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8 किस्से, जो बताते हैं, कैसे दिलीप कुमार ने शाहरुख, अमिताभ, धर्मेंद्र की लाइफ बना दी थी

दिलीप कुमार- एक ऐसे एक्टर, जो गलती से फिल्मों में आ गए. परिवार का नाम न खराब हो, इसलिए अपना नाम बदल लिया. हिंदी सिनेमा को नई ऊंचाई पर लेकर गए. भारत में मेथड एक्टिंग लेकर आए. अच्छा काम करने की भूख ऐसी कि 50 साल से ज़्यादा लंबे करियर में मात्र 65 फिल्में की. मगर उन गिनी-चुनी फिल्मों से उन्होंने एक्टर्स की कई खेप को प्रेरित किया. वैसे तो उन्हें इंडिया का हर एक्टर अपना आइडल बताता है. मगर आज बात उन एक्टर्स की, जिन्होंने सही मायनों में दिलीप कुमार को अपना गुरु माना.

# मनोज कुमार- वो एक्टर जिन्होंने दिलीप कुमार की वजह से नाम बदल लिया

1947 में 9 साल के हरिकिशन गिरी गोस्वामी ने दिलीप कुमार की ‘जुगनू’ फिल्म देखी. इसके बाद तय किया कि वो बड़े होकर एक्टर बनेंगे. दो साल बाद दिलीप साहब की नई फिल्म ‘शबनम’ रिलीज़ हुई. हरिकिशन ये फिल्म देखने गए और दिलीप कुमार के किरदार से अति-इम्प्रेस्ड हो गए. इस फिल्म में दिलीप साब के किरदार का नाम मनोज था. हरिकिशन गोस्वामी ने तय किया कि जब एक्टर बनेंगे, तो अपना नाम मनोज रखेंगे. उसी एक्टर को दुनिया आज मनोज कुमार के नाम से जानती है.

जो आदमी दिलीप कुमार को अपना गुरु मानता था, ज़ाहिर तौर उसका सपना रहा होगा कि किसी दिन अपने आइडल के साथ काम करे. मनोज का ये सपना 1968 में पूरा हुआ. जब वो दिलीप कुमार के साथ भीम सिंह डायरेक्टेड फिल्म ‘आदमी’ में नज़र आए.

फिल्म 'आदमी' के एक सीन में दिलीप कुमार के साथ मनोज कुमार.
फिल्म ‘आदमी’ के एक सीन में दिलीप कुमार के साथ मनोज कुमार.

1976 में आई असित सेन की ‘बैराग’ में काम करने के बाद दिलीप कुमार ने फिल्मों से ब्रेक ले लिया. 1980 में दिलीप साब को मनोज कुमार का फोन आया. वो चाहते थे कि उनकी अगली फिल्म में दिलीप कुमार काम करें. दिलीप कुमार ने उन्हें अपने घर बुलाया. मगर मनोज कुमार फौरन उनके घर नहीं गए. उन्होंने पहले अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट पूरी की. जब वो दिलीप कुमार को तीन घंटे का नैरेशन देने उनके घर पहुंचे, तब दिलीप कुमार के पास समय नहीं था. क्योंकि वो अपने भाई से मिलने अस्पताल जा रहे थे. मनोज कुमार ने उन्हें दो मिनट के भीतर अपनी फिल्म की कहानी सुनाई. दिलीप कुमार ने इस फिल्म के हां कर दी. ये फिल्म थी 1981 में आई कल्ट क्लासिक मानी जाने वाली ‘क्रांति’. मनोज कुमार उन चुनिंदा लोगों में से थे, जिन्हें दिलीप कुमार के साथ एक्टिंग करने का भी मौका मिला. और उन्हें डायरेक्ट करने का भी.

'क्रांति' की मेकिंग के दिनों में मनोज कुमार के साथ दिलीप कुमार.
‘क्रांति’ की मेकिंग के दिनों में मनोज कुमार के साथ दिलीप कुमार.

# अमिताभ बच्चन- जिन्हें दिलीप कुमार के ऑटोग्राफ के लिए 46 साल इंतज़ार करना पड़ा

अमिताभ बच्चन अपने करियर में कई बार कह चुके हैं, उनके फिल्मों में आने के पीछे की वजह दिलीप कुमार रहे हैं. वो बचपन से चोरी-छुपे उनकी फिल्में देखने जाया करते थे. हालांकि तब उनके जहन में ये बात नहीं थी कि वो बड़े होकर एक्टर बनेंगे. मगर उनके मन में दिलीप कुमार के लिए बहुत सम्मान था. ये रेस्पेक्ट 10 गुना और बढ़ गई, जब उन्होंने दिलीप कुमार की ‘गंगा जमुना’ देखी. एक तरह से उन्होंने इस फिल्म को स्टडी करना शुरू कर दिया. इसके पीछे की वजह अमिताभ ने एक अवॉर्ड शो के दौरान बताई. उन्होंने कहा-

”मेरे लिए ये कल्पना करना बेहद मुश्किल था कि जो आदमी कभी उत्तर प्रदेश नहीं गया, वो अवधी भाषा के शब्दों को इतनी सफाई और पूरे नुआंसेज़ के साथ कैसे उच्चारित कर सकता है.”

