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2017 की 15 फिल्में जो सबसे ज्यादा तृप्त करेंगी!

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#1. टोबा टेक सिंह

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भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के कुछ समय बाद लाहौर के एक पागलखाने में ये कहानी घटती है. जहां बिशन सिंह नाम का ‘पागल’ बंद है. जब दोनों देशों की सरकारें अपने हिंदु, सिख, मुस्लिम कैदियों की अदला-बदली करने का फैसला लेती है तो सबको अपनी-अपनी जगह भेजा जाता है. बिशन सिंह को भी उसके शहर टोबा टेक सिंह रवाना किया जाता है लेकिन जब उसे पता चलता है कि टोबा टेक सिंह भारत की जगह पाकिस्तान की साइड रह गया है तो वो जाने से इनकार कर देता है. डायरेक्टर केतन मेहता की ये फिल्म 1955 में प्रकाशित सआदत हसन मंटो की लघु कथा ‘टोबा टेक सिंह’ पर बनी है. ये एक क्लासिक कहानी है. विभाजन की पीड़ा को मंटो ने यूं लिखा कि 2017 में भी वो मानवीय त्रासदी प्रासंगिक लगती है. भारत और पाकिस्तान के कुछ फिल्मकारों ने मिलकर सद्भावना अभियान ‘ज़ील फॉर यूनिटी’ के अंतर्गत कुछ फिल्में बनाई थीं जिसमें से ये केतन द्वारा निर्देशित थी. फिल्म में बिशन सिंह का मार्मिक रोल पंकज कपूर ने किया है. मंटो की कहानी, केतन के निर्देशन के अलावा बहुत बड़ा चार्म पंकज कपूर की अदायगी है. वे अपनी अलग ही लीग के एक्टर हैं. इसमें विनय पाठक भी हैं जिन्होंने मंटो का रोल किया है.

एक घंटे से कुछ ज्यादा की ये फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी या टीवी पर ज्ञात नहीं.

#2. भावेश जोशी

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इसे एक गुजराती लड़के भावेश जोशी की कहानी बताया जा रहा था जिसमें सुपरपावर्स आ जाती हैं. हालांकि विशुद्ध रूप से सुपरहीरो मूवी नहीं है. ये एक विजिलांते फिल्म है जिसमें मुंबई में रहने वाला एक लड़का सड़कों पर उतरता है. उसके पास निश्चित रूप से कुछ जोरदार शक्तियां हैं. फिल्म में इस लिहाज से बहुत यथार्थपूर्ण लेकिन भरपूर एक्शन भी होगा. इसके अलावा buddy comedy भी है. इसमें विजिलांते लड़के के साथ उसके रूममेट दोस्त भी होता है. इनकी हंसी-ठिठोली होगी. लीड रोल हर्षवर्धन कपूर ने किया है जिन्होंने राकेश मेहरा की ‘मिर्जया’ से 2016 में फिल्म डेब्यू किया था. ‘भावेश जोशी’ उनकी दूसरी फिल्म होगी. इस फिल्म में उनके कई लुक होंगे जिसमें वे प्रोस्थेटिक मेकअप में दिखेंगे. फिल्म को डायरेक्ट किया है विक्रमादित्य मोटवानी ने. स्क्रिप्ट में उनके साथ अनुराग कश्यप का हाथ भी लगा है. ‘उड़ान’ और ‘लुटेरा’ फेम विक्रम की ये चौथी फीचर होगी और इससे पॉजिटिव वाइब आ रही हैं. ‘भावेश जोशी’ का पोलिटिकल एंगल उत्साह जगाता है. क्योंकि 2013 में जब कॉन्ग्रेस पार्टी का शासन था तब इसकी स्क्रिप्ट कुछ और थी और नई सरकार बनी तो स्क्रिप्ट में बदलाव किए गए. फिल्म में मुंबई से जुड़े हुए राजनीतिक मुद्दे देखने को मिलेंगे. 2017 की पहली तिमाही में इसकी शूटिंग पूरी हो जाएगी.

