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वो दस सुपर-डुपर हिट भारतीय फ़िल्में, जिनके पोस्टर बाहर की फिल्मों से चुराए हुए हैं

‘ये खबर छपवा दो अखबार में
पोस्टर लगवा दो बाज़ार में’

आज आपको सुनाते हैं पोस्टर पुराण.

डिजिटल क्रांति से पहले. 2G मॉडम/LAN कनेक्शन से पहले. जब इंटरनेट शहर के साइबर कैफ़ेज़ तक ही पहुंचा था. उस वक़्त तक फ़िल्मों के पोस्टर की अहमियत अलग ही थी. कौन सी फ़िल्म लगी है, उसका पता पोस्टर से ही चलता था. लोगों को अगर जानना होता था कि टॉकीज़ में कौनसी फ़िल्म लगी है तो सबसे पहले चौराहे पर लगे पोस्टर को देखने जाते थे. क्योंकि छोटे शहरों में फिल्म थोड़ी लेट ही पहुंचती थी.

'राजाठाकुर' फ़िल्म का पोस्टर.
राजा ठाकुर’ फ़िल्म का पोस्टर.

बचपन में स्कूल आते-जाते वक़्त मेरी नज़रे उन दीवारों पर दौड़ती थीं, जहां आने वाली पिच्चरों के पोस्टर लगते थे. कहीं पोट्रेट वाले. कहीं लैंडस्केप वाले. फिल्मों के साथ-साथ हर साल सर्दियों में शहर में लगने वाली नुमाइश में आने वाले सर्कस के भी पोस्टर लगते थे. कुछ पोस्टर गंदे भी होते थे जिन्हें बच्चों को नहीं देखना होता था (पिताजी के मुताबिक). इसके अलावा साइकल, कमल, हाथ, हाथी वाले पोस्टर टंगते थे, हाथ जोड़े किसी बंदे की फोटो के साथ.

शेयरिंग इज़ पब्लिसिटी.
शेयरिंग इज़ पब्लिसिटी.

फिल्मों की बात करें तो अब फिल्मों के हार्डकॉपी पोस्टर से ज़्यादा सॉफ्टकॉपी पोस्टर पर ध्यान दिया जाता है. अब पोस्टर चिपकाने से ज़्यादा फैलाए जाते हैं. सोशल मीडिया के सागर में. क्रिटिक्स, फ़िल्म से जुड़ी कास्ट, पीआर टीम और प्रॉडक्शन हाउस वाले ट्विटर, इंस्टा और फ़ेसबुक पर पोस्टर रिलीज़ करते हैं. उनके फैन्स उसे वॉट्सऐप ग्रुप तक ले जाते हैं. फ़िर चाहे पोस्टर को भला बोलें या बुरा. पोस्टर अपना काम कर चुका होता है.

जैसे कि हमने बाहरी मुल्कों के गाने, सीन्स, धुन हर चीज़ पर हाथ साफ़ किया है, तो पोस्टर कैसे छोड़ते. वो भी टापे. हमारा पोस्टर टापने में भी ट्रैक रिकॉर्ड बहुत दुरुस्त है. आज आपको ऐसी ही 10 फ़िल्मों के पोस्टर के बारे में बताते हैं, जो टापे हुए हैं.

महत्वपूर्ण सूचना : ( Copied / Inspired/ हैविली इंसायर्ड = टापना, आटना, छापना, टीपना, चुराना, उड़ाना वगैरह वगैरह…)


#बाहुबली : द बिगनिंग – सिमोन बिर्च

बाहुबली : द बिगनिंग - सिमोन बिर्च.
बाहुबली : द बिगनिंग – साइमन बर्च.