2009 में दिलीप कुमार जन्मदिन पर अमिताभ बच्चन ने उनके साथ अपनी पहली मुलाकात का किस्सा बताया. 1960 में अमिताभ अपने माता-पिता के साथ बंबई घूमने आए थे. वो साउथ बॉम्बे के एक बड़े रेस्टॉरेंट में गए हुए थे. उसी समय वहां दिलीप कुमार आ गए. अमिताभ दौड़ते हुए पास की स्टेशनरी की दुकान पर गए और ऑटोग्राफ बुक खरीद लाए. लोगों की भीड़ के बीच ऑटोग्राफ बुक हाथ में लिए, उन्होंने कई बार दिलीप साब को आवाज़ लगाई. मगर उनकी आवाज़ दिलीप साब तक नहीं पहुंची. थोड़ी देर बाद दिलीप कुमार वहां से चले गए. निराश और एंबैरेस्ड अमिताभ वहीं रह गए. उन्हें लग रहा था कि अब उनके दोस्त उनका मज़ाक उड़ाएंगे.

 फिल्म 'शक्ति' के एक इंटेंस सीन में बाप-बेटे बने दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन.
फिल्म ‘शक्ति’ के एक इंटेंस सीन में बाप-बेटे बने दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन.

इस घटना के 46 साल बाद यानी 2006 में अमिताभ की फिल्म ‘ब्लैक’ के प्रीमियर पर दिलीप कुमार और सायरा बानो पहुंचे. फिल्म देखने के बाद सब लोग अमिताभ को उनके शानदार अभिनय के लिए बधाई दे रहे थे. मगर दिलीप कुमार थिएटर से बाहर निकलकर एक साइड में खड़े हो गए. लोगों से निपटने के बाद अमिताभ दिलीप कुमार के पास पहुंचे. दिलीप साब ने अमिताभ का हाथ पकड़ा और उनकी आंखों में देखने लगे. वो अमिताभ से बिना कुछ कहे वहां से चले गए. दो दिन बाद अमिताभ के घर एक ख़त आया. ये दिलीप कुमार की ओर से अमिताभ को अप्रीशिएशन लेटर था. इसमें अमिताभ की काम की तारीफ करने के बाद नीचे दिलीप कुमार ने साइन किया हुआ था. अमिताभ ने इस लेटर को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा कि दिलीप साब का ऑटोग्राफ लेने का सपना 46 साल बाद पूरा हो गया.

ऐसे तमाम किस्से हैं इन दोनों लीजेंड्स के. मगर हम आपको एक आखिरी किस्सा सुनाकर अपनी बात आगे बढ़ाएंगे. एक बार देर रात अमिताभ, दिग्गज राइटर जोड़ी सलीम-जावेद के साथ बैठे थे. अचानक इनका मन किया कि दिलीप कुमार से मिलने चला जाए. अमिताभ ने समय देखा, तो रात के 2 बज रहे थे. उन्हें लगा कि ये सही समय नहीं है किसी के घर जाने का. मगर दोस्तों की जोर-जबरदस्ती के बाद ये लोग कार में बैठकर दिलीप कुमार के घर चल दिए. वहां पहुंचकर बताया कि वो सिर्फ दिलीप कुमार से मिलने आए हैं. उनसे मिलकर तुरंत चले जाएंगे. दिलीप कुमार नींद से जागकर अमिताभ और सलीम-जावेद से न सिर्फ मिले, बल्कि सारी रात बैठकर उनके साथ बातचीत करते रहे.

दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में सिर्फ एक फिल्म में साथ काम किया. वो फिल्म थी रमेश सिप्पी डायरेक्टेड ‘शक्ति’. उसके बाद या उससे पहले इन दोनों सुपरस्टार्स ने किसी फिल्म पर कोलैबरेट नहीं किया. दिलीप कुमार के गुज़रने पर अमिताभ ने कहा कि जब भी हिंदी सिनेमा का ज़िक्र होगा, उसे दिलीप कुमार से पहले और दिलीप कुमार के बाद दो काल खंडों में तोड़कर देखा जाएगा.

बाद के दिनों में दिलीप कुमार के साथ अमिताभ बच्चन.
बाद के दिनों में दिलीप कुमार के साथ अमिताभ बच्चन.

