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फिल्म रिव्यू: बदला

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‘बदला’ स्पैनिश फिल्म ‘कॉन्त्रातिएंपो’, जिसे अंग्रेजी में ‘दी इनविज़िबल गेस्ट’ नाम से जाना गया, उसकी रीमेक है. सुजॉय घोष डायरेक्टेड इस फिल्म में शाहरुख खान ने पैसा लगाया है. अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू ने लीड रोल्स किए हैं. इन्हें सपोर्ट करने के लिए अमृता सिंह, मानव कौल और टोनी ल्यूक जैसे एक्टर्स हैं. इन सभी एक्टर्स ने ऐसे किरदार निभाए हैं, जिनके बिना ये फिल्म पूरी नहीं हो पाएगी. लेकिन जैसे पूरी होती है, वो भी आप नहीं सोच सकते. क्या होता है कि सिनेमा देखने वाले के दिमाग में एक अलग सिनेमा चल रहा होता है. जो सामने चल रही फिल्म से कुछ कदम आगे चलता है. अपने गेस करने की क्षमता और फिल्म के प्रेडिक्टेबल होने के कारण. लेकिन इस फिल्म में आप जो प्रेडिक्ट करते हैं, उसे सामने लाकर गलत साबित कर दिया जाता है. कुल जमा बात ये है कि लाख सिर धुनते रहने के बाद भी गेस नहीं कर पाते कि आगे होने क्या वाला है. ‘बदला’ से जुड़ी ऐसी ही कुछ चीज़ों के बारे में नीचे विस्तार से बात करते हैं.

कहानी

नैना सेठी एक बड़ी कंपनी की मालिक है. सक्सेसफुल बिज़नेसवुमन है. शादीशुदा है, एक बच्ची है. और एक एक्सट्रा मैरिटल अफेयर भी है. अर्जुन नाम के एक फोटोग्राफर के साथ. जब ये दोनों अपने परिवार से अलग एक जगह कुछ क्वॉलिटी टाइम स्पेंड करने के लिए मिलते हैं, तब एक एक्सीडेंट होता है. इस बाद एक्सीडेंट के बाद फिल्म के पांचों किरदारों की ज़िंदगियां जुड़ जाती हैं. या यूं कहें तीन लोगों की, क्योंकि दो लोगों के जान की बलि ये कहानी ले लेती है. इसमें एक लाचार माता-पिता हैं, जिनका बेटा अचानक से गायब हो गया है. और दूसरी ओर एक पैसे और पावर वाली महिला और उसका बॉयफ्रेंड. इसे देखते वक्त एक बार को अजय देवगन की ‘दृश्यम’ याद आती है. आधी से ज़्यादा फिल्म एक कमरे में घटती है, जहां सिर्फ दो लोगों के बीच सवाल-जवाब हो रहा है. और इस सब के बीच ये फिल्म अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग जॉनर को डिस्कवर करती है. शुरू ये थ्रिलर की तरह होती है, बीच में फैमिली ड्रामा और और खत्म होने तक रिवेंज थ्रिलर में तब्दील हो जाती है. ये एक बड़ी सी उलझन बुनती है, जिसमें आप नहीं सिर्फ इसके किरदार फंसते हैं. ये फिल्म आपके गेस करने की क्षमता पर असर डालती है. लेकिन आप जब सिनेमाहॉल से बाहर निकलते हैं, तो मन में किसी तरह की कोई शंका या सवाल नहीं होता है. क्योंकि फिल्म देखते वक्त आप जो भी इक्वेशन मन में सोचकर बैठे थे, फिल्म में उन सभी को सॉल्व कर दिया गया है.

अपने बॉयफ्रेंड अर्जुन के साथ नैना सेठी.
अपने बॉयफ्रेंड अर्जुन (टोनी ल्यूक) के साथ नैना सेठी (तापसी पन्नू).