#3. ट्रैप्ड

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एक आदमी है जो मुंबई में एक अपार्टमेंट में 25 दिनों तक कैद रहता है. उसके दौरान ये उसके जिंदा बचे रहने की कहानी है. ये रोल राजकुमार राव ने किया है. ‘शाहिद’, ‘सिटी लाइट्स’, ‘तलाश’ और ‘काई पो छे’ जैसी फिल्मों के बाद ‘ट्रैप्ड’ में उनका आह्लादकारी अभिनय दिख सकता है. फिल्म को डायरेक्ट किया है विक्रमादित्य मोटवानी ने जिनकी पहली फिल्म ‘उड़ान’ (2010) का रेफरेंस आज भी दिया जाता है.

‘ट्रैप्ड’ फरवरी में रिलीज हो सकती है जिसके बाद इसे नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध करवाया जाएगा.

#4. सीक्रेट सुपरस्टार

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एक बच्ची है जो म्यूजिक की दुनिया में बड़ा नाम करना चाहती है. लेकिन उसका पिता इसके खिलाफ है. वो बेटी के सपनों को कुचलने में कोई कमी नहीं छोड़ता. लेकिन लड़की भी जिद्दी है. वो बुर्का पहनकर, गिटार लेकर अपना परफॉर्मेंस यूट्यूब पर अपलोड करती है. यहीं से वो चल निकलती है. लेकिन इसके बाद बहुत कुछ होता है. उसे मुश्किलें भी होती हैं, और उसे उसका तारणहार भी मिलता है. आमिर खान उसी तारणहार का रोल कर रहे हैं. वे म्यूजिक प्रोड्यूसर सरीखा रोल कर रहे हैं जो लड़की की मदद करेगा. आमिर की पत्नी किरण राव ने इस फिल्म को प्रोड्यूस किया है. ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ के डायरेक्टर हैं अद्वैत चंदन जो आमिर के मैनेजर रहे हैं. ये उनकी पहली फिल्म है. इससे पहले वे किरण के निर्देशन वाली ‘धोबी घाट’ में असिस्टेंट डायरेक्टर थे. ‘तारे जमीं पर’ में वे असिस्टेंट प्रोडक्शन मैनेजर थे. बच्चों के विषय पर उनके लिए स्वस्थ और प्रगतिशील फिल्में कम ही आती हैं, इस लिहाज से ये फिल्म उत्साहजनक है. इसमें एक बच्ची के सपनों की उड़ान दिखाई जाती है. माता-पिता को संदेश है कि शिक्षा या परंपराओं के लिए उन्हें कुचलो मत. पहले इस फिल्म का नाम ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ रखा गया था. इसमें बच्ची का केंद्रीय किरदार जाइरा वसीम ने निभाया है जो ‘दंगल’ में महावीर फोगाट की बेटी के रोल में थीं.

‘सीक्रेट सुपरस्टार’ 4 अगस्त को रिलीज होगी.

#5. रंगून

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वर्ल्ड वॉर-2 के शुरुआती दौर की कहानी बताई गई है. इसमें तीन केंद्रीय पात्र हैं. एक 30 और 40 के दशक की फिल्मी हीरोइन है जो फेमिनिस्ट रोल करती है. वो अपने दौर की एक्शन हीरोइन्स में से है जो फिल्म में लीड रोल करती है. उसको कहानी में दो लोगों से अलग-अलग पड़ावों में प्यार होता है. एक ब्रिटिश-भारतीय सेना के अधिकारी से, दूसरा एक फिल्म निर्माता से. इस कथानक से ये अमेरिकन क्लासिक ‘केसाब्लांका’ (1942) जैसी कहानी लगती है. फिल्म में ये तीन भूमिकाएं कंगना रनोट, शाहिद कपूर और सैफ अली खान ने की हैं. ‘रंगून’ के डायरेक्टर विशाल भारद्वाज हैं. अपनी हरेक फिल्म के साथ विशाल ने निरंतरता दिखाई है. उनकी पिछली दो फिल्में गंभीर राजनीतिक विषयों पर आधारित थीं – ‘मटरू की बिजली का मंडोला’ विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) नीति के तहत खेती की जमीनें लेकर कॉरपोरेट घरानों को बेचने को आतुर नेताओं और उसका सामना करते ग्रामीणों-जमींदारों की कहानी कहती थी, वहीं ‘हैदर’ कश्मीर में उग्रवाद की समस्या और उसमें से निकलती राजनीति पर टिप्पणी करती थी. ‘हैदर’ शेक्सपीयर के नाटक हैमलेट का हिंदी रूपांतरण भी थी. ‘रंगून’ जैसी पीरियड ड्रामा में वे कितना फिक्शन रखते हैं व कितना सच और कितना पोलिटिकल-सोशल कमेंट्री की जगह निकाल पाते हैं ये देखना बहुत दिलचस्प होगा.

