Submit your post

Follow Us

बाबरी विध्वंस केस: आरोप लगाने वाले पक्ष की गवाही पर कोर्ट ने क्या-क्या टिप्पणी की?

लखनऊ की स्पेशल CBI कोर्ट ने लगभग 28 साल पुराने बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में अपना फ़ैसला सुना दिया. स्पेशल CBI जज एसके यादव ने 30 सितंबर को फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि घटना पूर्व-नियोजित नहीं थी. जो कुछ हुआ था, अचानक हुआ था. ये कहते हुए कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया. साथ ही ये भी कहा कि अभियोजन पक्ष इन आरोपियों की संलिप्तता को लेकर साक्ष्य पेश नहीं कर सका.

2300 पन्ने के जजमेंट में कोर्ट ने सीबीआई की ओर से पेश किए गए सबूतों और गवाहों की गवाही को एक-एक करके खारिज कर दिया. सीबीआई ने कोर्ट के सामने 351 गवाह पेश किए. वीडियो और ऑडियो एविडेंस के अलावा 600 से ज्यादा लिखित दस्तावेज पेश किए. लेकिन कोर्ट ने माना कि सीबीआई की ओर से पेश गवाह और सबूत आरोपियों को दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. कोर्ट ने मजबूत सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया.

जानते हैं कि सीबीआई की ओर से पेश किए गए इन गवाहों की गवाही पर कोर्ट ने क्या टिप्पणी की.

अभियोजन साक्षी संख्या- 253 : प्रवीण जैन

घटना के समय ‘द पायनियर’ अखबार में काम करने वाले प्रवीण जैन गवाही दी थी कि कारसेवक 6 दिसंबर, 1992 के लिए रिहर्सल कर रहे हैं. बताया कि तमाम कारसेवक वहां पर एक टीले पर रस्सी व लोहे के लंगर को फंसाकर उस पर चढ़ने की रिहर्सल कर रहे थे. साथ ही उस टीले पर जो गुम्बद था, उसे भी तोड़ने का प्रयास कर रहे थे. 6 दिसंबर, 1992 को करीब 12 बजे वो मानस भवन पर थे और बाबरी मस्जिद की फोटो खींच रहे थे, तभी कारसेवक बाबरी मस्जिद पर चढ़ने लग गए. उन्होंने इन लोगों की फोटो खींची. उन्होंने ये भी गवाही दी कि कारसेवक 12 बजे के आसपास प्रेस वालों से मारपीट करने लगे. इसके बाद वो उस मंच पर चले गए, जहां मुरली मनोहर जोशी और अन्य नेता थे.

तस्वीर का दिन : 6 दिसम्बर 1992. तस्वीर में कारसेवक बाबरी मस्जिद गिराते हुए. ये स्टोरी इसी केस के बारे में.
तस्वीर का दिन : 6 दिसम्बर 1992. तस्वीर में कारसेवक बाबरी मस्जिद गिराते हुए. ये स्टोरी इसी केस के बारे में.

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि गवाही देने वाले ने माना कि रिहलर्स की सूचना किसी अधिकारी को नहीं दी गई. गवाह ने ये भी कहा कि यह सही है कि 1992 की घटना काफी बड़ी थी, उस समय हर फोटोग्राफर व पत्रकार अपने को घटना से जोड़ना चाहता था. यह कहना भी सही है कि 1992 की घटना से सम्बन्धित कई फर्जी खबरों को कई पत्रकारों ने अपनी प्रसिद्धि के लिए गलत ढंग से छापा था और उसका लाभ भी कमाया था. कोर्ट ने कहा कि इस गवाह के पूरे बयान से आरोपियों की घटना में संलिप्तता साबित नहीं होती.

अभियोजन साक्षी संख्या-39 : मृत्युंजय कुमार झा

मृत्युंजय कुमार झा ने गवाही दी कि वो 1992 में ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप की वीडियो मैगजीन ‘न्यूज ट्रैक’ में बतौर रिपोर्टर काम करते थे. 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में कवरेज के लिए गए थे. घटना वाले दिन उनकी टीम मानस भवन की छत पर फोटोग्राफी कर रही थी. उन्हें देखकर कुछ लोग मानस भवन में घुसे. छीना-झपटी में उनके उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए. इस घटना की एफआईआर राम जन्मभूमि थाने में लिखवाई.

बाबरी मस्जिद के ऊपर चढ़े कारसेवक.
बाबरी मस्जिद के ऊपर चढ़े कारसेवक.

कोर्ट ने क्या कहा?

इस गवाह के पूरे बयान से स्पष्ट है कि वो कैमरामैन भरतराज के साथ था. 11.30 बजे के बाद कुछ लोग गुम्बद पर चढ़ गए, जिससे वहां का दृश्य बदल गया. एफआईआर में कैमरामैन से सामान छीनने वाली बात नहीं लिखी है. इस गवाह के भी न्यायालय के बयान और धारा 161 के तहत दर्ज बयान में विरोधाभास है. कोर्ट ने कहा कि इस गवाह द्वारा अलग से कोई पेपर प्रमाणित नहीं किया गया है. साथ ही इस गवाह के साक्ष्य से घटना की पुष्टि नहीं होती है.

