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'ब्राह्मण-बनिया-मुस्लिम-महिला'- दिल्ली में AAP, BJP और कांग्रेस के उम्मीदवारों की लिस्ट क्या कहती है?

Delhi Election 2025: अगर आप बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के उम्मीदवारों की लिस्ट देखेंगे तो बहुत कुछ समानताएं मिलेंगी. जैसे अपर कास्ट का ध्यान रखना, पुराने नेताओं के बेटे-बेटियों को सेट करना, महिला सम्मान की बात करना, मगर टिकट देने में कंजूसी करना.

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Delhi Election 2025
दिल्ली में 5 फरवरी को चुनाव होंगे, 8 फरवरी को नतीजे आएंगे.
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सौरभ
21 जनवरी 2025 (Updated: 21 जनवरी 2025, 02:08 PM IST)
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दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए AAP, बीजेपी और कांग्रेस तीनों के उम्मीदवारों की लिस्ट आ चुकी है. तीनों पार्टियों ने सारे समीकरण बैठाने की कोशिश की है. सोशल इंजीनियरिंग पर विशेष ध्यान दिया गया है. मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में वोटबैंक साधने की अलग कोशिश की गई है. महिलाओं के लिए सभी पार्टियां जोर-शोर ने घोषणाएं की. महिला सम्मान भी इस चुनाव में चर्चा का विषय बना. लेकिन जब बात महिलाओं के प्रतिनिधित्व की आई तो किसी भी पार्टी में जोश नहीं दिखा. बजाए इसके पूर्व मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, नेताओं के बेटों-बेटियों को भी बढ़-चढ़कर टिकट दिए गए.

बेटे-बेटियों का ख्याल रखा गया है!

2014 लोकसभा चुनाव में भ्रष्टाचार, महंगाई के अलावा परिवाद भी एक ऐसा मुद्दा था जिस पर बीजेपी ने कांग्रेस को बुरी तरह घेरा. भ्रष्टाचार एक ऐसा मुद्दा है जो जनता की स्मृति में ज्यादा दिन टिकता नहीं है. और महंगाई अगली सरकार के लिए भी उतना ही बड़ा मुद्दा बन जाती है जितना पिछली सरकार में थी. लेकिन परिवारवाद एक ऐसा मुद्दा बन गया जिसने आम जनता को लगभग ये यकीन दिला दिया कि कांग्रेस में परिवारवाद वाली पार्टी है. तब से दो लोकसभा चुनाव और 70 से ज्यादा विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर हरदम घिरती रही है.

अगर हम दिल्ली चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों की लिस्ट देखें तो विरोधी उस पर ये आरोप एक बार फिर लगा सकते हैं. इस चुनाव में कांग्रेस ने पूर्व सांसदों, विधायकों, मंत्रियों के परिवार से ताल्लुक रखने वालों को 8 टिकट बांटे हैं. ये संख्या तीनों पार्टियों में ज्यादा ज्यादा है. सबसे चर्चित नाम संदीप दीक्षित का है. पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे हैं. वह अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा दो पूर्व सांसदों के बेटों को कांग्रेस ने टिकट दिया है. चार विधायकों के बेटे-बेटियों को टिकट दिया गया है. और पूर्व प्रधानंमत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते आदर्श शास्त्री को भी कांग्रेस ने टिकट दिया है. शास्त्री इससे पहले AAP से विधायक भी रह चुके हैं.

परिवारवालों को टिकट बांटने में दूसरा नंबर आता है आम आदमी पार्टी का. AAP ने 6 टिकट नेताओं के रिश्तेदारों को बांटे हैं. सभी पूर्व विधायकों के बेटे-बेटी हैं. इनमें AAP के पूर्व विधायक शोएब इकबाल, मतीन अहमद, महाबल मिश्रा के बेटे भी शामिल हैं. साथ ही उत्तम नगर के विधायक नरेश बाल्यान की बेटी को टिकट दिया गया है. गौर करने वाली बात ये है इन सभी को अपने पिता की सीट से ही टिकट दिया गया है.

इस रेस में बीजेपी थोड़ा पीछे है. बीजेपी ने तीन पूर्व नेताओं के बेटों को टिकट दिया है. इनमें पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा को टिकट दिया गया है. प्रवेश वर्मा दो बार पश्चिम दिल्ली से सांसद भी रह चुके हैं. प्रवेश केजरीवाल के खिलाफ नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा 1993 में दोबारा विधानसभा के गठन के बाद दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री रहे मदनलाल खुराना के बेटे हरीश खुराना को भी टिकट दिया गया है.  इसके अलावा यूपी के अमरोहा से बीजेपी सांसद कंवर सिंह तंवर के बेटे भुवन तंवर को भी दिल्ली कैंट से टिकट दिया गया है.

सोशल इंजीनियरिंग पर पूरा फोकस!