एक्टर्स का काम

अमिताभ बच्चन के साथ कमाल की बात ये है कि वो किसी भी किरदार के साथ इतना कंफर्टेबल हो जाते हैं कि ये ख्याल भी नहीं आता कि ये रोल इनसे बेहतर कोई और कर सकता था. वो इससे पहले भी तापसी के साथ ही फिल्म ‘पिंक’ में भी वकील का रोल कर चुके हैं. टेबल के दूसरी ओर बैठी तापसी का किरदार एक गिल्ट से भरी और फ्रस्टेटेड महिला का है. लेकिन बाद में थोड़े टाइम के बाद ये कैरेक्टर हावी भी हो जाता है. ये ट्रांजिशन बहुत शांति से होता, जो नोटिस में आता है. नैना और बादल दोनों ही कैरेक्टर्स काफी लेयर्ड हैं, जो आखिर में खुलकर सामने आते है. ‘2 स्टेट्स’ के बाद अमृता सिंह एक मजबूत और लंबे किरदार में दिखी हैं, जिसे उन्होंने बड़े मन से निभाया है. मानव कौल बिलकुल ही छोटे से रोल में हैं. वो इससे पहले ‘वज़ीर’ में भी अमिताभ बच्चन के साथ काम कर चुके हैं. लेकिन इस फिल्म में वो वेस्ट हो गए हैं. मानव ने नैना के कॉलेज के साथी और पर्सनल लॉयर जिम्मी पंजाबी का रोल किया है. फिल्म में उनका स्क्रीनटाइम मुश्किल से पांच-सात मिनट है. और ऐसा कि उसे कोई भी एक्टर निभा जाए. नैना के पार्टनर अर्जुन का रोल मलयाली एक्टर टोनी ल्यूक ने किया है. जिनका एक्सेंट छोड़कर बाकी सबकुछ ठीक है.

फिल्म के एक सीन में अमिताभ बच्चन. बच्चन ने फिल्म में एक वकील का रोल किया है.
फिल्म के एक सीन में अमिताभ बच्चन. बच्चन ने फिल्म में एक वकील का रोल किया है.

गाने-वाने कुछ हैं?

फिल्म में कोई गाना नहीं है. क्योंकि न जरूरत है न स्पेस. जो भी गाने आप सुन रहे हैं वो प्रमोशनल सॉन्ग्स हैं. हां फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर बिलकुल इसकी परिस्थितियों से मेल खाता हुआ है. जैसे नैना और बादल के शुरुआती इंवेस्टिगेशन सीन में बैकग्राउंड में हल्की-हल्की तबले की थाप सुनाई देती है. वो बहुत ही हल्की और मीठी सी है, जिससे फिल्म का फ्लो नहीं खराब होता. स्क्रीन पर लगातार कहानी चलती है, जो आपको उलझाए रखती है, जिससे आपका किसी और चीज़ पर ध्यान ही नहीं जाता. फिल्म बिलकुल कट-टू-कट है, जिससे इसकी रफ्तार अच्छी है. एडिटिंग के मामले में क्रिस्प.

फिल्म में अमृता सिंह और मानव कौल ने भी अहम किरदार निभाए हैं.
फिल्म में अमृता सिंह और मानव कौल ने भी अहम किरदार निभाए हैं.

ओवरऑल फिल्म कैसी है?

इस फिल्म का अपना फ्लो है, जो आप चाह कर भी खराब नहीं कर सकते. मगर आपने अगर कोई भी एक सीन मिस कर दिया, तो फिल्म से कैच अप नहीं पाएंगे. एक बढ़िया एंटरटेनिंग और एंगेजिंग फिल्म, जो ज्ञान नहीं देती. न नहीं कोई गलत मैसेज. ये खालिस एंटरटेनमेंट हैं, क्वॉलिटी एंटरटेनमेंट. जब मौका मिले, नहीं मिले तो निकालिए और ये फिल्म देखकर आइए. सिनेमा देखते हैं तो ये वाली देखनी जरूरी है.


फिल्म रिव्यू- ‘सोनचिड़िया’

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Badla Film Review starring Amitabh Bachchan and Taapsee Pannu directed by Sujoy Ghosh

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