अभियोजन साक्षी संख्या-141 : सीमा चिश्ती

सीमा चिश्ती ने अपने बयान में कहा था कि 6 दिसंबर, 1992 को अपने साथियों के साथ कवरेज के लिए वो फैजाबाद पहुंची थीं. घटना वाले दिन 10-10.30 बजे के करीब लालकृष्ण आडवाणी, विनय कटियार और अन्य नेता आए. 5-6 मिनट चक्कर काटने के बाद रामकथा कुंज पर स्थित मंच पर चले गए. 11: 45 बजे के करीब कारसेवक नियंत्रित होकर ढांचे की ओर बढ़ने लगे. पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की. 12 बजे के करीब मीडिया के लोगों पर हमला हुआ. सीमा चिश्ती पर भी हमला हुआ. इसकी एफआईआर उन्होंने कराई. बाद में सीबीआई ने उनसे पूछताछ की थी.

फाइल फोटो
बाबरी मस्जिद की फाइल फोटो

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट के मुताबिक, गवाह सीमा चिश्ती ने स्वीकार किया है कि यह एक एडिटेड कैसेट है. इस साक्षी ने कहा है कि 3 दिसंबर, 1992 से 4 दिसंबर, 1992 तक उसकी टीम द्वारा जो अयोध्या में शूट किये गये थे, वह उसी रूप में कैसेट में नहीं हैं, बल्कि एडिटेड वर्जन हैं. एडिटिंग कब की गई, उन्हें नहीं पता है. कोर्ट ने कहा कि गवाह ये भी बताने में असमर्थ रही हैं कि कितनी बार ये कैसेट एडिटेड वर्जन बनने के बाद सीबीआई को सौंपने के पहले चलाया गया. कैसेट के साथ क्या-क्या किया, उन्हें खुद नहीं पता है.

अभियोजन साक्षी संख्या-21 : जगवीर सिंह

जगवीर सिंह ने बताया कि 6 दिसंबर, 1992 को उनकी ड्यूटी विवादित ढांचे के गर्भगृह में थी. सुबह सात बजे से एक बजे तक ड्यूटी थी. 12 बजे के करीब विवादित ढांचे में तोड़-फोड़ शुरू हुई. तोड़-फोड़ करने वाले लोगों के हाथ में गैती, फावड़ा, बेलचा आदि सामान थे. जब ये लोग अन्दर आ रहे थे, तो उन्हें रोकने की कोशिश की गई. लाठीचार्ज भी किया गया. इस घटना में उनके सिर पर चोट लगी थी और उनकी यूनिट के डॉक्टर ने इलाज किया था. सीबीआई को जगवीर ने अपने बयान में ये बात बताई थी कि घटना के समय वो बन्दूक नहीं लिए थे, बल्कि लाठी लिए थे.

Babri And Ayodhya
बाबरी मस्जिद को तोड़ने की कोशिश केवल 1992 में ही नहीं, उसके पहले भी हुई.

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट के मुताबिक, इस गवाह ने अपनी इंजरी रिपोर्ट की जानकारी होने के तथ्य से भी इनकार किया. धारा 161 के तहत दर्ज बयान में इस तरह के तथ्य से इनकार किया. कोर्ट ने कहा कि इस गवाह ने आरोपियों के बारे में कोई बयान नहीं दिया है. इस साक्षी के बयान से भी आरोपियों की अपराध में संलिप्तता दिखाई नहीं देती.


बाबरी मस्जिद केस: CBI कोर्ट के फैसले पर योगी आदित्यनाथ ने किससे माफी की मांग कर दी?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

पोस्टमॉर्टम हाउस

ये गेम आस्तीन का सांप ढूंढना सिखा रहा है और लोग इसमें जमकर पिले पड़े हैं!

पॉलिटिक्स और डिप्लोमेसी वाला खेल है Among Us.

फिल्म रिव्यू- कार्गो

कभी भी कुछ भी हमेशा के लिए नहीं खत्म होता है. कहीं न कहीं, कुछ न कुछ तो बच ही जाता है, हमेशा.

फिल्म रिव्यू: सी यू सून

बढ़िया परफॉरमेंसेज़ से लैस मजबूत साइबर थ्रिलर,

फिल्म रिव्यू- सड़क 2

जानिए कैसी है संजय दत्त, आलिया भट्ट स्टारर महेश भट्ट की कमबैक फिल्म.

वेब सीरीज़ रिव्यू- फ्लेश

एक बार इस सीरीज़ को देखना शुरू करने के बाद मजबूत क्लिफ हैंगर्स की वजह से इसे एक-दो एपिसोड के बाद बंद कर पाना मुश्किल हो जाता है.

फिल्म रिव्यू- क्लास ऑफ 83

एक खतरनाक मगर एंटरटेनिंग कॉप फिल्म.

बाबा बने बॉबी देओल की नई सीरीज़ 'आश्रम' से हिंदुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं!

आज ट्रेलर आया और कुछ लोग ट्रेलर पर भड़क गए हैं.

करोड़ों का चूना लगाने वाले हर्षद मेहता पर बनी सीरीज़ का टीज़र उतना ही धांसू है, जितने उसके कारनामे थे

कद्दावर डायरेक्टर हंसल मेहता बनायेंगे ये वेब सीरीज़, सो लोगों की उम्मीदें आसमानी हो गई हैं.

फिल्म रिव्यू- खुदा हाफिज़

विद्युत जामवाल की पिछली फिल्मों से अलग मगर एक कॉमर्शियल बॉलीवुड फिल्म.

फ़िल्म रिव्यू: गुंजन सक्सेना - द कारगिल गर्ल

जाह्नवी कपूर और पंकज त्रिपाठी अभिनीत ये नई हिंदी फ़िल्म कैसी है? जानिए.