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इन स्टूडेंट्स को सीधे मिलेगा यूनिवर्सिटी में एडमिशन, नहीं देना होगा कोई एंट्रेंस एग्जाम

UGC ने भारत में पढ़ाई के लिए आने वाले विदेशी स्टूडेंट्स के लिए बड़ी घोषणा की है. अब यूनिवर्सिटीज चाहें तो विदेश छात्रों को 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा सीटों पर एडमिशन दे सकती हैं.

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22 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 22 अगस्त 2022, 06:06 PM IST)
UGC Admission
UGC चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने बताया कि इन सीटों पर एडमिशन के लिये CUET या कोई एंट्रेंस टेस्ट देने की जरूरत नहीं होगी. (फोटो- इंडियाटुडे)
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UGC ने भारत में पढ़ाई के लिए आने वाले विदेशी स्टूडेंट्स के लिए बड़ी घोषणा की है. अब यूनिवर्सिटीज चाहें तो विदेश छात्रों को 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा सीटों पर एडमिशन दे सकती हैं. ये सीटें यूनिवर्सिटी की कुल सीटों के अलावा होंगी. UGC चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने बताया कि इन सीटों पर एडमिशन के लिये CUET या कोई एंट्रेंस टेस्ट देने की जरूरत नहीं होगी. 

मौजूदा सीटों के अतिरिक्त होंगी सीटें

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक यूनिवर्सिटीज अब विदेशी छात्रों को एक्स्ट्रा सीटों पर एडमिशन दे सकेंगी. यूनिवर्सिटी के पास रेगुलेटरी बॉडी की गाइडलाइन्स को ध्यान में रखते हुए एक्स्ट्रा सीट्स के बारे में फैसला लेने का अधिकार होगा. जिसमें यूनिवर्सिटी का इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और बाकी जरूरी चीजों का ध्यान रखना होगा. UGC चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने बताया, 

इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिये हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स 25 प्रतिशत अतिरिक्त सीटें बना सकते हैं. ये सीटें उनके अंडरग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट प्रोग्राम की सीटों से अलग बनाई जा सकती हैं.

केवल विदेशी स्टूडेंट्स ले सकेंगे एडमिशन

इन सीटों में जो स्टूडेंट्स किसी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत भारत में पढ़ने आते हैं, उन्हें नहीं जोड़ा जायेगा. हालांकि एडिमिशन के लिये भारत में होने वाले एंट्रेंस टेस्ट नहीं देने होंगे. UGC चेयरमैन ने बताया, 

ये सीटें केवल इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिये होंगी. अंडरग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट दोनों प्रोग्राम में एडमिशन के लिये ये सीटें होंगी. अगर कोई भी सीट खाली रह जाती है तो उसमें किसी और स्टूडेंट को एडिमिशन नहीं दिया जायेगा. यहां इंटरनेशनल स्टूडेंट वो होंगे जिनके पास किसी दूसरे देश का पासपोर्ट होगा.

UGC चेयरमैन के मुताबिक हायर एजुकेशन का अंतरराष्ट्रीयकरण नई एजुकेशन पॉलिसी 2020 का एक मुख्य हिस्सा है. इससे भारत और दूसरे देश के बीच रिश्ते भी बनते हैं. भारत के कई हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में इंटरनेशनल स्टूडेंट पढ़ने आ रहे हैं और इसके लिये उनकी फंडिंग भी बढ़ाई जा रही है. इससे भारत को विदेशी स्टूडेंट्स की पढ़ाई के लिये एक अनुकूल जगह बनाने का काम भी होगा.

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