भी उसी फॉर्मूले का नतीजा थी. तमाम औसतपन के बावजूद इस फिल्म ने कई लोगों का करियर बना दिया. इस फिल्म से सबसे ज़्यादा फायदा हुआ माधुरी दीक्षित का. लेकिन सरोज खान और अलका याग्निक को भी इसी फिल्म ने बॉलीवुड में एस्टैब्लिश किया. ‘कर्मा’ से गाना कटने के बाद माधुरी के करियर में बहुत कुछ हो चुका था. लेकिन सुभाष घई का उस पर कोई असर नहीं पड़ा. फिल्म ‘राम लखन’ में माधुरी को कास्ट कर उन्होंने अपना दिया हुआ वादा पूरा किया. ‘तेज़ाब’ के ठीक अगले साल आई ‘राम लखन’ ने माधुरी को बॉलीवुड की टॉप हीरोइनों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया.


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