अभी इसकी रिलीज फरवरी में होनी प्रस्तावित है लेकिन रिलीज साल में आगे ही होगी.

#6. अ डेथ इन द गंज

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इस कहानी के केंद्र में श्यामल चैटर्जी नाम का शर्मीला लड़का है जिसका प्यार का नाम शूटु भी है. वो अपने सेमेस्टर एग्जाम में फेल हो गया है लेकिन परिवार में किसी को बताया नहीं है. स्थिति से बचने के चक्कर में वो परिवार के साथ रोड ट्रिप करते हुए मेकक्लोस्कीगंज (झारखंड) जाता है. उसके साथ उसकी कज़िन बॉनी की कुंआरी दोस्त भी है जिस पर शूटु का क्रश है. वह यहां लाइफ और नेचर को नए सिरे से अनुभव करता है. फिल्म के अंत तक रिश्तों में भीतरी धमाका हो चुका होता है जिसका किसी को भी अंदाजा नहीं होता. बात 1979 की है. इस फिल्म की डायरेक्टर हैं कोंकणा सेनशर्मा. बतौर डायरेक्टर ये उनकी पहली फिल्म है. फिल्म का ट्रेलर आ चुका है और बेहद ताज़ा, कलात्मक, अमूर्त, उत्साह जगाने वाला है. ‘अ डेथ इन द गंज’ में विक्रांत मेसी (लुटेरा, दिल धड़कने दो), रणवीर शौरी, कल्कि कोचलिन, तिलोतमा शोम (किस्सा), गुलशन दैवय्या (हंटर, द गर्ल इन यैलो बूट्स), तनुजा, ओम पुरी और अन्य एक्टर्स ने काम किया है. फिल्म के प्रोड्यूसर्स में अभिषेक चौबे सरीखा नाम भी है जो खुद डायरेक्टर (उड़ता पंजाब) हैं और निर्माताओं द्वारा फिल्म के कंटेंट की पूरी स्वतंत्रता डायरेक्टर को देने की आदर्श स्थिति को सपोर्ट करते हैं.

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#7. वीरे दी वेडिंग

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फिल्म का पहला लुक आना अभी बाकी है.

‘ब्राइड्समेड्स’ (2011) जैसी (अमेरिकन) गर्ल कॉमेडी की श्रेणी में आने वाली फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ चार दोस्तों की कहानी है. एक शादी पर ये सब साथ नजर आती हैं और इस दौरान, पहले और बाद की चीजों पर कहानी खड़ी होती है. अभी फिल्म की कहानी के बारे में कुछ नहीं बताया गया है. ये भी हो सकता है कि चार में से एक लड़की की शादी पर बाकी तीन सहेलियां जाएं और उसे जीवन को लेकर सही फैसला लेने में मदद करें. फिल्म में इन चार सहेलियों के किरदार सोनम कपूर, करीना कपूर खान, स्वरा भास्कर और शिखा तलसानिया कर रही हैं. फिल्म के डायरेक्टर हैं शशांक घोष जिन्होंने सोनम कपूर स्टारर ‘खूबसूरत’ (2014) बनाई थी. उस फिल्म की तरह ‘वीरे दी वेडिंग’ को भी रिया कपूर ही प्रोड्यूस कर रही हैं जो सोनम की बहन हैं. इस कॉमेडी ड्रामा में करीना कपूर के दो लुक होंगे. एक लुक में वे प्रेगनेंट दिखेंगी और इस हिस्से को कथित तौर पर अक्टूबर में फिल्माया गया. मार्च-अप्रैल में फिल्म की ज्यादातर शूटिंग होगी. विशेष यह है कि ये पूरी तरह से लड़कियों के किरदारों वाली फिल्म है जो आमतौर पर हिंदी सिनेमा में नहीं देखने को मिलती. बजट कम रहे और बिना मेल हीरो की फिल्म होने के बावजूद ‘वीरे दी वेडिंग’ बॉक्स ऑफिस पर हिट हो इसकी कोशिश मेकर्स की है. इससे भी खास इसका कंटेंट होगा जिसमें हम प्रगतिशील कहानी देख सकते हैं. करीना का किरदार भी एक प्रोग्रेसिव महिला का है. सोनम भी दिल्ली की एक मिडिल क्लास लड़की का रोल निभा रही हैं जो इसमें संतुलन साधती है कि जिंदगी में आप क्या करना चाहते हो और क्या करते हो.

