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आखिर क्या है भारत-अमेरिका ट्रेड डील, जिसको लेकर ट्रंप कतई रूखे हो रखे हैं?

अमेरिका के प्रेजिडेंट डॉनल्ड ट्रंप 24-25 फरवरी को भारत आ रहे हैं. दिल्ली जाएंगे, अहमदाबाद, आगरा जाएंगे. अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप नाम का बड़ा भारी इवेंट भी होगा. लेकिन नमस्ते और दुआ सलाम से पहले ही मिस्टर प्रेजिडेंट कतई अग्रेसिव हो रखे हैं.

अभी इसी महीने की शुरुआत में भारत को जनरलाइज़्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (GSP) लिस्ट से बाहर कर दिया था. और अब ट्रंप ने कह दिया है कि भारत के साथ तय हो चुकी मेगा ट्रेड डील फिलहाल नहीं होगी.

ट्रेड डील क्या है? इससे होगा क्या? ट्रंप ने आखिर बोला क्या है? इन सब सवालों पर बात करेंगे, लेकिन पहले चार शब्दों के बारे में जानते हैं, जिनमें से एक का ऊपर ज़िक्र हो चुका है और तीन का आगे होगा.

– जनरलाइज़्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (GSP) – ये ऐसी लिस्ट है, जिसमें शामिल देशों को अमेरिका के साथ बिज़नेस में छूट मिलती है. उन्हें अपना कोई प्रोडक्ट अमेरिका भेजने पर कम इम्पोर्ट ड्यूटी देनी पड़ती है. कमजोर इकॉनमी वाले देशों को अमेरिका इस लिस्ट में शामिल करता है. अब भारत को बाहर भी इसी बिनाह पर किया गया है क्योंकि अमेरिका मानता है कि भारत की इकॉनमी अब इतनी भी कमजोर नहीं रही.

– इम्पोर्ट ड्यूटी- कोई भी एक देश जब अपना कोई प्रोडक्ट दूसरे देश भेजता है, तो  वहां इस प्रोडक्ट पर टैक्स लगता है. यही है इम्पोर्ट ड्यूटी.

– मूडीज-  दुनियाभर के देशों के आर्थिक हालातों पर नज़र रखने वाली संस्था. मूडीज हर साल बड़े-बड़े देशों के लिए अगले एक साल तक का जीडीपी ग्रोथ प्रेडिक्शन भी देती है, जिसकी खासी वजनदारी मानी जाती है.

इंडिया-अमेरिका ट्रेड डील क्या है?

2018 में भारत-अमेरिका के बीच मेगा ट्रेड डील पर बात शुरू हुई थी. इसे ऐसे समझिए कि डील होने के बाद दोनों देशों के बीच करीब 71 हजार करोड़ रुपए का बिज़नेस बढ़ेगा. GSP लिस्ट से बाहर होने के बाद भारत का करीब 45 हजार करोड़ रुपए का खर्चा बढ़ चुका है. जाहिर सी बात है कि भारत को ये पसंद नहीं आ रहा है.

वहीं अमेरिका अब भारत की बड़ी इकॉनमी का हवाला देते हुए उसे बिज़नेस में छूट देने को राज़ी नहीं है. यही तिया-पांचा खत्म करने के लिए ट्रेड डील की जा रही है, जिसमें बिज़नेस टैरिफ को लेकर क्लियर-कट गाइडलाइन्स तय होंगी.

साथ ही बिज़नेस बूस्ट करने के भी तमाम प्लैन हैं, जिसमें एनर्जी सेक्टर और मेडिकल सेक्टर अहम हैं. दोनों ही देश चाहते हैं कि उनके बिज़नेस की चीन पर निर्भरता कम हो, इसलिए एक-दूसरे से हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं.

ट्रंप ने 19 फरवरी को डील के बारे में कहा-

“बिज़नेस वगैरह के मामले में भारत का ट्रीटमेंट हमारे लिए बहुत अच्छा नहीं रहा है. फिर भी ये तो तय है ही कि हम भारत के साथ बहुत बड़ी ट्रेड डील करेंगे. लेकिन ये डील अभी नहीं होगी. इस बड़ी चीज को हम फ्यूचर के लिए बचाकर रखना चाह रहे हैं. अभी मैं ये भी बताने की पोजीशन में नहीं हूं कि ये डील अमेरिका के प्रेजिडेंट इलेक्शन के पहले भी हो जाएगी या नहीं.”

