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मुकेश अंबानी के जीजा बोटाद सीट से चुनाव जीते या हार गए?

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विधानसभा : बोटाद (बोटाद)

बीजेपी 906 वोट से जीती.

बीजेपी के सौरभ पटेल कोः 79,623 वोट

कांग्रेस के डीएम पटेल कोः 78,717 वोट

गुजरात में 2017 का चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष रहे राहुल गांधी के अलावा पाटीदार नेता हार्दिक पटेल और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी के लिए भी सबसे कठिन चुनौतियों में से था. नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी तो कई चुनाव देख चुके थे, लेकिन हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी पहली बार सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव में सक्रिय थे. इस चुनाव में एक और बीजेपी नेता चुनाव लड़ रहे थे, जो लगातार चार बार विधायक रहे थे. ये थे बोटाद से तीन बार के विधायक रहे सौरभ पटेल, जो पांचवीं बार विधायक पहुंचने के लिए लड़ रहे थे. पांचवीं बार इसलिए कि इससे पहले जब 2012 में चुनाव हुए, तो वो अकोटा से विधायक बने. रिश्ते में वो मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के जीजा लगते हैं.

विरोधी उन पर बाहरी का ठप्पा लगाते हैं.

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आनंदीबेन पटेल के बाद जब गुजरात के मुख्यमंत्री के चेहरे चर्चा में थे, तो एक नाम सौरभ पटेल का भी सामने आया था.

खुद सौरभ ने भी माना कि पहली बार 1998 में जब वो यहां से चुनाव लड़े थे, तो बाहरी होने का मुद्दा था. लेकिन जीत मिली तो उसके बाद काम करते रहे. मोदी की सरकार में वित्त मंत्री रहे, लेकिन विजय रूपानी की सरकार में मंत्री पद नहीं मिला. इस चीज को पार्टी का फैसला मानकर स्वीकार करने वाले सौरभ पटेल शुरू से ही इस चुनाव को जीतने के लिए आश्वस्त थे. वहीं इस सीट पर पहले कांग्रेस ने एनसीपी छोड़कर पार्टी में शामिल हुए मनहर पटेल को चुनावी मैदान में उतार दिया. इसके बाद पाटीदार संगठन ने कांग्रेस का विरोध कर दिया. कांग्रेस ने अंतिम वक्त में अपना उम्मीदवार बदल दिया और डीएम पटेल को चुनावी मैदान में उतार दिया. इस सीट से पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के कन्वीनर और हार्दिक पटेल के बाद दूसरे सबसे बड़े पाटीदार नेता दिनेश बांभणिया भी टिकट चाहते थे. हालांकि बात नहीं बनी और चुनाव से ऐन पहले दिनेश बांभणिया ने पाटीदार अनामत आंदोलन समिति छोड़ दी थी.

Botad seat candidate
बीजेपी नेता सौरभ पटेल और कांग्रेस कैंडिडेट डीएम पटेल के बीच शुरुआत से ही कड़ा मुकाबला था.

पिछला नतीजा : बीजेपी के ठकरसीभाई मनिया ने कांग्रेस के कुंवरजी भाई बवालिया को 10,000 वोटों से हराकर चुनाव जीत लिया था.

इस बार का नतीजा : बीजेपी के सौरभ पटेल ने चुनाव जीत लिया है. 

तीन क्षेत्रीय मुद्दे, जिन्होंने बीजेपी को जीत दिलाने में मदद की

1. सौरभ पटेल बोटाद के पुराने विधायक रहे हैं. पिछला चुनाव उन्होंने यहां से भले ही नहीं लड़ा था, लेकिन लोग उनको याद करते थे.

2. कांग्रेस में आपसी खींचतान का फायदा सौरभ पटेल को मिला.

3. पहले सीट पर पाटीदार आंदोलन का प्रभाव पड़ा था, लेकिन चुनाव से ठीक पहले दिनेश बांभणिया ने पाटीदार अनामत आंदोलन समिति छोड़ दी, जिसका कांग्रेस उम्मीदवार पर नकारात्मक असर हुआ.


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