#8. द रिंग / रहनुमा
(वर्किंग टाइटल)

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बताते हैं कि ये कहानी एक उन्मुख मिजाज की गुजराती लड़की की है जिसकी सगाई की अंगूठी गुम गई है जिसे वो पूरे यूरोप में खोजती हुई फिर रही है. उसे यूरोप घुमाने वाला है एक पंजाबी टूरिस्ट गाइड जिससे उसे प्यार हो जाता है. अभी फिल्म की कहानी आधिकारिक रूप से बताई नहीं गई है. इसमें शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा लीड रोल कर रहे हैं. डायरेक्टर हैं इम्तियाज अली. ये पहला मौका है जब इम्तियाज इन दोनों के साथ काम कर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने ‘लव आजकल’ और ‘जब वी मेट’ जैसी फिल्में बनाई हैं और ये फिल्म भी उसी स्पेस में हो सकती है लेकिन अनुमान है कि इम्तियाज कुछ अलग करना चाह रहे हैं. क्योंकि उन्होंने खुद कहा है कि वे एक ही तरह की फिल्मों के पैटर्न में नहीं पड़ना चाहते. उनके अलावा शाहरुख भी अपनी तरह की फिल्मों से बाहर निकलना चाहते थे. अगर वाकई में ये दोनों ऐसा कर पाते हैं तो अनूठा होगा. इम्तियाज ने ‘रॉक स्टार’, ‘तमाशा’ और ‘हाइवे’ जैसी फिल्मों में प्यार, समाज, जीवन, ट्रैजेडी और यात्राओं को लेकर अपनी फिलॉसफी बताई है, ये फिल्म भी इस कड़ी में एक कदम आगे होगी. फिल्म में इस बार ए आर रहमान का नहीं बल्कि प्रीतम का म्यूजिक होगा. ‘द रिंग’ और ‘रहनुमा’ कहकर पुकारी जा रही इस फिल्म का नाम अभी तय होना है.

इसे अगस्त में रिलीज किया जा सकता है.

#9. हरामखोर

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श्याम एक ग्रामीण अंचल में स्कूल टीचर है. फनी और सटका हुआ है. शादीशुदा है. पत्नी से खिचखिच होती रहती है और अपनी एक छात्रा संध्या को वो फ्लर्ट करता है. क्लास में एक लड़का है जो संध्या को पसंद करता है, उससे शादी करना चाहता है लेकिन असफल है. वो अपने दोस्त के साथ मस्ती-मजाक करता रहता है. श्याम एक टिपिकल टीचर की तरह है जो न सिर्फ लड़कों को बल्कि लड़कियों को भी पीटता है. फिल्म में किशोरवय लड़के-लड़कियों की फैंटेसी, खिलंदड़पन, सामाजिक नैतिकताओं और व्यवस्था को टटोला जाता है. ‘हरामखोर’ डायरेक्टर श्लोक शर्मा की पहली फीचर फिल्म है. इससे पहले उन्होंने विशाल भारद्वाज और अनुराग कश्यप को असिस्ट किया है. उन्होंने कुछ शॉर्ट फिल्में इससे पहले बनाई हैं. कहानी में टीचर का रोल नवाजुद्दीन सिद्दीकी और छात्रा का रोल श्वेता त्रिपाठी ने निभाया है.

13 जनवरी को ये रिलीज हो रही है.