# धर्मेंद्र- वो बदकिस्मत एक्टर, जो लाख कोशिशों के बावजूद दिलीप कुमार के साथ काम न कर पाए

धर्मेंद्र दिलीप कुमार की एक फिल्म देखने के बाद एक्टर बनने बंबई चले आए. उनका सपना था कि वो ‘अगले दिलीप कुमार बने’. मगर उन्हें लीड रोल तो क्या, कोई फिल्ममेकर साइड रोल्स में भी कास्ट करने को तैयार नहीं था. इस दौरान धर्मेंद्र को कई रातें भूखे पेट गुज़ारनी पड़ी. वो वापस पंजाब जाना चाहते थे. मगर उन्हें मनोज कुमार ने रोक लिया. अगले कुछ समय में धर्मेंद्र इंडिया के टॉप लीडिंग एक्टर्स की लिस्ट में शामिल हो गए. बहुत बड़े स्टार बन गए. मगर दिलीप कुमार के साथ काम करने की इच्छा अब भी अधूरी थी.

1968 में दिलीप कुमार को लेकर ‘आदमी’ नाम की फिल्म बन रही थी. इसमें उनके साथ एक और बड़े हीरो को कास्ट किया जाना था. धर्मेंद्र ने बहुत कोशिश की कि ये फिल्म उन्हें मिल जाए. मगर इस फिल्म में मनोज कुमार को कास्ट कर लिया गया. जो कि खुद दिलीप कुमार के बड़े फैन थे. साथ ही मनोज की धर्मेंद्र से भी अच्छी दोस्ती थी. क्योंकि उन्होंने ही धर्मेंद्र को पंजाब लौटने से रोका था. इस मौके को हाथ से जाते देख धर्मेंद्र को बहुत निराशा हुई. मगर वो मनोज कुमार के लिए खुश थे.

जवानी के दिनों दिलीप कुमार के साथ धर्मेंद्र.
जवानी के दिनों दिलीप कुमार के साथ धर्मेंद्र.

1980 में बी.आर. चोपड़ा ने ‘चाणक्य चंद्रगुप्त’ नाम की एक फिल्म शुरू की. फाइनली इस फिल्म में दिलीप कुमार के साथ धर्मेंद्र को कास्ट किया गया. दिलीप साब चाणक्य और धर्मेंद्र चंद्रगुप्त मौर्य का रोल करने वाले थे. धर्मेंद्र इसलिए भी बहुत एक्साइटेड थे क्योंकि बी.आर. चोपड़ा अपने राइटर्स के साथ होने वाली मीटिंग में धर्मेंद्र को भी शामिल करते थे. सब कुछ सेट था और इस फिल्म की शूटिंग जल्द ही शुरू होने वाली थी. मगर किसी फाइनेंशियल क्राइसिस की वजह से प्रोड्यूसर ने ये फिल्म बंद कर दी. धर्मेंद्र का दिलीप कुमार के साथ काम करने का सपना एक बार फिर पूरा होते-होते रह गया.

90 के दशक में दिलीप कुमार अपने करियर की पहली फिल्म डायरेक्ट करने जा रहे थे. इस फिल्म का नाम था ‘कलिंगा’. इस फिल्म में दिलीप कुमार के साथ अमज़द खान, जैकी श्रॉफ, राज किरण और राज बब्बर जैसे एक्टर्स काम कर रहे थे. धर्मेंद्र चाहते थे कि वो किसी भी हालत में इस फिल्म का हिस्सा बनें. उन्होंने दिलीप साब से रिक्वेस्ट की कि उन्हें अपनी फिल्म में काम करने दें. मगर दिलीप कुमार ने कहा कि उनकी फिल्म में ऐसा कोई रोल नहीं है, जो धर्मेंद्र कर सकें. एक ही रोल है, वो है जस्टिस कलिंगा यानी दिलीप कुमार के किरदार के बेटे का. मगर धर्मेंद्र की उम्र ज़्यादा होने की वजह से ये किरदार उन पर ठीक नहीं लगेगा. धर्मेंद्र ने कहा कोई बात नहीं, इस फिल्म में मेरे बेटे सनी को ले लीजिए. दिलीप कुमार अपनी फिल्म में सनी देओल को कास्ट करने को तैयार हो गए. सनी तब तक लीडिंग रोल्स में कई रोमैंटिक और एक्शन फिल्में कर चुके थे. ‘कलिंगा’ में जो रोल उन्हें मिल रहा था, वो थोड़ा नेगेटिव शेड लिए हुए था. इसलिए सनी ने इस फिल्म में काम करने से इन्कार कर दिया. बनकर तैयार होने के बावजूद किन्हीं दिक्कतों की वजह से ‘कलिंगा’ कभी रिलीज़ नहीं हो पाई.

सनी देओल को दुलारते दिलीप कुमार.
सनी देओल को दुलारते दिलीप कुमार.