2015 की रिलीज़ ‘बाहुबली’ ने बॉक्स-ऑफिस पर और दर्शकों के दिलों में खूब झंडे गाड़े. फ़िल्म का पोस्टर तो याद होगा आपको. पानी से निकला शिवगामनी देवी का हाथ और हाथ में नवजात बालक. पोस्टर लोगों ने खूब पसंद भी किया था. एस एस राजामौली ने फ़िल्म पर तो बड़ी मेहनत की लेकिन पोस्टर में शायद थक गए और बाहर से उठाकर चेंप दिया. फ़िल्म का पोस्टर 1998 में रिलीज़ हुई हॉलीवुड फ़िल्म ‘साइमन बर्च’ से मिलता है. फर्क बस इतना है कि ‘बाहुबली’ के पोस्टर में शिवगामनी देवी एक हाथ से बालक को पकड़ी हैं. ‘साइमन बर्च’ में दो हाथों पर शिशु है. अब राजामौली जी से कोई पूछे बाहुबली साम्राज्य में पोस्टर चोरी का क्या दंड होता?


#बाहुबली 2 – ओंग बैक 2

बाहुबली 2 - ओंग बैक 2
बाहुबली 2 – ओंग बैक 2

‘बाहुबली’ 1 की अपार सफ़लता के दो साल बाद 2017 में रिलीज़ हुई ‘बाहुबली 2’. कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा इसका जवाब देश को मिल गया. लेकिन राजामौली जी ने फिर से फ़िल्म का पोस्टर क्यों टापा इसका जवाब नहीं मिला. जी हां इस फ़िल्म का पोस्टर भी टापा गया था. वो पोस्टर याद होगा, जिसमें प्रभास हाथी की सूंड़ पर खड़े हैं. ये पोस्टर टापा गया था 2008 में रिलीज़ हुई टोनी जा की फ़िल्म ‘ओंग बैक 2’ से. जिसमें टोनी जा तलवार लिए हाथी की सूंड पर खड़े लड़ रहे हैं. ये अच्छी बात नहीं राजामौली साब.


#पीके – क्विम बर्रीरोज़

#पीके - क्विम बर्रीरोज़
#पीके – क्विम बर्रीरोज़

2014 में रिलीज़ हुई परफेक्शनिस्ट आमिर खान कि फ़िल्म ‘पीके’. जिसके पोस्टर रिलीज़ ने ही खूब सारा बज़ क्रिएट कर दिया. क्योंकि पोस्टर में आमिर के बदन पर लिबास के नाम पर एक रेडियो ही था. इस पोस्टर को कुछ लोग तुरंत चीप पब्लिसिटी स्टंट बताने लगे. बाद में फ़िल्म देख कर मालूम पड़ा कि ये फ़िल्म की एक सिचुएशन को दर्शाता एक वैलिड पोस्टर था. लेकिन ‘पीके’ के कई विवादों में एक विवाद ये भी था कि ये रेडियो वाले पोस्टर का आईडिया भी कॉपीड था. दरअसल ये पोस्टर कॉपी किया गया था 70 के दशक के पोर्तुगीज़ आर्टिस्ट क्विम बर्रीरोज़ के अल्बम कवर से. जिसमें वो भी नग्न अवस्था मे एक हारमोनियम टाइप म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट लिए खड़े थे.


 

#ग़जनी – द इनक्रेडिबल हल्क

#ग़जनी - द इन्क्रेडिबल हल्क
#ग़जनी – द इन्क्रेडिबल हल्क

साल 2008. मार्केट में चारों तरफ आमिर हेयर स्टाइल और 6 पैक्स वाली बॉडी की चर्चा. ‘गजनी’ एक फुल ऑन मसाला फ़िल्म थी. कॉमेडी, ट्रेजेडी, एक्शन, रोमांस, म्यूज़िक सब ऐसा था कि छोटे और बड़े शहरों में शो हाउसफुल. फ़िल्म के डायरेक्टर थे ए आर मुरुगादॉस जो पहले ‘गजनी’  तमिल में बना चुके थे. फ़िल्म की कहानी का मोटा हिस्सा लिया गया था साल 2000 में आई क्रिस्टोफर नोलन की फ़िल्म ‘मोमेंटो’ से. इस बात का ज़िक्र भी हुआ उस वक़्त. लेकिन किसी ने ये चर्चा नहीं की कि फ़िल्म का पोस्टर भी ‘हैविली इंस्पायर्ड’ था. 2008 में आई हॉलीवुड सुपरहीरो फ़िल्म ‘द इनक्रेडिबल हल्क’ से. अगर आप दोनों फिल्मों के पोस्टर देखेंगे तो आपको समानता साफ़ दिखेगी.