#10. सिमरन

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अमेरिका में अपने रूढ़िवादी परिवार में रहती है सिमरन नाम की युवती. कमजोर पृष्ठभूमि में जीवन में आगे का रास्ता बनाते हुए वो जॉब करती है. लेकिन उसकी हसरतें कुछ और भी हैं. उसे जुआ खेलने की आदत पड़ जाती है. ऐसी कि उस पर कर्जा हो जाता है. अब उसे चुकाने के लिए वो कुछ बैंक लूटती है और पूरे अमेरिका में उसके चर्चे हो जाते हैं. कोई भी बैंक लूटते हुए उसके पास कोई हथियार नहीं होते. सिमरन एक गुजराती लड़की बताई जा रही है लेकिन संदीप कौर नाम की जिस युवती की कहानी पर ये फिल्म आधारित है वो पंजाबी थी. संदीप ने 2014 के जून-जुलाई महीनों में तीन राज्यों में बैंक लूटे थे. बाद में उसे एक लंबे कार चेज़ के बाद पकड़ लिया गया. अब वो जेल की सजा काट रही है. फिल्म को लिखा है ‘अलीगढ़’ के स्क्रीनराइटर अपूर्व असरानी ने. उन्होंने ‘सिमरन’ की कहानी को मूल कहानी से कितना बदला है ये देखना होगा. फिल्म को डायरेक्ट किया है हंसल मेहता ने जिन्होंने पिछले तीन सालों में लगातार ‘शाहिद’, ‘सिटीलाइट्स’ और ‘अलीगढ़’ जैसी ठोस फिल्में बनाईं जो सच्ची कहानियों या सामाजिक हकीकतों पर आधारित थीं. ‘शाहिद’ आतंकी हमलों के मुस्लिम आरोपियों का केस लड़ने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता व वकील शाहिद आज़मी की कहानी थी, वहीं ‘अलीगढ़’ एएमयू के प्रोफेसर सिराज की लाइफ पर बेस्ड थी जो समलैंगिक थे और अंतत: मृत पाए गए. हंसल आज के दौर के सबसे महत्वपूर्ण फिल्मकारों में से हैं और ‘सिमरन’ में फेमिनिज़्म की कैसी विवेचना करेंगे ये देखना थ्रिलिंग होगा.

कंगना रनोट अभिनीत ये फिल्म 15 सितंबर को रिलीज होगी.

#11. लिपस्टिक अंडर माई बुर्क़ा

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ये चार औरतों की कहानी है जो जीवन में अपनी-अपनी आज़ादी की तलाश में हैं. एक कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की है जो अपनी cultural identity में फंसी है. उसे बुर्का पहनकर कॉलेज जाना पड़ता है लेकिन उसकी हसरत एक पॉप सिंगर बनने की है. एक लड़की है जो ब्यूटीशियन है. वो अपने छोटे शहर की दम घोंटू जिंदगी से दूर जाना चाहती है. लेकिन ये सब इतना आसान नहीं. तीसरी कैरेक्टर एक पीड़ित हाउसवाइफ है जिसके तीन बच्चे हैं. वो सेल्सवुमन होने की एक दूसरी ही दुनिया में भी जीती है. चौथी है एक 55 साल की विधवा जो टेलीफोन के रोमांस के जरिए अपनी यौनिकता को फिर से जिंदा पाती है. ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्क़ा’ में सारी औरतें ऐसी हैं जिनके जीवन समाज के अनुकूलन का परिणाम हैं और इसमें वे अपने मन का फैसला नहीं ले पाई हैं, लेकिन फिर वे अपना फैसले खुद लेती हैं. महिला किरदारों की ऐसी कहानियां इतनी प्रतिबद्धता के साथ फिल्मों में अब भी नहीं दिखाई जाती, लेकिन डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव ने दिखाई है. वे समाज में औरतों की उन पहचानों को सामने लाती हैं जो अपने-अपने बुर्क़ों के नीचे छुपा दी गई हैं. इससे पहले अलंकृता 2011 में ‘टर्निंग 30’ डायरेक्ट की और लिखी थी. ‘लिपस्टिक..’ को प्रकाश झा की कंपनी ने प्रोड्यूस किया है जिनकी ‘गंगाजल’, ‘अपहरण’ और ‘राजनीति’ जैसी फिल्मों में अलंकृता असिस्ट कर चुकी हैं. इसमें कोंकणा सेन शर्मा, रत्ना पाठक शाह, विक्रांत मेसी, शशांक अरोड़ा, अहाना कुमरा और प्लबिता बोरठाकुर ने काम किया है.