टिकट बंटवारे में सभी पार्टियों की रणनीति पर अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने एक विस्तृत रिपोर्ट की ही. रिपोर्ट के मुताबिक सभी पार्टियों ने अपर कास्ट उम्मीदवारों को भर-भर कर टिकट दिए हैं. आम आदमी पार्टी ने सबसे ज्यादा 48 प्रतिशत कथित उच्च जाति के उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं. AAP ने कभी ब्राह्मण-बनिया पार्टी के नाम से जानी जाने वाली बीजेपी से भी ज्यादा टिकट अपर कास्ट उम्मीदवारों को बांटे. बीजेपी ने 45 फीसदी अपर कास्ट कैंडिडेट उतारे हैं. यहां कांग्रेस ने कुछ नर्मी दिखाते हुए ये आंकड़ा 35 प्रतिशत ही रखा है.

दिल्ली की मौजूदा डेमोग्रेफी पर नज़र डालेंगे को पाएंगे कि टिकट बंटवारा पूरी रणनीति के तहत किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में उच्च जातियां सबसे बड़ा वोट ब्लॉक बनाती हैं. राजनीतिक दल दावा करते हैं कि यह संख्या 35% से 40% के बीच है. इनमें से, ब्राह्मण सबसे ज्यादा लगभग 13% है. उसके बाद राजपूत 8%, वैश्य 7% पंजाबी खत्री 5%, और बाकी अन्य सामान्य जातियां हैं.

तीनों पार्टियों का टिकट बंटवारे में इस सियासी समीकरण पर फिट बैठने की पूरी कोशिश की गई है. बीजेपी ने 19%, कांग्रेस ने 17% और AAP ने 16% टिकट ब्राह्मण उम्मीदवारों दिए हैं. इसके बाद AAP ने 10%, बीजेपी ने 7% राजपूत उम्मीदवार उतारे हैं. कांग्रेस ने सिर्फ एक राजपूत को टिकट दिया है. साथ ही बीजेपी ने वैश्य समुदाय के उम्मीदवारों को खूब टिकट बांटे हैं. बीजेपी ने 17%, AAP ने 13% और कांग्रेस ने 10% वैश्य उम्मीदवार उतारे हैं.

दिल्ली में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) अगला बड़ा वोट ब्लॉक है जो राजधानी के मतदाताओं का लगभग 30% हिस्सा है. इनमें से जाट और गुज्जर सबसे बड़ा वोटबैंक बनाते हैं जो OBC मतदाताओं का लगभग आधा हिस्सा हैं. उसके बाद यादव जैसी अन्य जातियां हैं. दिल्ली की आबादी में दलितों की संख्या 16% से ज़्यादा है जबकि मुस्लिमों की संख्या लगभग 13% और सिखों की संख्या 3.5% है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने ओबीसी आबादी के अनुसार सबसे ज़्यादा 30% टिकट दिए हैं. AAP ने 25% जबकि भाजपा ने 20% टिकट OBC समाज को दिए हैं. बीजेपी और कांग्रेस ने अपने सभी टिकटों में से 14% जाटों को दिए हैं. AAP ने 11% है. BJP और AAP ने 9%  गुज्जरों को टिकट दिए हैं जबकि कांग्रेस ने 11%.

इसके अलावा दिल्ली की 17 प्रतिशत दलित आबादी के लिए 12 सीटें आरक्षित की गई हैं. इन पर किसी पार्टी का कोई ज़ोर चल नहीं सकता. 

ये भी पढ़ें- दिल्ली चुनाव में पूर्वांचलियों को साधने की खूब कोशिश हो रही है, रोहिंग्या एंगल भी आया

अल्पसंख्यक प्रेम

दिल्ली में 7 ऐसी सीटें हैं जहां मुस्लिमों की संख्या निर्णायक भूमिका निभाती है. ये सीटें हैं- ओखला, बाबरपुर, मुस्तफाबाद, सीलमपुर, मटिया महल, बल्लीमारान और चांदनी चौक. पिछले दो चुनावों से ये सातों सीटें आम आदमी पार्टी के खाते में जा रही हैं. इस बार कांग्रेस ने चांदनी चौक में के अलावा सभी मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर मुस्लिम कैंडिडेट उतारे हैं. वहीं AAP ने 5 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया. बीजेपी ने अपनी परंपरा दोहराते हुए एक भी मुस्लिम को उम्मीदवार नहीं बनाया है.

महिलाओं की कितनी भागीदारी

रमेश बिधूड़ी के बयान रुकते नहीं और दिल्ली में महिला सम्मान का मुद्दा चर्चा से हटता नहीं. महिलाओं के लिए सबने बढ़चढ़ कर घोषणाएं भी कीं. लेकिन ये सम्मान किसी भी पार्टी की कैंडिडेट लिस्ट में नज़र नहीं आता. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 46 फीसदी वोटर महिलाएं हैं. 2020 विधानसभा चुनाव में पुरुषों का मत प्रतिशत 62.6 था और महिला का मत प्रतिशत  62.5. लेकिन आप पार्टियों की कैंडिडेट लिस्ट देखेंगे पाएंगे कि बराबरी की बात तो करनी ही नहीं, महिला उम्मीदवारों की संख्या पुरषों के मुकाबले चौथाई के आसपास भी नहीं दिखती. हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. भारतीय राजनीति में यह एक सामान्य घटना है. AAP और बीजेपी ने इस बार 9-9 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है और कांग्रेस ने 8 महिला उम्मीदवार उतारी हैं.

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