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गुजरात में चुनाव लड़ रहे दलितों के नेता जिग्नेश को किससे खतरा है?

बनासकांठा जिले में विधानसभा है वडगांव. सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. यहां से कांग्रेस के मनीलाल बाघेला ने 2012 में विधानसभा का चुनाव जीता था. उनके सामने बीजेपी के फखीरभाई बाघेला चुनावी मैदान में थे. मनीलाल बाघेला ने 21 हजार से ज्यादा वोटों से बीजेपी उम्मीदवार को हराया था. अब इस सीट से दलित नेता जिग्नेश मेवानी चुनावी मैदान में हैं.

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जिग्नेश के नेतृत्व में पूरे गुजरात में दलितों ने आंदोलन किया था.

ऊना में दलितों की पिटाई के बाद दलितों ने पूरे गुजरात में आंदोलन किया था. इस आंदोलन की गूंज पूरे देश में सुनाई दी थी. इस आंदोलन के दौरान अगर कोई नाम सबसे ज्यादा चर्चा में था तो वो नाम जिग्नेश मेवानी का ही था. चुनाव से ठीक पहले बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के अलावा सबसे ज्यादा चर्चा किसी की थी तो वो हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी और अल्पेश ठाकोर थे. अल्पेश खुद कांग्रेस में शामिल हो गए, जबकि हार्दिक ने पिछले दिनों कांग्रेस को बाहर से समर्थन देने का ऐलान किया था. जिग्नेश ने भी बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. अब जब चुनाव लड़ने की बारी आई तो जिग्नेश निर्दलीय ही वडगांव सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं. इससे पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थी कि जिग्नेश भी अल्पेश ठाकोर की तरह कांग्रेस में शामिल होकर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन अल्पेश ने इसे खारिज कर दिया था.

जिग्नेश ने फेसबुक पेज पर अपनी उम्मीदावरी का ऐलान करते हुए लिखा-

जिग्नेश मेवानी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में हैं. इस सीट पर कांग्रेस ने मनीलाल बाघेला को ही उम्मीदवार बनाया है, जबकि बीजेपी की ओर से विजय भाई हरखाभाई चक्रवती उम्मीदवार हैं. हरखाभाई चक्रवती तो घोषित तौर पर जिग्नेश के विरोधी खेमे के हैं, लेकिन मनीलाल कांग्रेस के हैं. कांग्रेस का जिग्नेश के प्रति और जिग्नेश का कांग्रेस के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर सीधे तौर पर दिख रहा है. ऐसे में जिग्नेश को सबसे बड़ा खतरा बीजेपी से नहीं, कांग्रेस से ही हो सकता है. हालांकि राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के नेता जिग्नेश ने निर्दलीय उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही दूसरी पार्टियों से भी अपील की है कि वो कोई उम्मीदवार न उतारें, ताकि जिग्नेश की जीत सुनिश्चित हो सके. इसके बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस अपने उम्मीदवार को वापस ले सकती है.

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जिग्नेश के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया है.

जिग्नेश ने चुनाव लड़ने के लिए किसी भी कॉरपोरेट से चंदा लेने से इनकार कर दिया है. जिग्नेश ने साफ किया है कि उन्हें 20 लाख रुपए की जरूरत होगी और इसके लिए वो लोगों से पैसे मांगेंगे. पैसों के लिए जिग्नेश ने एक पत्र भी लिखा था-

“दलित अधिकारों की मांग करने वाले हम लोग डेढ़ साल पुराने संगठन हैं, जिसने कभी किसी राजनैतिक दल, कॉरपोरेट या किसी एनजीओ से चंदा नहीं लिया है. हमारा संगठन राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच लोगों के काम और लोगों की मदद से चलता है, जिसका मकसद जनता की लड़ाई जनता के पैसे से करने का है.”

अब जिग्नेश चुनावी मैदान में उतर गए हैं. उनके सामने बीजेपी के विजय भाई हरखाभाई चक्रवती मैदान में हैं. कांग्रेस ने अभी स्थिति साफ नहीं की है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अभी के कांग्रेस विधायक को लेकर भी क्षेत्र में नाराजगी है. ऐसे में ऊना से निकले दलित आंदोलन की आग को बीजपी के विरोध में धार देकर जिग्नेश अपनी सियासी पारी की शुरुआत कर सकते हैं.


वीडियो में देखें गुजरात की रानी के जौहर की कहानी

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