अक्टूबर 2016 में मामी फिल्म फेस्ट में इसका प्रीमियर हुआ था, इंडिया रिलीज तय होनी है.

#12. फिल्लौरी

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ये कहानी जालंधर के फिल्लौर कस्बे में स्थित है. एक पंजाबी शादी की पृष्ठभूमि में सबकुछ चलता है. अभी इसके अलावा कुछ नहीं ज्ञात लेकिन ये पता है कि इसमें बहुत सारा पागलपन, ड्रामा और अजीब किरदार दिखेंगे. ये एक रोमांटिक और फनी फिल्म है लेकिन अचरज भरी बातें भी होती हैं. इसे डायरेक्ट किया है अंशय लाल ने जिनकी ये पहली फीचर है. इससे पहले वे ‘चक दे इंडिया’, ‘दोस्ताना’, ‘हाउसफुल’ और ‘हिम्मतवाला’ जैसी फिल्मों में असिस्टेंट रहे हैं. अनुष्का शर्मा और उनके भाई के बैनर की ये दूसरी फिल्म है. इसमें उनके अलावा दिलजीत दोसांझ, महरीन पीरज़ादा और सूरज शर्मा लीड रोल में हैं. सूरज ने ‘लाइफ ऑफ पाई’ और ‘मिलियन डॉलर आर्म’ जैसी हॉलीवुड फिल्मों में काम किया है. ये उनकी पहली हिंदी फिल्म होगी. महरीन ने 2016 में एक तेलुगु फिल्म में काम किया था. वैसे वो पंजाब से ही हैं. ‘एनएच10’ को प्रोड्यूस करने के साथ ही अनुष्का ने स्पष्ट कर दिया था कि वे बेहद कम बजट में सिर्फ सॉलिड स्क्रिप्ट वाली फिल्में ही बनाएंगी और उस फिल्म के डायरेक्टर नवदीप सिंह के साथ वे एक और फिल्म प्लान कर रही हैं. उससे पहले वे ‘फिल्लौरी’ ला रही हैं. इसकी भी स्क्रिप्ट अच्छी मानी जा रही है, बाकी सबकुछ निर्देशन पर निर्भर करता है. फिल्म को लेकर एक अच्छा फीडबैक इसके एक्टर दिलजीत दोसांझ का है जिन्होंने ‘उड़ता पंजाब’ में अपनी एक्टिंग से प्रभावित किया है. उन्होंने ‘फिल्लौरी’ के लिए कहा है, “ये एक अमेजिंग स्टोरी है जो बॉलीवुड में कभी नहीं देखी गई है. इसकी एंडिंग ऐसी है कि मैंने सोचा ये फिल्म मैं कैसे छोड़ सकता हूं? मुझे महसूस हुआ कि हमने पंजाबी सिनेमा के लिए इस कहानी को इससे पहले क्यों नहीं सोचा? मैं इसे लेकर ओवर-एक्साइटेड हूं.”

#13. मॉम

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ये फिल्म एक सौतेली मां के बारे में है जिसका अपनी 18 साल की बेटी से रिश्ता अच्छा नहीं है. लेकिन बाद में उनके जीवन में कुछ ऐसा होता है कि वे करीब आती हैं. इस ड्रामा में श्रीदेवी मां का रोल कर रही हैं. उनकी बेटी के रोल में पाकिस्तानी एक्ट्रेस सजल अली और पति के रोल में पाकिस्तानी एक्टर अदनान सिद्दीकी को लिया गया था. शूटिंग भी की गई, लेकिन बीते साल पाकिस्तानी एक्टर्स के खिलाफ भारत में जैसा माहौल बनाया गया उससे अभी स्पष्ट नहीं है कि वे इस फिल्म में होंगे कि नहीं. वैसे ‘मॉम’ में नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक खास भूमिका में दिखेंगे. अक्षय खन्ना भी एक प्रमुख रोल में होंगे. और अभिमन्यु सिंह (गुलाल, जज़्बा) विलेन के किरदार में दिखेंगे. श्रीदेवी ने 2012 में गौरी शिंदे की डेब्यू फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ से अपना कमबैक किया था जिसका कंटेंट अच्छा था. तब से उन्होंने तमिल फिल्म ‘पुली’ को छोड़कर कुछ नहीं किया है. कमबैक के बाद इस साल ‘मॉम’ उनकी दूसरी हिंदी फिल्म होगी. इसमें उनके रोल को सेंट्रल रखने और स्क्रिप्ट को जोरदार रखने के लिए उनके पति और प्रोड्यूसर बोनी कपूर ने बहुत टाइम लिया. उन्होंने कई स्क्रिप्ट रद्द कीं और फिर इस कहानी पर उनका मन जम गया. इस फिल्म को रवि उदयावर डायरेक्ट कर रहे हैं जिन्होंने इससे पहले विज्ञापन फिल्में बनाई हैं और ये उनकी डेब्यू फीचर है. फिल्म की शूटिंग दिल्ली और जॉर्जिया में हुई है.

