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वो 8 कॉमेडी फिल्में जो लॉकडाउन में देखकर खुद को थैंक यू बोलेंगे

इंडिया में 21 दिन का लॉकडाउन है. अब घर से बाहर जाने का विकल्प नहीं. तो क्यों न ख़ूब फ़िल्में देखें. कॉमेडी जॉनर में हम कुछ नाम आपको सुझाते हैं.

कॉमेडी जॉनर क्या होता है? उस श्रेणी की फ़िल्में जिनको देखकर हंसी आती है. कॉमेडी फ़िल्में भी कई तरह की होती हैं. ब्लैक या डार्क. स्लैपस्टिक. पैरोडी, स्पूफ या मखौल उड़ाने वाली. सोशल या सटायर कॉमेडी.

हमारी लिस्ट की आठ फिल्मों में हर तरह की कॉमेडी है. देखें. कमेंट्स में और भी नाम सुझाएं.

1. तिथि (कन्नड़, 2015)

कहानी शुरू होती है 101 साल के सेंचुरी गौड़ा की मौत से. उसके बाद परिवार में तीन पीढ़ियां हैं. सब जुदा. सेंचुरी का बूढ़ा बेटा दिन भर खेतों में घूमता रहता है. उसे जीवन-मरण, किसी चीज़ से फर्क नहीं पड़ता. पोता अपने दादा की जमीन लेने के लिए हाथ पैर मार रहा है. और पर-पोता गांव में नई आई गड़रिए की बेटी के साथ प्रेम में पड़ जाता है. सेंचुरी की मौत के 11वें तक क्या क्या होता है, ये हमें नज़र आता है.

डायरेक्टरः राम रेड्डी

कहां देखें: नेटफ्लिक्स पर. यहां क्लिक करें.

2. शॉन ऑफ द डेड (ब्रिटिश, 2004)

लंदन में शॉन अपने दोस्त के साथ रहता है. फैमिली पूरी तरह डिसफंक्शनल है. गर्लफ्रेंड ने डंप कर दिया. ऑफिस में कोई इज्ज़त नहीं है. एक दिन उसके घर के पार्क में दो लोग घुसकर अजीब बर्ताव करने लगते हैं. फिर शॉन को पता चलता है कि ये लोग इंसान नहीं ज़ॉम्बी हैं. यानी ज़िंदा लाशें. और पूरे लंदन पर ज़ॉम्बी अटैक हो गया है. अब शॉन अपनी फैमिली और गर्लफ्रेंड को ज़ॉम्बीज़ से बचाने निकलता है. उसकी जान पर बनी रहती है, और हमारी हंसी नहीं रुकती.

डायरेक्टरः एडगर राइट. उनकी ये फिल्म क्लासिक्स में गिनी जाती है.

कहां देखें: कई प्लेटफॉर्म पर है. एमेज़ॉन, आईट्यून्स, डायरेक्ट टीवी और हूलू. लेकिन अधिकतर अमेरिका की लोकेशन से ही देख सकते हैं. ऐसा न कर सकें तो आगे यूट्यूब पर भी नीचे देख सकते हैं. हालांकि ये प्रिंट ज़रा खराब है.

3. राजा बाबू (हिंदी, 1994)

एक अनाथ बच्चे को रईस फैमिली अडॉप्ट कर लेती है. बच्चा बड़ा होकर राजा बाबू बनता है. मतलब गंवई और नॉन-सीरियस लड़का. ज़िंदगी मज़े में कट रही होती है कि उसे मधु नाम की लड़की से प्यार हो जाता है. मधु भी राज़ी हो जाती है. शादी की तैयारियां चलती हैं. लेकिन फिर गड़बड़ हो जाती है. मधु को पता चल जाता है कि राजा अनपढ़ है और उससे ये बात छुपाई गई. वो हंगामा कर देती है. राजा की लाइफ में तूफान आ जाता है जब उसका पिता उससे नाराज हो जाता है. आगे चीजें कैसे सुलझती हैं, ये हंसते-हंसाते पता चलता है.

डायरेक्टर: डेविड धवन. गोविंदा के साथ उनकी प्योर लल्लनटॉप फिल्म. बहुत देखी जा चुकी, लेकिन फिर भी बहुत देखी जा सकने वाली.

कहां देखें: यूट्यूब पर.

4. पुष्पक (हिंदी, 1987)

एक ग्रैजुएट लेकिन बेरोज़गार लड़का है, जो अमीर बनना चाहता है. एक दिन उसे सड़क किनारे शराब के नशे में धुत शराबी मिलता है. पता चलता है, बहुत रईस आदमी है. बेरोज़गार लड़का उसे किडनैप करके अपने घर में बंद कर देता है और उसके नाम से आलीशान ज़िंदगी जीने लगता है. लेकिन उसे पता नहीं है कि उस रईस आदमी की लाइफ में झोल है और उसे जान से मारने की सुपारी किसी ने दे रखी है.