#राउडी राठौर – द रिप्लेसमेंट किलर्स

#रॉउडी राठौर - द रिप्लेसमेंट किलर्स
#राउडी राठौर – द रिप्लेसमेंट किलर्स

2012 में रिलीज़ हुई अक्षय कुमार और सोनाक्षी सिन्हा की फ़िल्म ‘राउडी राठौर’. टिपिकल प्रभु देवा फिल्म. जो कि बेस्ड थी तेलुगु फ़िल्म ‘विक्रमारकुडु’ पर. तेलुगु फ़िल्म का ये हिंदी संस्करण भी खूब चला. बॉक्स ऑफिस हिट रही. प्रभुदेवा ने फ़िल्म पर तो मेहनत की लेकिन फ़िल्म के पोस्टर पर नहीं. क्योंकि ‘राउडी राठौर’ का पोस्टर 1998 में रिलीज़ हुई हॉलीवुड फ़िल्म ‘द रिप्लेसमेंट किलर्स’ से चेपा गया था. हूबहू चेपा गया था. बता दूं तो हंगामा हो.


#ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा – लॉर्ड्स ऑफ डॉग टाउन

#ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा - लॉर्ड्स ऑफ डॉग टाउन
#ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा – लॉर्ड्स ऑफ डॉग टाउन

2011 में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा’ ज़ोया अख्तर द्वारा निर्देशित बेहतरीन फिल्मों में से एक है. इनकी फ़िल्मों में लोकेशन्स और कैरेक्टर्स के ड्रीम्स पर बहुत फोकस रहता है. इसमें भी वही था. हृतिक,अभय और फ़रहान की तिकड़ी सबको ‘दिल चाहता है’ की तिकड़ी की याद दिला रही थी. फ़िल्म का सब कुछ अच्छा था, सिर्फ एक बात कम अच्छी हुई. वो ये कि इस फ़िल्म का पोस्टर भी 2005 में रिलीज़ हुई हॉलीवुड फिल्म ‘लॉर्ड्स ऑफ डॉगटाउन’ के पोस्टर से ‘हैविली इंस्पायर्ड’ था. गलत बात है कि नहीं. बताओ बैगवती क्या सोचेगी.


#रा वन – बैटमैन बिगिन्स

#रा वन - बैटमैन बिगिन्स
#रा वन – बैटमैन बिगिन्स

शाहरुख खान हमेशा कुछ नया करने की कोशिश में रहते हैं. कई बार सफल होते हैं. कई बार असफल. ‘रा वन’ भी उसी कुछ नया करने की असफ़ल कोशिश है. जिसका क्रेडिट अनुभव सिन्हा को जाता है. हालांकि फिल्म के VFX उस वक़्त के हिसाब से उम्दा थे. खैर जो भी हो मैंने तो इस चक्कर में हॉर्लिक्स खरीदा था, क्योंकि उसके साथ जी वन वाला मग मिल रहा था. बहरहाल बात पोस्टर कॉपी करने की है, तो जी हां ‘रा वन’ का पोस्टर भी कॉपी किया गया था 2005 में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘बैटमैन बिगिन्स’ से. इतनी बड़ी फिल्म का इतना फ़ेमस पोस्टर टापने के गट्स भी सिर्फ़ किंग खान के पास ही हो सकते हैं.