साल की पहली छमाही में ये रिलीज हो सकती है.

#14. स्निफ

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स्कूल में पढ़ने वाले आठ साल के प्यारे सिख बच्चे की ये कहानी है. उसकी सूंघने की क्षमता बहुत ज्यादा है. बताते हैं कि वो इस उम्र में वो अच्छा जासूस बनता है. साथ में उसके अलग-अलग खूबियों वाले दोस्तों की गैंग भी होती है. वे कुछ लाइव एक्शन एडवेंचर करते हैं. इस फिल्म को अमोल गुप्ते ने डायरेक्ट किया है. वे बेहद संवेदनशील फिल्ममेकर हैं. बच्चों की कहानियों को उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर रखा है. उनकी सबसे पहली फिल्म ‘तारे जमीं पर’ थी जिसे आधा डायरेक्ट किया था लेकिन फिर आमिर खान ने निर्देशन अपने हाथ ले लिया. लेकिन क्रिएटिव डायरेक्टर तो अमोल ही थे. फिर उन्होंने ‘स्टैनली का डब्बा’ बनाई जो सबने समान रूप से पसंद की. तीसरी फिल्म थी ‘हवा हवाई’ जो दो साल पहले रिलीज हुई. इनमें से कोई ऐसी फिल्म नहीं रही है जिसने मनोरंजन में या सामाजिक सौद्देश्यता में जरा सा भी शिकायत का मौका दिया है. अब उनकी अगली फिल्म ‘स्निफ’ के लिए लगता है कि वे बच्चों के सपनों, विचारों और फैंटेसी की निर्मल दुनिया से ये कहानी निकालकर ला रहे हैं. फिल्म में सुरेखा सीकरी, खुशमीत गिल, मनमीत सिंह और सुष्मिता मुखर्जी भी नजर आएंगे.

फिल्म अगले साल गर्मियों में रिलीज हो सकती है.

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#15. बरेली की बर्फी

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इसकी कहानी बरेली में घटती है. तीन पात्रों के बीच. एक प्रिंटिंग प्रेस का मालिक है, दूसरा लेखक है और तीसरी आजाद ख़याल बेबाक लड़की है. इस रोमैंटिक कॉमेडी वाली कहानी में ये भूमिकाएं आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव और कृति सेनन निभा रहे हैं. फिल्म को डायरेक्ट किया है अश्विनी अय्यर तिवारी ने. ‘बरेली की बर्फी’ के लिए उत्साह इसकी स्क्रिप्ट के कारण है. इसे लिखा है नितेश तिवारी ने जिन्होंने 2016 में ‘दंगल’ डायरेक्ट की थी. उससे पहले उन्होंने बच्चों की फिल्म ‘चिल्लर पार्टी’ भी बनाई थी. वे अश्विनी के पति हैं. अश्विनी ने भी पिछले साल अपनी पहली फिल्म ‘निल बट्‌टे सन्नाटा’ डायरेक्ट की थी जो बहुत ही अच्छी और समझदार फिल्म थी जिसमें एक बाई का काम करने वाली युवा मां अपनी बेटी को पढ़ाने और आगे बढ़ाने के लिए न जाने कितना संघर्ष करती है और खुद भी स्कूल में दाखिला लेती है. अश्विनी-नितेश दोनों ने अपने करियर में हर फिल्म में सामाजिक यथार्थ, स्वस्थ मनोरंजन और प्रासंगिक विषयों का ध्यान रखा है.

इस साल 21 जुलाई को रिलीज के लिए प्रस्तावित इनकी फिल्म का इंतजार है.

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