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ग्राउंड रिपोर्ट वलसाडः वो जगह जहां से जीतने वाली पार्टी की गुजरात में सरकार बनती है

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वलसाड. कहते हैं कि यहां जीतने वाली पार्टी या तो सरकार बनाती है या सरकार बनाने में शामिल होती है. केंद्र के साथ ऐसा शुरू से है. राज्य सरकार के साथ 1975 से.

बताया गया कि काफी टाइम पहले वलसाड के फेमस तीथल बीच को डिसेबल्ड फ्रेंडली बीच बनाने का ऐलान पीएम मोदी ने किया था, जो अभी तक नहीं हो पाया है. वलसाड में ही वापी भी आता है. जहां शुरू में तो लोग कहते रहे कि यहां ऐसी कोई खास दिक्कत नहीं है. लेकिन एक बार जब दिक्कतें निकलनी शुरू हुईं, तो वो बढ़ती ही गईं.

वलसाड का तीथल बीच. शाम को लोग यहां फुर्सत के कुछ पल बिताने आ जाते हैं. (फोटोःअमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)
वलसाड का तीथल बीच. शाम को लोग यहां फुर्सत के कुछ पल बिताने आ जाते हैं. (फोटोःअमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)

वापी में बहुत इंडस्ट्रीज़ हैं, खासकर केमिकल की. ये जगह सबसे प्रदूषित जगहों में से एक मानी गई. सप्लाई वाला पानी ठीक है, लेकिन GIDC के आस-पास के गांव में अंडरग्राउंड वाटर रंगीन आता है. GIDC यानी गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन. लोकल में GIDC का मतलब उस इलाके से होता है, जहां GIDC ने एक जगह जमीन अधिग्रहित करके उसे अलग-अलग कंपनियों को दे दिया है. इससे सारी कंपनियां एक जगह हो जाती हैं.

ये बताया गया कि बाहर से आने वालों को वापी में आंख में जलन होती है और सायनस की प्रॉब्लम हो जाती है. यहां रहने वाले इसके आदी हो चुके होते हैं. कंपनियां रात में ज्यादा टॉक्सिक फ्यूम्स छोड़ती हैं, जिसकी वजह से सुबह स्मॉग टाइप की धुंध रहती है. इतने बड़े केमिकल हब में लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि अगर कोई केमिकल ऐक्सिडेंट होता है, तो उन्हें फर्स्ट ऐड में क्या करना चाहिए. प्रशासन को ऐक्शन में आते-आते कई घंटे बीत जाते हैं. मेरे ख्याल से ये एक जरूरी चीज है, जिसमें लोगों को ये सिखाया जाना चाहिए कि बेसिक लक्षणों के आधार पर सबसे पहले बचाव के लिए क्या करना है.

Video: दुनिया की सबसे प्रदूषित जगहों में से एक वापी

वापी में हम जिनसे बात कर रहे थे, उसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों के समर्थक लग रहे थे, लेकिन अभी तक कोई भी नेता उनसे वोट मांगने नहीं आया था.

वापी में 5-6 महीने पहले एक श्मशान बना है. हाईटेक श्मशान. पार्क जैसा दिखने वाला श्मशान. जहां जाकर वीतराग न हो, मोह जग जाए. वापी की तमाम कंपनियों ने उसके लिए बड़ी रकम दान में दी है. एक करोड़ से ज्यादा से शुरू होकर दर्जनों नाम के आगे 5 लाख रुपए तक लिखे हुए हैं. इस श्मशान में लगे कैमरों से दूर के लोग भी अपने परिजनों का अंतिम संस्कार देख सकते हैं.

वापी में करोड़ों की लागत से बना अत्याधुनिक श्मशान. (फोटोः अमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)
वापी में करोड़ों की लागत से बना अत्याधुनिक श्मशान. (फोटोः अमितेश सिन्हा / दी लल्लनटॉप)

इंडस्ट्रीज़ की वजह से वापी की दमनगंगा नदी बहुत प्रदूषित बताई जाती है. गंगा की बात सब करते हैं, दमनगंगा की बात करने वाला कोई नहीं है.

वलसाड के ज्यादातर इलाकों में भाजपा मजबूत नजर आती है. सिवाय कपराडा के. जहां कांग्रेस के जीतू भाई 3-4 बार जीत चुके हैं. पारडी सीट के इलाके में खड़े एक आदमी ने वलसाड में अपने घर के पास की जगह का जिक्र करते हुए बताया कि 15 साल से खराब सड़क इस चुनाव के वक्त बनने लगी है. उनका मानना था कि चुनाव के वक्त काम तेजी से होते हैं. चुनाव जल्दी-जल्दी हों, तो काम भी जल्दी-जल्दी होगा.

Video: ‘हर महीने चुनाव हों, तो लोगों का काम जल्दी होगा’

वलसाड में ही उमरगांव पड़ता है. गुजरात विधानसभा की आखिरी सीट. विधानसभा सीट नंबर 182. शांत सा कस्बाई इलाका. यहीं बहुत पहले रामायण, महाभारत की शूटिंग हुई थी. अभी भी किसी न किसी सीरियल की शूटिंग चलती रहती है. सोया हुआ सा कस्बाई इलाका. थोड़ी शाम होने पर सैकड़ों नावें मछली मारकर लौट रही थीं. मछुआरों ने हमें जर्जर प्लेटफॉर्म दिखाया, जिससे आकर नाव लगती है और वो नाव पर खुद चढ़ते-उतरते हैं या सामान लादते-उतारते हैं.

करीब 30 साल पहले बना वो प्लैटफॉर्म कभी भी टूट सकता है. उस वक्त अगर उस पर कोई हुआ, तो उन लोगों की जान जा सकती है. वो बीच से टूट रहा है, जाने का रास्ता बस किनारे से बचा है. नाव जब आकर प्लैटफॉर्म से लगती है, तो वो पूरा हिलता है. यहां के लोगों की बस एक डिमांड है कि इस जर्जर प्लैटफॉर्म को ठीक करवा दिया जाए और एक पुराना प्लैटफॉर्म जो 50-60 साल पहले बना था और अब गिर चुका है, उसे बनवा दिया जाए. इसके लिए उन्होंने हर जगह अपील की है. लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई.

हो सकता है कि वलसाड में जीतने वाली पार्टी ही फिर से सरकार बना ले, लेकिन उस सरकार को कम से कम लोगों की ऐसी अपील पर ध्यान देना चाहिए, जो उनकी रोजी-रोटी से ही नहीं, जिंदगी से जुड़ी हो.

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