ट्रेड डील टलने की ये चार वजहें हैं

# यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम (USISPF) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले दो से तीन क्वार्टर में ये ट्रेंड निकला है कि दुनियाभर में बाइलेट्रल ट्रेड डील्स में कमी आई है.

यानी सिर्फ भारत-अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के तमाम बड़े देश मल्टीनेशन डील में तो इंट्रेस्ट दिखा रहे हैं, लेकिन उन डील से परहेज़ कर रहे हैं, जो दो देशों के बीच होनी हो.

# भारत की इकॉनमिक ग्रोथ रेट में आ रही लगातार कमी: भारत की ग्रोथ रेट 2016 में 6.6% थी, जो 2019 के अंत तक घटकर 4.5% तक आ चुकी है. मूडीज ने इसके आगे भी 5 से कम ही रहने का प्रेडिक्शन दिया है.

# यूएस-चाइना ट्रेड वॉर: अमेरिका और चीन के बीच अपनी-अपनी मिलिट्री पावर दिखाने की होड़ तो रही ही है, अब दोनों देश लंबे समय से ट्रेड के मामले में भी कंधे से कंधा टकरा रहे हैं. अमेरिका इन सब बातों के बीच बिज़नेस के मामले में नए रायते नहीं फैलाना चाह रहा है. खासकर चुनाव तक तो बिल्कुल नहीं.

# भारत के GSP लिस्ट से बाहर होने से पहले बदले नियम-कायदे: भारत के करीब 1900 प्रोडक्ट को अमेरिका में इंपोर्ट ड्यूटी पर मिलने वाली छूट अब नहीं मिलेगी. अब ये टैरिफ कितना रहेगा, इस पर दोनों देश अभी एक राय नहीं हो पा रहे हैं. ये भी ट्रेड डील अटकने की वजह रही.

भारत ट्रेड डील से क्या चाह रहा है?

# GSP लिस्ट में वापस एंट्री, ताकि इंपोर्ट ड्यूटी में रियायत मिल सके.

# स्टील और एल्युमिनियम प्रोडक्ट्स पर अमेरिका की ओर से लगाई गई इंपोर्ट ड्यूटी में कमी.

# एग्रीकल्चर, ऑटोमोबाइल, ऑटो जैसे गुड्स सेक्टर और इंजीनियरिंग जैसे सर्विस सेक्टर की अमेरिकी बाजार में बेहतर रीच. माने ज्यादा से ज्यादा एरिया कवर करने की सुविधा. ये भी GSP लिस्ट में आकर ही मुमकिन है.

अमेरिका ट्रेड डील से क्या चाह रहा है?

# अमेरिका भारत में अपने चार सेक्टर के लिए बड़ा बाजार चाहता है- एग्रीकल्चर, मैन्युफेक्चरिंग, डेयरी और मेडिकल.

# अमेरिका ये भी चाहता है कि भारत एपल जैसे प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करे.

# भारत GSP लिस्ट में वापस एंट्री का मोह छोड़े.

भारत-अमेरिका के बीच बिज़नेस का स्टेटस अभी क्या है?

भारत और अमेरिका के बीच बिज़नेस तो लंबा-चौड़ा है, लेकिन इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का रेशियो ठीक नहीं है. 2018-19 में अमेरिका ने भारत को करीब 4.1 लाख करोड़ रुपए का सामान बेचा और 5.9 लाख करोड़ रुपए का सामान खरीदा. यानी 1.8 लाख करोड़ रुपए ज्यादा खर्चे.

अब डील का भविष्य दोनों देशों के पॉलिटिकल सीन पर निर्भर रहेगा. मोदी सरकार के लिए ये डील पॉलिटिकली उतनी अहम नहीं है, जितनी ट्रंप सरकार के लिए. अमेरिका में इस साल राष्ट्रपति चुनाव हैं और वहां बड़ी कम्युनिटी इंडो-यूएस लोगों की है. काफी मुमकिन है कि ट्रंप डील को चुनाव के ज्यादा से ज्यादा पास ले जाने की कोशिश करें. फिर बिज़नेस की जो बातें अटकी हैं, वो तो है हीं. यानी साल से सेकंड क्वार्टर में इस पर कुछ होने की उम्मीद है.


डॉनल्ड ट्रंप जिस कार को इंडिया ला रहे, वो बम, कैमिकल अटैक झेलने के अलावा और क्या-क्या कर सकती है?

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