डायरेक्टर: सिंगीतम श्रीनिवास राव. कमल हसन स्टारर इस कॉमेडी में एक भी डायलॉग नहीं है. फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला था.

कहां देखें: यूट्यूब पर. 

5. हाफ टिकट (हिंदी, 1962)

शहर के बड़े मशहूर उद्योगपति का बेटा है विजय. पापा उस पर शादी करके सेटल हो जाने का प्रेशर बना रहे हैं. उनसे परेशान होकर विजय घर छोड़ देता है और मुंबई जाकर नए सिरे से ज़िंदगी शुरू करना चाहता है. लेकिन दिक्कत ये है कि उसके पास मुंबई जाने के पैसे नहीं हैं. वो एक बच्चे की हाफ-टिकट पर मुंबई पहुंच जाता है, जहां अंजाने में उसे हीरे की स्मगलिंग में घसीट लिया जाता है.

डायरेक्टर: कालीदास. ये किशोर कुमार, मधुबाला अभिनीत फिल्म कल्ट कॉमेडी मानी जाती है.

कहां देखें: यूट्यूब पर.

6. भेजा फ्राय (हिंदी, 2007)

एक म्यूज़िक प्रोड्यूसर है, जो हर वीकेंड एक पार्टी रखता है, जिसमें ऐसे आदमी को बुलाता है, जिसका मज़ाक उड़ाया जा सके. एक दिन उसकी पार्टी में वो मज़ाक की वस्तु बनता है एक आइटी वर्कर भारत भूषण, जो सिंगर बनना चाहता है. भारत दिल का तो अच्छा है लेकिन अपनी हरकतों से वो अपने आस पास के लोगों की लाइफ में कई समस्याएं खड़ी कर सकता है. ऐसी ही कई समस्याएं इस फिल्म में खड़ी होती हैं, जिन्हें भारत ही निपटाता है.

डायरेक्टर: सागर बेल्लारी. अपने आप में ये अलग ही तरह की कॉमेडी है. लेकिन देखने के बाद मन खुश करने की गारंटी है.

कहां देखें: यूट्यूब पर.

7. ज़ूर द फेत्त (फ्रेंच, 1949)

फ्रांस के गांव में पब्लिक हॉलीडे के दिन एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाती है. यहां पर एक पोस्टमैन आता है फ्रैंसिस. ये वैसे तो बड़ा मिलनसार बंदा है लेकिन इसे कोई सीरियसली नहीं लेता. डॉक्यूमेंट्री अमेरिका की मेल सर्विस के बारे में है, जो फ्रांस से कहीं बेहतर है. लेकिन फ्रांस के लोगों को लगता है कि ये उनके यहां से ही प्रेरित है. इसी बीच डॉक्यूमेंट्री के दो मुख्य आयोजक फ्रैंसिस को शराब पिलाकर धुत कर देते हैं. आगे जो होता है, उसे ही सही मायनों में कॉमेडी कहते हैं जो शायद आपने कभी नहीं देखी होगी.

डायरेक्टर: ज़ाक ताती. सारी फिल्में देखने लायक.

कहां देखें: यूट्यूब पर ये फिल्म नहीं है. आप इसे एपल आईट्यून्स या द क्राइटीरियन चैनल या डायेक्ट टीवी पर देख सकते हैं. लेकिन अमेरिकी लोकेशन के साथ ही. उसके लिए वहां के किसी परिचित से अपना यूएस अकाउंट बनवा सकते हैं. या कोई अन्य तरीका. अगर ये सब न कर सकें, तो ज़ाक ताती की ही दूसरी कॉमेडी है. 1967 में आई ‘प्लेटाइम’. उसे आप यहां क्लिक करके यूट्यूब पर देख सकते हैं.

8. मोंटी पायथन एंड द होली ग्रेल (ब्रिटिश, 1975)

ये 932 ईसवी का इंग्लैंड है. महान राजा किंग आर्थर निकले हैं. सेना के लिए कुछ योद्धा ढूंढने. आगे बढ़ते हैं तो आकाशवाणी होती है कि होली ग्रेल ढूंढो. अब ये होली ग्रेल क्या होती है, अपने को नहीं पता. लेकिन कोई ऐसी चीज है जिससे लाइफ में सारे सुख आ जाएंगे. लेकिन किंग आर्थर आगे बढ़ते हैं तो दिक्कतें आती हैं. फ्रेंच लोग बेइज्ज़ती करते हैं. एक तीन सिर वाला दानव मिलता है. न जाने क्या क्या होता है. लेकिन हर एक लाइन में सूक्ष्म हंसी होती है. खिल्ली उड़ाने वाली. सत्ता की. राजाओं की. जिन्हें क्लास चाहिए उनको इससे बेस्ट कॉमेडी मिल नहीं सकती.

डायरेक्टर: टेरी गिलियम, टैरी जोन्स.

कहां देखें: नेटफ्लिक्स पर. सब्सक्रिप्शन न हो तो नीचे यूट्यूब पर, ज़रा ख़राब प्रिंट के साथ.

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