#गुलाल – द शील्ड

#गुलाल - द शील्ड
#गुलाल – द शील्ड

अनुराग कश्यप का सनीमा. फ़िल्म मुश्किलों बाद रिलीज़ हुई लेकिन सिनेमा हॉल में कुछ दिन भी नहीं चली. हालांकि क्रिटिक्स ने फ़िल्म को खूब सराहा. अनुराग कश्यप की जमकर तारीफें हुई. फ़िल्म इस लिस्ट में हैं इसका मतलब है कि फ़िल्म का पोस्टर भारी इंस्पायर्ड है. ‘गुलाल’ का पोस्टर उठाया गया है 2002 में एयर हुए अमेरिकन टेलिविज़न शो ‘द शील्ड’ से. पोस्टर में सिर्फ़ ज़ूम का अंतर है. बाकी सब सेम है. अब अनुराग कश्यप के किस टीम मेंबर ने ये पोस्टर टापा है, पता नहीं. लेकिन बिल तो अनुराग कश्यप के नाम पर ही फ़टेगा. बचा लो ये दुनिया.


#ज़ीरो – उन होममे आ ला हॉट्यूर

#ज़ीरो - उन होममे आ ला हॉटयूर
#ज़ीरो – उन होममे आ ला हॉटयूर

2018 में रिलीज़ फ़िल्म ‘ज़ीरो’ शाहरुख खान की एक और विफ़ल कोशिश का नाम है. आंनद एल राय जैसे डायरेक्टर के साथ भी फ़िल्म अच्छी ना बने तो समझ जाना चाहिए वक़्त खराब चल रहा है. फ़िल्म उतनी अच्छी नहीं थी. सुपरस्टार मेरठिया शाहरुख नहीं जमा किसी को भी. फ़िल्म गयी फ्लॉप. शाहरुख गए ब्रेक पर. और उनके फैंस और मीडिया गयी उनकी अगली फ़िल्म की अटकलों पर. वैल मेन बात ये है कि ‘ज़ीरो’ का पोस्टर भी कॉपी किया गया है. 2016 में रिलीज़ हुई फ्रेंच फ़िल्म ‘उन होममे आ ला हॉटयूर’ से. फर्क इतना है कि फ्रेंच पोस्टर में एक सामान्य छोटे कद का व्यक्ति लंबी लड़की को किस करने के पोश्चर में है और ‘ज़ीरो’ में एक ड्वार्फ. कसम से जियरा चकनाचूर है कॉपीबाज़ी से.


#जजमेंटल है क्या – फ़्लोरा बोरसी आर्ट

#जजमेंटल है क्या - फ़्लोरा बोरसी आर्ट
#जजमेंटल है क्या – फ़्लोरा बोरसी आर्ट

मैडम कंगना रनौत और राजकुमार राव स्टारर ‘जजमेंटल है क्या’ पर पोस्टर कॉपी करने के गंभीर आरोप लगे. आरोप लगाए हंगरी की फोटोग्राफर फ़्लोरा बरसी ने, जिन्होंने अपनी खींची फोटो और फ़िल्म के पोस्टर को साथ में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ‘जजमेंटल है क्या’ टीम का पर्दाफाश किया. सिर्फ एक नहीं फ़िल्म के कई अलग-अलग पोस्टर अलग-अलग फोटोग्राफ़र्स की आर्ट से कॉपी किये गए थे. दिलजीत सुनेगा तो क्या कहेगा.

#इति पोस्टर कथा

इस लिस्ट में नया नाम टाइगर श्रॉफ की फिल्म ‘हीरोपंती-2’ का जुड़ा है. इस फिल्म का पोस्टर भी फ़ेमस वीडियो गेम सीरीज ‘हिटमैन’ के पोस्टर से कॉपी किया गया है.

एक तरफ़ हिंदी सिनेमा की ग्लोबल लेवल पर स्वीकार्यता देखकर फख्र होता है. तो वहीं दूसरी ओर आज भी हमारी फिल्मों के पोस्टर विदेशी फिल्मों के पोस्टर्स को देख कर बनाए जा रहे हैं, ये देखकर शर्मिंदगी भी होती है. जिस हिसाब से हमारी जनसंख्या है, हमारे पास तो आधे विश्व से ज़्यादा क्रिएटिव लोग होने चाहिए. फ़िर क्या कारण है आज भी हमें पोस्टर, म्यूज़िक, फ़िल्म के आईडिया बाहर से उठाने पड़ते हैं?


ये स्टोरी दी लल्लनटॉप में इंटर्नशिप कर रहे शुभम ने लिखी है.


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