इसके बाद से दिलीप कुमार की तबीयत बिगड़ गई. उन्होंने काम करना बंद दिया. ये सुनकर धर्मेंद्र का दिल टूट गया. उनका दिलीप कुमार के साथ काम करने का सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया.

# शाहरुख खान- जिन्होंने दिलीप कुमार की फोटो को गलती से अपनी फोटो समझ ली

शाहरुख खान और दिलीप कुमार का संबंध फिल्म-सिनेमा से परे था. शाहरुख के पिता ताज मोहम्मद और युसूफ खान उर्फ दिलीप कुमार पेशावर में ही पैदा हुआ और पले बढ़े. दिल्ली शिफ्ट होने के बाद शाहरुख बचपन से उनके घर आते-जाते रहते थे. दिलीप कुमार की अपनी कोई संतान नहीं थी. मगर वो कहा करते थे-

”अगर मेरा बेटा होता, वो शाहरुख जैसा दिखता. उसके बाल शाहरुख जैसे होते. इसलिए जब भी शाहरुख से मिलता हूं, तो मैं उसके बालों पर हाथ फेरता हूं.”

सायरा बानो उन्हें अपना मुंहबोला बेटा बुलाती थीं. मगर दिलीप कुमार और शाहरुख को सिर्फ पारिवारिक धागे में बांधकर छोड़ देना ठीक नहीं होगा. जब दिलीप कुमार सुपरस्टार बन चुके थे, तब शाहरुख पैदा हुए. उनकी मां हमेशा कहती हैं, तेरी शक्ल दिलीप कुमार से मिलती है. एक बार शाहरुख फिल्ममेकर केतन मेहता के ऑफिस पहुंचे. उन्हें वहां अपनी फोटो नज़र आई. केतन मेहता से पूछने पर पता चला कि वो दिलीप कुमार की फोटो थी. दोनों की शक्ल एक समय में इतनी मिलती-जुलती थी. ये किस्सा शाहरुख ने 2013 में फिल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में बताया था.

कुछ सालों पहले हॉस्पिटल से लौटे दिलीप कुमार से मिलने पहुंचे शाहरुख खान.
कुछ सालों पहले हॉस्पिटल से लौटे दिलीप कुमार से मिलने पहुंचे शाहरुख खान. दिलीप कुमार ने अपने अंतिम समय में लोगों को पहचानना बंद कर दिया था. 

शाहरुख आप की अदालत में बताते हैं कि वो हमेशा से स्पोर्ट्स की फील्ड में कुछ करना चाहते थे. हॉकी के अच्छे खिलाड़ी भी थे. फुटबॉल भी खेलते थे. परिवार में भी कोई एक्टिंग फील्ड में नहीं था. इसलिए एक्टिंग में जाने का उनका भी कोई इरादा नहीं था. वो बड़े साफ शब्दों में कहते हैं कि वो अपनी मां के भरोसे और दिलीप कुमार की एक्टिंग की वजह से वो फिल्म लाइन में आए.

हालांकि दोनों ने कभी किसी फिल्म में साथ काम नहीं किया. फिल्मी मैग्ज़ीन्स के मुताबिक सुभाष घई ने दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान को लेकर एक फिल्म प्लैन की थी. इसका नाम था ‘मदरलैंड’. मगर किन्हीं वजहों से ये फिल्म कभी बन पाई. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म के नहीं बनने के पीछे की वजह भी शाहरुख खान ही बताए जाते हैं. मगर वो फिल्म क्यों नहीं बनी, इस बारे में सुभाष घई से बेहतर और कोई नहीं बता सकता. इसलिए नक्कालों और फर्जी खबरों से सावधान!

शाहरुख खान दिलीप कुमार का बड़ा सम्मान करते थे. 2001 ज़ी सिने अवॉर्ड्स में उन्होंने ये बात साबित कर दी. 2001 में शाहरुख बहुत बड़े सुपरस्टार थे. ये बात आप गंभीरता से तब समझेंगे, जब कॉफी विद के शुरुआती दो सीज़न देखेंगे. खैर, ज़ी सिने अवॉर्ड्स के दौरान शाहरुख ने स्टेज पर अपने हाथों से दिलीप कुमार के स्वागत में रेड कार्पेट बिछाई थी. दिलीप कुमार के गुज़रने के बाद शाहरुख फौरन उनके घर पहुंचे. सायरा बानो को दिलासा दिया. उनके साथ बैठे रहे. सोशल मीडिया पर मौजूद तमाम तस्वीरें इसकी गवाह हैं. दिलीप कुमार की डेथ के बाद शाहरुख का रेड कार्पेट बिछाने वाला वीडियो जंगल की आग माफिक सोशल मीडिया पर फैल गया. जाते-जाते वो वीडियो आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं (04.44 मिनट से)-


वीडियो देखें: दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन की इस फिल्म के प्रड्यूसर को किसने किडनैप किया?

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